साजिद: लाला, क्या रंडी मिली है. इसको देख कर तो अपने ग्रूप के सभी लोग पागल हो जाएँगे. साला अब पता चला तुम इसकी क्यूँ इतनी तारीफ कर रहा था.
युसुफ (हेस्ट हुए): साला तेरा अभी से माल निकल गया.
असलम (उसका मज़ाक उड़ते हुए): इसको आज तक ऐसी औरतें मिली नही है ना. पर क्या भाई जान बातें बड़ी-बड़ी कर रहे थे. आज देख लिया आपकी पर्फॉर्मेन्स को.
युसुफ: सही बात है. साला कितना फेंकता था. आज देख लिया.
इनकी बात सुन कर मुझे और किंजल को हस्सी आ गयी. किंजल तोड़ा खिल-खिला कर हस्स पड़ी.
साजिद (ज़ोर से गुर्रटे हुए): बस! बहुत हो गया तुम दोनो का! अब मेरी बारी! आज दिखता हू तुम दोनो को. और इस रंडी को भी.
साजिद तुरंत किंजल के पास पहुँचा. युसुफ किंजल की छूट से लंड निकाल कर हॅट चुका था. किंजल अभी भी हाँफ रही थी. साजिद ने किंजल को बेड पर घुटनो के बाल किया, उसकी गांद को हवा में उठाया. किंजल की छूट और माल से चमक रही थी.
साजिद (किंजल की गांद को मसालते हुए): तेरी भाभी की गांद तो असलम ने खोल दी, पर तेरा क्या होगा, मेरी नयी रंडी? क्या तू इस लंड को अपनी गांद में लेगी?
किंजल भाभी शरम से मूह च्छुपाने लगी, पर उसके जिस्म में अब भी युसुफ के लंड का नशा था.
किंजल (धीरे से, काँपते हुए): मैं… मैं आपकी रंडी हू. जो आप चाहेंगे… वही होगा. पर… पर गांद…
साजिद ने किंजल की कोई बात नही सुनी. उसने अपना मोटा लंड किंजल की गांद के च्छेद पर रखा, और एक पल के लिए भी नही रुका. एक ज़ोर का धक्का मारा. किंजल की सबसे तेज़ चीख अब रूम में गूँजी. ऐसी चीख जो दर्द और अनोखे मज़े के बीच फाँसी थी.
किंजल: आआआआआआः! मा! मॅर गयी! मेरी गांद! मुझे छ्चोढ़ दो!
साजिद का लंड धीरे-धीरे किंजल की टाइट गांद में उतार रहा था. वो अपने दाँत कस्स कर बेडशीट को पकड़े हुए थी. जब साजिद का पूरा लंड उसकी गांद में समा गया, तो वो कुछ देर के लिए शांत हो गयी, सिर्फ़ सिसक रही थी.
साजिद (किंजल की गांद पर थप्पड़ मारते हुए): वाह! क्या गांद है तेरी रंडी! इतनी टाइट! अब देख, ये लंड तेरी गांद को रोज़ चाहिए होगा.
उधर, युसुफ और असलम, मेरे पास आने लगे. युसुफ अभी भी हाँफ रहा था.
युसुफ: संगीता, मेरी जान. अब तू मेरा और असलम का लोड्ा चूस कर तैयार कर. फिर हम दोनो एक साथ तेरी छूट को छोड़ेंगे.
मैं तुरंत युसुफ जी और असलम के लंड को अपने मूह में लेने को तैयार हो गयी. दोनो के लंड अभी-अभी झाड़ चुके थे, पर फिर से तंन को तैयार थे.
मैं बेड पर लेट गयी, और एक साथ युसुफ और असलम के लंड को बारी-बारी मूह में भर कर चूसने लगी . मेरी जीभ एक लंड से दूसरे लंड पर चल रही थी, उनकी टोपी को चाट रही थी, उनके नासूर को चूस रही थी. मैं अब पूरी तरह से उन मर्दों की चुड़क्कड़ रंडी बन चुकी थी, जिसका काम बस उनके लंड को खुश करना था.
