दोस्त और मा की चुदाई कहानी


पिछला भाग पढ़े:- माँ और दोस्त-३

हेलो दोस्तों! सूरज फिर से वापस आ गया नेक्स्ट पार्ट लेके. स्टोरी का फुल मज़ा लेने के लिए फर्स्ट पार्ट ज़रूर पढ़ लो. अब तक मैंने बताया कैसे पिता जी हॉस्पिटल में एडमिट थे तो माँ को मैं फ्लैट पे भेजता था रेस्ट करने, और खुद हॉस्पिटल में रहता था.

पिता जी के देहान्त के बाद माँ को पुणे लाया. स्टेबल लाइफ चल रही थी फ्लैट में, तब रिज़वान और माँ के अफेयर का पता चला. मैंने उन्हें रंगे हाथ पकड़ा. फिर कैसे दोनों ने मिल के मुझे इमोशनल ब्लैकमेल करके उनके रिलेशन को एक्सेप्ट करने पे मजबूर किया.

कुछ महीने निकल गए, पर मुझे उनकी फुल स्टोरी नहीं पता थी. कब क्लोज आये, फर्स्ट सेक्स कैसे हुआ, किसने पहले प्रोपोज़ किया? ये सवाल दिमाग में घूमते रहे. पर माँ से पूछने की हिम्मत नहीं.

एक दिन मैं और रिज़वान दोस्त की बर्थडे पार्टी में दारु पी रहे थे. माँ उस रात हमारे साथ नहीं थी, तो मुझे रिज़वान से बात करने का मौका मिला.

मैं: “रिजवान भाई, एक बात पूछूं? माँ को मत बताना.”

रिज़वान: “अरे यार, पूछ न. दोस्त है तू मेरा, कुछ भी बोल!”

मैं: “भाई, आप और माँ क्लोज कैसे आये? किसने पहले प्रोपोज़ किया? तुम्हारी लव स्टोरी बताओ न?”

रिज़वान (हस्ते हुए): “प्रोपोज़? ः, हमने कभी प्रोपोज़ नहीं किया भाई! और हां, लव स्टोरी सुन्नी है या सेक्स स्टोरी? सच बोल!”

मैं थोड़ा घबरा गया, शर्मा गया. फिर स्माइल देते हुए बोला, “क्या भाई, मज़ाक ले रहे हो? बताओ न रिलेशन के बारे में.”

रिज़वान: “चल, यहाँ बहुत शोर है. बाहर जाके कार में बैठते है, शांत जगह.”

हमने थोड़ी ड्रिंक ली और कार में बैठ गए. ड्रिंक करते हुए वो डिटेल्स बताने लगा.

रिज़वान: “जब तेरे पापा और माँ फ्लैट पे आये, मुझे तेरी माँ की तरफ कोई अट्रैक्शन नहीं था. मैं तब बिलकुल नार्मल था. हॉस्पिटल में जब तेरे पापा एडमिट हुए, उसके ३-४ दिन बाद तूने मुझे कहा, ‘रिजवान भाई, माँ थक गयी है, यहाँ हॉस्पिटल में ठीक से नींद नहीं हो पाती उसकी. कहीं वो बीमार न हो जाये. आप माँ को फ्लैट पे ले जाओ. वो फ्लैट पे फ्रेश हो जायेगी, और ठीक से सो भी पाएगी.’

तब से डेली मैं माँ को फ्लैट ड्राप करता. पहले दिन फ्लैट पहुंचे तो माँ सैड थी. हम तरय करते उसको इंगगे करने का. वो धीरे-धीरे कम्फर्टेबले हुई मेरे साथ. ४-५ दिन बाद बिलकुल फ्री हो गयी. तब मैं तेरे माँ का हाथ या कन्धा पकडता रोटी तो, कंधे सेहलता. कंधे के साइड से हुग करता. बाइक पे भी कंधे पे हाथ रखने लगी, चिपक के बैठने लगी.

मुझे अच्छा लगने लगा. फिर उसको खुश करने मैं अपने आप एक्स्ट्रा एफ्फोर्ट्स डालने लगा. पर मुझे नहीं पता था कि तेरी माँ भी मुझमे इंटरेस्टेड है आलरेडी.”

