बहन की चुदाई और रक्षा बंधन

सिस्टर सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट-

शिखा: एमेम भैया, मेरे जादूगर हो यार आप तो. एम्म एसस्स भैया, अब बस छोड़ डालो मुझे. फक मे प्लीज़ भैया.

शिखा ने अपना शॉर्ट और पनटी निकाला और मेरे लंड को अपनी छूट पर सेट किया. फिर एक झटके में पूरा लंड छूट में ले लिया.

शिखा: आहह शीत! बहनचोड़, बहुत बड़ा है भैया यार आपका. आज भी जान निकाल देता है. बहुत लकी हू मैं सच में, पहला लंड ही ऐसा मिला के दूसरे की ज़रूरत ही ना पड़े. पर फिर भी मेरा भाई मेरी छूट औरों में बाँटे फिरता है, कुत्ता!

शिखा छूट में मेरा लंड लिए हुए मेरी गोदी में बैठ गयी. फिर मेरे गले में अपनी बाहें डाल कर अपनी कमर आयेज-पीछे करके चूड़ने लगी. लंड सीधा था तो लंबाई ज़्यादा महसूस हो रही थी और साली पूरा जड़ तक ले रही थी. बहुत मज़ा आ रहा था. मैने भी टाँगें थोड़ी फैला कर लंड को प्रॉपर जगह दी अंदर-बाहर होने के लिए.

शिखा मस्त धक्के पेल-पेल कर अपनी छूट छोड़ रही थी. मैं उसके बूब्स को चूसने लगा, उसकी गर्दन को चूसने लगा.
किचन में फुल गर्मी थी और उपर से चुदाई, तो दोनो ही पसीने से भीग गये थे. पर दोनो ही चुदाई के नशे में खोए थे.

फिर शिखा ने मुझे वहीं स्लॅब पर लिटा दिया और अब खूब उछाल-उछाल कर अपनी चुदाई करवाने लगी.

शिखा: आ आहह मा भैया, एम्म एसस्स आपका, उहह आपका ये बहनचोड़ लंड हाए आहह आहह क्या मस्त लोड्‍ा है भैया. मेरी मा छोड़ देता है उउहह आहह. मा का नाम सुन कर देखो कैसे और टाइट हो गया भोंसड़ी वाला.

शिखा मेरे उपर झुकी और एक हाथ में मेरा मूह पकड़ लिया, जैसे जब दाँत लगते है वैसे.

शिखा: मेरी मा छोड़नी है? हा बोलो भैया, मा को छोड़ोगे मेरी आहह आहह?

उसने ज़ोर-ज़ोर से अपनी कमर आयेज-पीछे करनी शुरू कर दी, जैसे जोश में आ गयी हो. पर जितना ज़ोर लगती, लंड उतना ही उसकी छूट में अंदर तक जाता. फिर उसे उतना ही दर्द और मज़ा मिलता.

शिखा: आ आहह छोड़ोगे मेरी मा को बोलो भैया? एसस्स एसस्स फुक्ककक मे, आहह बताओ ना भैया.

मैं कुछ बोलने ही जेया रहा था की उसने मेरे गाल पर थप्पड़ मार दिया.

शिखा: मदारचोड़ सेयेल, मेरी मा छोड़ोगे? एम्म्म बेटी छोड़ने का दूं नही है और चला है मा छोड़ने एम्म. पहले बेटी की गर्मी तो शांत करने का दूं कर कुत्ते आहह!

फिर उसने मेरे कंधो पर पकड़ बनाई और छूट में लंड लेने लगी. वो ऐसे धक्के पेल रही थी जैसे उसके पास लंड हो और मेरे पास छूट. ये पहली बार देख रहा था मैं की शिखा इतनी जोश में आ कर चुदाई कर रही थी खुद की. वरना तो पहले जब भी वो लोड पर सवार होती तो धीरे-धीरे छोड़ती और 3-4 मिनिट में ही उतार जाती थी. पर आज तो अलग ही रूप में लगी पड़ी थी.

शिखा: आहह भैया, मदारचोड़ मेरी छूट छोड़ो. ऊऊ मा मेरी छूट आहह गयी मेरी छूट, भैया छोड़ो इसे आहह.

