रंडी बन कर चुदी संस्कारी औरतें

सेक्स स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट-

साजिद ने एक झटके में मेरे ब्लाउस के सारे हुक्स खोल दिए. मेरा जिस्म आज़ाद होने को बेकरार था. जैसे ही उसने मेरे ब्लाउस को साइड किया, मेरे बड़े, भारी बूब्स उछाल कर बाहर आ गये. उन्हें देख कर साजिद की आँखों में ऐसी चमक आई, जैसे उसे कोई ख़ज़ाना मिल गया हो.

साजिद (ज़ोर से साँस लेते हुए): आ! क्या मस्त च्चती है मेरी रंडी की. इस दूध की प्यास तो अभी बुझाना पड़ेगा.

इधर असलम ने किंजल भाभी के पेटिकोट का नाडा खोल दिया. किंजल की सिसकारी निकल गयी, उसने अपने घुटने मोड़ने की कोशिश की, पर असलम ने उसके कमर को कस्स कर पकड़ लिया. पेटिकोट ज़मीन पर गिरते ही किंजल सिर्फ़ एक छ्होटे से डीप पिंक ब्रा और मॅचिंग पनटी में खड़ी थी.

उसका जिस्म शरम से काँप रहा था. पर उसकी पनटी के नीचे से उभरी हुई छूट की निशानी और उसकी गांद की गोलाई ने तीनो मर्दों को पागल कर दिया था.

युसुफ किंजल के पास आया और उसका ब्रा उतार दिया. किंजल ने शरम से अपने बूब्स च्छुपाने की कोशिश की, पर उसके दूध जैसी सफेद, काससे हुए बूब्स को देख कर युसुफ के मूह से सुभान अल्लाह निकल गया.

युसुफ (किंजल के चेहरे पर हाथ फेरते हुए): अर्रे मेरी जान, इतनी शरम क्यूँ? तुम तो खुद यहाँ तुम्हारी प्यास बुझाने और हमारे लंड का स्वाद चखने आई हो.

किंजल भाभी ने अपनी आँखें खोल दी. उसका दर्र अब धीरे-धीरे हवस में बदल रहा था. उसकी नज़र सामने खड़े तीनो मर्दों पर पड़ी. तीनो ने अब अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए थे.

जब तीनो के लंड हवा में लहराते हुए बाहर निकले, तो किंजल के मूह से एक हल्की सी चीख निकल गयी. उसने तो बस सुना ही था, पर आज पहली बार अपनी आँखों से टीन टोपी-कटे लंड देखे, जो आम मर्दों के लंड से काई ज़्यादा तगड़े, लंबे और मोटे थे.

मैं (खड़ी हो कर युसुफ की तरफ इशारा करते हुए): भाभी, देखो. यही वो ताक़त है, जो हमारी छूट की प्यास बुझाएगी.

साजिद ने मुझे बेड पर धकेल दिया. उसने मेरी पनटी उतार कर फेंक दी, और मेरा नंगा जिस्म अब बेडशीट पर था. साजिद ने बिना देर किए अपने लंड को मेरे मूह के पास लाया.

साजिद: अभी कॉल पर कहा था ना, मेरी प्यासी छूट को लंड की आदत हो गयी है. तो पहले इस लंड को आचे से चूस.

मैं तो इस मज़े के लिए तैयार थी. मैने तुरंत साजिद का लंड अपने मूह में भर लिया और उसे ऐसे चूसने लगी जैसे सालों की प्यासी हू. मेरा जिस्म तो पहली मुलाक़ात में ही युसुफ की रंडी बन चुका था, अब तो ये हवस हर नये लंड को चखना चाहती थी.

उधर किंजल भाभी, जो अभी भी सिर्फ़ पनटी में थी, उससे असलम ने कंधे से पकड़ कर नीचे घुटनो के बाल बैठा दिया.