एक दिन फ्लैट पहुंचे. माँ लिविंग रूम के सोफे पे बैठी थी, रवि और मोहित (हमारे फ्लैमटेस) भी थे.

रिज़वान ने फुल डिटेल बतायी फर्स्ट टाइम की. मैं आपको एक्साक्ट्ली वैसा ही बता रहा हु…

माँ की आँखों से आँसू बह रहे थे. हॉस्पिटल से आते ही हालत खराब हो गयी. पिताजी की रिपोर्ट्स ने तोड़ दिया था. माँ सोफे पे बैठी थी और बहुत रो रही थी, चेहरा छुपा के.

रिज़वान, रवि, मोहित तीनो पास आये. रिज़वान ने पहले हाथ पकड़ा, “आंटी, रोइये मत. सब ठीक हो जाएगा. डॉक्टर ने ट्रीटमेंट बोलै न.” उसकी आवाज़ में सुकून था.

रवि ने पानी लाया, “आंटी, पहले पानी पियो. यूँ रूगी तो और परेशां होंगी.” मोहित बोलै, “हां आंटी, सूरज भाई टेंशन ले रहे होंगे. स्ट्रांग रहो आप अंकल के लिए, सब ठीक हो जायेगा.”

माँ ने पानी पिया, पर आंसू नही रुके. तीनो ने माँ को घेर लिया था. फिर उन्होंने थोड़ा अट्मॉस्फेरे नार्मल करने के लिए, गाओं की यादें, पिता जी के मज़बूत दिनों की बातें करना स्टार्ट किया. माँ शांत हुई.

रिज़वान बोलै, “चलिए खाना खा लेते. गरम रोटी-सब्ज़ी बनवाई है.”

सब ने मिल कर साथ में खाना खाया. माँ थोड़ा काम खाना खायी, वो मुस्कुराने की कोशिश कर रही थी. रात गहरी हो गयी. रवि-मोहित अपने रूम गए. माँ से रिज़वान बोलै, “आंटी, दुसरे बेडरूम में सो जाओ जहाँ मैं-सूरज सोते है. मैंने वहां गड्ढा बिछा रखा है.”

माँ अकेला महसूस कर रही थी. रिज़वान समझ गया, “आंटी, मैं भी वहीँ फ्लोर पे सो जाऊंगा, पास रहूँगा ज़रुरत पड़े तो.” माँ ने हां कहा. रूम में बड़ा गड्ढा माँ के लिए, रिज़वान का छोटा गद्दा दूर के पास माँ के गड्डे से दूर बिछा दिया. माँ लेटी, साड़ी ठीक की, आँखें बंद. रिज़वान लेट गया, मोबाइल देखता रहा.

थोड़ी देर बाद रिजवान को माँ की सिसकियाँ सुनाई दी. वो छुप के रो रही थी. रिज़वान उठा, पास बैठा, “आंटी, क्या हुआ? फिर रो रही हो?”

माँ: “बीटा, डर लग रहा… इतनी बीमारी कैसे हो गयी तेरे अंकल को, उन्हें कुछ हो गया तो हमारा कैसे होगा, मैं क्या करूँ?”

रिज़वान ने कन्धा सेहलय, “मैं हूँ न. पास आ जाओ.”

बातों में माँ उठ बैठी, रो पड़ी. रिज़वान गले लगा लिया, पीठ सहलाई.

माँ ने सर उसके कंधे पे रखा, अब वो दोनों एक-दुसरे को बैठे-बैठे हुग करने लगे. कुछ टाइम बाद वो दोनों हुग करते-करते गढ्डे पे लेट गए. माँ का सर रिज़वान के कंधे पे था, माँ का हाथ उसके चेस्ट पेट् था. माँ की आँखें बंद थी, साँसें नार्मल.

रिज़वान एक हाथ से माँ की बालों में था और दुसरे हाथ से वो माँ को हुग करते-करते माँ की नंगी पीठ सहला रहा था. बीच-बीच में वो माँ के शोल्डर से पेट तक हाथ ले जा रहा था. माँ को उसका टच अच्छा लगने लगा था, उसकी उँगलियों का नरम स्पर्श माँ को उसकी तरफ खींच रहा था.

