मा ने की बेटे के लंड की बात

जैसे की मैंने सेक्स स्टोरी के लास्ट पार्ट में बताया, माँ नहा कर आयी और मेरी बाइक कीय ढूंढते हुए झुक गयी. फिर मैं पीछे से माँ की पूरी नुदे गांड और चूत देख के उस दिन मूठ मारा था.

फिर अगले दिन माँ नार्मल ही मेरे साथ बात करी, जैसे वो सुभा वाला स्केन कुछ हुआ ही न हो. तो अब मुझे थोड़ा सा हिम्मत हुआ. सोचा थोड़ा आगे बढ़ो. फिर मैं प्लान किया कुछ करने का. लेकिन ऐसा कोई खास प्लान नहीं मिला. तो मैंने सोचा धीरे-धीरे माँ के करीब होक टच वगैरा करना स्टार्ट कर दू. लेकिन पहले से ऐसा कुछ नहीं था हमारे बीच, इसलिए वो करने की भी हिम्मत नहीं हो रही थी.

दो दिन बाद सोचा माँ को पूरा नंगा लुंड दिखाऊ खड़ा करके. इससे पहले बहुत बार पंत के अंदर से ही खड़ा देखि थी. इसलिए उस दिन रात में हिम्मत करके पंत पूरा उतार दिया और सो गया. सुबह जब मां जागी, मैं उससे पहले उस दिन जाग गया था.

जब लगा माँ जाग गयी थी, तब लुंड को पूरा खड़ा करके, थोड़ा थूक लगा के गीला कर दिया. फिर कंबल को थोड़ा साइड कर दिया. माँ कुछ १० मिनट बाद मेरे रूम की तरफ आई. मैं आँखें बंद कर दिया और सोने का नाटक किया. इसलिए कुछ देख नहीं पाया. लेकिन माँ कुछ सेकण्ड्स मेरे पास खड़ी रही, फिर बाहर चली गयी.

फिर भी मैं कुछ टाइम ऐसे ही लेटा रहा. माँ फिर से रूम पे आई और मेरे ऊपर कम्बल से कवर करके चली गयी. मैं और एक घंटे सोया. फिर उठ के बाथरूम गया और माँ के सामने नार्मल ही गया जैसे मुझे कुछ पता न हो. माँ भी तभी कुछ नहीं बोली, लेकिन उस दिन दोपहर को बोली-

माँ: इतना बड़ा हो गया है, ठीक से सोया कर.

मैं अनजान बन के: क्या हुआ?

माँ: कपडे उतार के क्यूँ सोया था कल?

मैं चुप रह गया और माँ भी कुछ नहीं बोली. फिर मैं बाहर चला गया. मैं माँ को नोटिस किया, लेकिन इसमें भी माँ को कोई फरक नहीं पड़ा. तो मैं सोच लिया अब धीरे-धीरे टच और हुग ऐसे कुछ करना स्टार्ट करो.

फिर उसी दिन शाम को जब माँ खाना बना रही थी किचन में, तब मैं भी किचन में माँ की हेल्प करने के लिए पुछा.

तो माँ बोली: क्या हो गया तुझे आज?

मैं बोला: बस ऐसे ही पूछ रहा हू.

फिर माँ बोली: नहीं कोई काम नहीं है.

उसके बाद मैं ऐसे ही बातें करने लगा, और जब माँ खड़ी होके बातें करने लगी, तब मैं हिम्मत करके पीछे से हुग कर दिया. तभी माँ थोड़ी चौंक गयी और क्या कर रहा है बोल के अलग कर दी. मैं बोला बस ऐसे ही, और मुझे थोड़ा सा डर लगा तो वहां से चला गया.

लेकिन बाद में माँ भी नार्मल ही बात की तो मुझे अच्छा लगा. पर इसमें भी काम नहीं हुआ. माँ हुग करने ही नहीं दी, इसलिए और कुछ तरय नहीं किया. फिर कुछ दिन बीत गए. एक दिन मैं दोपहर को मेरे रूम में गेम खेल रहा था. जब मैं पानी पीने किचन की तरफ जा रहा था, तो माँ के रूम का डोर खुला था, और माँ को मैं देखते ही रह गया.

माँ की नुदे गांड दूर के तरफ थी. वो दूसरी तरफ फेस करके सो रही थी, और आगे से टेबल फैन की वजह से निघ्त्य उठ गयी थी कमर तक. उन्होंने पंतय भी नहीं पहनी थी. ये देखते ही मैं रूम के अंदर गया. पहले मैं एक-दो फोटो लिया. फिर धीरे से वहाँ बेड पे बैठ गया, और देख कर लंड को सहलाने लगा. मैंने एक हाथ को माँ के एक चुत्तड़ पे रखा और हल्का-हल्का सहलाया. बहुत मुलायम था.