और दूसरी तरफ, किंजल की गांद साजिद के धक्को से तेज़ हिल रही थी. उसका दर्द अब पूरी तरह से मज़े में बदल चुका था.
किंजल (चीखते हुए): साजिद जीिइई! बहुत मज़ा! मेरी गांद… और ज़ोर से! आपकी रंडी की गांद फाड़ दो! और तेज़!
किंजल की चीख अभी तक हवा में थी, पर वो अब उस नये अनुभव के मज़े में डूब चुकी थी. साजिद तेज़ी से किंजल की गांद मार रहा था.
साजिद (ज़ोर से गुर्रटे हुए): क्या टाइट गांद है, किंजल! तेरी छूट से भी ज़्यादा मज़ा तो तेरी गांद में है! तू सच में रंडी बनने के लिए ही पैदा हुई है!
किंजल (अपने दोनो हाथ चादर पर गाडते हुए): आ… साजिद जीि… धीरे… पर रुकना मत! फाड़ दो… मेरी गांद को फाड़ दो! मैं आपकी रंडी हू!
मैं नीचे लेती हुई थी, मेरे मूह में अब भी युसुफ और असलम का लंड था. उनकी गर्मी और उनके पानी का स्वाद मेरे अंदर की हवस को और बढ़ा रहा था.
मैं उनके लंड को चूस्टे हुए किंजल भाभी का अनुभव देख रही थी, और मेरा जिस्म इस नये खेल के लिए बेचैन हो रहा था.
युसुफ (मेरा मूह से अपना लंड निकालते हुए, ज़ोर से हानफते हुए): बस! बहुत हो गया! अब डबल मज़े की बारी है!
युसुफ और असलम दोनो ने अपने लंड मेरे मूह से अलग किए. मेरा मूह थूक और उनके रसन से चमक रहा था. युसुफ ने किंजल भाभी को बेड पर उल्टा ही रहने दिया. असलम तुरंत किंजल के पास पहुँचा. उसने अपने लंड का टोपी किंजल की फूली हुई छूट पर रखा, जिसमे अभी-अभी युसुफ का माल छ्छूता था.
किंजल (हैरानी से): क्या… क्या कर रहे है?
असलम ने बिना कोई जवाब दिए, एक ही तगड़े धक्के में अपना लंड किंजल की छूट में उतार दिया. किंजल की छूट में अब असलम का लंड था, और गांद में साजिद का लंड!
किंजल: आआआआआआः! निकालो! निकालो! ये क्या किया!
मैं… मैं मॅर गयी!
किंजल की आँखें बाहर निकल आई थी. उसका जिस्म बेड पर पूरी तरह से तंन गया. ये उसकी ज़िंदगी का पहला डबल पेनेट्रेशन था, और दो तगड़े लंड उसकी छूट और गांद को एक साथ छोड़ रहे थे.
असलम (किंजल के कान में फुसफुसते हुए): अब तू सच में हमारी रंडी बनी है, किंजल! डबल मज़ा ले!
साजिद और असलम दोनो ने किंजल को एक साथ छोड़ना शुरू किया. किंजल की छूट और गांद से निकालने वाली आवाज़, और उसकी चीखें, रूम 309 को हवस के शोर से भर रही थी. कुछ ही देर में उसके चीखने की आवाज़ मज़े की सिसकारियों में बदल गयी.
किंजल (चिल्लाते हुए): अयाया! हन! दोनो! दोनो एक साथ! और ज़ोर से! मेरी छूट और गांद फाड़ दो! मैं आपकी रंडी हू!
जब किंजल दोनो लंड से चुड रही थी, तब युसुफ मेरे पास आया.
युसुफ (मेरे जिस्म को प्यार से सहलाते हुए): संगीता मेरी जान, तूने तो हमारे लंड को चूस कर और गरम कर दिया है. अब तेरी बारी है. तेरी छूट तो पहले ही मेरी रंडी है, पर आज तुझे मेरी और साजिद की डबल ताक़त मिलेगी.
