प्रेग्नेंट होने के लिए बेटी चुदी बाप से

पिछला भाग पढ़े:- पति से बेटी छुडवाई-१

दोस्तों, मैं सुषमा अपनी बेटी की चुदाई कहानी का नेक्स्ट पार्ट लेके आपके सामने हाज़िर हु. उम्मीद है स्टोरी का फर्स्ट पार्ट आपका लंड खड़ा करने में सफल रहा होगा. अगर किसी ने फर्स्ट पार्ट अभी तक नहीं पढ़ा है, तो पहले उसको ज़रूर पढ़े.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा कि मेरी बेटी हमारे घर आयी हुई थी. लेकिन वो मुझे पहले की तरह खुश नहीं लग रही थी. पूछने पर पता चला कि उसको उसके ससुराल में ताने पड़ रहे थे, क्यूंकि वो अभी तक प्रेग्नेंट नहीं हुई थी. फिर मैंने उसको उसके बाप से छोड़ने को कहा. पहले वो नहीं मानी, लेकिन बाद में प्लान सुनने के लिए रेडी हो गयी. अब आगे-

पिंकी: चलो मान ली आपकी बात. लेकिन पापा मुझे छोडेंगे क्यों? और वो भी धोखे से छुड़वाना है.

मैं: देख तेरे पापा बहुत दारु पीते थे, जिस वजह से उसकी तबियत खराब होने लगी. फिर डॉक्टर ने उनको शराब कम करने को कहा. लेकिन वो नहीं कर पाए. इसको लेके हमारे बीच बहुत लड़ाई हुई. फिर आखिरकार हमने हफ्ते में एक दिन डीडे किया, जिस दिन वो जितनी चाहे पी सकते है.

पिंकी: लेकिन इससे मेरी चुदाई का क्या लेना-देना.

मैं: सुन तो ले. जो दिन हमने डीडे किया, वो है बुधवार. इस दिन शराब पीने के बाद वो पूरी तरह से टुन्न हो जाते है, और चुड़ै भी ज़रूर करते है. चुदाई के दौरान उनकी आंखें बंद होती है. उनको कुछ नहीं पता होता. बस जानवरो की तरह छोड़ते रहते है. तो उसी वक़्त तुझे उनसे छोड़ना होगा.

पिंकी: बुधवार तो कल है.

मैं: हां, तो कल तू अपने बाप से छुड़ेगी.

पिंकी: मम्मी, प्लान तो अच्छा है. लेकिन ये काम करेगा न?

मैं: बिलकुल करेगा. तू बस अपने बाप पे भरोसा रखा.

फिर हम अगले दिन का इंतज़ार करने लगे. शाम हुई, और मेरे पति घर पर आये. हमने डिनर किया, और उसके बाद वो ड्रिंक लेके बैठ गए. पिंकी और मैं उनको देख रहे थे. वो एक के बाद एक पेग बनते गए और पीटे गए. और जैसा की हमेशा होता था, वो पूरी तरह टुन्न हो गए.

फिर जब वो रूम में जाने के लिए उठे, तो लड़खड़ाने लगे. मैंने उनको संभाला और रूम तक लेके गयी. रूम में जब मैंने उनको बेड पर लिटाया, तो वो बोले-

पति: आ जाओ तुम भी मेरी जान. आज छोड़ने का बड़ा मन्न है.

पहले मैं उनको अक्सर मन करती थी. लेकिन उस दिन मैंने कहा-

मैं: मैं बस आई. थोड़ा काम रह गया है.

फिर मैं रूम से बाहर आयी. पिंकी बाहर मेरा इंतज़ार कर रही थी. मैंने पिंक कलर का नाईट सूट पहना था. बाहर आते ही मैंने वो उतारना शुरू कर दिया. मुझे कपडे उतारते देख पिंकी बोली-

पिंकी: मम्मी, ये आप क्या कर रही हो? कपडे क्यूँ उतार रही हो?

मैं: तू भी अपने कपड़े उतार.

पिंकी: लेकिन क्यों.

मैं: बस उतार.

पिंकी भी अपने कपड़े उतारने लगी. अब हम दोनों सिर्फ ब्रा-पंतय में एक-दुसरे के सामने थी. फिर मैंने उसको कहा-

मैं: ले मेरा नाईट सूट पहन ले.

पिंकी: क्यूँ मम्मी?

मैं: क्यूंकि तेरे बाप ने शराब पी है. वो अँधा नहीं हुआ है. मेरे कपडे देखे है उसने. शामे कपडे पहन कर जायेगी तो रिस्क कम होगा.