माँ उसे और टाइट हग कर रही थी. वो रिज़वान की चेस्ट की गर्माहट महसूस कर रही थी. रिज़वान ने फ़ोरेहेअद के ऊपर माँ की भरी हुई मांग पे किश किया. माँ की साँसें अब तेज़ हो रही थी. रिज़वान बार-बार माँ के सर पे चूम रहा था. माँ ने अपना चेहरा ऊपर किया और रिज़वान ने माँ के लिप्स पे हल्का चुम्बन दिया, और वेट करने लगा माँ के रिएक्शन का.

रूम में लाइट बंद था. अँधेरा था, पर वो दोनों इतने करीब और चिपके हुए थे की एक-दुसरे का हर इशारा वो दोनों महसूस कर रहे थे और समझ रहे थे. छोटे से चुम्बन के बाद माँ ने अपना चेहरा और ऊपर किया जैसे वो चाहती थी कि रिजवान आगे बढे.

रिज़वान ने अब अपने होंठ माँ के होंठो पे रख दिए और उसका नीचे का लिप्स सुक करने लगा. माँ ने अपने होंठ उसे सौंप दिए थे. वो दोनों अब सब भूल के पागलों की तरह किश कर रहे थे. माँ ने आँखें और तिघ्टलय बंद कर ली थी. उनको ठीक से किस करना नहीं आता था. वो तो बस रिज़वान को बॉस समझ के जैसे वो करता उसे सपोर्ट करने लगी थी.

रिज़वान वाइल्ड किस्सेस की बारिश माँ पे बरसा रहा था. अब माँ सीधा लेती थी और रिज़वान आधा माँ के ऊपर ाके माँ को किस करने लगा था. वो माँ के चेहरे पे, गार्डन पे किस करने लगा था. माँ के कान निबल काट रहा था. माँ की सिसकियाँ अब हैवी हो चुकी थी. वो मदहोश हो चुकी थी.

एक तरफ रिज़वान माँ को चूम रहा था और दूसरी तरफ उसका हाथ माँ के पेट और कमर को सहला रहा था. माँ की साड़ी का पल्लू रिज़वान ने हटा दिया और अब वो माँ की गर्दन से नीचे बूब्स की तरफ किस करने लगा था. नीचे आते-आते रिज़वान ने माँ के बूब्स को ब्लाउज के ऊपर से ही काटा.

माँ एक-दम से उछल पड़ी, जैसे किसी ने पहली बार उसका बूब चबाय हो. रिज़वान धीरे-धीरे माँ के पेट पे नाभि तक पहुँच गया था.

दोस्तों मैं आप को यहाँ बीच में रोकते हो. माँ के बारे में अब तक नहीं बताया था, क्यूंकि वो मेरे लिए देवी थी. आगे ४४, ५५ कग, गोरी-चिट्टी, भरी कर्वी बॉडी, फ्रेश कलर टोंड. स्मूथ ग्लोइंग स्किन, ३४क टाइट बूब्स. खेतों में हार्ड वर्क करने से वो एक-दम फिट थी. उसकी स्किन एक-दम टाइट, सिर्फ थोड़ा धूप की वजह से स्किन तन हुआ था, और टेशन के वजह से उसका मूड ऑफ रहता था.

रिज़वान मुझे कई बार कहता था, “भाई तेरी माँ ‘उनुसेड ब्यूटी’ है, एक-दम वर्जिन लड़की जैसी. तेरे पापा ने उसे ठीक से उसे नहीं किया कभी.”और रिज़वान २७ का था, हैवी बॉडी थोडा सांवला, गयम-बिल्ट, शेर जैसा शाइनिंग, स्मार्ट हैंडसम, मसल्स ऐसे की हर औरत पागल करे.

अब स्टोरी पे आता ह.

अब माँ का अपने आप पे कोई कंट्रोल नहीं था. रिज़वान ने एक पैर माँ के पैरों पे डाल दिया और माँ की साड़ी जाँघों तक कर ली. हाथों से माँ के बूब्स ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा. बीच-बीच में वो माँ के बूब्स ब्लाउज के ऊपर से ही चूसता था. उसने माँ का ब्लाउज गीला कर दिया था.

वो गीला-पण माँ के बूब्स के निप्पल्स को महसूस हो रहा था. माँ पागल हो गयी थी और वाइल्ड मोअन्स कर रही थी. माँ से रहा नहीं गया और उसने करवट बदली. रिज़वान ने माँ को पीछे से पकड़ लिया और पूरा चिपक गया. अब माँ की ओपन बैक पे रिज़वान टूट पड़ा और छूने लगा.

