चूत चुदाई की चाहत ने किया बर्बाद

चढ़ती जवानी में मैं जम कर हस्तमैथुन करता था. मगर मैंने किसी भी कीमत पर चूत चुदाई करके यौन सुख लेने की ठान ली. फिर मेरे साथ हुई इस घटना ने मेरी जिन्दगी बदल दी.

दोस्तो, मैंने अन्तर्वासना पर बहुत सी सेक्स कहानियां पढ़ी हैं. मुझे सेक्स के प्रति शुरू से ही बहुत रुझान रहा है. जब मैं अपने कॉलेज के दिनों में था तो उस वक्त मेरी जवानी अपने पूरे उफान पर थी.

कॉलेज में दाखिला लेने से पहले ही मैंने हस्तमैथुन करना शुरू कर दिया था. उन दिनों सेक्स का खुमार ऐसा था कि मुझे नहीं पता था कि सेक्स की भूख मिटाने के लिए मेरा ये पागलपन मेरी जिन्दगी को बदल कर रख देगा.

यह बात उन दिनों की है जब मैं अपने ग्रेजुएशन के पहले साल में दाखिला लिया था. किसी भी महिला या लड़की को देखते ही सबसे पहले नजर उसके स्तनों पर ही जाकर रुकती थी. फिर उसके बाद पूरे बदन को ताड़ता था. यदि लड़की देखने में जवान और खूबसूरत होने के साथ-साथ सेक्सी दिखती तो रात को उसके बारे में सोच कर मुठ मारे बिना मुझे नींद नहीं आती थी.

मौका सधे इंटरनेट पर पोर्न वीडियो और सेक्स फिल्में देखने के अलावा सेक्स कहानियां पढ़ना मेरी रोज की आदत बन चुकी थी. मेरी इसी आदत ने मुझे एक ऐसा झटका दिया कि उसका भुगतान मुझे मरते दम तक करना पड़ेगा.

मैं जीव विज्ञान यानि की बायोलॉजी का छात्र था. जिस किसी ने भी पढ़ाई में इस विषय का विस्तार से अध्य्यन किया है उनको पता होगा कि इस विषय में प्रजनन प्रकिया, प्रजनन अंगों और उनसे संबंधित सभी क्रियाओं की विस्तार से जानकारी दी जाती है. किताबों में जब भी योनि के बारे में जिक्र होता था मेरे दिमाग में लड़कियों की चूत के चित्र उभर आते थे.

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उनके स्तनों और निप्पलों को मैं किताबी चित्रों में भी इतनी वासना के साथ देखता था कि कई बार तो उनको देख कर ही मुठ मार लिया करता था. मुझे नहीं पता कि मेरे साथ ही ये सब हो रहा था या सबके साथ ऐसा होता है. मगर मुझे महिलाओं में चूत और चूचियों के अलावा कुछ नजर नहीं आता था.

दोस्तो, उस वक्त मेरे अंदर हवस को शांत करने की धुन और सेक्स करने की भूख दिमाग में ऐसे सवार थी कि कुछ दिनों के बाद हस्तमैथुन से मुझे मजा आना बंद हो गया. कुछ दिनों तक तो मैं हस्तमैथुन से काम चलाता रहा मगर वक्त के साथ-साथ अब मुझे जनाना जिस्म की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस होने लगी.

मैं हर किसी लड़की से इसलिये बात करता था ताकि किसी तरह उसको पटा सकूं और जल्दी से जल्दी उसके साथ सेक्स करने का मौका मिले. मगर मेरी फूटी किस्मत देखो कि मुझे कोई ऐसी लड़की मिल ही नहीं रही थी जो जल्दी से सेक्स के लिए तैयार हो जाये.

बहुत दिनों की मेहनत के बाद एक लड़की पटी. मगर वो भी पापा की परी निकली. उसके साथ जब भी मैं थोड़ा आगे बढ़ने की सोचता था तो वो कोई न कोई बहाना बनाने लगती थी. फिर मैंने किसी और चिड़िया को दाना डालने की सोची. एक और लड़की पटाई. मगर वो रूढ़िवादी विचारधारा की थी.

वो हमेशा धर्म-कर्म की बातें किया करती थी. जब उससे सहवास की बात करता तो वो कहती कि वो शादी से पहले अपनी योनि का कौमार्य भंग नहीं करवाना चाहती. मुझे वहां से भी निराशा ही हाथ लग रही थी. मेरी प्यास दिनों दिन बढ़ती जा रही थी.

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फिर मेरे कुछ दोस्तों से मैंने वेश्यालय के बारे में सुना. चूंकि मुंबई जैसे शहर में वेश्याएं आसानी से मिल जाती हैं तो वहां पर मेरे दोस्त अक्सर जाया करते थे. वो चूत मार कर जिन्दगी के मजे ले रहे थे. मैंने भी ठान लिया था कि अगर मजे लेने हैं तो मैं भी एक बार ट्राई करके देख लेता हूं.

मुंबई में एक जगह कामठीपुरा के नाम से जानी जाती है. उस एरिया को चूतनगरी कहा जाये तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. जैसे ही मैं कामठीपुरा में अंदर गया तो उस इलाके में घुसते मुझे यकीन हो गया कि यहां मुझे मेरी मनचाही चूत चोदने के लिए यकीनन मिल जायेगी.

पहली बार किसी वेश्यालय की तरफ कदम बढ़ा रहा था इसलिए थोड़ी घबराहट भी हो रही थी. कोठे के ऊपर व नीचे खड़ी हुई लड़कियां मुझे इशारे कर-करके बुला रही थीं. कोई तो राह चलते हुए मुझे अपने रेट तक कह दे रही थी. कहीं से आवाज आती- कहां जा रहा है चिकने?

Red Light Area Kotha
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कभी कोई सामने से आकर कहती- रस्ते का माल सस्ते में चाहिए तो इधर आजा!
कहीं से 200 की आवाज आती तो कहीं से 500 और 1000 की. मैं भी मन ही मन खुश हो रहा था कि एक हजार रुपये में एक से बढ़कर एक चूत चोदने के लिए तैयार मिल जाती है. मैं तो बेवजह ही लड़की पटाने के चक्कर में पड़ा हुआ था.

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