मेट्रो में आंटी की गांड पर लंड घिसा

मेरा नाम सुनील है, सबसे पहले मैं सब लड़कियों और आंटियों को नमस्कार करता हूँ. मैं दिल्ली का हूँ. मैं एक अच्छी कम्पनी में जॉब करता हूँ. आज मैं जो सेक्स स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ, वो मेरे साथ दिल्ली मेट्रो में घटी थी. ये वाकिया करीब दस दिन पहले का है, मैं रोज की तरह अपने ऑफिस नॉएडा सेक्टर 16 से मेट्रो से अपने घर लौट रहा था. मेट्रो में बहुत भीड़ थी क्यूंकि ये टाइम ऑफिस के छूटने का जो था. धक्का मुक्की करके मैं जैसे तैसे अन्दर चढ़ गया. वैसे डब्बे में पैर भी रखने को मुश्किल सी हो रही थी. अगले स्टेशन पर कुछ लोग उतर गए, तो थोड़ी जगह हुई..

जिससे मैं कुछ और अन्दर को घुस गया. इस स्टेशन पर कुछ और लोग चढ़े इसलिए डब्बे में तो फिर से जैसे भीड़ थी, बल्कि उससे भी ज्यादा बढ़ गई. मैं जहाँ खड़ा था, वहां मेरे आगे एक 30-31 साल की मैरिड आंटी भी खड़ी हुई थी. उसने साड़ी पहनी हुई थी और वो अकेली थी. वो मुझे एकदम सेक्सी माल लग रही थी. उसका फिगर भी एकदम सेक्सी था. उसके उठे हुए चूतड़ मेरे लौड़े के आगे थे, पहले मेरा कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन भीड़ की वजह से मेरा लंड उसके चूतड़ों पर दब रहा था. जैसा कि आपको पता है लंड पर किसी का कंट्रोल नहीं होता है. वही हुआ,

थोड़ी देर के बाद मेरा लंड खड़ा हो गया और आंटी के चूतड़ों में दबने लगा. आंटी ने एक दो बार पीछे देखा लेकिन वो बिना कुछ बोले ऐसे ही खड़ी रही. मैंने थोड़ा चांस लिया और अपना एक हाथ उसकी गांड पर टच करवा दिया. वो कुछ नहीं बोली तो धीरे धीरे करके मैंने उसके चूतड़ों पर अपना पूरा हाथ रख दिया. उन्होंने पीछे देखा और मुझे थोड़ा पीछे होने को बोला. मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो क्या चाह रही है. मैं थोड़ा पीछे हो गया. अब मैं उसकी गांड से टच नहीं हो रहा था लेकिन अक्षरधाम से भीड़ एकदम चढ़ी और फिर उससे चिपकना मेरी मजबूरी हो गया. और अब तो भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वो कह भी नहीं सकती थी कि पीछे हटो.

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अब मेरा खड़ा लंड आंटी की गांड की दरार में लगा था. अब आंटी ने भीड़ का फायदा देख कर अपना हाथ पीछे कर दिया और मेरे लंड को अपनी गांड पर दबा दिया. मुझे थोड़ा दर्द हुआ और मैंने भी आंटी की गांड को अपने हाथ से दबा दी. मैं उसके कूल्हों को हाथ से सहला रहा था और मेरा हाथ उसकी गांड की दरार पर लग गया था, मैं उसके चूतड़ों को दबाने लगा. उसे भी मज़ा आने लगा और वो अपनी गांड को मेरे लंड की तरफ दबाने लगी. मैंने घूम कर देखा तो भीड़ में किसी का भी ध्यान हमारी तरफ नहीं था. लगभग सब चेहरे थके हुए से थे.. जैसे किसी को कुछ परवाह भी नहीं थी. फिर मैं अपना हाथ आगे करके उसकी चूत पे ले गया और ऊपर से सहलाने लगा. बाय गॉड… आंटी की बुर को टच कर के तो बड़ा मज़ा आ रहा था.

थोड़ी देर में राजीव चौक आ गया तो वो उतरने लगी. मैं भी उसके पीछे उतर गया. अब मैंने चलते हुए उसे हाय कहा तो वो भी हंस कर हैलो बोली. मैंने कहा- आपका नम्बर मिल सकता है? आंटी ने थोड़ा भाव खाने के बाद अपना मोबाइल नम्बर दे दिया. फिर हम मेट्रो के अन्दर के ही कैफे काफी डे में बैठे गए. वो मेरे साथ इस वक्त ऐसा बर्ताव कर रही थी, जैसे कि हम एक दूसरे को काफी समय से जानते हों और जैसे वो मेरी गर्लफ्रेंड हो. मैंने उसकी खूब तारीफ़ की, वो सुन कर खुश हो रही थी. उस दिन तो कुछ नहीं हुआ लेकिन अब हम फोन पर रेग्युलर बात करते और एक साथ ही मेट्रो में आया जाया भी करते हैं. जब कभी भीड़ होती और मौक़ा मिलता तो मैं उसकी गांड और चूत को दबा देता था. अगले सन्डे मैंने उसे फोन किया और घूमने चलने को बोला,

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वो तैयार हो गई, मैंने उसे इन्डिया गेट पर बुलाया और तय वक्त पर मैं भी वहां पहुँच गया और हम मिल गए. उसने टॉप और जींस पहना थाज जिसमे वो सेक्सी लग तही थी, उसके चूतड़ पूरे उठे हुए नजर आ रहे थे, मेरा लंड उसके चूतड़ देख कर खडा हो गया. हम वहीं बैठ कर बातें करने लगे, उसने बताया कि उसका पति सेल्स मैनेजर है और अक्सर आउट ऑफ़ टाउन ही होता है. मैंने उससे होटल में चलने को कहा तो साली ने थोड़ा भाव खाया लेकिन फिर वो रेडी हो गई. ऑटो करके हम दोनों एक सस्ते वाले होटल पर आए और कमरा ले लिया. कुछ ही देर में तो हम दोनों बेड पर थे और बातें कर रहे थे.

बातों बातों में मैंने उसकी टांगों पर हाथ रख दिया और सहलाने लगा. उसने आँखें बंद कर लीं. फिर मैंने उसेव अपनी बांहों में भर लिया और उसे किस करने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी. मैं अपना हाथ उसकी चूची पर ले आया और सहलाने लगा. उसकी चूचियां काफी मुलायम थी, मुझे बहुत मजा आ रहा था और उसे भी जरूर मजा आ रहा होगा. कुछ ही पलों में हम दोनों की कामुकता बढ़ गई और मैंने उसका टॉप उतार दिया. वो ब्लैक कलर की ब्रा में थी, मैंने ब्रा को भी निकाल दिया. वाऊ.. क्या चूचे थे.. मैंने अपने होंठ उसकी एक चूची पर रख दिए और मैं उसकी चूचियों को काफी देर तक चूसता रहा. वो गरम हो गई थी,

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