असलम (किंजल के गाल पर थप्पड़ मारते हुए): चल, तू बड़ी शरमाती है ना? पहले ये मेरा लंड देख और इसकी गर्मी महसूस कर. तेरा पति तो तुझे सिर्फ़ बच्चे पैदा करने के लिए छोड़ता होगा. ये लंड तुझे जन्नत दिखाएगा.

किंजल भाभी की आँखों में आसू थे, ये उसके लिए बहुत नया और ज़ोरदार अनुभव था. पर जैसे ही असलम का लंड उसके चेहरे के सामने आया, उसकी साँसें तेज़ हो गयी. उसके होंठ काँप रहे थे, पर उसकी आँखों में अब लंड की दीवानगी थी.

युसुफ ने किंजल के बाल पकड़े और उसे असलम का लंड चूसने का इशारा किया.

युसुफ: मेरी जान ये तेरा नसीब है. जो औरत इस लंड को ज़ुबान लगती है, वो कभी अपने पति के लंड से खुश नही रह पाती.

किंजल ने धीरे से अपना मूह खोला. पहले तो वो दर्र रही थी, पर जैसे ही असलम के लंड का टोपी उसके होंठो से टकराया, उसके अंदर की हवस जाग उठी. उसने आँखें बंद की और वो असलम का लंड चूसने लगी.

उसका पहला टोपी-कटा लंड चूसने का अनुभव था, और उसकी चाहने वाली जीभ ने असलम को पागल कर दिया.

मैं साजिद का लंड चूस्टे हुए, किंजल भाभी को असलम का लंड चूस्टे देख रही थी. हमारी आँखों में अब शरम नही, बस हवस और जुनून था.

साजिद का लंड इतना मोटा और तगड़ा था की मेरा जबड़ा दर्द कर रहा था, पर मज़ा उस दर्द से काई ज़्यादा था. मैं उसे अपनी जीभ और होंठों से सहला रही थी, हर झटके के साथ आ की आवाज़ निकाल रही थी.

इधर किंजल भाभी, जो शुरू में दर्र रही थी, अब असलम का लंड बड़े जोश से चूस रही थी. उसने लंड को अपने दोनो हाथो में पकड़ रखा था, और एक रंडी की तरह उसे अपने गले तक उतारने की कोशिश कर रही थी. असलम उसकी इस हिम्मत से बहुत खुश था.

असलम (किंजल के बाल सहलाते हुए): मेरी जान, क्या ज़ुबान है तेरी. लगता है तेरा पति तुझे कभी ये मज़ा नही दे पाया. तुम जैसे संस्कारी औरतें जब हमसे छुड़वाने आती है, तब उनके अंदर की रंडी जाग जाती है.

असलम की बात सुन कर युसुफ और साजिद के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान थी. जैसे उन्होने आज एक और औरत को रंडी बना दिया हो.

मैं (साजिद का लंड मूह से बाहर निकाक़ल कर): असलम तुम सच कह रहे हो. युसुफ जी से चूड़ी, तब से मैं भी रंडी बन गयी हू.

युसुफ: संगीता मेरी जान, बस तुम नही जो भी आपकी औरत हम से एक बार छुड़वा लेती है वो हमारे लंड की प्यासी हो जाती हे.

साजिद (मेरे मूह में लंड गुसा कर): हा भाई जान, और इनकी औरतें पट्ट भी आसानी से जाती हे. पता नही इनके मर्द छोड़ते भी है या नही.

असलम (किंजल भाभी का मूह पकड़ कर छोड़ते हुए): सही कहा, अब तक हमने कितनी को छोड़ा होगा. पर भाई जान इन दोनो जैसी आज तक नही मिली है. दोनो क्या तैयार हो कर आई है जैसे कही आचे काम के लिए जेया रही हो.

किंजल भाभी (उसका लंड बाहर निकाल कर): सही काम के लिए तो तैयार हुए है. दीदी ने बताया की आपको संस्कारी औरतें पसंद है तो.

असलम: वाह मेरी जान, क्या बात कही है. सच में ऐसी सारी में साज-धज कर कोई निकलती है मेरा लंड हलचल करने लगता है.

