एरॉटिक सेक्स स्टोरी अब आयेज-
रात का खाना खाने के बाद, सब अपने-अपने कमरों में चले गये. हीरल “गुडनाइट दीदी, गुडनाइट जीजू” बोल कर अपने कमरे में चली गयी. पर जाते-जाते उसने मुझे एक ऐसी तिरछी नज़र से देखा की मेरे बदन में फिर से करेंट दौड़ गया.
मैं और रानी अपने बेडरूम में आ गये. रानी ने दरवाज़ा बंद किया और लाइट दीं कर दी. वो अपनी निघट्य पहन कर मेरे बगल में लेट गयी. उसने बड़े प्यार से अपना हाथ मेरे सीने पर रखा और मेरे करीब खिसक आई.
रानी: “सुनिए… आज आप बड़े खामोश लग रहे है. थके हुए है क्या?”
उसने धीरे से मेरी गर्दन पर किस किया. पर सच कहूँ तो, मुझे रानी के छ्छूने से आज वो पहले जैसा कुछ महसूस नही हो रहा था. मेरा दिमाग़, मेरा दिल और मेरा जिस्म, सब कुछ अभी भी दोपहर वाली घटना में अटका हुआ था. मुझे हीरल की वो गरम साँसें, वो कसावट, और वो डॉगी स्टाइल में उसका चीखना याद आ रहा था.
रानी का स्पर्श मुझे अब ‘फीका’ लग रहा था. कहाँ वो हीरल की जवानी का जोश और कहाँ ये रोज़ की कहानी.
कुमार (मॅन में): “यार, मुझे रानी के साथ करने का बिल्कुल मॅन नही है. मुझे तो बस हीरल चाहिए.”
पर… मजबूरी थी. अगर मैं माना करता तो रानी को शक हो सकता था की मुझे अचानक क्या हो गया. इसलिए मैने भी झूठा नाटक शुरू किया.
मैने रानी को अपनी बाहों में भरा, पर जब मैने आँखें बंद की, तो अंधेरे में मुझे रानी नही, हीरल दिखाई दे रही थी.
रानी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने ‘पपीतों’ पर रखा. वो नरम थे, पर हीरल जीतने सख़्त और उभरे हुए नही थे. मैं रानी के जिस्म को सहला रहा था, पर मेरे दिमाग़ में हीरल की तस्वीर थी. मैं कल्पना कर रहा था की ये रानी नही, हीरल है जो मेरे नीचे लेती है.
रानी गरम हो रही थी, उसने मेरे ‘लंड’ को पाजामा के उपर से पकड़ा.
रानी: “आपका तो आज मूड बड़ा तेज़ लग रहा है, अभी तक खड़ा है?”
उसे क्या पता था की ये उसके लिए नही, बल्कि उसकी छ्होटी बेहन की यादों की वजह से खड़ा था.
मैं बस जल्दी से निपटना चाहता था. मैने रानी को किस किया, पर उस किस में वो ‘करेंट’ नही था जो सुबह हीरल के साथ शवर में था.
तभी, साइड टेबल पर रखे मेरे मोबाइल पर एक मेसेज नोटिफिकेशन की आवाज़ आई: टिंग!
रानी का ध्यान भटक गया.
रानी: “इतनी रात को किसका मेसेज आया?”
मेरा दिल ज़ोर से धड़का. मुझे लगा कहीं हीरल ना हो. मैने कहा, “कुछ नही, ऑफीस का ग्रूप मेसेज होगा. तुम छ्चोढो ना.”
पर मेरी नज़र स्क्रीन पर पड़ी. लॉक स्क्रीन पर नाम चमक रहा था “साली साहिबा” (मैने हीरल का नाम यही सवे किया था).
मेसेज था: “जीजू… नींद नही आ रही. मेरे होंठो पर अभी भी आपके ‘केले’ का स्वाद है. क्या करू?”
ये पढ़ते ही मेरा ‘लंड’ जो तोड़ा ढीला पद रहा था, वो एक-दूं लोहे जैसा सख़्त हो गया. रानी ने उस सख्ती को महसूस किया और खुश हो कर बोली, “ओह हू… मेसेज पढ़ते ही इतना जोश आ गया? चलो फिर देर क्यूँ करे?”