साजिद ने किंजल भाभी की गांद में अपना लंड निकाल कर, हानफते हुए वहाँ से निकल गया. असलम अभी भी किंजल की छूट में लगा हुआ था. युसुफ ने मुझे सीधा किया, मेरे दोनो पैर अपने कंधों पर रख लिए. उसने अपने लंड का टोपी मेरी छूट पर रखा. उसी वक़्त, साजिद भी मेरे पास आया. उसने बिना देर किए, अपना तगड़ा लंड मेरी गांद के च्छेद पर सेट किया.
मैं (एक तेज़ साँस लेते हुए): युसुफ जीई… साजिद जीई… एक साथ!
युसुफ ने एक तगड़ा धक्का मारा, और उसका लंड मेरे अंदर उतार गया. उसी पल, साजिद ने भी बिना रहम के अपना पूरा लंड मेरी गांद में पेल दिया. मेरी तेज़ चीख रूम में गूँज उठी. ये मेरा भी पहला डबल पेनेट्रेशन था.
मैं: आआआआआआआआः! मा! मॅर गयी! मेरी छूट और गांद दोनो फटत गयी! रुकना मत! और ज़ोर से!
दोनो ही लंड इतने मोटे और तगड़े थे की मेरे जिस्म में एक पल के लिए साँस रुक गयी. मेरे आयेज किंजल भाभी चुड रही थी और मेरे पीछे दो मर्द मुझे एक साथ छोड़ रहे थे. इस अनोखे अनुभव ने मुझे बेन्तेहा मज़ा दिया.
युसुफ (धक्के मारते हुए): देख, संगीता! ये है तेरी रंडी होने का नतीजा! दो-दो लंड एक साथ! तेरा जिस्म हमारा है!
साजिद (मेरी गांद को मसालते हुए): तेरी गांद तो सोने की है, संगीता! आज से तू हमारी रंडी है!
साजिद ने अपनी गांद मारने वाली इक्चा पूरी होने के बाद, अपना लंड मेरी गांद से निकाल लिया और उसकी जगह असलम आ गया.
मेरे अंदर अब युसुफ और असलम के लंड की टक्कर चल रही थी. मेरी छूट और गांद दोनो की दीवारें कस्स कर खिच चुकी थी. मुझे लग रहा था जैसे मेरा जिस्म दो टुकड़ों में बट्ट जाएगा, पर ये दर्द भी इतना नशा दे रहा था की मैं और तेज़ धक्के माँग रही थी.
मैं (चीखते हुए): हन… और ज़ोर से! दोनो एक साथ! मेरी छूट और गांद को पागल कर दो!
हम दोनो औरतें टीन मर्दों के बीच बुरी तरह फाँसी हुई थी. युसुफ और असलम दोनो ने एक नये जोश के साथ हमे छोड़ना शुरू किया. दो-दो लंड एक साथ हमारे जिस्म में उतार-चढ़ रहे थे, और हमारी हर साँस, हर चीख सिर्फ़ हवस से भारी थी.
किंजल भाभी तो अब पूरी दीवानी हो चुकी थी. युसुफ का लंड जब उसकी गांद में तेज़ी से चलता, और असलम का लंड उसकी छूट को रगड़ता, तो किंजल का पूरा जिस्म बेचैन हो जाता.
किंजल (चिल्लाते हुए): अयाया! युसुफ जी! गांद को फाड़ दो! और असलम जी! मेरी छूट का भोसड़ा बना दो! मैं आपकी रंडी हू! मुझे बार-बार छोड़ो!
साजिद अभी भी इस खेल से बाहर नही था. जब हम दोनो डबल पेनेट्रेशन में थे, तो वो कभी मेरे मूह में अपने लंड देता, तो कभी किंजल भाभी के बूब्स को ज़ोर से मसलता.
तीनो मर्द अब इस ख़याल से पागल हो चुके थे की भाभी और ननंद एक साथ उनके लंड से मरवा रही थी. उन्होने अपनी रफ़्तार और ताक़त को आखरी सीमा तक बढ़ा दिया. रूम में सिर्फ़ छम-छम की आवाज़ और हमारी सिसकारियों का शोर था.
