बीवी की बड़े लंड की चाहत

उस टाइम हम दोनों ने हर आसन में चुसाई से चुदाई तक भरपूर सेक्स किया। उस दिन की चुदाई के बाद तो कांची भी कह उठी- हमेशा ऐसी चुदाई करते तो आज ये सब करना ही नहीं पड़ता.
पर यह जोश किसी के हाथ में तो होता नहीं।

नहा धोकर जब बाहर निकले तो रॉकी बाहर ही इंतज़ार कर रहा था, वो झट से बोल उठा- आज तो बड़ी देर लगा दी नहाते हुए?
मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं, थकान की वजह से जरा आंख लग गयी थी।

अब हम माउंट आबू में होटल से बाहर निकले और रेस्टोरेंट में खाना खाया. उस दौरान कांची और रॉकी आमने सामने बैठे और टेबल के नीचे से एक दूसरे के पैर रगड़ने लगे।
रॉकी की वाइफ तो खाने में मग्न थी पर मेरा पूरा ध्यान उनकी हरकतों पर था। मैंने कांची के सामने देखा तो वो मुस्करा रही थी।

खाना खाकर हम वही आस पास मार्केट में घूमने निकले।

घूमते घूमते रॉकी का पैर एकदम से मुड़ गया और वो मोच खा बैठा। बाद में कांची ने बताया कि वो जान बूझकर किया गया नाटक था।
होटल पास ही में था तो हम किसी तरह सहारा देकर रॉकी को रूम पर ले आये और उसी के रूम में बैठ कर गप्पें लगाने लगे।

रॉकी की पत्नी थोड़ा अपसेट लग रही थी। जब हमने पूछा तो रुआँसी होकर बोली- आबू घूमने का कितना मन था पर अब घूम ही नहीं पाऊंगी।
रॉकी बोला- क्यों नहीं घूम पाओगी? कांची भाभी और भाईसाब के साथ घूम आओ।
“तो फिर आपका ख्याल कौन रखेगा?” रॉकी की वाईफ ने पूछा।

तो मैं बोला- आप और कांची चले जाओ, रॉकी का खयाल में रख लूंगा.
पर बात यहाँ भी नहीं बनी क्योंकि कांची अकेले औरतों के जाने से डर रही थी या बहाना बना रही थी.

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तो अब तय हुआ कि मैं रॉकी की वाईफ को घुमा के आऊंगा और कांची रॉकी का ख्याल रखेगी।
यह हम तीनों के मन की मुराद पूरी होती दिख रही थी।

मैं और रॉकी की वाईफ लक्खी लेक और अन्य जगह घूमने निकल गए।

अब आगे की कहानी कांची की जुबानी।
जैसे ही प्रभात और भाभी जी बाहर निकले, मैं भी उन्हें रिक्शा में बैठाने उनके पीछे पीछे गयी।
जैसे ही वो रवाना हुए, मेरे पति प्रभात ने मुझे आंख मारकर बेस्ट ऑफ लक बोला। सामने से मैंने भी उसे आँख मार कर रिप्लाई किया।

मैं जल्दी से अपने रूम में आई और जल्दी से पारदर्शी नाइटी पहनी और चुदवाने की उतावल में रॉकी के रूम में पहुंच गई।
रॉकी तो जैसे मेरी राह ही तक रहा था। उसने अपने ऊपर के कपड़े तो पहले ही फेंक दिए थे। मुझे देखते ही दरवाजे की तरफ लपक पड़ा जैसे मेरी अगवानी करने आया हो।
मैं भी जाकर सीधा उसके गले से लिपट गयी।

रॉकी मेरी पीठ को सहलाने लगा और पीछे से मुझे दबाने लगा जिससे मेरे नर्म गद्देदार चुचे उसके मर्दाने सीने में चुभने लगे। मैंने भी उसे पूरी आजादी दे दी थी। अब ना मैं सहन कर पा रही थी, ना रॉकी के बस में था अपने को रोकना।

उसने जल्दी ही मेरा गाउन और ब्रा पेंटी मुझसे अलग कर दिए। मैंने भी उसके जिस्म पर बचे अंडरवियर से उसके लंड को आजाद कर दिया। उसका मूसल लन्ड किसी सांप की भांति फुंफकार रहा था।
उसका लन्ड देखते ही मेरे जिस्म में आग भर गई। मैंने उसका लण्ड हाथ में लिया और सहलाने लगी। रॉकी का लंड 8 इंच से तो ऊपर ही था ओर मोटा भी मेरे मन माफ़िक़।

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मैं लन्ड को सहला रही थी और रॉकी मेरे चुचों से खेल रहा था। उसने मेरे एक चुचे को मुँह में और दूसरे को हथेली में लेकर मुझे पूरी तरह गर्म कर दिया।

वो अब मेरी पीठ को दबा कर मेरा मुँह अपने लन्ड के पास लाया। मैंने भी उसका लन्ड झट से मुँह में ले लिया और किसी लॉलीपॉप की भांति चूसने लगी। रॉकी आह भरकर रह गया।

कुछ देर लन्ड चुसाई के बाद रॉकी ने मुझे उठाया और अपने बिस्तर पर ले आया। मैं थोड़ी हैरान थी कि थोड़ी देर पहले जो चल भी नहीं पा रहा था वो मुझे उठाकर बेड पर ले आया। जब रॉकी से पूछा तो वो बोला- अगर यह बहाना नहीं बनाता तो क्या हम तुम इस हालात में होते?
यह सुनकर तो मैं उससे चिपट गयी और उसे चुम्बनों से नहला दिया।

वो भी जल्दी ही मेरी चूत तक पहुंच गया और अपनी जीभ से मेरी चूत का रसपान करने लगा। मेरी चूत की आंखें खुशी से छलक गयी और रॉकी उसके आँसू (रस) पूरा ही पी गया।

अब वो उठा और मेरी दोनों टांगों को अपने हाथों से ऊंचे उठाया और पोजिशन बनाकर मेरी चूत का बरसों का इंतजार खत्म किया।
अब रॉकी का मूसल मेरी फूल सी चूत की गहराई में उतर रहा था और भी उसके हर धक्के का उसी की तरह साथ दे रही थी।

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