रानी मेरे उपर चढ़ने लगी, पर मेरी आँखें बार-बार दरवाज़े की तरफ और उस मोबाइल स्क्रीन की तरफ जेया रही थी. मैं रानी के साथ था, पर मेरी रूह साली के पास थी. बगल वाले कमरे में हीरल का कमरा था. मैने रानी को हल्के से रोका और खाँसने का नाटक किया.
कुमार: “खुक… खुक! रूको रानी, लगता है खाने में मिर्ची ज़्यादा थी. मेरा गला बुरी तरह सूख रहा है. मैं बस ठंडा पानी पी कर आता हू.”
रानी ने मूह बनाया और बिस्तर पर गिर गयी.
रानी: “उफफ़फो! सारा मूड खराब कर दिया. जाओ जल्दी आना, मैं इंतेज़ार कर रही हू.”
मैं जल्दी से बिस्तर से उठा. मैने अपना मोबाइल उठाया और कमरे से बाहर निकल आया. बाहर आते ही मैने चैन की साँस ली. मैने तुरंत हीरल को रिप्लाइ किया-
कुमार: “पानी पीने का बहाना बनाया है. मैं उपर च्चत (टेरेस) पर आ रहा हू. वहाँ मिलो.”
मैं दबे पावं सीडीयों से होता हुआ उपर च्चत की तरफ बढ़ा. हर आहत पर दिल धक-धक कर रहा था की कहीं कोई देख ना ले.
जैसे ही मैं च्चत पर पहुँचा, ठंडी हवा चल रही थी और चाँद की रोशनी में सब कुछ चमक रहा था. वहाँ रेलिंग के पास हीरल खड़ी थी.
उसने एक हल्की ट्रॅन्स्परेंट निघट्य पहन रखी थी, जो हवा में उडद रही थी. चाँदनी में उसका गोरा बदन और भी निखरा हुआ लग रहा था. मुझे देखते ही वो पलटी और उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कान थी. मैं तेज़ी से उसके पास गया और बिना कुछ बोले उसे अपनी बाहों में भर लिया.
कुमार: “तुमने तो मुझे पागल कर दिया है हीरल. नीचे रानी बिस्तर पर है, और मैं यहाँ तुम्हारे लिए भाग कर आया हू.”
हीरल ने मेरी गर्दन में अपनी बाहें डाल दी और मेरी आँखों में देखते हुए बोली-
हीरल: “तो मैं क्या करती जीजू? उस मेसेज का रिप्लाइ नही करते तो मैं खुद आपके कमरे में आ जाती. मुझसे रहा नही जेया रहा था.”
मैने उसका चेहरा पकड़ा और पूछा, “ऐसा क्या हो गया जो नींद उडद गयी?”
हीरल ने शरम और मस्ती भारी नज़रों से नीचे देखा और बोली: “डोपेहर को जो आपने पिलाया था, उसका नशा अभी तक नही उतरा. और जब बिस्तर पर लेती, तो बस यही ख़याल आ रहा था की काश जीजू मेरे पास होते.”
उसकी बात सुन कर मेरा ‘केला’ पाजामा फाड़ने को तैयार हो गया. मैने उसे रेलिंग से सताया. उसकी निघट्य हवा में उडद रही थी, जिससे उसकी नंगी टाँगें और चिकनी जांघें मुझे सॉफ दिख रही थी. मैने अपना हाथ उसकी निघट्य के अंदर डाला और सीधा उसकी बिली पर रख दिया.
हीरल: “ह… जीजू… हाथ कितने ठंडे है आपके…”
कुमार: “अभी गरम कर देता हू.”
मैने वहाँ च्चत पर, खुले आसमान के नीचे, उसे ज़ोर से किस करना शुरू किया. मेरे हाथ उसकी निघट्य के अंदर उसके नंगे ‘बूब्स’ को मसल रहे थे. हीरल ने अपना सिर पीछे कर दिया और चाँद की तरफ देखते हुए सिसकियाँ लेने लगी.
हीरल: “जीजू… जल्दी करो ना… अगर दीदी उपर आ गयी तो?”
कुमार: “दर्र लग रहा है?”
हीरल: “दर्र भी लग रहा है… और मज़ा भी आ रहा है…”
मैने उसकी निघट्य को उपर उठा दिया. वो अंदर से बिल्कुल नंगी थी. मैने अपना पाजामा नीचे किया और अपना लोहे जैसा सख़्त ‘लंड’ बाहर निकाला. चाँदनी रात में हम दोनो रेलिंग के सहारे खड़े थे.