साजिद: पर हमे पता है ये जितनी संस्कारी बनने का ढोंग करती हे, इतनी ही हमारे लंड की प्यासी होती है.

युसुफ, जो अब तक सब कुछ देख रहा था और सुन रहा था, उससे अब सबर नही हुआ. उसका लंड भी कस्स कर तंन चुका था.

युसुफ: बस करो दोस्तों! इन रंडियों की छूट को अब और इंतेज़ार नही करवा सकते. संगीता, मेरी जान, तूने मेरा लंड पहले चखा है. आज फिर बता, कहाँ से शुरू करू?

साजिद ने एक ज़ोर की आ के साथ अपना लंड मेरे मूह से निकाला. मैं थूक और साजिद के प्री-कम को चाट रही थी, मेरी आँखों में अब सिर्फ़ लंड लेने की भूक थी.

मैं: युसुफ जी, मेरा जिस्म आपकी रंडी है. मेरी छूट और मेरी गांद दोनो आपके लंड के लिए तैयार है. पर किंजल भाभी पहली बार है, इनकी बड़ी प्यासी छूट को पहले आप ही शांति दो!

युसुफ ने मेरी बात सुन कर किंजल की तरफ देखा. किंजल अब असलम का लंड चूस कर उठ चुकी थी और पनटी में ही काँप रही थी.

युसुफ (किंजल के करीब जेया कर): मेरी जान, तुम्हारी छूट का दरवाज़ा खोलने का मौका मुझे दो. तुम्हारी ये नयी ज़िंदगी मेरे लंड से शुरू होगी.

युसुफ ने बिना देर किए किंजल की पनटी को नीचे खिसका दिया और उसकी प्यासी, रस्स भारी छूट पर हाथ रखा. किंजल एक पल के लिए सिसक उठी. युसुफ ने किंजल को उठा कर बेड पर पटक दिया. असलम और साजिद, अब मेरी और किंजल भाभी की बगल में खड़े थे.

युसुफ ने अपने तगड़े लंड का टोपी किंजल की छूट के च्छेद पर रखा. किंजल की छूट आज तक सिर्फ़ मेरे भाई और परेश जी का लंड झेल चुकी थी. युसुफ का लंड उसके मुक़ाबले में बहुत ज़्यादा मोटा और लंबा था.

किंजल (दर्द और दर्र से): अया… युसुफ जी… धीरे… ये बहुत मोटा है…

युसुफ (एक ज़ोर का थप्पड़ किंजल के मूह पर मारते हुए): चुप! रंडी की तरह चीख मत. जब इस लंड का नशा चढ़ जाएगा, तो तू खुद चिल्ला-चिल्ला कर माँगेगी.

और उसने बिना किसी रहम के एक ही धक्के में अपना लंड किंजल की छूट में आधा उतार दिया. किंजल की चीख रूम में गूँज उठी.

किंजल: आआआआआआआः! मा! मॅर गयी! फटत गयी मेरी छूट!

उसकी आँखों से पानी निकल आया, उसके जिस्म में तेज़ झटका लगा. पर युसुफ ने कोई रहम नही किया. उसने दूसरा, और भी तगड़ा धक्का मारा, और उसका पूरा लंड किंजल की छूट की गहराई में समा गया. किंजल का मूह खुला रह गया, वो बस सिसक रही थी.

युसुफ (हेस्ट हुए): देख लिया दोस्तों, ये है हमारे लंड की ताक़त. पहली बार में ही इसकी छूट को फाड़ के रख दिया.

जब किंजल युसुफ के लंड से चुड रही थी, तब असलम मेरे पास आया. मैं तो कब से इस पल का इंतेज़ार कर रही थी. असलम ने मेरे जिस्म को देखा और एक नॉटी स्माइल दी.

असलम: संगीता, तुम तो पहले से तैयार हो. तुम आई हो तब से मेरा दिल तेरी गांद पर है. तो तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए मैं तुम्हारी गांद का दरवाज़ा खोलूँगा.

