कॉलेज वॉचमन ने वर्जिन लड़की को चूसा

दोस्तों, मैं रेखा अपनी चुदाई कहानी का नेक्स्ट पार्ट लेके आयी हु. पिछले पार्ट का बहुत अच्छा फीडबैक दिया आपने. उसके लिए आप सब रीडर्स का धन्यवाद्. जिन लोगों ने पिछले पार्ट नहीं पढ़ा है, वो उसको ज़रूर पढ़े.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा, की कैसे बीमारी की वजह से मैं एक्साम्स की तयारी नहीं कर पाई. फिर मेरी फ्रेंड के कहने पर मैंने कॉपी करने का डिसिशन लिया. पहले २ एक्साम्स तो ठीक हो गए, लेकिन तीसरे पर मैं पकड़ी गयी. पकड़े जाने पर वॉचमन ने मुझसे सेक्स करने की बात की. अब आगे-

वॉचमन की बात बिलकुल सीधी और स्पष्ट थी. अगर तो मैं उसकी बात पर हां बोल देती, तो वो मुझे छोड़ देता. अगर ना बोलती, तो मुझे ऑफिस लेके जाता.

मैं बड़ी दुविधा में थी. या तो मैं उसे अपनी कुवारी चूत चुदवाती, या फिर अपने कर्रिएर से जाती. मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या करूँ. टाइम निकल रहा था, और मैं सोचती जा रही थी. फिर मैंने सोचा जो होगा देखा जायेगा. अगर कर्रिएर बन गया तो बाकी सब बातें मायने नहीं रखती. इसलिए मैंने उसको कहा-

मैं: ठीक है, आप कर लो जो करना है. लेकिन एग्जाम के बाद कर लेना. अभी टाइम निकल रहा है.

वॉचमन: क्या मेरी शकल पर चुटिया लिखा है?

मैं: मतलब?

वॉचमन: मतलब एक बार तूने एग्जाम दे दिया, तब तू मुकर जायेगी. जो होगा, अभी होगा, इसी वक़्त होगा.

मैं: लेकिन इसमें टाइम वास्ते होगा. मेरा पेपर रह जायेगा.

वॉचमन: मुझे सिर्फ आधा घंटा चाहिए.

मैं: आधे घंटे तो बहुत ज़्यादा है. अगर मैं एग्जाम पेपर का न भी सोचु, तो टीचर को क्या बोलूँगी, की इतनी देर कैसे लग गयी बाथरूम में?

वॉचमन: उसके लिए मैं हु. मैंने जो बोलना है बोल दूंगा.

फिर वॉचमन मेरा हाथ पकड़ कर मुझे ले जाने लगा. कॉलेज की एक साइड पर एक छोटा सा कमरा है, जहाँ वो और उसकी बीवी रहते है. वो मुझे वहां ले गया. अंदर डबल बेड लगा हुआ था. मुझे बीएड के पास ले जाके वो बोला-

वॉचमन: चल जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार और नंगी होजा.

उसकी बात सुन कर मैं उसको देखने लगी. फिर वो बोला-

वॉचमन: क्या हुआ? जल्दी कर ना. जितना तू टाइम लगाएगी, उतना ही एग्जाम के लिए लेट होगा तुझे.

उसकी बात सुन कर मैं हड़बड़ा गयी, और जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगी. वो मुझे देखे जा रहा था. पहले मैंने अपनी जीन्स निकली. नीचे मैंने ब्राउन पंतय पहनी थी, जिसमे मेरी गांड बहुत सेक्सी लग रही थी. फिर मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी, जिसके नीचे वाइट ब्रा थी. वॉचमन ऊपर से नीचे मुझे देख के बोला-

वॉचमन: तू तो बहुत सेक्सी है. तुझे छोड़ने में बहुत मज़ा आएगा.

वो मेरे करीब आया, और मुझे अपनी बाहों में भर लिया. फिर उसने अपने होंठो को मेरे होंठो पर चिपका दिया और मेरे होंठ चूसने लगा. उसके मुंह से बदबू आ रही थी, जो मुझे बर्दाश्त करनी पड़ रही थी. मैं कोई रिस्पांस नहीं दे रही थी.

