अधूरी तमन्ना का कुछ मज़ा!

हाल ही की ताजा सच्ची घटना कहानी के रूप में पेश कर रहा हूँ ! मेरे बारे में मेरी पुरानी कहानियों में पढ़ने के बाद आप सभी जानते हैं तो सीधा मुद्दे पर आता हूँ।
मेरी शादी के बाद मेरी बीवी यानि मेरी जानू के प्यार में इतना खो गया कि एक साल तक तो मुझे लगा कि बिगड़े हुए इन्सान को सुधारना है तो उसकी शादी कर देना चाहिए ताकि वो बाहर के बिगड़े माहौल से दूर हो जाए।
परन्तु साल गुजरते गुजरते मेरा यह भ्रम टूटने लगा कारण था, मेरी जवान होती साली रूपा जो जवानी में कदम रख चुकी थी और मुझसे बेतकल्लुफ होकर खूब मजाक करती थी, मेरा दिल उसे पाने के लिए मचलने लगा परन्तु गांव के परिवेश में ऐसा मौका इत्तेफाक से ही मिल पाता है कि साली का कुछ मज़ा ले सकूँ !
वो दिन पर दिन जवान और खूबसूरत होती जा रही थी पर मुझे कोई भी मौका नहीं मिल पाया कि उसकी चढ़ती जवानी और गदराते जिस्म का आनन्द ले सकूँ !
रूपा भी बड़ी बिंदास थी, मेरे साथ खूब मजाक करती थी परन्तु बदकिस्मती से मेरे नैनों की भाषा को वो पढ़ न सकी, न ही समझ सकी और मैंने पहल इसलिए नहीं की, मैं नहीं चाहता था कि मेरे प्रणय निवेदन को वो ठुकरा दे और मैं अपनी नजरों में अपने को गिरा हुआ महसूस करूँ।
और मेरी शादी के ठीक तीन साल बाद उसकी भी शादी हो गई और वो विदा होकर चली गई जिसका सबसे ज्यादा सदमा शायद मुझे ही लगा होगा।
फिर दिन आये, गए, गुजरते रहे, मैं अपने दिल को यह समझाते हुए तसल्ली देता रहा कि साली रूपा और मेरी बीवी की कद काठी और रंग रूप लगभग सामान ही है, जो आनन्द मेरी बीवी से मिलता है, वही तो रूपा से भी मिलता। क्या हुआ जो वो मेरे हाथ न लग सकी !
कई बार रूपा का ख्याल दिल में लेकर बीवी से सेक्स करता था, फिर धीरे धीरे सब सामान्य हो गया और मैं अपनी गृहस्थी और काम धंधे में रम गया।
कभी रूपा मिलती तो हंसी मजाक जरूर हो जाती पर अब मैं उसके प्रति ज्यादा संजीदा नहीं होता था, अब तक मेरी सलहज रेखा से मेरी हंसी मजाक होती रहती, वो भी मस्त जवानी से भरपूर थी ! फिर जब मेरी बीवी की डिलिवरी हुई तो रेखा भाभी कुछ दिनों के लिए मेरे साथ रही और मैंने उनकी जवानी के मजे कैसे लिए, वो मैं अपनी कहानी ‘नया मेहमान’ में लिख चुका हूँ। जिन्होंने नहीं पढ़ी, वो
जरुर पढ़ कर आनन्द उठाएँ !
मेरी साली रूपा शादी के बाद और भी निखर गई उसके वक्ष और नितम्ब भी मेरी बीवी के जैसे सुडौल हो गए एकदम भरे और उभरे और अब तक एक बेटी की माँ भी बन चुकी है !
इसी साल होली के बाद वो अपने मायके आई थी तो एक दिन को मेरे घर पर भी आई।
उस दिन ऑफिस से जल्दी घर आ गया, बीवी और साली को बच्चों सहित बाजार घुमाने ले गया।
रात में खूब मस्ती की हम सभी ने, क्योंकि सुबह 8 बजे की बस से उसे अपने ससुराल वापस जाना था।
बस स्टैंड मेरे घर से बिल्कुल पास ही है इसलिए साले और सलहज ने भी रूपा को मेरे घर रुकने पर कोई एतराज नहीं किया !