मैने जल्दी से शिखा को खुद से चिपकाया और नीचे से धक्के पेलने लगा, क्यूंकी वो झड़ने के क़रीब थी. उसके धक्के धीमे होने लगे थे. नीचे से ताबड़तोड़ धक्के पेले तो 2 मिनिट में ही उसकी छूट का रस्स निकालने लगा. पर मैं छोड़ना जारी रखे था.

शिखा: भैया रुकू यार झड़ने तो दो आचे से एम्म्म हूउ हूउ ह्म्‍म्म्म.

और शिखा लंबी आहें भारती हुई मेरे सीने पर सिर रख कर झड़ने लगी.

शिखा (लंबी साँसों के बीच): मज़ा आ गया भैया, आज तो हाए छूट का कचूमर बना दिया अपनी.

विवेक: हा आज तो कुछ ज़्यादा ही जोश में थी तू. क्या बात है, क्या सोच रही थी?

शिखा उठ कर मेरी कमर पर बैठ गयी. मेरा लंड अभी भी छूट में था उसकी.

शिखा: बात बता तो डू, पर फिर आप वापस उसी बात पर आध जाओगे.

विवेक: बता तो अछा.

शिखा: आपके आने से पहले ना सो गयी थी मैं अपनी छूट में मूली लिए हुए. तो सपने में मैने देखा की आप…

इतना बोल कर वो चुप हो गयी और मुस्कुरा कर मुझे देखने लगी.

विवेक: आयेज बोल क्या कर रहा था सपने में मैं?

शिखा: नही, मैं नही बतौँगी, जाने दो.

विवेक: अर्रे बड़ी बदतमीज़ है, सस्पेनस बड़ा रही है. बता दे!

शिखा: आप सपने में मेरे सामने मुम्मा की छूट छोड़ रहे थे.

और ये बोल कर उसने अपना मूह च्छूपा लिया और मेरे सीने से आ कर लग गयी. मैने उसे हग किया, और छोड़ने लगा ज़ोर-ज़ोर के धक्के पेल-पेल कर. शिखा मेरे सीने पर सिर रख कर हाथ से च्छुपाए हुए, चेहरे को इधर-उधर घूमते हुए ना-ना करने लगी.

शिखा: ससस्स भैया, नो प्लीज़, धीरे से आ मा

विवेक: तेरी मा की छूट.

शिखा: छोड़नी है ना आपको?

विवेक: हा यार, प्लीज़ दिलवा दे तेरी मा की छूट शिखा. मेरी जान, मेरी बहना, प्लीज़ हाए. क्या छूट होगी!

शिखा: उम्म्म एसस्स छोड़ो मुझे. आहह भैया, नही प्लीज़, वापस शुरू मत करो ना. आ मुम्मा नही, मैं और सिर्फ़ मैं एम्म.

मैं रुका और उसे नीचे किया स्लॅब पर. फिर खुद स्लॅब से उतार गया. फिर लंड उसके मूह में दिया और धीरे-धीरे मूह छोड़ने लगा, क्यूंकी लंड तोड़ा ढीला पड़ने लगा था. 2 मिनिट मूह की चुदाई की और लंड फिर से तंन गया.

शिखा को नीचे उतरा और उसकी टाँगें चौड़ी करके खड़ा किया. उसके बाद लंड एक धक्के में उतार दिया उसकी छूट में. अब वो स्लॅब का सहारा लिए खड़ी थी और मैं उसके उपर झुका था, और लंड पेल रहा था.

शिखा: एम्म भैया आ, एक बात पूचु, सच-सच बताना आ आ ह्म. आप मुम्मा को हमारी शादी के लिए छोड़ना चाहते हो या वैसे ही छोड़ना है?

मैने उसकी तरफ देखा तो वो शातिर स्माइल दे रही थी.

शिखा: मुझे सब पता है बहनचोड़. आप को यू ही छोड़ना है मुम्मा को, हमारी शादी तो बस बहाना है ताकि मुझे बुरा ना लगे, हैईना?

विवेक: नही, ऐसा कुछ नही है शिखा.

शिखा: अछा बेटे, मुझसे झूठ. तो फिर मुम्मा का नाम सुन कर ये लोड्‍ा इतना टाइट क्यूँ हो जाता है? और आपके उपर एक-दूं से चुदाई का जानवर क्यूँ नाचने लग जाता है मुम्मा के नाम से? बोलो बोलो?

