रंडी मा की चुदाई का गुस्सा

सेक्स स्टोरी के पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की मेरी विधवा मा को मैने अपने दोस्त रिज़वान के साथ चुदाई करते देखा. मेरी चीख सुन के दोनो अलर्ट हो गये और मा रूम में भागी. अब आयेज-

मैने मेरा निकाला हुआ एक जूता उठा के रिज़वान की तरफ मारा. रिज़वान ने वो रोक लिया और मुझसे शांत होने बोला.

मैं उसे गली दे रहा था, ”हरंखोर सेयेल, मदारचोड़” और उसके तरफ जाने लगा. तब तक उसने उसकी अंडरवेर पहन ली. मैं उसे मारने वाला था, बुत वो बॉडी बिल्डर है तो उसने मेरे हाथ पकड़ के मुझे लॉक कर लिया.

टन तक मा अंदर से गाउन पहन के आई और उसने हम दोनो को रोका. मैं रोने लगा था और दोनो को गाली दे रहा था. मा को मैने धक्का दिया और कहा, ”ये रंडी जैसे कम करने लगी हो तुम.” तब रिज़वान ने मुझे फिर से पकड़ा.

मा: “रिज़वान तुम उसे छ्चोढो और जाओ यहाँ से.”

फिर मा ने गुस्से से मुझे कहा: ”सूरज तू पहले चुप होज़ा, फिर मैं तुझे बताती हू.”

मैं: ”अब क्या बताॉगी? सब देख लिया मैने अपनी आँखों से.”

रिज़वान ने कपड़े पहने और वो चला गया. मेरी सीधी-साधी मासूम मा जो की कभी बड़ी आवाज़ में बात नही करती थी, आज वो इतना कुछ होने के बाद भी एक-दूं स्टेबल मेरे सामने खड़ी थी. जाते टाइम उसने रिज़वान को हेस्ट हुए बाइ कहा, और इशारा किया ”मैं संभाल लूँगी.”

जैसे ही रिज़वान बाहर गया, और मा ने डोर लॉक किया, वो मुझे इग्नोर करके लिविंग रूम में पड़े अपने कपड़े उठाने लगी.

मैं बहुत गुस्से में था. मैने उसके हाथ को झटका दिया और कहा, “बोल ना ये रंडी-पाना क्यूँ किया तुमने?” वो एक-दूं से मेरी तरफ गुस्से से देखी और बोली, ”डोर रह, मुझे टच मत कर. और ठीक से बात कर, मा हू तेरी.”

मैं: ”मैने सिर्फ़ हाथ को टच किया. वो तो तुझे नंगा करके छोड़ रहा था. फिर तुझे रंडी ना काहु तो क्या देवी काहु?”

मा: ”उसने मुझे नगा नही किया. मैं खुद उसके सामने नंगी हुई हू. रही बात मैं रंडी हू या देवी हू, तुझे उससे कुछ लेना देना नही. मैं अपनी मलिक खुद हू. तू मुझसे बात मत करना इसके बाद.”

अब मैं पूरा हांग हो गया था. मुझे समझ नही आ रहा था क्या बोलू. मैं सोचता रह गया की क्या ये मेरी केरिंग मा थी, या कोई और. ना उसे कोई शरम थी, ना कोई दर्र. एक-दूं फियरलेस हो गयी थी. मैं सोच ही रहा था की तब तक मा अपने बेडरूम में जाके डोर लॉक करके बैठ गयी. मैं चिल्लाता रहा, रोता रहा, बुत उसने डोर नही खोला.

ऐसे ही पूरा दिन और रात निकल गये. मैं भी रो-रो के तक गया था और मुझे नींद लग गयी.

नेक्स्ट दे जब आँख खोली मा फ्रेश होके किचन में कम करने लगी थी. मैं उसके पास गया और बात करने का ट्राइ करने लगा. वो मुझे इग्नोर कर रही थी. फिर मैने शांति से बात करने का ट्राइ किया.

मैं: मा सुनो ना, प्लीज़ बात करो. मुझे बहुत अजीब लग रहा है.

मा: अर्रे मा क्यूँ, रंडी बोलो रंडी.

मैं: सॉरी मा, पर मैं भी क्या करू. कोई भी अपनी मा को ऐसे देखेगा तो गुस्सा होगा ही ना.

मा: हा पर क्या ये तरीका है मा से बात करने का?

मैं: सॉरी मा. इसके बाद मैं ऐसे बात नही करूँगा.

मैं ने कुछ रिप्लाइ नही दिया.

मैं: मा अब से आप रिज़वान से डोर रहना. उससे बिल्कुल बात मत करना. उसने आप को फसाया है मैं जानता हू.