रात में मैं दो पैग लगा चुका था, हम सबने साथ में खाना खाया और रूपा ने अपने कपड़े बदलकर मेरी बीवी की साड़ी पहन ली क्योंकि वो अपने कपड़े पैक कर चुकी थी।
फिर मेरे डबल बेड पर एक ओर मेरी बीवी दूसरी ओर मेरी साली रूपा सो गई, अपने अपने बच्चों को अन्दर की ओर सुला लिया।
मैंने नीचे गद्दा लगा कर अपना बिस्तर लगा लिया।
दोनों बहनें बातें कर रही थीं, कब मेरी झपकी लग गई मुझे पता ही नहीं चला। करीब 1 बजे मेरी नींद खुली तो मेरे शरीर का जानवर
कुलबुलाने लगा, मुझे रूपा के जिस्म की चाहत सताने लगी।
उम्मीद तो नहीं थी कि रूपा इसके लिए कभी तैयार होगी पर शराब के नशे मैंने ठान लिया कि यदि कोई लफड़ा हुआ तो यह कहकर क्षमा मांग लूँगा कि यह साड़ी जो तुमने पहनी है, उसे देख कर मुझे लगा कि मेरी बीवी यानि तुम्हारी दीदी सो रही है इसलिए
गुस्ताखी हो गई !
हालांकि मेरी बीवी सोते समय कमरे की पूरी लाइट बंद कर देती है, उसे अँधेरे में सोने की आदत है जिसमें कुछ भी ठीक से दिखाई भी नहीं देता, मैं हिम्मत जुटाकर करवट से सोई रूपा के चादर में घुस, पीछे जाकर लेट गया फिर अपने हाथों को रूपा के कंधे पर रख दिया।
वो शायद गहरी नीद में थी, यह सोच कर मैंने उसकी बड़े बड़े स्तनों पर अपना हाथ रख दिया।
उसने ब्रा नहीं पहनी थी, मैं ब्लाउज़ के ऊपर से ही स्तनों को सहलाने लगा।
तभी उसने अपने हाथों से मेरे हाथ को पकड़ कर हटा दिया मेरे कलेजा धक से रह गया, सीने की धड़कन धाड़ धाड़ करके आवाज कर रही थी !
रूपा बार बार मेरे हरकत करतें हाथो को पकड़कर हटा रही थी, लगता था जैसे मेरा हार्ट फेल हो जायेगा !
मैंने कुछ देर बाद फिर से रूपा के स्तनों पर हाथ रख दिया और अपने होंठ को उसकी गर्दन और पीठ पर छुआते हुए हौले हौले चूमने लगा। जब रूपा की ओर से कोई विरोध नहीं हुआ तो अपने एक पैर से रूपा की पिंडलियों को सहलाते हुए उसकी साड़ी को धीरे धीरे
ऊपर की ओर सरकाते हुए जांघों तक ले आया, अब रूपा की सांसों में एक हल्की सिसकारी सी निकल गई !
मैं समझ गया कि मेरा तीर निशाने पर लग गया है, मैंने उसकी पीठ पर कई चुम्बन ले डाले, स्तनों को जोर से सहलाते हुए मसलने लगा !
मेरा लंड अकड़कर खड़ा होकर रूपा की गांड की दरार पर रगड़ देने लगा वो तो बहुत ही बेक़रार हो रहा था, आज उसकी अरसे पहले की अधूरी इच्छा पूरी होने वाली थी वो तो बस रूपा के छेद में घुस जाने को बेक़रार होकर झटके से दे रहा था !
चादर के अन्दर ही रूपा को चित्त लिटाकर उसके स्तनों को अपने होंठो में लेकर चूसते हुए दूसरे हाथ से उसकी योनि को पेंटी के ऊपर से ही सहलाने लगा।
रूपा मुझसे बेल की तरह लिपट गई, उसकी योनि बिल्कुल गीली हो रही थी। अब मेरा रास्ता बिल्कुल साफ था, यानि रूपा चुदने को तैयार हो चुकी थी !
मैंने उसके कान में कहा- नीचे आ जाओ !
