छोटी गलती के बाद की और बड़ी गलती

जब मैं अपने घर आई, तो सबसे पहले मैं अपने खाली घर में खूब झूम कर इधर उधर टहली। अपनी चुदाई की खूब खुशी मनाई। शीशे में देख कर अपने आपको चुदाई की बधाई दी- ले साली मुँह मीठा कर, आज तो फिर से चुद गई, जिस चूत को इतना संभाल कर रख रही थी, आज एक नौजवान तुझे चोद कर फिर से कली से फूल बना गया।
और ना जाने क्या क्या मैं खुद से कहती रही।

उसके बाद मैंने गिनना छोड़ दिया। क्योंकि इस बात को काफी दिन हो चुके हैं और अब तक वो मुझे बहुत बार चोद चुका है, या अगर यूं कहूँ कि मैं उसको बहुत बार चोद चुकी हूँ तो ज़्यादा बेहतर होगा।

मेरी तो जैसे जवानी वापिस आ गई है, हर वो हरकत, हर वो बात, हर वो आसान जो संभोग के दौरान कभी मैं अपने पति से करती थी, अब सब मैं इस लड़के से करती हूँ। मुझे नीचे लेट कर चुदने की बजाए, खुद मर्द के ऊपर चढ़ कर चुदाई करना पसंद है, और वो मैंने बहुत बार किया है।

मैं खुश हूँ, क्योंकि मैंने अपने मन की करी। पहले बहुत डरती थी कि दुनिया वाले क्या कहेंगे, पर अब, माँ की चूत दुनिया वालों की।

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