दोस्त की सेक्सी माँ निर्मला की चूत चुदाई

(अब निर्मला मेरा साथ देने लगती है, उसकी सिसकारियाँ ऐसे लग रही थी जैसे पुरे गाँव में गूंज रही हो, एक 50 साल की औरत बहुत सालों से चुदाई से वंचित थी उसके अंदर बहुत ही कामुक वासनाएं भरी थी, वो करहा रही थी, गिडगिड़ा रही थी, चोदने के लिए भीख मांग रही थी)
निर्मला- पंडित, हाईईईईए.. मेरे बेटेटेटेटे.. अह्ह्ह्ह्ह.. और ना तड़पा, डाल दे अंदर अपना हथौड़ा बेटा
मैं- रुक जा जान आज तुझे संतुष्ट कर दूंगा, बस तेरा आशीर्वाद चाहिए.
निर्मला- मेरा आशीर्वाद तेरे अह्ह्ह्ह्ह.. साथ हिहिहिहि है उफ्फ्फ्फ्फ.. बेटा मत तड़पा अह्ह्ह्ह्ह..
मैं- तुझे और तड़पाउंगा मेरी रानी, जब तक तू मुझ से भीख न मांगे तब तक नहीं चोदुंगा जान
निर्मला- हाये रेरेरेरेरे.. मैं भीख मांगती हूँ मरर राजाअह्ह्ह्ह्ह.. चोद डाल मुझे, अपने बच्चे की माँ बना दे, कमल को एक भाई दे दे अह्ह्ह्ह्ह..
मैं- ठीक है मेरी रान्ड, आज तेरी कोख में अपना वीर्य डाल दूंगा रण्डी और नौ महीने बाद बच्चा देखने आऊंगा.
निर्मला- इस घर में एक बार फिर किलकारियाँ गूंजेंगी बेटा, अह्ह्ह्ह्ह.. ओहोहोहोहो.. डाल जल्दी डाल, खेलना बंद कर, असली काम कर जल्दी, अब सहन ना होता रे मुझ से अह्ह्ह्ह..
मैं- तैयार हो जा जानेमन मेरा लवड़ा लेने के लिए.
(फिर मैं निर्मला को बिस्तर पर लेटाता हूँ और लण्ड को उसकी चूत में जिसकी झांटे सफ़ेद थी रखता हूँ और एक जोरदार झटका मारता हूँ जिससे लण्ड चूत की गहरी खायी में समा जाता है)
निर्मला- आआआआआ.. अह्ह्ह्ह्ह.. मआरर डालाललाला.. अह्ह्ह्ह्ह.. ओहोहोहोहो.. उफ्फ्फ.. उईईईईई.. अम्मा!!!
(फिर चुदाई प्रारम्भ होती है, मैं लण्ड को अंदर बाहर करता हूँ, उसने अपनी दोनों मोटी मोटी टाँगे मोड़ कर मेरी पीठ ने रखी दी, और निर्मला मेरे होंटों को, गाल को, गले को मस्ती में चूमे जा रही थी और सिसकारियाँ ले रही थी, आहें भर रही थी, चुदाई चल रही थी, उसकी चूड़ियों की खनखन और पजेब की आवाज़ से कमरा स्वर्गमय हो गया था, चूड़ियों की खनखनाहट से मेरा जोश और बढ़ गया और मेने अपनी रफ़्तार बुलेट ट्रेन की तरह कर दी)
निर्मला- अह्ह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह्ह.. अह्ह्ह्ह.. ओहोइऊओइ.. उईईईईईई.. उम्म्म्म्म हाये रेरेरेरेरेरेरे.. अह्ह्ह्ह.. धीरे धीरे हरआआआआमी उफ्फ्फ मर गयी अम्मा, मार डाला पंडित तूने, कर कर, और चुदाई कर, बना दे अपने बच्चे की माँ मुझे, दे दे एक और कमल अह्ह्ह्ह्ह.. मैं झड़ने वाली हूँ बेटा, मैं आईईईई मैं आईईईई.. मैं आईईईई.. अह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्!!!
(और अंततः निर्मला झड़ जाती है और ढेर सारा पानी छोड़ती है जिससे मेरा लण्ड गीला और चिपलादार हो जाता है इससे मुझे और आनंद की अनुभूति होती है और मैं फचापच चुदाई करते करते चाची की चूत में झड़ने वाला होता हूँ)
मैं- मैं भी आया रंडी चाची, मैं आने वाला हूँ तेरी चूत में, झड़ने वाला है मेरा माल, अह्ह्ह्ह भेन की लोड़ी, भेनचोद रंडी, अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह मेरी पत्नी, मेरे होने वाले बच्चे की माँ, मैं आया
अह्ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह्ह..
(और मैं अपना सारा माल चाची चूत के अंदर छोड़ देता हूँ, हम दोनों ऐसे ही पसीने से लतपत एक दूसरे के ऊपर पड़े रहते हैं, चाची अभी भी सिसकारी भर रही थी, मेरा लण्ड चाची की चूत में ही था, 2 घण्टे हम ऐसे ही सोये रहते हैं)
(फिर कमल घर आता है, अपनी माँ को नाईटी में देखकर वो गुस्सा करता है लेकिन मैं उसे दारु पिला देता हूँ और रात में फिर से निर्मला चाची की चुदाई करता हूँ, 9 महीने बाद चाची की चूत से एक लड़के का जन्म होता है.
गाँव में किसी को पता नहीं था कि ये किसका लड़का है तो गाँव वाले ऐसे ही धारणा बना देते हैं कि ये कमल का कुकर्म है और इस वजह से कमल का मुह काला करके पुरे गाँव में घुमाया जाता है, लेकिन कमल को पता चल गया था कि उसका भाई मेरा ही बच्चा है.
कमल को गाँव वालों ने इस गंदे काम के लिए चप्पल से पीटा और मुह काला करके पुरे गाँव में घुमाया, और उसकी माँ को रंडी घोषित कर दिया, लेकिन मेने एक दिन चुपके से रात को उसकी माँ को अपने साथ शहर भगा ले आया और निर्मला से शादी कर ली, लेकिन कमल को पता नहीं उसकी माँ कहाँ है.
गाँव वालों ने उसे उसकी माँ को गायब करने के दोष में उम्र कैद सुना दी है और अब कमल जेल में है और उसकी माँ निर्मला मेरे साथ शहर में खुश है, हमने अपने बच्चे का नाम कमल रखा है और अब निर्मला काफी मस्त और मोर्डन बन चुकी है, मेने निर्मला के लिए एक ब्यूटी पार्लर खोल दिया है जहाँ निर्मला देह व्यापार करके भी कुछ पैसे कमाती है और हम दोनों का गुज़ारा हो जाता है).

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