फिर उसके चादर में से निकलकर टटोलते हुए अपने बिस्तर पर आ गया।
जहाँ मेरा बिस्तर लगा था वहाँ और ज्यादा अँधेरा था। कुछ ही क्षणों में रूपा एक साये की तरह आकर मेरे बिस्तर में आकर मेरी बाँहों में समा गई !
मैंने उसके साड़ी अलग कर दी पेटीकोट ऊपर उठा दिया फिर पैंटी निकाल दी, ब्लाउज के हुक खोल दिए तो रूपा के अमृत कलश बाहर आ गए !
मैं उसे पूर्ण नग्न नहीं करना चाहता था, क्या पता कब मेरी बीवी की नींद खुल जाये !
फिर मैंने अपने लंड को उसके हाथों के हवाले करके 69 की पोजीशन ली और रूपा की गीली चिकनी चूत को जीभ और अंगुली से सहलाते हुए मस्त करने लगा !
वो मेरे लंड को सहलाते हुए चूम रही थी, उसकी सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थी, मैं नहीं चाहता था कि उसकी स्वर ध्वनियाँ और
तेज होकर मेरी बीवी की नीद में खलल डाले !
मैं सीधी पोजीशन में आकर टांगों को घुटनों से मोड़कर फैला दिया और अपने लौड़े को उसकी बुर का रास्ता दिखा दिया।
अगले ही पल मेरा लंड रूपा की बुर में था और एक हल्की सी उफ़ रूपा के कंठ के बाहर वो मुझसे ऐसे लिपट गई जैसे वो भी कभी मेरे साथ ये सब करने को तरसती रही हो !
थोड़ा सा विराम लेकर हम दोनों अपनी मंजिल की और बढ़ चले। मैं नहीं चाहता था कि वो कोई आवाज भी करे, इसलिए ज्यादा से ज्यादा उसके होंठों को अन्गुलियों से दबाकर रखा था !
एक हाथ से उसके अमृत कलशों को मसलते हुए, उन्हें चूमते चाटते, अपने लंड को ज्यादा से ज्यादा उसकी चिकनी गीली चूत के अन्दर पेल रहा था !
वो अपनी गांड को उठाकर चुदाई में मेरी बीवी की तरह मेरा पूरा सहयोग कर रही थी, जल्द ही वो चरम पर पहुँच गई। जैसे ही वो
स्खलित हुई मैंने उसका मुँह हाथ से दबाकर बंद कर लिया, तुरंत बाद ही मेरे लंड ने भी वीर्य की पिचकारी छोड़ दी।
पांच मिनट तक हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे के आगोश में पूरे समर्पण के साथ खो गए !
मैंने महसूस किया वाकई इसका जिस्म बिल्कुल मेरी बीवी की तरह ही है यानि मेरा अनुमान सही निकला !
फिर हो भी क्यों न आखिर दोनों बहनें ही तो हैं !
उसके बाद उसने अँधेरे में जैसे तैसे अपनी साड़ी लपेट ली और पलंग पर चली गई।
मेरी दिली ख्वाइश थी कि उससे बात करूँ, उसे बता दूँ कि रूपा मैं तुम्हें तुम्हारी शादी के पहले से बहुत चाहता हूँ, तुम्हें हासिल करने की तमन्ना मेरे दिल में उसी समय से थी पर कभी पूरा करने का मौका नहीं मिला, तुम्हारी शादी के बाद तो मैं तुम्हें पाने की उम्मीद ही खो चुका था, पर आज तुम्हें पाकर मैं धन्य हो गया, कभी मौका मिले तो मुझे इसी तरह अपनी जवानी के जाम पिलाते रहना !
और भी बहुत सी बातें उससे करना चाहता था पर बीवी के उठने का खतरा मोल लेना नहीं चाहता था इसलिए मैंने उसे पलंग पर जाने दिया।
यहाँ तक कि हम दोनों में से कोई भी अपने प्यार या दिल की बात नहीं बोल पाया !
कैसा संयोग था कि इतना सब हुआ पर सभी कुछ संवादहीन, बस एक घटना की तरह जैसे हम दोनों अपना अपना किरदार निभा रहे हों !
मुझे तो यह एक सुखद स्वप्न की तरह लग रहा था !
