दोस्त की माँ को दो लोगो ने ठोका

दोस्तों अमित उस समय प्री मेडिकल टेस्ट की तैयारी कर रहा था, इसलिए वो कंप्यूटर पर कम बैठता था क्योंकि कंप्यूटर उसके कम काम में आता था, लेकिन में कंप्यूटर को उससे ज़्यादा काम में लेता था। एक दिन में कंप्यूटर पर बैठा हुआ अपना काम कर रहा था इतने में अमित की मम्मी हमारे लिए चाय बनाकर ले आई और अब उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे भी कंप्यूटर चलाना सीखना है में बहुत दिनों से कंप्यूटर सीखना चाहती हूँ, लेकिन मुझे यहाँ पर सिखाने वाला कोई भी नहीं है मैंने बहुत बार अपने बेटे से भी यह बात कही, लेकिन वो हमेशा मेरी बात को अनसुनी कर देता है। तो मैंने उनसे बोला कि इसमे ऐसा क्या है, अगर आप चाहती है तो में आपको सिखा दूँगा? इसको चलाना बहुत आसान काम है। तब नेहा ने बहुत खुश होकर मुस्कुराते हुए मुझसे कहा कि कल से हम अपनी क्लास शुरू करेंगे, आज मुझे थोड़ा ज्यादा काम है, मैंने भी मन ही मन बहुत खुश होकर उनसे कहा कि अच्छा ठीक है आपकी जैसे मर्जी और मुझे पूरी रात वो सब सोच सोचकर नींद नहीं आई कि मुझे कल से नेहा को कंप्यूटर जो सीखना था और वो मेरे पास बैठेगी यह बात सोचकर ही मेरा लंड तो खड़ा हो जाता, मुझे उस सारी रात उसके साथ चुदाई के विचार आते रहे। अगले दिन मैंने एकदम टाइट टी-शर्ट पहनी और सैंट भी लगाया में हर रोज की तरह उसके आने से पहले ही अमित के घर पर पहुंच गया और मैंने देखा कि उस दिन नेहा ने बिना बाँह का गाउन पहन रखा था। वो मेरे पास एक कुर्सी रखकर उस पर बैठ गई और मैंने कंप्यूटर का माउस उसकी तरफ रखा था ताकि माउस को चलते समय में जानबूझ कर अपने हाथ को आगे पीछे करते समय उसके बूब्स को भी छू लूँ। में अब उनको कंप्यूटर के सभी हिस्से दिखा रहा था और बता भी रहा था इसको बोर्ड कहते है और बाद में माउस को छूते हुए मैंने जानबूझ कर उसके बूब्स के साथ मेरा हाथ टकरा दिया। तभी वो मेरी कोहनी के उसके मुलायम बूब्स पर छूते ही तुरंत पीछे हट गयी। मैंने उससे कहा कि माफ़ करना आंटी गलती से हो गया। तो वो बोली कि कोई बात नहीं है मैंने अब सबसे पहले माउस को चलाने के बारे में कहा जिसकी वजह से अब तो कई बार मेरा हाथ उसके बूब्स से टकरा रहा था और अब वो पीछे भी नहीं हटा रही थी और में मज़े लिए जा रहा था। फिर दूसरे दिन जब में अपने दोस्त के घर पर गया तब मुझे पता चला कि अमित कहीं बाहर गया हुआ था, इसलिए में और अमित की मम्मी घर पर अकेले ही थे और में बहुत खुश था, क्योंकि अब मुझे किसी भी बात की कोई भी टेंशन नहीं थी। अब मैंने की बोर्ड उसको चलाना सिखाया, लेकिन उसकी उंगलिया उस पर ठीक तरह से बैठ ही नहीं रही थी कई बार ऐसा किया, लेकिन कामयाब नहीं हुई और अब वो थक गयी, इसलिए उसने मुझसे कहा कि अब मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं आएगा। फिर मैंने मौका देखकर उससे कहा कि एक काम करो तुम मेरी गोद में बैठ जाओ में पीछे से जिसके ऊपर में उंगली रखूं तुम भी उस पर अपनी ऊँगली रखना वो बोली कि हाँ यह ठीक होगा है। अब वो मेरी गोदी में आकर बैठ गयी मेरा लंड तो पहले से ही पूरा टाइट हो गया, लेकिन उसकी गांड में फिट नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उससे कहा कि थोड़ा सा ऊपर आ जाओ और वो जैसे ही ऊपर आई मेरा लंड उसकी गांड के बीच में बिल्कुल फिट हो गया, अब तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और शायद उसे भी मेरा लंड अपनी गांड में महसूस करके बहुत मज़ा आ रहा था और मैंने पूरे एक घंटे तक उसके बूब्स और गांड का पूरा पूरा मज़ा लिया। उसके बाद में अपने घर पर आ गया और अपने घर पर आकर मैंने उसके नाम से अपना लंड हिलाया और लंड को शांत किया।

