छोटी गलती के बाद की और बड़ी गलती

और जैसे ही उठ कर वो अपने कपड़े उतारने लगा, मैंने भी उठ कर अपने कमीज़ और सलवार उतार दिये। ब्रा पेंटी उतारने से उसने ही मना कर दिया था। उसके बदन पर भी सिर्फ एक चड्डी ही थी।
मुझे इसी तरह अधनंगी हालत में वो हाथ पकड़ ले चला, और फिर उसने सारे घर में मुझे घुमाया।

मैंने पूछा- यह क्या कर रहे हो?
वो बोला- तुम कभी अपने घर में ऐसे घूमी हो?
मैंने कहा- ऐसे मतलब, ब्रा पेंटी में? अरे मैं तो बिल्कुल नंगी भी घूमती हूँ। जब घर में कोई नहीं होता। कई बार तो मैं सारा सारा दिन नंगी रहती हूँ।
वो बोला- तो फिर यहाँ कपड़े क्यों पहने हो, उतारो इन्हें भी!
कह कर उसने मेरी ब्रा खोली और पेंटी भी उतरवा दी, और अपनी चड्डी भी उतार दी।

हम दोनों उनके ड्राइंग रूम में बिल्कुल नंगे खड़े थे। वो आगे आया और मुझसे लिपट गया; उसका तना हुआ लंड मेरे पेट से चिपक गया और मेरे दोनों मम्मे उसके सीने में घुस गए।
बहुत कस कर गले लगाया मैंने उसे … वो भी मेरे बदन पर हाथ फेर रहा था और हम दोनों एक दूसरे को चूम चाट रहे थे।

चूमते चूमते उसने मुझे वहीं फर्श पर ही लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर लेट गया। मैंने अपनी टाँगें खोल कर उसको अपने ऊपर सेट किया और अपनी टाँगों से उसकी कमर को जकड़ लिया। अब उसका खड़ा लंड बिल्कुल मेरी चूत के ऊपर रगड़ रहा था। उसने मेरी आँखों में देखा और कहा- जानती हो स्वीटी, इस एक पल के लिए मैंने कितना इंतज़ार किया है?
मैंने पूछा- कितना?
वो बोला- 10 साल, जब तुम्हें पहली बार देखा था, तब तुम्हें चोदने की सोची थी और आज वो मेरी इच्छा पूरी होने जा रही है।

मैं मुस्कुरा दी, तो उसने अपनी कमर हिलाई और अपने लंड का टोपा मेरी चूत पर सेट किया और अगले ही पल हम दोनों ने आनन्द से अपनी अपनी आँखें बंद कर लीं। बड़े आराम से उसका कड़क लंड मेरी गीली चूत में उतर गया।

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पता नहीं उसको ज़्यादा मज़ा आ रहा था, या मुझे पर दोनों के मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ़्फ़’ जैसे ही शब्द निकल रहे थे और दोनों की आँखें बंद थी।

मगर कुछ देर बाद वो बोला- यार, यहाँ फर्श पर चुभता है, चलो बेड पर चलते हैं।
हम उठे और बेडरूम में चले गए।

बेडरूम में जाकर मैं खुद ही बेड पर लेट गई, अपनी टाँगें खोली और उसे अपने हाथ से आने का इशारा किया। वो मेरी टाँगों के बीच में आया तो मैंने खुद उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रखा और उसने अंदर डाल दिया।
इस बार मैं पूरी तरह से सीधी नहीं लेटी थी, बल्कि पीठ के नीचे मैंने बहुत से तकिये लगा लिए और मैं कुछ कुछ अधलेटी या बैठी सी थी। इस वजह से वो भी मेरे सामने बैठ कर ही मेरे साथ सेक्स कर रहा था।

इससे एक तो उसका वज़न मेरे ऊपर नहीं पड़ रहा था, दूसरा हम एक दूसरे को बहुत अच्छी तरह से देख पा रहे थे। बार बार कभी मैं तो कभी वो एक दूसरे को होंठों को चूमते, एक दूसरे की जीभ के साथ खेलते रहे और वो नीचे से अपना लंड मेरी चूत में चलाता रहा।

मेरी चूत ने भी उसके लंड के स्वागत में खूब पानी का छिड़काव किया और मेरी चूत के पानी से ही बेड की चादर पर एक बड़ा सा निशान बन गया था। चादर गीली हो रही थी और मैं ढीली हो रही थी क्योंकि मेरी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी।

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और फिर मैंने उसे कहा- ज़ोर से फुद्दी मार अपनी जान की मेरे राजा, निहाल कर दे मुझे, फाड़ दे मुझे आज, खाजा मुझको मेरे राजा, खा जा।
फिर जब उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में लिया तो दाँतों से मेरे नीचे वाले होंठ पर काट भी लिया। मैं तो जैसे सारी दुनिया ही भूल गई, ऐसे ज़ोर से तड़पी और झड़ी कि जैसे आज तक किसी गाजर या मूली ने मुझे वो स्वाद नहीं दिया था, जो मुझे अपने यार के लंड से अपनी फुद्दी मरवा कर आया।

झड़ने के बाद मैं पीछे को सर टिका कर लेट गई और उसे देखने लगी के वो कैसे मुझे चोद कर मज़े ले रहा था। फिर वो भी झड़ा और मेरी चूत में ही झड़ गया। कुछ मेरी चूत के अंदर और कुछ बाहर बिस्तर पर उसने अपना माल टपका दिया।

हम दोनों बड़े संतुष्ट थे।

कुछ देर वो मेरे ऊपर ही लेटा रहा; फिर घड़ी पर टाइम देख कर बोला- स्वीटी अपने चलने का टाइम हो गया।
मैंने कहा- नहीं यार, मेरा दिल नहीं भरा, एक बार और मारो मेरी।
वो बोला- आज अपने पास टाइम की कमी है, अगली बार खुला टाइम लेकर आऊँगा और फिर दोनों पूरा दिन चुदाई के मज़े करेंगे।
मुझे मानना पड़ा।

हम दोनों ने बाथरूम में जाकर अपने आप को साफ किया, फिर बाहर आकार बिस्तर और बाकी सब ठीक किया, और अपने अपने कपड़े पहन कर वापिस घर को चल पड़े।
रास्ते में मैंने मांग कर उसका लंड एक बार फिर से चूसा; मगर सिर्फ 2 मिनट के लिए।

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