किंजल भाभी का जिस्म पूरी तरह से काँप रहा था. वो आखरी बार ज़ोर से चीखी और बेहोशी की हालत में चली गयी. वो इतनी तक गयी थी फिर भी अपनी हिम्मत बनाए रखी. उसके झाड़ते ही, युसुफ, असलम और साजिद, तीनो एक साथ आखरी धक्के देने लगे.
युसुफ (मेरे छूट में), असलम (मेरी गांद में), और साजिद (किंजल की छूट में), – तीनो ने एक साथ, पूरी ताक़त से हम दोनो औरतों के अंदर अपना सारा गर्म माल भर दिया.
तीनों मर्द एक साथ हमारे उपर हानफते हुए गिर गये. हम दोनो औरतें, ताकि हुई, ढीली सी, और पूरी तरह संतुष्ट, उस बेड पर पड़ी थी. हमारे जिस्म पर मर्दों के पानी की खुश्बू थी और हमारे अंदर टीन लुंडों का गरम एहसास. कुछ देर बाद, जब सब की साँसें ठीक हुई, तो युसुफ हंसा.
युसुफ (मुझे और किंजल भाभी को देखते हुए): वाह! आज तो हमारी पार्टी ने कमाल कर दिया. दो-दो प्यासी रंडियों को एक साथ संतुष्ट किया. संगीता, किंजल, अब तुम दोनो पूरी तरह से हमारी हो.
हम दोनो ने एक-दूसरे की तरफ देखा. हमारे चेहरे थकावट और गहरे मज़े से लाल थे. वो दर्र और शरम जो पहले किंजल के चेहरे पर थी, अब वो एक बेन्तेहा हवस में बदल चुकी थी.
किंजल भाभी ने शरमाते हुए साजिद का लंड पकड़ लिया, जो अभी भी रस से भरा था.
किंजल: हम आपकी रंडियन है, युसुफ जी. अब हमारी छूट और गांद की प्यास सिर्फ़ आप लोग ही बुझा सकते है.
मैं: हा युसुफ जी. हम दोनो तैयार है. जब भी आप और आपके दोस्त हमे बुलाएँगे, हम तुरंत हाज़िर हो जाएँगे.
युसुफ ने मुस्कुराते हुए हमे एक-एक किस किया. उस दिन, हम दोनो औरतों ने अपने पतिव्रता होने का झूठा नाटक ख़तम कर दिया था. हम घर की संस्कारी बहू नही, बल्कि उस गांग के मर्दों के लंड की प्यासी रंडियन बन चुकी थी.
शाम को, हम दोनो अपने घर वापस आई, पूजा का झूठ बोल कर निकली थी. मेरी मा को कहाँ पता था की उनकी बेटी और बहू दूसरे मर्दों से बुरी तरह अपनी छूट और गांद छुड़वा कर आई है.
हमारे जिस्म दर्द कर रहे थे, पर हमारे होंठो पर एक अजीब सी मुस्कान थी. उस दिन के बाद मेरा जब भी मॅन करता मैं युसुफ जी और उनके दोस्तों से चूड़ने जाती. उनके ग्रूप में कुछ 8-9 मर्द थे. और मेरा वहाँ आना-जाना हो गया था, तो में तो सभी मर्द के लंड ले चुकी थी.
मेरे साथ कभी-कभी किंजल भाभी भी आती थी. मैने एक बार ज्योति को भी उनसे चुडवाया. और मैने किंजल भाभी को भी दीदी के गाओं के सरपंच, संग्राम जी से भी चुडवाया.
दोस्तो मैं आपकी संगीता, अब आपसे बिदाई लेती हू. यहाँ तक मैने अपने ज़िंदगी का सफ़र आप से शेर किया. मेरा चुदाई का खेल यही तक सीमित नही रहा. मैने उसके बाद भी बहुत सारे मर्दों से अपनी चुदाई करवाई. लेकिन समय की कमी की वजह से मैं अपने सारे किससे आप तक नही ला पौँगी. और उसके लिए दिल से माफी मांगती हू. आपका ढेर सारा प्यार मुझे मिला, उसकी मैं आभारी हू.