रिज़वान ने माँ को पीछे से हुग करके रखा था. पीठ पे किस्स करते-करते रिज़वान ने माँ के ब्लाउज के हुक्स खोले, और जब तक माँ कुछ महसूस कर पाती, या सोच पाती, उसने माँ की ओल्ड पैटर्न की लूसे ब्रा को बिना हुक खोल ऊपर कर लिया. फिर माँ के बूब्स नंगे कर दिए.

उसने झटके से माँ को सीधा किया और माँ के नंगे बोओब्स पे टूट पड़ा. उसके लाइट ब्राउन निप्पल्स रिज़वान पिंच-सूचक-बाईट कर रहा था. बूब्स को उसने चूस-चूस के पूरा गीला कर दिया था. माँ अब होश खो चुकी थी. उससे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. उसे चिल्लाने का मनन कर रहा था, जैसे कोई पहली रात को चिल्लती हो.

वो हैवी मोअन कर रही थी, जब-जब रिज़वान उसके निप्पल्स को काटा. माँ अपने हाथ से खुद का मुंह दबा लेती ताकि उसकी आवाज़ बाहर न जाए.

माँ की साड़ी उसकी जाँघों तक आ चुकी थी. रिज़वान रुका, उसने क्विकली माँ की पंतय को खींचा उतारने के लिए. माँ ने भी कमर उठा के उसका साथ दिया, साथ में ही रिज़वान ने एक साथ अपनी नाईट पैंट और अंडरवियर उतार दी. उसका जानवर जैसा मैसिव थ्रोब्बिंग लुंड एक-दम टाइट हो चूका था.

रिज़वान ने माँ का एक हाथ पकड़ के उसकी करवट बदली और उसकी ब्रा निकाल के माँ के बूब्स को आज़ाद कर दिया. फिर वो भी लेत के माँ के नंगे बदन पे चिपक गया और अपना नंगा जानवर जैसा लुंड माँ की नंगी गांड पे घिसने लगा.

एक हाथ से वो माँ की चूत में ऊँगली करने लगा था. माँ की कर्ली बाल वाली जूसी चुत तैसे कर रहा था. क्लीट रब कर रहा था. माँ पूरी भीग गयी थी, वो एक्ससिटेमेंट में अपनी गांड उछाल रही थी. रिज़वान का प्रे-छुम माँ की नंगी नाराम गांड पे चिपक रहा था.

अब रिज़वान ने माँ को सीधा किया और उसके टांगों की बीच में आ गया. माँ ने भी रिज़वान के लिए अपने टांगें फैला दी. वो माँ के लिप्स पे किश कर रहा था. फिर गर्दन से गुज़रते वो माँ के बूब्स चूसने लगा. उसका फनफनाता लुंड माँ की चूत के दरवाज़े पे टकरा रहा था.

जैसे उसका लंड माँ की चूत पे लगता, माँ सहम जाती. रिज़वान ने अपने हाथ में लुंड पकड़ा और माँ के ग-स्पॉट पे घिसने लगा. माँ तड़प उठी. रिज़वान ने एक ज़ोरदार थप्पड़ माँ के बूब्स पे मारा और लुंड माँ की चूत के दरवाज़े पे टिका दिया. माँ एक-दम सहम गयी और जैसे-जैसे रिज़वान उसपे अपना बॉडी का प्रेशर बढ़ने लगा, वो ऊपर-ऊपर सरकने लगी.

अब रिज़वान ने अपना पूरा वेट माँ के ऊपर डाल दिया, और उसे लॉक कर दिया ताकि वो ऊपर न सरक सके. वो माँ को नैक पे, बूब्स पे किस्स करते-करते अपना तगड़ा लुंड माँ की चूत में डालने लगा था.

अब रिज़वान रेडी था माँ की गहराई नापने के लिए. उसने माँ के जाँघें पकड़ ली. रिज़वान के लुंड की बड़ी टोपी माँ की गीली चुत में घुसी. माँ ने साँसें रोक ली. १० साल बाद लंड उसकी चूत में जा रहा था.