मैने हीरल की एक टाँग उठा कर रेलिंग पर रख दी. अब उसका रास्ता पूरा खुला था. मैने बिना वक़्त गँवाए अपना ‘लंड’ उसकी गीली ‘छूट’ पर सेट किया और एक ही झटके में आधा अंदर डाल दिया.
हीरल: “म्म्म्ममह! जीजू… आहह… धीरे… आवाज़ गूंजेगी…”
पर मैं कहाँ रुकने वाला था. मैने रेलिंग पकड़ कर धक्के लगाना शुरू कर दिया. हर धक्के के साथ हीरल का जिस्म हिलता और वो मेरे कंधे पर दाँत गाढ़ने लगती ताकि चीख ना निकले.
नीचे रानी मेरा इंतेज़ार कर रही थी, और उपर च्चत पर मैं उसकी बेहन के साथ चाँदनी रात का मज़ा लूट रहा था.
मैने हीरल की एक टाँग जो रेलिंग पर रखी थी, उसे नीचे उतरा और खुद उसके पैरों में घुटनो के बाल बैठ गया. मैने उसकी निघट्य को कमर तक उपर उठा दिया. चाँदनी रात में उसकी ‘छूट’ सॉफ चमक रही थी, बिल्कुल गीले गुलाब की तरह.
मैने बिना देर किए अपना मूह उसकी ‘छूट’ के पास किया और गहरी साँस ली. उसकी खुश्बू ने मुझे मदहोश कर दिया. मैने अपनी जीभ बाहर निकली और नीचे से उपर तक एक लंबा चटकारा लगाया.
हीरल: “सस्सस्स… ह… जिजुउू…”
हीरल ने मेरे बालों में अपनी उंगलियाँ फसा ली. मैं पूरी भूख के साथ उसकी ‘बिल्ली’ को चाटने लगा. मेरी जीभ उसके दाने (क्लाइटॉरिस) के साथ खेल रही थी. वो पहले से ही गीली थी, पर मेरी जीभ की गर्माहट ने वहाँ बाढ़ ला दी थी.
मैने अपने होंठ उसकी ‘छूट’ पर लगा दिए और ज़ोर से चूसने लगा. जितना भी पानी और रस उसने छ्चोड़ा, मैने एक बूँद भी बेकार नही जाने दिया. मैं सारा का सारा पानी पी गया.
हीरल: “हाए जीजू… आप तो पूरा निचोढ़ रहे हो… आह… बस करो…”
जब मैने उसे पूरा सॉफ कर दिया, मैं खड़ा हुआ. मेरा ‘लंड’ अब कंट्रोल से बाहर हो चुका था. मैने हीरल को घुमाया और उसे रेलिंग को पकड़ कर झुकने को कहा.
जैसे ही वो झुकी, उसके गोल-गोल टमते जैसे हिप्स (पिछवाड़ा) मेरे सामने आ गये. वो इतने गोरे और भरे हुए थे की मेरा मॅन किया उन्हे काट लू. मैने अपने दोनो हाथो से उसके “गोल गांद बंप” को पकड़ा और फैला दिया. बीच में वो तंग और छोटी सी “होल्ल” (पीछे का च्छेद) दिखाई दी, जो अभी तक अनचुई लग रही थी.
मैने अपने हाथ पर तोड़ा थूक लगाया और उसकी ‘गांद के च्छेद’ पर रग़ाद दिया ताकि वो चिकनी हो जाए. फिर मैने अपना लोहे जैसा सख़्त ‘लंड’ उसकी गांद के मूह पर सेट किया.
हीरल दर्र के मारे तोड़ा काँप गयी.
हीरल: “जीजू… पीछे? वो बहुत तंग है… दर्द होगा…”
कुमार: “दररो मत मेरी जान, बस शुरू में दर्द होगा, फिर मज़ा ही मज़ा है.”
मैने उसकी कमर को कस्स के पकड़ा और एक ज़ोरदार धक्का मारा.
“आअहह!” हीरल चीख पड़ी, पर उसने जल्दी से अपना हाथ मूह पर रख लिया ताकि आवाज़ नीचे ना जाए. मेरा ‘लंड’ उसकी तंग च्छेद को चीरते हुए टोपा अंदर कर गया था.