मेरे अंदर एक तेज़ करेंट दौड़ गया. गांद मरवाने का ख़याल मुझे हमेशा से एग्ज़ाइटेड करता था.

मैं (अपनी गांद उपर उठाते हुए): अया… असलम जी. मैं गांद में लंड लेने की बहुत शौकीन हो गयी हू. मेरी गांद तो कब से लंड के लिए तड़प रही है. रंडी की तरह मारिए मेरी गांद को!

असलम ने मेरी गांद के बीच अपने लंड का टोपी रखा. उसने थूक लगाया और फिर एक तगड़ा धक्का मारा. मेरी चीख किंजल की चीख से मिल गयी.

मैं: अयाया! गया.

असलम का लंड मेरी गांद में धीरे-धीरे अंदर उतार रहा था. ये दर्द और मज़े का ऐसा मिलन था, जो मेरी रूह को हिला गया. जब असलम का पूरा लंड मेरी गांद में घुस गया, तो मेरी आँखों में पानी आ गया, पर मेरे होंठो पर एक मुस्कान थी. जो मुझे रंडी बन जाने का एहसास दिला रही थी.

युसुफ जी किंजल की छूट को ऐसे बुरी तरह से छोड़ रहा था की उसकी कमर बेड पर ज़ोर-ज़ोर से टकरा रही थी. किंजल का चेहरा पहले दर्द से बिगड़ा था, पर अब उसकी आँखों में खुशी और नशा सॉफ दिख रहा था. उसका दर अब पूरी तरह से युसुफ के तगड़े लंड के आयेज हार चुका था.

किंजल (ज़ोर से सिसकारी भरते हुए): ह… हा युसुफ जीिीइ… और ज़ोर से! मेरी छूट… मेरी छूट को फाड़ दो! मैं आपकी रंडी हू! सिर्फ़ आपके लंड के लिए बनी हू!

युसुफ ने उसकी ये बातें सुन कर एक ज़ोर का धक्का मारा, और कुछ ही पलों में उसके जिस्म में तेज़ झटके आने लगे. उसका तगड़ा, गरम माल किंजल की छूट की गहराई में पिचकारी की तरह च्छुत गया. युसुफ हानफते हुए किंजल के उपर गिर गया. किंजल भी उस माल से भर चुकी थी और उसके होंठों पर एक गहरी संतुष्ट मुस्कान थी.

इधर, मेरी गांद में असलम का लंड अब तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था. गांद की वो टाइट गर्मी असलम को पागल कर रही थी, और मुझे वो दर्द और मज़ा एक अनोखा नशा दे रहा था. साजिद मेरे बूब्स मसालते हुए ये सब देख रहा था.

मैं (चीखते हुए): आ… असलम जी… मेरी गांद… फटत रही हे! और घुसाओ! गांद को फाड़ दो! मैं आपके दोस्तों की रंडी हू!

असलम ने मेरी इस चीख पर जोश में आ कर दो-टीन तगड़े धक्के मारे. मेरे जिस्म में भी झटके लगे और मैं पूरी तरह से ढीली पद गयी. असलम का गरम पानी मेरी गांद के अंदर छ्छूट गया. वो भी हानफते हुए मेरे उपर गिर गया.

अब दोनो मर्द मेरे और किंजल के उपर थे. और उधर साजिद, वो इस मंज़र को देख कर और ज़्यादा गरम और ज़्यादा बेचैन हो गया. उसका लंड, जो अब तक हवा में लहरा रहा था, अब पूरी तरह से पानी छ्चोड़ने को तैयार था. उसने मेरे पास आ कर मेरे बूब्स को ज़ोर से मसलना शुरू कर दिया, और मेरे मूह पर अपने लंड का रस्स गिरने लगा. मैं भी उसके रस्स को एक अची रंडी की तरह छत रही थी.

साजिद: लाला, क्या रंडी मिली है. इसको देख कर तो अपने ग्रूप के सभी लोग पागल हो जाएँगे. साला अब पता चला तुम इसकी क्यूँ इतनी तारीफ कर रहे थे.

तो बे कंटिन्यू…

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