माँ ने आँखें एक-दम तिघ्टलय बंद की थी. उसने एक हाथ मुँह में दबा के रखा था, और एक हाथ से वो रिज़वान के बालों को नोच रही थी. रिज़वान धीरे-धीरे अन्दर-बाहर कर रहा था. माँ ने टाँगें और फैलाई. उससे दर्द सहा नहीं जा रहा था. पर वो ये दर्द महसूस करना चाहती थी. उसे वो चुदाई का सुख चाहिए था.

रिज़वान ने अपनी स्पीड बढ़ाई. वो ज़ोर का झटका देने लगा था. उसका पूरा नंगा बदन माँ के नंगे बदन पे चिपका था. उनका मिलान हो चूका था. उसने अपना जानवर जैसा तगड़ा लुंड माँ की चूत में पूरा धकेल दिया था. माँ की चीख निकल गयी. उससे कण्ट्रोल नहीं हुआ, तो रिज़वान ने अपना मुँह माँ के मुँह पे चिपका दिया ताकि वो ज़ोर से चिल्ला न सके, और उसकी आवाज़ बाहर तक ना जाये.

अब ज़ोर-ज़ोर झटके, चपक-चपक की आवाज़ रूम में गूँज रही थी. माँ के आंसू निकल रहे थे, पर अब ये आंसू दुःख के नहीं बल्कि सुख के थे, संतुष्टि के थे. रिज़वान अब अन्दर-बाहर के झटके लगा रहा था. माँ को किश कर रहा था. माँ का चिल्लाना अब कम हुआ था. उसकी चीख अब सिसकियों में बदल गयी थी. रिज़वान उसे छोड़ रहा था, बूब्स दबा रहा था. माँ उसके नंगे बदन पे हाथ फेर रही थी.

रिज़वान का पानी आने वाला था, तो उसने अपने आप को रोका. फिर लुंड माँ की चूत से बाहर निकाला और अपने लंड पे उसने २-३ थप्पड़ मारे. वो इतनी जल्दी पानी नहीं छोड़ना चाहता था. माँ आलरेडी पानी छोड़ चुकी थी. रिज़वान ने अब माँ की साड़ी खींची और उसे पूरा नंगा कर दिया. और फिर से माँ की टाँगों के बीच में गया.

माँ बहुत गीली हो चुकी थी. वो २ बार झाड़ चुकी थी. उसने फिर से माँ को छोड़ना शुरू किया. माँ ने अब अपने पैर रिज़वान की कमर पे लपेट लिए. रिज़वान झटके मार रहा था. अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था. थोड़ी देर में उसका पानी गिरने वाला था.

तभी माँ भी पानी छोड़ने वाली थी. उसने अपने पेअर और टाइट करके रिज़वान को और टाइट पकड़ लिया. रिज़वान उसके पैरों से निकल के पानी बाहर छोड़ने का सोच रहा था, पर माँ ने उसे नहीं छोड़ा. तो रिज़वान ने अपना गरम पानी माँ की चूत में छोड़ दिया. माँ ने भी अपना पानी छोड़ दिया.

दोनों एक साथ झड़ गए थे. दोनों के पानी का संगम हुआ था. एक-दम ढीले पड़ गए थे दोनों. रिज़वान माँ के ऊपर लेट गया. माँ उसे सहला रही थी. धीरे से रिजवान ने अपना लंड माँ की चूत से बाहर निकाला, तो माँ की चूत से पानी बाहर टपकने लगा. रिज़वान माँ की साइड में आके लेट गया. माँ ने उसके कन्धे पे सर रख दिया और दोनों सो गए.

सुबह रिज़वान उठा, तब माँ किचन में कुछ काम कर रही थी.

माँ: “रिज़वान बीटा, उठ गए? चाय-नाश्ता रेडी है. फ्रेश हो जाओ, और नाश्ता कर लो, हॉस्पिटल भी जाना है.”

जैसे रात में कुछ हुआ ही न हो. आज का दिन कुछ अलग लग रहा था. वो दुखी नहीं थी. उसके चेहरे पे नयी चमक थी, जैसे उसे बरसो बाद कोई अपना मिला हो. रवि और मोहित भी साथ में नाश्ता कर रहे थे.

अगली स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में.

अगला भाग पढ़े:- माँ और दोस्त-५

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