बड़ी साली की दबी हुई अन्तर्वासना

उसको देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी. चाय लाने के बाद हमने साथ में बैठ कर चाय पी. फिर हम दोनों के बीच में रोज की तरह बातें शुरू हो गई. उसने बताया कि आज रात को भी उसके पति की नाइट शिफ्ट है.

वो बोली- तुम हाथ-मुंह धोकर बैठो, मैं तुम्हारे लिये खाना लगा देती हूं.
उसकी बातों को सुन कर आज ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझ पर अपना हक सा समझने लगी थी.

मैं जल्दी से उठ कर अपने रूम में गया और फटाफट चेंज करके वापस आ गया. जब तक मैं वापस आया उसने खाना लगा दिया था.
हमने साथ में बैठ कर खाना खाया और कुछ यहां-वहां की बातें करने लगे. बीच-बीच में मैं उसके हाथ के बने हुए खाने की तारीफ भी कर रहा था. वो मेरी बातें सुन कर काफी खुश हो रही थी. उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी दिखाई दे रही थी आज.

मैंने कहा- आज तो आप बहुत खूबसूरत लग रही हो.
फिर वो मुझे छेड़ने के मकसद से बोली- आज से क्या मतलब है तुम्हारा? बाकी दिन मैं खूबसूरत नहीं लगती हूं क्या?
इस पर हम दोनों हंसने लगे.

फिर मैंने भी उसको छेड़ने के अंदाज में कहा- खूबसूरत तो आप हो ही लेकिन आज आपका चेहरा कुछ ज्यादा ही चमक रहा है. लगता है कि साढू साहब ने आज आपको दिन में ही खुश कर दिया है.
उसने मेरी बात पर शर्माते हुए मेरे हाथ पर चुटकी से काट लिया और हम दोनों साथ में हंसने लगे.

यह कहानी भी पड़े  Bua Ki Beti Ki Choot Ki Pyas

वो बोली- आप भी न! पता नहीं क्या-क्या बोलते रहते हो!
मैंने कहा- क्यूं, मैंने कुछ गलत कह दिया क्या?
मेरी बात पर वो थोड़ी गम्भीर होते हुए कहने लगी- अरे आपके साढू साहब को इतनी फुरसत कहां है!
इतना कहते-कहते वो उठ कर किचन की ओर जाने लगी.

उसके जाने के बाद मैंने पास में ही रखे हुए उसके मोबाइल को उठा कर देखा. उसकी सर्च हिस्ट्री में कुछ पॉर्न साइट्स के लिंक मुझे दिखाई दे गये. ये देख कर मैंने उसके फोन को चुपचाप वैसे ही रख दिया.

फिर मैं बिल्कुल अन्जान बन कर बैठ गया. वो जब वापस आई तो हमने फिर कुछ बातें कीं. कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद मैं उसको फिर से उसी विषय पर ले आया जिस विषय पर उसके जाने के पहले हम लोग बातें कर रहे थे.

मैंने उसको दोबारा से छेड़ते हुए कहा- आपने उस बात पर उदास सा चेहरा क्यों बना लिया था?
वो बोली- कौन सी बात पर?
मैंने कहा- वही साढू साहब के खुश करने वाली बात पर?

कुछ देर तक सोचने के बाद वो बोली- नहीं, आपने कुछ गलत नहीं कहा था. बस मैं ऐसे ही कुछ सोचने लगी थी.
मैं दोबारा से जोर देकर पूछा- कुछ ऐसी-वैसी बात है क्या?
वो कहने लगी- उनके पास मुझे देने के लिए वक्त ही कहां है.

मैंने अपनापन जताते हुए कहा- आप ऐसे दुखी मत होइये वरना मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा.

इस पर वो उदास होकर अपनी सारी व्यथा मुझे बताने लगी, कहने लगी- सच कहूं तो उन्होंने कभी मेरी परवाह की ही नहीं. उनको मेरी खुशी से कुछ लेना-देना नहीं है.

यह कहानी भी पड़े  भाभी की चुत की प्यास बुझायी

मैं समझ गया था कि वो बहुत परेशान है अपने पति की बेरुखी से. इसलिए मैंने दूसरा विषय छेड़ दिया. फिर कुछ यहां-वहां की बातें करने के बाद उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई.

फिर मैंने दोबारा से उसको छेड़ने के इरादे से कहा- मुझे पता चल गया था कि आज आपके चेहरे पर ये चमक कैसे आई आप इतनी खुश क्यों लग रही थीं!
वो तपाक से बोली- क्या पता लग गया आपको?

मेरी साली की कहानी अगले भाग में जारी रहेगी. कहानी पर अपने विचार रखने के लिए कमेंट करें. यदि आप कहानी के विषय में अपनी व्यक्तिगत राय साझा करना चाहते हैं तो मुझे मेल करें. मेरा मेल आईडी नीचे दिया हुआ है.

Pages: 1 2 3

error: Content is protected !!