पिंकी: वह मम्मी! कमाल हो आप तो.

फिर पिंकी ने मेरे कपड़े पहने, और रूम में चली गयी. मैं दरवाज़े पर खड़ी सब देख रही थी. पिंकी अन्दर गयी और मेरे पति के पास जाके लेट गयी. जब पति को महसूस हुआ कि मैं उनके पास आ चुकी थी, जो की असल में मैं नहीं पिन्की थी, तो उन्होंने उसको बाहों में भर लिया.

अब वो उसके गालों को चूमने लगे, और उसके बूब्स दबाने लगे. पिंकी की सांसें तेज़ होने लगी. धीरे-धीरे उन्होंने पिंकी के कपड़े उतारने शुरू किए. पहले कमीज, फिर पजामा उतरा. अब पिंकी ब्रा और पेंटी में थी.

फिर वो उसकी गर्दन पर किश करने लगे, और फिर क्लीवेज चाटने लगे. पिंकी की सांसें तेज़ होने लगी. उसके बाद पति ने पिंकी की ब्रा निकाल दी, और बूब्स पर टूट पड़े. उन्होंने दोनों बोओब्स अपने बड़े हाथों में लिए और उनको चूसने लगे. पिंकी अहह अहह करने लगी.

उसके बाद वो नीचे गए, और उसकी पैंटी उतार कर चुत पर मुह लगा दिया. पिंकी की चुत बिल्कुल क्लीन शेव थी. जैसे ही उन्होंने पिंकी की छूट पर मुह लगाया, पिंकी तड़प उठी. उसने चादर को अपनी मुट्ठी में भर लिया. कुछ देर मेरे पति ऐसे ही अपनी बेटी की चूत चूसते रहे.

फिर वो पूरे नंगे हुए, और पिंकी को लंड चूसने का बोल कर सीधे लेट गए. पिंकी अपने बाप के ऊपर गयी, और उसका लंड चूसने लगी. वो उसके मुँह को लुंड पर दबाने लगे, जिससे पिंकी को सांस लेने में मुश्किल हो रही थी.

कुछ देर अचे से पिंकी के बाप ने उसे लुंड चुसवाया. फिर उसको सीढ़ी लिटा कर उसकी टांगों के बीच आये, और एक ही झटके में अपना लुंड पूरा उसकी चूत में पेल दिया. पिंकी की जोर की चीख निकली, लेकिन उसने अपना मुँह बंद कर लिया.

मैं समझ रही थी, की जब उसके सांड़ जैसे बाप का लंड उसकी चूत में गया होगा, तो उसको कितना दर्द हुआ होगा. लेकिन वो चीख कर रिस्क बाधा नहीं सकती थी.

पिंकी का मुँह लाल हो गया था, और उसका बाप उसकी चूत चुदाई करे जा रहा था. कुछ देर में पिंकी नार्मल हो गयी, और उसके चेहरे पर अब मज़े के भाव आने लगे. उसने टाँगें अपने बाप की कमर पर लपेट ली. उसका बाप ऐसे ही उसकी चूत पेलता रहा.

कुछ देर बाद मेरे पति थक कर लेट गए. ऐसे मौके पर मैं तो सोचती हु की शुकर है वो थक गए. लेकिन पिंकी को तो उनका स्पर्म चाहिए था. फिर पिंकी उनके ऊपर गयी, और उनके लुंड को अपनी चूत में लेके उस पर उछलने लगी.

मेरे पति भी अपनी बेटी के चूतडों पर हाथ रख कर उसको लुंड पर उछलने लगे. कुछ देर पिंकी ऐसे ही उछलती रही. पूरे रूम में छप-चाप की आवाज़ें रही थी. इसका मतलब ये था की वो झाड़ चुकी थी. कुछ और देर में मेरे पति अहह अहह करने लगे.

पिंकी भी अहह अहह करने लगी. मैं समझ गयी कि उनका माल उनकी बेटी की चूत में जा रहा था. फिर पिंकी उन पर गिर गयी. अब चुड़ै कार्यक्रम खत्म हो चूका था. पिंकी ने लुंड अंदर ही लिए रखा, ताकि स्पर्म बाहर न आये. फिर लुंड से उतर कर टाँगें थोड़ी देर हवा में उठाये राखी.

उस रात के ५ दिन बाद खुशखबरी आ गयी. तो हमारा मिशन पूरा हुआ.

फीडबैक गुलाटी.ग़लती५५५@जीमेल.कॉम पर दे.

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