दोस्त की मम्मी की चोदी चूत

हेल्लो फ्रेंड्स! मेरा नाम पुनीत. मैं हरयाणा मे रहता हूँ. और तो और मैं बहोत अच्छी फॅमिली से बिलॉंग करता हूँ. मेरी उम्र अभी 19 साल है. यानी की मैं अभी जवान हुआ हूँ. सच काहु तो मैं काफ़ी खुश भी हूँ.

मैं अपनी फॅमिली साथ यहा पर रहता हूँ. और स्कूल मे नॉन मेडिकल का स्टूडेंट हूँ. मैं बहोत खुश नसीब भी हूँ की मुझे इतनी अच्छी फॅमिली मिली है. क्योकि वो मेरा साथ हमेशा देती है या तो ये कह लो की मैं बहोत लकी हूँ.

आज मैं आपको अपनी एक कहानी बताने जा रहा हूँ जिसको पढ़ कर आपको बहोत मज़ा आने वाला है. और तो और मुझे भी काफ़ी खुशी मिलने वाली है.

चलो अब ज़्यादा टाइम वेस्ट ना करते हुए मैं आपको अपनी कहानी पर ले कर चलता हूँ. बात आज से कुछ टाइम पहले की है जब मेरे घर के सामने एक घर खाली हुआ करता था और वाहा पर एक दिन एक फॅमिली रहने आई थी.

उस फॅमिली मे टोटल 4 ही लोग थे. अंकल आंटी एक लड़का और एक लड़की. अंकल आर्मी मे थे और आंटी हाउस वाइफ थी. उनका बेटा सोरभ मेरे ही उम्र का था और उसकी बहें शालिनी हमसे 2 साल बड़ी थी.

शालिनी दिखने मे बहोत ही ज़्यादा सुंदर थी और उसको देख कर मन करता था की बस देखते ही जाओ और बस देखते ही जाओ.

सोरभ और मैं एक ही स्कूल मे थे. हमारे सब्जेक्ट अलग अल्ग थे क्योकि वो आर्ट्स मे था और मैं नॉन मेडिकल मे था. मुझे स्टडी बहोत ही ज़्यादा पसंद थी पर सौरभ को स्टडी से ज़्यादा खेल कूद करना ज़्यादा पसंद हुआ करता था.

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मैं और सोरभ हमेशा एक साथ ही स्टडी किया करते थे. मैं अकसर उसके घर जा कर ही पढ़ाई करता था. और तो और मुझे पढ़ाई करना बहोत अच्छा लगता था. पर उसको खेलना ज़्यादा अच्छा लगता था.

और ऐसे ही हमारी पढ़ाई भी हो जाती थी और उसका खेलना भी हो जाता था. उसका सबसे ज़्यादा फेवरेट गेम फुटबॉल हुआ करता था और सारा सारा दिन वो बस वही खेलता रहता था.

अब ऐसे ही सब चल रहा था. मैं तो आंटी के घर स्कूल से आते ही चला जाया करता था. बेशक वो आया हो या न्ही पर मैं ज़रूर चला जाता था.

तो दोस्तो उस दिन भी मैं ऐसे ही चला गया. अभी सौरभ स्कूल मे ही था क्योकि उसका मॅच था. पर मेरा मन तो पढ़ाई करने का कर रहा था.मैं वाहा जा कर पढ़ाई करने लग गया और फिर ऐसे ही करता रहा.

मैं वाहा बैठा हुआ था और तब घर पर आंटी के इलावा कोई भी न्ही था. आंटी भी बाथरूम मे नहाने चली गई थी. मैं आराम से बैठा हुआ पढ़ रहा था की तभी काफ़ी देर बाद मैने देखा की आंटी अभी तक नही आई तो मैं उनके कमरे के बाहर चला गया.

मैने जब अंदर देखा तो आंटी नंगी ही मिरर के सामने खड़ी थी. मैं उनको ऐसे देख कर घबरा गया और अपनी आँखो को बंद करलिया. पर तभी मैने दुबारा से अपनी आँखे खोली और उनको देखने लग गया.

उनका नंगा बदन देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था. आंटी को न्ही पता था की मैं उन्हे देख रहा हूँ. पर आंटी को मैने जेसे ही ऐसे देखा था तो मैं तो देखता ही रह गया.

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उनका चिकना बदन कमाल का था. और तो और उनके बूब्स देख कर मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था. उनका फिगर इतना कमाल का था जी मैं तो पागल हुआ जा रहा था.उनके बूब्स को वही खुद ही अपने हाथो से मसले जा रही थी और काफ़ी देर तक वो ऐसे ही करी जा रही थी और करी ही जा रही थी.

मैं भी वाहा पर खड़ा हो कर उनके बूब्स को देख रहा था. उनका हर एक जिस्म का हर एक हिस्सा साफ सॉफ नज़र आ रहा था और तो और उनकी चूत पर बाल थे जिसकी वजह से वो साफ दिखाई न्ही दे रही थी.

अब ऐसे ही मैने लंड को हाथो मे ले कर उपर नीचे करना शुरू कर दिया और तो और बहोत मज़ा भी आने लग गया था. मैं पागलो की तरह लगा हुआ तब और मेरा मन कर रहा था की मैं बस अपने आप को उन मे समा दू.

फिर तभी हल्के से मुझसे खटका हो गया तो उन्होने पीछे मूड कर देखा तो वाहा पर कोई न्ही था. तब उन्होने बाहर आ कर देखा तो मैं वही टेबल चेयर पर बैठ कर पढ़ाई कर रहा था. उन्हे लगा था की मैं अभी आया हूँ और ये सोच कर फिर से वो अंदर चले गये.

और थोड़ी देर बाद उन्होने कपड़े पहने और फिर बाहर आ गये. तब बाहर आ कर उन्होने मुझसे पूछा की मैं कब आया हूँ. तो मैने कहा की मैं तो कब का आ गया हूँ .

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