बाप का पाप

मेरे कराहने परपापा ने धक्के मारना बंद कर मेरी चूचियों को मसलना शुरू किया. अब मज़ाआने लगा. 6-7 मिनिट बाद दर्द ख़तम हो गया. अब पापा बिना रुके धक्के लगा रहे थे. धीरे धीरे पापा का पूरा लंड मेरी चूत की झिल्ली फाड़ता हूवा घुस गया. मैं दर्द से छ्त्पटाने लगी. ऐसा लगा जैसे चूत मैं चाकू(नाइफ) धँसा है. मैं कमर झटकते बोली, “हाए पापा मेरी फट गयी. निकालो मुझे नही चुदवाना.” पापा अपना लंड पेलते हुवे मेरे गाल चाट रहे थे. पापा मेरे गाल चाट बोले, “बेटी रो मत अब तो पूरा चला गया. हर लड़की को पहली बार दर्द होता है फिर मज़ा आता है.”

कुच्छ देर बाद मेरा कराहना बंद हूवा तो पापा धीरे धीरे चोदने लगे. पापाका कसा कसा आ जा रहा था. अब सच ही मज़ा आ रहा था. अब जब पापा ऊपर से धक्का लगाते तो मैं नीचे से गांड उछालती. उमेश तो केवल ऊपर से रगड़ कर चोदकर चला गया था. असली चुदाई तो पापा कर रहे थे. पापा ने पूरा अंदर तक पेल दिया था. पापा का लंड उमेश से बहुत मज़ेदार था. जब पापा शॉट लगाते तो सूपड़ा मेरी बच्चेदानी तक जाता. मुझे जन्नत के मज़े से भी अधिक मज़ा मिल रहा था. तभी पापा ने पूछा, बेटी अब दर्द तो नही हो रहा है “हाए पापा अब तो बहुत मज़ा आ रहा है. आअहह्छ पापा और ज़ोर ज़ोर से चोदिये.”

पापा इसी तरह 20 मिनिट तक चोदते रहे. 20 मिनिट बाद पापा के लंड से गरम गरम मलाईदार पानी मेरी चूत मे गिरने लगा. जब पापा का पानी मेरी चूत मे गिरा तो मैं पापा से चिपक गयी और मेरी चूत भी फालफ़लकार झड़ने लगी. हम दोनो साथ ही झाड़ रहे थे. पापा ने फिर मुझे रात भर चोदा. सुबह 12 बजे सोकर उठे तोमैने पापा से कहा, “पापा आज फिर चोदेन्गे अरे मेरी जान अब मैं बेटी चोदबन गया हू. अब तो तुझे रोज़ ही चोदुन्गा. अब तो तू मेरी दूसरी बीवी है
पर पापा जब मम्मी आ जाएँगी तो अरे मेरी जान उसे तो बस एक बार चोद दूँगा और वह ठंडी हो जाएगी फिर तेरे कमरे मैं आ जाया करूँगा. मैं फिर पापा के साथरोज़ सुहागरात मनाने लगी. तो दोस्तो कैसी लगी ये कहानी दोस्तो फिर मिलेंगे एक और नई कहानी के साथ तब तक के लिए विदा आपका दोस्त राज शर्मा

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