चचेरी बहन के साथ रंगरेलियाँ

वो बोलीं- जरा इसके बारे में तो कुछ बताओ।
मैंने कहा- बहन आज पहली बार ही आपके मम्मे देखे और मुझे मिल भी गए.. इनका अहसास ही कुछ और है। ये थोड़े नर्म.. थोड़े सख्त हैं और सफ़ेद दूध पर ये काला निप्पल तो कमाल ही लगता है.. जैसे ऊपर वाले ने इसे बुरी नजर से बचाने के लिए ही लगा दिया हो।
बहन मेरी ये बातें सुनकर बोलीं- भैया जी.. आपको तो कवि होना चाहिए था।
मैंने कहा- आप हो ही इतनी खूबसूरत कि कोई भी कवि बन जाए।
वो अपनी तारीफ सुन कर इतनी खुश हो गईं कि मुझे जोर से जकड़ लिया और बोलीं- ओह.. मेरे प्यारे चोदू.. भैया जी.. आप मुझे पहले क्यों नहीं मिले।
अब वो अपनी चूत में मेरे हर एक धक्के का मजा ले रही थीं। थोड़ी देर मैं यूं ही बिना कुछ बोले धक्के लगाता रहा।
सच बताऊँ तो मुझे भी अब थोड़ी थकान महसूस हो रही थी.. पर चुदाई का खुमार और बहन की चूत थी.. जो मुझे थकने ही नहीं देती थी।
थोड़ी देर बाद बहन बोलीं- बस भैया जी अब इसको ख़त्म कीजिए।
मैंने कहा- हार गईं क्या मेरी प्यारी बहन..
वो बोलीं- सच में भैया जी.. आप जीत गए।
दोस्तो… मैंने भी अब काम ख़त्म करने के हिसाब से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
थोड़ी ही देर बाद मैं उनकी चूत में जोर से झड़ने लगा और मैं उन पर ही निढाल हो गया।
वो काफी देर तक मुझे प्यार से सहलाती रहीं और चूमती रहीं।
पता नहीं कितनी देर तक मैं उनकी चूत में थोड़ा-थोड़ा झड़ता रहा।
सच में दोस्तो, मैं अपनी बहन का प्यार पाकर धन्य हो गया।
इस बार झड़ने के बाद मेरा लण्ड ढीला पड़ गया, अब उसमें थोड़ा दर्द भी महसूस हो रहा था।
आखिरकार लण्ड पिछले एक घंटे से खड़ा जो था.. इतनी मेहनत के बाद उसकी थकान तो लाजमी ही थी।
मैं और बहन बिना लण्ड निकाले ही कितनी ही देर तक एक-दूसरे की बाँहों में पड़े रहे और एक-दूसरे को प्यार करते रहे।
बाद में बहन उठीं और मुझे चूमते हुए बोलीं- भैया जी.. ये चुदाई मैं जिंदगी भर नहीं भूलूँगी।
मैंने भी उनके चूचे चूसते हुए कहा- मैं भी..
वो जैसे ही उठीं.. मेरा वीर्य उनकी जांघों से रिस कर बाहर आने लगा जिसकी धार देख कर बहन बोलीं- भैया जी आप कितना झड़ते हो.. तुम्हारे जीजा की तो कुछ बूँदें ही बाहर आती हैं.. वो भी कभी-कभार ही!
मैंने कहा- इसे चख कर देखो बहन..
वो बोलीं- हट गंदे कहीं के..
मैंने कहा- एक बार देखो तो सही..
इस पर वो मुस्कुराईं और थोड़ा अपनी उंगली पर लेकर चख लिया।
मेरी बहन का ऐसा रिस्पोंस देख कर सच में मैं बहुत खुश हो गया।
वो सीधे ही ऐसे नंगी बाथरूम में चली गईं। मैं भी उनके पीछे बाथरूम में चला गया।
वहाँ बहन ने अपने हाथों से मेरे लण्ड को पानी डालकर साफ कर दिया। बाद में उन्होंने अपनी चूत साफ की.. जिसे मैं खड़े होकर देख रहा था।
उन्होंने अपनी उंगली चूत में डालकर अन्दर घुमाई और अपनी चूत से सारा वीर्य निकाल दिया और अपने आपको साफ कर दिया।
उन्होंने कहा- अब तो बाहर जाओ भैया जी.. मुझे मूतना है।
मैंने कहा- मेरे सामने ही कर लीजिए ना..
जिस पर उन्होंने मुझे धक्का दिया और प्यार से कहा- अब जाओ भी..
मैं अपनी जगह पर आ गया और अपनी पैन्ट पहन ली, मैं किताब पढ़ने बैठ गया।
थोड़ी देर बाद बहन बाथरूम से बाहर आईं और सोफे पर पड़ी अपनी पैन्टी और सलवार लेकर पहनने लगीं।
थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आईं और बोलीं- भैया जी ये ड्राइंग रूम का दरवाजा तो खुला ही था। मैं भी उसे देख कर भौंचक्का रह गया। फिर मैंने बहन से कहा- चलो बहन इससे एक बात तो साफ है कि ऊपर वाले को हमारा ये रिश्ता मंजूर है.. वर्ना कोई आ जाता और हम पकड़े जाते।
मेरा ऐसा कहने पर बहन ने राहत की साँस ली और बोलीं- शायद आप ठीक कह रहे हो भैया जी।
तो दोस्तो, यह थी मेरी अपनी चचेरी बहन के साथ चुदाई की सच्ची कहानी..

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