हम दोनो किचन में खड़े थे, सवाल-जवाब में लगे हुए,
और मेरे पास उसके इस सवाल का जवाब था. पर उसे बता देता तो बुरा मान जाती वो. पर सोचा के चलो आज ये भी बात करके ख़तम कर ही देते है.

विवेक: देख ऐसा है शिखा. सिद्धि मुझे हॉट लगती है.

शिखा: देखा बहनचोड़, मैं जानती थी.

विवेक: अर्रे पूरी बात तो सुन. वो मुझे हॉट लगती है और उसे छोड़ने का सच में बहुत मॅन है. पर ये भी सच है के तुझसे बहुत ज़्यादा प्यार करता हू मैं, और तुझे उदास नही देख सकता हू. और तुझसे डोर तो जाना ही नही है कुछ भी हो जाए. तो बस इसीलिए एक दिन सोचते-सोचते बस एक यही रास्ता दिखाई दिया जो सब के लिए सही होगा.

शिखा कुछ बोल ही नही, बस चुप-छाप खड़े थे हम दोनो.

शिखा: ई लोवे योउ भैया.

और फिर से उसने मुझे हग किया. मैने उसे उठा कर स्लॅब पर बैठाया क्यूंकी हाइट कम है ना. फिर उसने मुझे गले लगाया और उसकी आँखें नाम हो आई.

विवेक: अर्रे तू बात-बात पर रोने क्यूँ लगती है यार?

शिखा: भैया मुझे दर्र लग रहा है यार, क्या सच में हम शादी कर पाएँगे? आप डोर तो नही जाओगे ना मुझसे? प्लीज़ मुझे कभी नही छ्चोढना. अब मैं आपके बिना नही रह पौँगी भैया.

विवेक: स्ष चुप, रोना बंद कर. मैं नही जेया रहा तुझे छ्चोढ़ कर कहीं भी पागल. मैं खुद भी तो नही रह पौँगा अब तेरे बिना मेरी जान.

मैने उसके आँसू सॉफ किए, उसके गाल पर एक चुम्मि दी, और उसे गोदी में उठा कर कस्स के गले से लगाया. फिर बाहर हॉल में आ गया और सोफे पर बैठ गया.

विवेक: शिखा यार कोई प्लान बता ना यार कैसे होगा ये सब जो हम चाह रहे है?

शिखा ने कुछ नही बोला और वो बस मुझे ज़ोर से हग किए रही. तोड़ा माहौल भी शांत हो गया तो मेरा लंड भी ढीला पद गया. फिर मैने उसे उठाया और बेडरूम में गया. उसे बेड पर लिटाया और बातरूम जाने को हुआ तो उसने मुझे खींच लिया.

शिखा: नही, अकेला मत छ्चोढो अभी भैया प्लीज़.

तो मैं वापस से उसे हग किया और उसके साथ ही लेट गया. वो मेरे उपर आ कर मुझे हग करके लेट गयी किसी छ्होटे बच्चे की तरह. मैं बस सोच रहा था के कैसे सब होगा. क्या करू क्या नही, और यहीं सब सोचते-सोचते पता नही कब नींद लग गयी.

सुबह मुझे उठाया शिखा ने. जब आँख खुली तो देखा शिखा नहा चुकी थी. बाल गीले थे उसके. वो मेरे पास आई और मुझे हग किया.

शिखा: हॅपी रक्षा बंधन मेरे प्यारे से भैया.

विवेक: हॅपी रक्षा बंधन बहना.

शिखा: हा, बस बेहन, कोई प्यारी दुलारी नही?

विवेक: अर्रे हा-हा हॅपी रक्षा बंधन मेरी प्यारी दुलारी बहना.

और ये कहते-कहते मैने उसके बूब्स पकड़े ही थे की उसने मेरे हाथ पर मार दिया.

शिखा: भैया आज रक्षा बंधन है यार, आज तो शरम करो यार.

विवेक: अर्रे पर हम तो कर…

शिखा: स्ष, कुछ मत बोलो. जल्दी से उठो और नहा कर ऑफीस अटेंड करो. मैं मार्केट जेया रही हू. तोड़ा टाइम लगेगा मुझे लौटने में. तब तक आप की सेवा के लिए वरुण को फोन करके बुला डू भैया?

विवेक: वो घर नही गया क्या?

शिखा: नही, आपके लंड के लालच में वो भी रुक गया. चस्का लग गया है उसको भी आपके लंड का भैया.