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फिर दूसरे दिन उसने टी-शर्ट और स्कर्ट पहनी हुई थी और उसके नीचे ब्रा भी नहीं पहनी थी। में तुरंत समझ गया कि अब आंटी को भी मेरे साथ मज़ा आ रहा है मेरे पास आते ही वो सीधी आकर मेरी गोदी में बैठ गई अमित यह सब देख रहा था। फिर जैसे ही वो मेरी गोदी में बैठी तो मेरा लंड जींस में तन गया और उसकी गांड में एकदम फिट हो गया। अब तो में बड़े बड़े उसके बूब्स और निप्पल को हाथ लगा रहा था और मैंने कुछ देर बाद महसूस किया कि अब नेहा के निप्पल बिल्कुल टाइट हो गए थे और वो अब उसकी टी-शर्ट में से साफ साफ तने हुए दिखाई दे रहे थे। अब मैंने एक हाथ उसकी जाँघ पर रख दिया और अपने हाथ को घुमाने लगा। वो मुझसे कुछ नहीं बोल रही थी, लेकिन मुझे अब वो जींस की पेंट पहनने से बहुत ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी और उस बात को वो बहुत अच्छी तरह से समझ गयी इसलिए वो मुझसे बोली कि अगर तुम्हे गर्मी महसूस हो रही है तो तुम अमित का ट्राउज़र पहन लो, मैंने तुंरत कहा कि हाँ यह ठीक है। अब में फट से खड़ा हो गया वो मेरे पीछे आई और उसने मुझे अमित का ट्राउज़र दे दिया और टी-शर्ट भी दे दी। फिर मैंने उसके सामने ही अपनी शर्ट को उतार दिया वो इस पल की राह देख रही थी क्योंकि में हर रोज कसरत करता हूँ इसलिए मेरा शरीर और मेरे मसल्स बहुत अच्छे आकार के थे और जैसे ही मैंने अपनी शर्ट को उतारा वो मेरा कसा हुआ बदन को देखती ही रह गयी। उसने पास आकर मेरी छाती पर हाथ लगाया और बोली कि तुम्हारा बदन तो मस्त है। तभी अमित ने उसे आवाज देकर बुला लिया और में कपड़े बदलकर वापस चला गया तो नेहा बैठी हुई मेरी राह देख रही थी। अब उसे भी मेरे साथ चुदाई करने की इच्छा हो रही थी और में जैसे ही कुर्सी पर बैठा वो फट से मेरी गोदी में आकर बैठ गयी और मैंने भी कपड़े बदलते समय अपनी अंडरवियर को उतार दिया था इसलिए मेरा लंड नेहा की गांड का ज़्यादा अच्छी तरह से महसूस हो रहा था और अब में उसकी जाँघ पर हाथ फेर रहा था और धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को ऊपर उठा रहा था। तभी नेहा ने मुझसे कहा कि अभी नहीं, अगर अचानक से अमित यहाँ पर आ गया तो वो हमे इस हालत में देख लेगा। अब में उनके कहते ही तुरंत रुक गया और फिर मैंने अमित की तरफ देखा तो वो अपनी एक किताब को अपने सामने रखकर पढ़ाई करने के बहाने से मुठ मार रहा था। अब मैंने नेहा की वो बात मान ली और में बंद हो गया। दूसरे दिन मैंने उसके घर पर जाने से पहले ही अमित को सब कुछ बहुत अच्छी तरह से समझा दिया जिसको वो समझ भी चुका था और जब में उसके घर पर गया तो अमित ने मुझे देखकर अपनी मम्मी के सामने एक झूठा बहाना बनाया और कहने लगा कि में दो घंटे बाद आ जाऊंगा कहकर वो तुरंत बाहर चला गया। अब नेहा उसकी बात को सुनकर बहुत खुश होकर मेरी गोदी में आकर बैठ गई अब तो हम दोनों के सामने खुला मैदान था हमे रोकने देखने वाला उस समय पूरे घर में कोई भी नहीं था। आज हम दोनों अपनी मर्जी में मालिक थे और अपनी मर्जी का कोई भी काम कर सकते थे, हमे किसी से डरने की जरूरत नहीं थी। अब मैंने जल्दी से आगे बढ़कर उसकी टी-शर्ट को ऊँचा उठा दिया और अब ब्रा के ऊपर से ही बूब्स को दबाने लगा और निप्पल को निचोड़ने लगा। नेहा भी उस वक़्त का बहुत इंतज़ार कर रही थी और वो मुझसे कुछ भी नहीं बोली बस सिसकियाँ लेती रही और में अपने काम में लगा रहा। अब मैंने आंटी की टी-शर्ट को उतार दिया और उसके बाद ब्रा को भी उतार दिया, वाह क्या मस्त बूब्स थे एकदम नरम नरम, गोरे गोरे बहुत मोटे में तो उसे ज़ोर से मसलने लगा।

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