मैने रुका नही, धीरे-धीरे दबाव बनाया और फिर पूरा का पूरा ‘लंड’ उसकी पीछे वाली च्छेद में उतार दिया.
हीरल की आँखों से पानी निकल आया, पर वो दर्द के साथ एक अलग ही कसक महसूस कर रही थी. उसकी गुफा मेरे ‘लंड ‘ को चारों तरफ से जाकड़ रही थी, बिल्कुल एक अंगूठी की तरह.
जब वो थोड़ी अड्जस्ट हुई, मैने धक्के लगाने शुरू किए.
ठप… ठप… ठप…
हीरल के गोल टमते मेरे पेट से टकरा रहे थे. रात के सन्नाटे में सिर्फ़ हमारे जिस्म के टकराने की आवाज़ और हीरल की दबी हुई सिसकियाँ सुनाई दे रही तीन. मैं उसकी पीछे की च्छेद का कोना-कोना अपने ‘लंड’ से महसूस कर रहा था.
च्चत पर माहौल गरम था. मेरा ‘लंड’ हीरल की तंग पीछे वाली गुफा में तेज़ी से आयेज-पीछे हो रहा था. उसकी पकड़ इतनी मज़बूत थी की मैं अब और बर्दाश्त नही कर पा रहा था. मेरा जिस्म अकड़ने लगा और मुझे महसूस हुआ की वो पल आ गया है.
मैने हीरल की कमर को कस्स के पकड़ लिया और हानफते हुए बोला, “हीरल… मैं छ्चोड़ने वाला हू… तुम्हारी गांद का च्छेद भरने वाला है!”
हीरल ने भी रेलिंग को ज़ोर से भींच लिया और दर्द-ओ-मज़े में बोली, “हा जीजू… भर दो… मेरे पीछे सब कुछ भर दो… अहह!”
मैने आख़िरी 2-3 तेज़ धक्के मारे और मेरा ‘लंड’ थरथरने लगा. मैने अपनी गरम-गरम “लंड का पानी” (कम) की पिचकारी सीधा उसकी पीछे गांद के च्छेद के अंदर छ्चोड़नी शुरू कर दी.
“ऑश गोद… जिजुउुउ…” हीरल की आँखें पलट गयी.
मैने बूँद-बूँद करके सारा पानी उसकी अंतरियों में उतार दिया. उसका च्छेद मेरे गरम पानी से लबालब भर गयी थी. मैं वहीं उसके पीछे चाँद सेकेंड्स तक चिपका रहा, हानफते हुए, जब तक मेरा ‘लंड’ शांत नही हुआ.
जब मैने बाहर निकाला, तो एक हल्की सी पोप की आवाज़ आई और च्छेद तोड़ा खुला रह गया, जिसमे मेरा दिया हुआ प्यार भरा था.
“जल्दी… कपड़े ठीक करो,” मैने साँस चढ़ते हुए कहा. “रानी को शक हो जाएगा.”
हम दोनो ने जल्दी-जल्दी अपने आपको संभाला. हीरल ने अपनी निघट्य नीचे खींची और बाल ठीक किए. मैने अपना पाजामा उपर किया और नाडा बाँधा. हम दोनो पसीने में थे, पर चेहरे पर एक शैतानी सुकून था.
हम दबे पावं च्चत से नीचे उतरने के लिए सीडीयों (स्टेर्स) की तरफ बढ़े. मैने हीरल को इशारा किया की नॉर्मल रहना.
हम अभी सीडीयों से नीचे उतार कर लॉबी में पहुँचे ही थे की अचानक सामने से रानी आती हुई दिखाई दी. हमारा दिल हलाक में आ गया! रानी के हाथ में पानी की बॉटल थी और वो शायद किचन से आ रही थी या उपर मुझे ढूँढने आ रही थी.
हम दोनो सीडीयों के बीच में ही रुक गये. रानी ने हमे एक साथ नीचे उतरते हुए देख लिया.
रानी (हैरानी से): “अर्रे? तुम दोनो एक साथ उपर च्चत से आ रहे हो? कुमार, आप तो पानी पीने गये थे ना? और हीरल, तुम वहाँ क्या कर रही थी?”
माहौल एक-दूं टेन्स हो गया. हीरल घबरा गयी और मेरी तरफ देखने लगी. अब मुझे ही कुछ बोलना था.
मैं क्या बोला वो नेक्स्ट पार्ट में पता चलेगा, तो इंतज़ार करो…