विवेक: नही रहने दे, किसी को मत बुला. तू जल्दी जेया और जल्दी आ. तब तक मैं भी ऑफीस का काम निपटा लू. फिर तुझसे भी तो निपटना है.

शिखा जल्दी-जल्दी अपना तोड़ा कुछ समान बाग में डाल कर मार्केट निकल गयी और मैं अपने काम में लग गया. आज ज़्यादा काम नही दिया था मॅनेजर ने, तो राहत थी. मुझे लग रहा था के 3 घंटे में ख़तम कर दूँगा सारा, या उससे पहले भी.

मैं काम में इतना बिज़ी हो गया की टाइम का पता ही नही चला. जब मेरा फोन बजा तो देखा 1:14 हो गये थे.

शिखा: हेलो भैया, क्या कर रहे हो?

विवेक: कुछ नही, बस ऑफीस का काम निपटा रहा हू, तू कब तक आएगी?

शिखा: बस 10-15 मिनिट्स में आ जौंगी. अछा सुनो ना, एक मेसेज किया था, आपने देखा नही क्या?

मेसेज: भैया मेरा एक काम कर दो ना, आप फ्लॅट से निकलो और सीधा जेया कर रिघ्त हॅंड साइड पर जो पहला तुर्न है, उसमे जाना. फिर एंड में एक मेडिकल शॉप है, वहाँ से हमारा समान ले आओ ना. मुझे याद नही रहा और सब ख़तम है. कुछ भी नही है रूम पर, ना कॉनडम्स, ना लोशन, ना आपकी टॅब्लेट्स. और मैं कॅब में ही रुकूंगी तो तोड़ा अजीब हो जाएगा ना. प्लीज़ आप लेलो अपने पसंद का फ्लेवर आंड ऑल.

शिखा: जेया रहे हो?

विवेक: हा बस 5 मिनिट में निकलता हू. लोग आउट कर डू.

शिखा: ओक थॅंक योउ भैया, मिलते है.

मैं वापस आया तो दरवाज़ा अनलॉक था, जब की मैं लॉक करके गया था तो मतलब शिखा आ चुकी थी. मैं अंदर गया तो डांग रह गया. शिखा एक-दूं साज-सॉवॅर कर खड़ी थी ब्लू लहँगे में. वो हाथ में आरती की ताली लिए थी.

वो बहुत बहुत ज़्यादा सुंदर दिख रही थी. पार्लर से रेडी हो कर आई थी. मैं उसके पास गया वो स्माइल कर रही थी. फिर उसने आरती की मेरी, मिठाई खिलाई और फिर मेरी कलाई पर रखी बाँधी. मैं उसके होंठो पर किस करने चला तो फिर से मेरे हल्का सा थप्पड़ मार दिया.

शिखा: भैया बोला ना आज नही, रखी है आज. कुछ तो शरम करो इस पवितरा त्योहार की. आज हम दोनो सिर्फ़ भाई बेहन वाला प्यार ही करेंगे.

विवेक: हा तो मैं बस अपनी प्यारी सी दुलारी सी बेहन को प्यार ही तो करने जेया रहा था. पर तू है के करने ही नही दे रही.

शिखा ने तली टेबल पर रख दी और मेरी तरफ हाथ बढ़ाया.

शिखा: चलो मेरा गिफ्ट निकालो जल्दी से.

विवेक: मैं दूँगा गिफ्ट, पर तू लेने को रेडी कहाँ हो रही.

शिखा: भैया यार प्लीज़, मस्ती मत करो. जल्दी से मेरा गिफ्ट दो. रोहिणी आंटी ने बताया है मुझे आप कुछ लेकर आए हो.

मैने उसे अपने बाग से गिफ्ट बॉक्स दिया निकाअल कर. उसने गिफ्ट लिया और छ्होटे बच्चे की तरह रौंद-रौंद उछालने लगी. फिर मुझे हग किया और थॅंक योउ बोला.

फिर गिफ्ट बॉक्स खोला तो उसमे एक सेट पायल थी, जिनमे छ्होटे-छ्होटे घुंघरू थे और एक सेट कंगन का था. उनमे भी घुंघरू थे. आप सब समझ ही गये होगे की ये गिफ्ट क्यूँ दिया मैने.

एमाइल करके बताइए अगर समझ गये तो आर्तिकायर2022@गमाल.कॉम पर.

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