दो लंडो का स्वाद अपनी ही चुत मे

तभी श्लोक ने मेरी पेंट उतारनी शुरू कर दी मुझे बहुत शर्म आ रही थी, उसने बोला शर्मा मत वो देख किस तरह सेक्स मैं मस्त हैं, मुझे डर भी लग रहा था क्योकि मई यह सब पहली बार कर रही थी | श्लोक ने मेरी पेंटी भी उतार दी और अपना हाथ मेरी चूत की और ले जा रहा था | मेरी जान शर्मा मत अब मेरा लंड तेरा हो चूका है, मैं और भी शर्मा रही थी, दूसरी और अबे रितिका के मुह पर बैठ कर अपना लंड चुसवा रहा था, श्लोक ने धीरे से मेरी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और मुझे किस करने लगा अब्ब हम गरम से होने लगे, श्लोक ने अपनी अंडरवियर उतार दी और अपना लंड मेरे पेट पर घुसाने लगा, और कबी नीचे की और फेरता एक हाथ से बूब्स को दबाता, अब श्लोक मेरी चूत पर रख कर लंड को घुमाने लगा जिस से हम दोनों मदहोश हो रहे थे | तभी श्लोक का लंड भी पूरी तरह से तन गया था और मेरी चूत के अन्दर घुसने के लिए बेताब था | श्लोक ने मुझे गोद में उठाया और बेड पर लेटा दिया |

अब श्लोक से भी और सहा नही जा रहा था, जान में अपना लंड तेरी चूत को सोंप रहा हु, उसने धीरे से लंड को मेरी चूत में डालने की कोसिस की मगर चूत कहा हार मानने वाली थी, वो श्लोक को अन्दर आने की इजाजत ही नही दे रही थी | ऐसा इस लिए था क्योकि मैंने पहले कभी किसी से सेक्स नही किया था | तब श्लोक ने मेरे अपने लंड पर आयल लगाया, और मुज से लिपट कर किस करने लगा और अपने लंड को मेरे चूत पर फिर से घुमाने लगा, और धीरे से धक्के देने लगा मुझे दर्द का अहसास होने लगा तब श्लोक ने मेरे जीब को अपने मुह में लेकर चुसना शुरू किया और नीचे हलके हलके धक्के दे रहा था जिस से मुझे और दर्द होना शुरू हुआ, मगर रितिका को कोई दर्द का अहसास नहीं था क्योकि वो पहले भी अबे से सेक्स कर चुकी थी | अबे ने रितिका को अपने लंड पर बैठाया और उसको जोर जोर से झटके दे रहा था वो खूब मजे ले रहे थे | अबे कभी उसके बूब्स को अपने दांतों से काटता और कबी उसकी चूत को बहुत जोर से धक्के देता, उनको देख कर श्लोक का मन भी ऐसा ही करना चाहा, उसने मेरे होंटो पर एक चोकलेट रख दी और उसे चूसने लगा और मेरे होंटो को काटने लगा फिर उसने चोकलेट मेरे मुह में डाल दी और मेरी जीब को अपने दांतों के नीचे जकड ली, और लंड को मेरी चूत मैं घुसाने लगा मुझे दर्द हो रहा था मगर अब्ब मैं श्लोक के नीचे थी इसलिए कुछ न कर पाई खुद को बचाने के लिए, मगर श्लोक का लंड अब मेरी चूत को फाड़ देना चाहता था, श्लोक ने एक जोर से धक्का लगाया और थोडा सा लंड मेरी चूत में घुस गया जिसके कारण में दर्द से चिला उठी मगर श्लोक ने मुझे पहले से ही अपनी जकड में पकड़ रखा था |

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उसने धीरे धीरे और धक्के देने शुरू किये में दर्द से चिला रही थी मगर अब श्लोक कहा छोड़ने वाला था मेरा दर्द तेजी से बड रहा था तब श्लोक ने कुछ देर लिए लंड को चूत में ही रखा और दर्द से कुछ रहत मिलने लगी तब श्लोक ने मेरी जीब को भी आजाद कर दिया, में बोली अपनी जान के साथ ऐसा कोई करता है क्या, श्लोक मेरी जान बस थोडा सा दर्द सेहन कर लो फिर तुम्हे खूब मजे दूंगा, मेरा दर्द कम हो चूका था, तब श्लोक ने मुझे टेढ़ा लेटाया और मगर से अपने लंड को मेरी चूत में घुसाया और मेरे होंटो को अपने अपने होंटो के नीचे दबा लिया | और जोर जोर से झटके मरने लगा, ऐसा लग रहा था जैसे चूत ही फाड़ डाली हो, श्लोक ने पुरे जोश के साथ लंड को अन्दर बाहर किया, मेरी आँखों से आँसो बह रहे थे, और में पानी छोड़ चुकी थी मगर श्लोक अपना लंड अन्दर बाहर फेरता रहा | कभी होंट चूसता और कभी बूब्स. जोर जोर से लंड चूत में घूम रहा था अब श्लोक भी झड़ने ही वाला था, जान क्या में पानी अंदर ही छोड़ दू? सपना तुमने तो मेरी चूत को फाड़ डाला है, अब क्या पूछ रहे हो जहाँ छोड़ना है पानी छोड़ दो, श्लोक जान नाराज क्यों हो रही हो तुमको तो मैंने एक कली से फूल बनाया है जो सिर्फ मेरे लिए है | पानी छोडते होए श्लोक मुज से चिपक गया और बोला जान मुझे बहुत मजा आया अब की बार तुम्हे भी और मजा दूंगा जब मैंने उठकर देखा तो खून से हम दोनों गंदे हो चुके थे| मैंने उठना चाहा मगर इतनी हिम्मत नही रही थी कि चल पाती तभी श्लोक ने मुझे उठाकर बाथरूम में नहाया और बेड पर लेटा दिया और मुज को किस करने लगा |

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