वो लगातार मेरे होंठो को मुह में लेके चूसंता रहा. मैं अपना मुँह नहीं खोल रही थी. तभी उसने अपना एक हाथ ब्रा के ऊपर से मेरे चुचे पर रखा, और उसको ज़ोर से दबाया. इससे मेरी चीख निकली, और मुँह खुल गया.

जैसे ही मेरा मुंह खुला, उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसा दी, और मेरी जीभ चूसने लगा. कुछ देर उसने मेरे होंठो को पूरा मजा लेके चूसा. इतनी देर में मुझे भी कुछ-कुछ होने लगा था और मेरी चूत गीली होने लगी थी.

फिर उसने मेरे लिप्स छोड़े, और मेरी गर्दन पर किस करते हुए मेरे बूब्स दबाने लगा. मेरी सांसें तेज़ हो चुकी थी. फिर वो पीछे गया, और मेरी पीठ चाटने लगा. साथ ही उसने ब्रा का हुक खोल कर उसको निकाल दिया.

मेरे बूब्स आज़ाद करके वो वापस सामने आया, और दोनों बूब्स को हाथ में लेके दबा दिया. मेरी आह निकल गयी. फिर वो एक-एक करके मेरे बूब्स को दबा-दबा कर चूसने लगा.

वो कभी निप्पल के चारों तरफ जीभ घुमता, कभी उसको मुह में लेके चूसता, तो कभी दांतों में लेके काटने लगता. मेरी सांसें बहुत तेज़ हो गयी थी. मेरे मुँह से अहह अहह की सिसकियां निकल रही थी. अब वो जो भी कर रहा था, वो मुझे उत्तेजित कर रहा था.

बूब्स को अचे से चूसने के बाद वो नीचे बैठ गया. अब उसका फेस मेरी पंतय वाली जगह के सामने था. उसने पहले मेरी चूत पर पंतय के ऊपर से हाथ रखा. फिर उसने चुत को सहलाना शुरू किया. इससे मेरे मुँह से अहह अहह की कामुक सिसकियाँ निकलने लगी. आज पहली बार किसी मर्द ने मेरे प्राइवेट पार्ट को छुआ.

मुझे एक वॉचमन का अपनी चूत को टच करना घिनौना लग रहा था, लेकिन मज़ा भी आ रहा था. वो अपनी उँगलियों से मेरी चूत के दाने को दबा रहा था, जिससे मुझे और मज़ा आना शुरू हो गया.

फिर उसने दोनों तरफ से मेरी पंतय के इलास्टिक में हाथ डाला, और उसको नीचे खींच कर उतार दिया. अब मैं उसके सामने पूरी नंगी थी. मेरी चूत पर थोड़े बाल थे, क्यूंकि मैंने शेव नहीं की थी. चुत देख कर वो बोला-

वॉचमन: शेव नहीं करती क्या तुम?

मैं कुछ नहीं बोली. फिर वो मेरी चूत पर हाथ लगा कर देखने लगा. उसने अपनी उँगलियों से छूट की फांके खोली और बोला-

वॉचमन: तू तो कुवारी है अभी.

मैं: तुम्हे क्या लगा, मैं जगह-जगह मुंह मारती हो (मैंने गुस्से में कहा).

वॉचमन हस्सा और बोलै: आज तो मजा आएगा.

फिर उसने अपने दोनों हाथ दोनों साइड्स से मेरे चूतडों पर रखे, और मुझे अपनी और खींचते हुए अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया. मैं हैरान हो गयी, जब उसने ऐसा किया.

अब वॉचमन मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा, उसको चूमने लगा. मैं तो जैसे पागल सी हो गयी. मेरे पूरे बदन में उसके ऐसा करने से करंट सा दौड़ने लगा. वो मेरी चूत को अपने मुँह में खींच-खींच कर चूस रहा था. छूट के छेद के अंदर जीभ डालने की कोशिश कर रहा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

इसके आगे क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. यहाँ तक की कहानी कैसी लगी, गुलाटी.ग़लती५५५@जीमेल.कॉम पर बताये.

अगला भाग पढ़े:- कॉलेज वॉचमन ने की पहली चुदाई-३

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