मैं एक-दूं मुझपे गुस्से से भड़क गयी और बोली: सूरज, तुम्हे सिर्फ़ एक बार बतौँगी सुन लो. मैं ऱीzवन से प्यार करती हू, उससे डोर नही रह सकती.

और वो गुस्से में रूम में चली गयी. मुझे फिर से गुस्सा आया. मैं चिल्लाने लगा, फिर से गलिया देने लगा. उस दिन मैं ऑफीस नही गया. दिन भर सेम चलता रहा. वो बस यही बोलती रहती की मैं उससे डोर नही रह सकती. शाम को हम फिर आमने-सामने आए. तब मैं शांति से बात करने का सोचा.

मैं: चलो ठीक है मा आप रहो रिज़वान के साथ. पर शादी करके रहो. पूछो उसको शादी करेगा वो आपसे? शायद आपको पता नही उसकी एक गफ़ भी है. वो बस आपका उसे कर रहा है.

मा: देख सूरज, उसने मुझे सब बताया, और मैं भी नही चाहती की उससे शादी करू. जैसा है वैसा चलने दे. फालतू ड्रामा मत कर. तू तेरा ऑफीस कर और तेरा काम, मुझे मेरा करने दे.

मा का ऐसा बोल्ड आंड रूड रूप मेरी समझ नही आ रहा था. जो औरत मुझे देवी लगती थी, एक ही दिन में वो कैसे रंडी बन गयी? उसकी चाल-ढाल, उसके बात करने का तरीका एक-दूं कैसे चेंज हो गया? मुझे ये समाज़ नही आया.

शाम को मैने बिके निकली और रिज़वान के फ्लॅट पे गया. डोर ओपन करते ही मैं रिज़वान पे टूट पड़ा. तब बाकी रूम्मटेस ने मुझे रोक लिया. रिज़वान मुझे सिर्फ़ रोक रहा था और शांत रहने बोल रहा था. मैं उसे गालियाँ दे रहा था.

उसके फ्लाटमेट मुझे मारने और दबाने लगे. उन्हे रिज़वान ने रोका. उनमे से एक रवि भैया थे. वो मुझे बाहर ले गये और मुझे शांत किया, और पूछा-

रवि: क्या हुआ सूरज, क्यूँ गुस्सा हो रिज़वान पे?

मैं: भैया मैं आपसे क्या बोलू. बता भी नही सकता ऐसी बात है.

रवि: सूरज शांत होज़ा, मुझे पता है सब (मैं चौंक गया).

रवि: डोंट वरी, मैं पहले से जानता हू सब तुम्हारी मा और रिज़वान के बारे में. बुत तुझे भी तोड़ा शांति से समझना होगा. इसमे रिज़वान की या तुम्हारी मों की कोई ग़लती नही. वो एक-दूसरे को पसंद करने लगे और उनमे करीबी आ गयी, तो क्या करेंगे. इट्स नॅचुरल भाई.

मैं: राई भैया, आप कैसे जानते हो? रिज़वान मेरी मा की बदनामी कर रहा है क्या सब को बता के?

रवि: अर्रे सूरज ऐसा नही है. मैं पहले से जानता हू. जब से तेरे दाद हॉस्पीटलाइज़्ड थे और मा फ्लॅट पे आती थी, तब से वो दोनो करीब आए है.

मैं: क्या कह रहे हो भैया! वो दोनो 1 साल से.. ये सब चल रहा है मेरे पीठ पीछे (मैं और गुस्से में आया और रिज़वान को गाली देने लगा).

रवि: देख सूरज, मेरा काम था तुझे समझना, की तुझे समझना होगा दोनो को, और शांत रहना होगा. तू कितना भी गुस्सा करेगा तो कोई फ़ायदा नही. रिज़वान चाहे तो तुझे कभी भी मार सकता है. तू उसे इतना भला-बुरा कहता रहा है, बुत वो तुझे कुछ नही कह रहा.

मैं: तो भैया मैं क्या करू? मैं नही देख सकता ये सब. आप प्लीज़ रिज़वान को समझाओ प्लीज़.

रवि: अर्रे सूरज, वो दोनो एक-दूसरे के प्यार में है. यहाँ तक की रिज़वान ने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ब्रेकप कर लिया ताकि तेरी मों की केर कर सके. और तेरी मा के बारे में सोच. वो भी अकेली है. उसकी भी तो नीड है, रिज़वान और तेरी मा एक-दूं बेस्ट है एक-दूसरे के लिए.

मैं उसकी बात सुनते-सुनते बीच में ही वहाँ से निकल गया. रवि भैया मुझे बुलाते रहे, रोकते रहे, बुत मैं नही रुका और वहाँ से निकल गया.

इसके आयेज क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पढ़िएगा.

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