अगले दिन सात बजे रूपा ने मेरे चेहरे पर पानी के छींटे डालकर जगा दिया और खिलखिलाते हुए हंसने लगी, बोली- जीजू उठो जल्दी… मुझे बस स्टेंड छोड़ने चलो !
उसकी आँखों की चमक और खिला चेहरा देख मेरी नीद उड़ गई, इच्छा हुई कि एक बार फिर से मौका मिल जाये तो मजा आ जाये ! फिर कोई मौका नहीं मिला, मैंने उससे कहा- पहुंचकर फोन करना !
मेरी बीवी और मैंने उसे बस में बिठाकर उसकी ससुराल रवाना कर दिया !
सारा दिन मैं उसके फोन का इंतजार करता रहा।
शाम को मेरी बीवी ने बताया- रूपा का फोन आया था, वो अच्छे से पहुँच गई है !
मैं सोचता रहा कि उसने मेरे को उसने फोन क्यों नहीं लगाया जबकि मेरा नंबर भी तो उसके पास है? फिर सोचा कि शायद उसको मौका नहीं मिला होगा !
रूपा के फोन का इंतजार और उस की याद में दिल बहुत उदास हो रहा था, रात को मैंने दो की जगह चार पैग लगा लिए, अच्छा खासा नशा हो गया था !
मेरी बीवी ने बड़े प्यार से मुझे खाना खिलाते हुए मजाक किया- लगता है, साली के जाने के गम में आज कुछ ज्यादा ही चढ़ा ली !
मुझे लगा जैसे किसी ने मुझे करंट लगा दिया हो, कहीं कल रात को मेरी बीवी ने मुझे रूपा के साथ वो सब करते हुए देख तो नहीं लिया?
आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा, नशे की हालत में कुछ भी सोच नहीं पा रहा था !
कमरे की लाइट बंद की जाकर पलंग पर लेट गया सोचने लगा कि यदि मेरे को उसने रूपा के साथ देखा होता तो अभी घर में इतनी शांति नहीं होती, न ही मैं चैन की साँस ले पा रहा होता !
तभी मेरी बीवी रसोई का काम निपटाकर आ गई।
मैंने दूसरी और करवट बदल ली तो मेरी बीवी ने मुझे पीछे से लेटकर जकड़ लिया और शरारत करते हुए मुझे बहकाने लगी।
मैंने कहा- सो जाओ यार ! आज मूड नहीं है !
तो वो बोली- कल तो बड़े रोमांटिक हो रहे थे? मैंने इशारे से मना भी किया था पर नहीं माने और बेशर्मी की सारी हदें पार करके मुझे बहका कर अपने मन की कर ही ली थी तभी सोने दिया था ! सच कहू तो कल रात तुमने जिस शार्ट कट तरीके से किया बहुत मजा आया, फिर भी मुझे लग रहा था कहीं रूपा न जाग जाये, नहीं तो सोचेगी दीदी और जीजू कितने बेशरम हैं ये लोग ! एक दिन भी सबर नहीं कर सकते !
एक क्षण में मेरा सारा नशा उतर गया, मुझे लगा जैसे मेरे हाथों के तोते ही उड़ गए हों, अब असलियत मेरे सामने थी यानि की रात को रूपा नहीं, अपनी बीवी के साथ ही सम्भोग किया था !
परन्तु आप सभी यकीन करो या न करो, मेरे जिस्म की वो उत्तेजना इतनी प्रबल थी बिल्कुल ऐसा लगा था जैसे पहली बार अपनी जानू के साथ सुहागरात में महसूस हुआ था।
चंद मिनटों का वो सम्भोग कितना सुखद और अविस्मरणीय था और यह तजुर्बा शायद जिन्दगी भर नहीं भूल पाउँगा !
गनीमत यह रही कि रात में मैंने उसे रूपा जानकर उससे कोई बात नहीं की नहीं तो मेरी तो बाट लग जाती !
मैं बीवी से यह पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाया कि वो रूपा की जगह और रूपा उसकी जगह कैसे आ गए? यह बात राज ही रह गई ! मुझे लगता है रूपा की बच्ची को रात में बार बार पेशाब जाने की वजह से उन्होंने अपनी जगह बदल ली होगी !
खैर जान बची तो लाखों पाए, लौट के बुद्धू घर को आये !

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