रसिका भाभी को कुंवर साहब ने चोदा

मुझे बड़ी गुदगुदी हो रही थी और मजा भी आ रहा था. फिर कुंवर साहब ने मुझे बेड पे ले लिया और खुद नंगे खड़े हो गए.

हम दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे. कुंवर साहब ने मुझे पूरी नंगी कर दिया. हम दोनों नंगे हो चुके थे.

कुंवर साहब ने मुझे बेड पर लेटा कर मेरे पैर फैला दिए और मेरे ऊपर चढ़ गए. कुंवर साहब ने अपना बड़ा और मोटा लंड मेरी चुत के ऊपर लगाया और धक्के देने लगे.

हम दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, लेकिन मेरे मुँह से कामुक आवाजें आनी लगीं ‘आह … ओह …’

उनके धक्के चालू थे और जोर जोर से वे मुझे चोदे जा रहे थे. उनका लंड बड़ा मोटा था. कोई 6 इंच से भी ज्यादा लंबा और मोटा लंड था. मैं अपनी चुत में लंड की मोटाई और लम्बाई को महसूस कर रही थी.

उनकी साधू बाबा जैसे लंबी दाढ़ी मेरे मम्मों को सहला रही थी. इससे मुझे मजा आ रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि मैं किसी साधू बाबा से चुदवा रही हूँ.

उनके धक्के अभी लग ही रहे थे कि उन्होंने बोलना शुरू कर दिया.

उनके भी मुँह से आवाजें आ रही थीं- रसिका बहू, तुम क्या मस्त माल हो … जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था, तभी मुझे तुझे चोदने का मन हो गया था.

मैं कुछ नहीं बोल रही थी. कुंवर साहब की 70 की उम्र में भी उनका भारी शरीर और बड़े लंड के धक्के मैं झेल रही थी. मुझे भी चुदाई में बहुत मजा आ रहा था.

वो मुझे धकापेल चोद भी रहे थे और बोल भी रहे थे- मैं भी काफी टाईम से सेक्स का भूखा था, पत्नी के देहांत के बाद मैंने अपने आपको अकेला पाया और बिजनेस में ज्यादा व्यस्त हो गया. आज काफी टाईम के बाद तुझसे जो सुख मिल रहा है, वो मैं कभी नहीं भूल सकता.

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अब मैं भी उनके आगोश में आ गयी थी, मेरी कमर अब नीचे से उछल कूद करने लगी थी. अपने कुल्हे हिला हिला कर मैं भी अब उनका साथ देने लगी.
मैंने कहा- उम्म्ह… अहह… हय… याह… कुंवर जी आप इस उम्र में भी इतने जवान हो, एक बात पूछूं?
कुंवर साहब- हां पूछो.
मैं- क्या मैं आपको बाबा बोल सकती हूँ??
कुंवर साहब- क्या बाबा जी का लेना ज्यादा पसंद आता है रसिका?

मुझे हंसी आ गई. मैंने बोला- अअअअ … आआआह … बाबा चोद दो.
अब मेरे मुँह से भी सेक्सी आवाजें आने लगीं.
कुंवर साहब ने कहा- हां बेटी क्यों नहीं … तुम मुझे बाबा बोल सकती हो.

उनको क्या पता मैं उन्हें साधू बाबा के रूप में देख रही थी.

मैंने कहा- ओओह … हां. … बाबा प्लीज़ और चोदो मुझे … प्लीज़ प्यास बुझाओ अपनी बेटी की … बाबा जी … आह प्लीज़ और चोदो मुझे … आपका लंबा मोटा लंड मेरे अन्दर तक घुसेड़ दो मेरी चुत में … और जोर से बाबा जी प्लीज़ चोदो मुझे.
कुंवर जी भी बोलने लगे- हां बेटी ले ये ले मेरा लंड … और ले मेरा लंड खा जा पूरा … आह ले ले अपनी प्यासी चुत में.

उनके धक्के और तेज हो गए. मैं भी अपने चूतड़ों को हिला हिला कर बाबा जी का साथ देने लगी.

काफी देर चुदायी चली और कुंवर साहब का पानी मेरी बुर में घुसने लगा. दोनों को खूब मजा आया. काफी देर तक कुंवर साहब मेरे ऊपर पड़े रहे.

फिर एक बार हम दोनों में चुदायी हुई. उस रात कुंवर जी ने मुझे तीन बार चोदा.

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दूसरे दिन हमारी नींद खुली. घर की सब खिड़कियां बंद ही थीं. मैंने कुंवर साहब को चाय दी और कहा- नहाने का पानी तैयार है कुंवर जी.

उनकी तरफ देखते देखते मैं बाथरूम में चली गयी और जाते जाते साड़ी बाहर ही उतार दी.
वो भी समझ गए. मैं अन्दर ही ब्लाउज और साये में थी.

वो बाथरूम में अन्दर आ गए. उन्होंने मेरे कपड़े उतारे … शॉवर चालू किया. अपने लंड को साबुन लगाकर मुझे नीचे कुतिया जैसे बैठने को बोला.

फिर कुंवर साहब ने मेरे चूतड़ों और गांड में भी साबुन का पानी घुसाया. मेरी गांड चिपचिपी कर दी. मैं समझ गयी कि आज कुंवर साहब पीछे का मजा लेने वाले हैं.

फिर कुंवर साहब ने अपने लंड का सुपारा मेरी गांड के छेद पर रखा और गांड में घुसा दिया. मैं बिलख गई, पर मेरे पति ने मुझे गांड मार कर भी चोदा था, इसलिए दो तीन झटकों में ही गांड ने डिस्को करना शुरू कर दिया.

काफी देर तक कुंवर साहब ने मेरी गांड मारी. फिर अपना पूरा पानी मेरी गांड में छोड़ दिया. मेरी गांड उनके गर्म पानी से पूरी भर गयी. मुझे काफी तकलीफ हुई लेकिन मजा भी आया.

सासू माँ के इन तीन महीने की गैरमौजूदगी में हम दोनों ने बहुत चुदाई की.

फिर सासू माँ आ गईं, कुंवर साहब के भी जाने का टाईम आ गया.

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