फिर एक हाथ पंत के अंदर करके लुंड को भी सहला रहा था. तभी माँ हिलने लगी, तो मैं बेड से उठ के खड़ा हो गया और माँ भी जाग गयी. मैं धीरे रूम से बाहर चला गया, तब माँ भी मुझे देख ली. मैं जल्दी से घर से बाहर चला गया.

शाम को ८ बजे तक मैं बाहर ही रहा. फिर माँ कॉल करके खाने के लिए बुलाई तो घर आया. माँ नार्मल ही बात कर रही थी, जैसे उनको कुछ पता नहीं. ये देख मैं रिलैक्स हुआ और उस दिन रात को माँ की वो फोटो देख के मुठ मार.

अगले दिन में एक नई सिम लिया और उसमे व्हात्सप्प खोला. फिर माँ की व्हाट्सप्प नंबर पर मस्सगे किया तो माँ रिप्लाई नहीं दी. शाम को कुछ माँ-सोन इन्सेस्ट रिलेटेड फोटोज और ६ माँ-सोन पोर्न वीडियोस सेंड कर दी. फिर माँ को देखने लगा.

जब माँ मोबाइल हाथ में ली, तब फटाक से फिर रख दी. कुछ टाइम बाद हमारे खाना खाने के बाद वो उसके रूम में सोने चली गयी. तब मुझे लगा वो वीडियो भी देखि होगी. मुझे उस दिन ब्लॉक भी नहीं करी थी. जब अगले दिन मैं फिर कुछ वीडियोस सेंड किया, तब ब्लॉक कर दी.

इसमें भी कोई फ़ायदा नहीं हुआ. माँ में कोई चेंज भी नहीं हुआ. फिर कुछ दिन बाद माँ मुझे एक लड़की के बारे में बतायी हमारे नाना के गाओं की. मेरी उस लड़की के साथ शादी की बारे में.

तो मैं बोला: इतनी जल्दी क्या है? मैं अभी शादी नहीं करूँगा.

माँ: क्यों, उम्र तो हो गयी है, और तेरी हरकतें भी बढ़ गयी है.

मैं: लेकिन मुझे अभी शादी नहीं करनी.

माँ: क्यों, और कोई है क्या गर्लफ्रेंड?

मैं: नहीं.

माँ: सच-सच बता.

मैं: सच में कोई नहीं है. आप तो देख रही हो दिन भर घर पर ही रहता हु.

माँ: ाचा, इतना बड़ा हो गया. एक भी नहीं पट्टी तेरे से.

माँ मेरे साथ पहली बार ऐसी बात कर रही थी खुल के, तो मुझे भी हिम्मत हो रही थी.

मैं: हां थी एक, अब नहीं.

माँ: क्यों, क्या हुआ उसके साथ?

मैं: ऐसे ही अछि नहीं थी वो लड़की.

माँ: कोण थी?

मैं बता दिया लड़की के बारे में.

माँ: तो उसके साथ कुछ हुआ था कि नहीं सच-सच बता?

मैं: नहीं बस किश किया था.

माँ (हस कर बोली): तो क्या फ़ायदा इतना बड़ा हथियार लेके.

माँ के मुँह से ये सुनते ही मैं समझ गया. लेकिन शॉक हो गया क्यूंकि माँ इतनी खुल के मेरे से बात कर रही थी. फिर मैं थोड़ा सोचने लगा और फिर बोला-

मैं: मतलब?

माँ: कुछ नहीं कुछ नहीं (हसने लगी).

मैं: बताओ कौन सा हथियार?

माँ: अरे छोड़ ये बात, बस ऐसे ही बोल दी.

मैं: हां मैं समझ गया.

माँ हसने लगी चुप हो गयी. कुछ सेकण्ड्स मैं भी चुप रहा और ऐसे बातें सुन के मुझमे हिम्मत भी बढ़ गयी थी

मैं: बताओ न, कौन सा हथियार?

माँ: तू समझ गया न?

मैं: हां, लेकिन मैं सूरे नहीं हो, बताओ.

माँ: अच्छा तू क्या समझा?

मैं (मेरे लंड की तरफ इशारा करते हुए बोला): ये है न?

माँ की-ची करके हसने लगी.

मैं: यही है न?

माँ: चुप होजा हरामी.

मैं: सच में बड़ा है क्या?

माँ: ीे! क्या पूछ रहा मुझे.

मैं: तुम ही तो बतायी अभी.

माँ: हे भगवन, छोड़ इस बात को, ऐसे ही बोल दी मैं.

मैं: तुमने कब देखा?

माँ: नंगा जो सो रहा है.

मैं: सच में बड़ा है?

माँ: चुप कर. ठीक-ठाक है, मैं ऐसे ही बोल दी.

और माँ थोड़ी मुझसे नज़रें नहीं मिला पाए. वो मुंह नीचे करके धीरे-धीरे हस्स रही थी. फिर वो वहां से जाने लगी.

इसके आगे क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पता चलेगा.

अगला भाग पढ़े:- फेसबुक के द्वारा माँ के साथ सेक्स-४

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