गर्लफ्रेंड की चुदाई का मौका

सॉरी, सेक्स स्टोरी रीडर्स, इतना लाते स्टोरी पोस्ट करने के लिए. वो छ्होटी सिस की मॅरेज थी, सो इस वजह से तोड़ा बिज़ी हो गया था. बुत डोंट वरी, ई’म बॅक हियर.

उस दिन पीनाज़ के साथ गार्डेन में जो कुछ भी हुआ, उसके बाद मुझे उसको छोड़ने की इंतेज़री और बढ़ गयी. हम अब कपल के जैसे मिलने लगे थे. मैं उसके लिए चॉक्लेट्स ले कर जाता, वो बहुत हॅपी हो जाती. जब भी मैं उसे मिलता, उसे खा जाने वाली नज़रों से देखता. वो भी मुझे सेक्सी वाली स्माइल देती.

हम जब भी मिलते, मैं उसे पूछता, की यार तुमसे अकेले में अब कब मुलाक़ात होगी. तब वो बोलती, की यार कुछ सेट्टिंग ही नही हो रहा है. तब मैने उसे कह भी दिया, की यार कहीं तुम भी तमन्ना की तरह मुझे घुमा तो नही रही ना?

ये सुन कर वो तोड़ा गुस्सा हो गयी. उसका चेहरा लाल हो गया, पर उसने कुछ कहा नही. वो शायद कुछ कहती. पर उससे पहले शबनम वहाँ आ गयी, जिस सोडा शॉप पे हम बैठे थे. शबनम को आता देख वो मुझे बाइ कह कर चली गयी. वो और पीनाज़, उन दोनो ने एक-दूसरे को हल्की सी स्माइल दी, वो फॉरमॅलिटी वाली.

शबनम: भाई, ये क्या चल रहा है?

मे: क्या चल रहा है मतलब? कुछ भी तो नही.

शबनम: अगर तुम्हारे और पीनाज़ के बीच में कुछ चल रहा है, तो यार ध्यान रखना. वो लड़की साइको टाइप है.

मे (शबनम को उपर से नीचे देखा, वो बहुत सयानी हो गयी थी): तुझे बहुत पता है इसके बारे में, बस तू यहीं करती रहती है क्या दिन भर?

शबनम: नही भाई, वो मेरी फ्रेंड है, शेलज़ा, उसकी पड़ोसी है. वो कह रही थी की पीनाज़ कभी कभी साइको हो जाती है, और वो किसी की नही सुनती फिर.

मे: ह्म… मुझे तो ऐसा कुछ नही दिखा उसमे.

शबनम (धीरे से): वो दिखेगा भी कैसे, अभी तो तुम्हे कुछ और ही दिख रहा होगा उसके अंदर (मैने वो सुन तो लिया था, पर उसे जताया नही).

मे: क्या… क्या कहा तुमने?

शबनम: कुछ नही, कुछ नही. चलो अब घर चलते है. बहुत देर हो चुकी है.

शबनम मेरी बगल मैं चल रही थी. आज पहली बार मैने ये महसूस किया की शबू की चेस्ट का साइज़ अब बढ़ रहा था. उसके उभार का कर्व अब आचे से दिख रहे थे. मैने ये भी फील किया की अब वो पहले से बड़ी हो गयी थी. और उसने जिस तरह से अभी मुझसे बात की, मुझे पक्का यकीन था की उसे चुदाई के बारे में पता होगा.

इंटरनेट अभी नया-नया सब को मिलने लगा था, सो उसने भी शायद नेट से या अपनी किसी फ्रेंड के साथ पॉर्न की सीडी देख रखी हो. पर ये सब मेरा असंप्षन था. फिर चलते-चलते हम घर पहुँच गये. फिर वो मुझे स्माइल देते हुए अपने कमरे में चली गयी. शायद वो ये मुझे दिखा रही थी, की उसे सब पता था, और अब वो बड़ी हो चुकी थी.

मेरी इस कहानी की रियल टाइम लाइन ये है की जब मैं तमन्ना से मिला, तब वो और मैं 1स्ट्रीट एअर में थे. और हमारी लोवे स्टोरी शुरू हुई. पीनाज़ और तमन्ना दोनो सेम आगे की थी. 1स्ट्रीट एअर के बाद तमन्ना दूसरे कोर्स (या इंटरकोर्स ही कह लो) के लिए दूसरी सिटी चली गयी, और हमारा वन साइडेड ब्रेकप हो गया.

मैं 2न्ड एअर में आ गया. उसके बाद मुझे पीनाज़ मिली, और उसने मुझे तमन्ना की उस सो कॉल्ड डॉक्टर से अफेर (देसी भाषा में चुदाई) की बात बताई. फिर उस गार्डेन में हम एक-दूसरे के करीब आए, और मैने उसके जिस्म का आचे से ज़ेयजा लिया.

उस दिन के बाद मेरा पीनाज़ के घर आना जाना बढ़ सा गया. पीनाज़ के घर पे उसके पापा थोड़े स्ट्रिक्ट से थे. एक बार उन्होने मेरे बारे में पूछा, तो उसने अपने पापा से कहा, “पापा, सुहैल तो मेरे भाई जैसा है. मेरे साथ ही कॉलेज में पढ़ता है, और हम साथ में प्रॉजेक्ट कर रहे है.” ये सुन कर मेरी आँखें फटी रह गयी, की ये लड़की क्या बाला थी. निकलते वक़्त मैने उसे पूछा,

मे: यार पीनू, कुछ और बहाना बना लेती. पर भाई का बहाना…?

पीनाज़: वो तुम हो क्या? मैने तुम्हे रखी तो नही बँधी ना?

मे: नही…

पीनाज़: तो फिर, इतना टेन्षन क्यूँ ले रहे हो? और वैसे भी तुम्हे भाई बनाने से पहले हमने वो सब तो कर लिया है, जो भाई-बेहन में जनरली नही होता, सो जस्ट रिलॅक्स यार.

मे: ह्म्‍म्म्म… ओक. (और मैं अपने घर के लिए निकल पड़ा. पर तोड़ा ही आयेज गया, तब पीछे से पीनाज़ ने आवाज़ लगाई, सो मैने मूड के देखा)

पीनाज़ (स्माइल देते हुए) अगर तुम मेरे भाई बन भी गये, तो भी अपने में तो ये सब चलता ही है ना (और वो शरमाती हुई घर में भाग गयी).

मैं उस वक़्त उसका ये इशारा समझ नही पाया, और अपने घर वापस आ गया. पीनाज़ ने जो भाई बेहन का बहाना बनाया, उससे फ़ायदा ये हुआ की अब मुझे उसके घर जाने में कोई रोक-टोक नही होने लगी. मैं उसको चिढ़ते हुए उसके मों के आयेज उसे आपा (दीदी) कहने लगा. और जब भी मौका मिलता, तब आपा को पकड़ के उसके मज़े लेता.

रोमॅन्स तो हो रहा था, पर पीनाज़ की चुदाई का कोई सीन नही बन रहा था. एक बार घर पे कोई नही था, तब चान्स लिया, पर किसी के आने की वजह से बीच में ही हमे रुकना पड़ा. मेरा कलपद हो गया. मैं रुत कर वहाँ से चला गया. फिर कुछ दीनो तक पीनू से नही मिला.

कुछ डेज़ बाद वो मुझे मार्केट में मिली, और उसने मुझे एक गुड न्यूज़ दी की उसके घर वेल सब 2 डेज़ के लिए शादी में जेया रहे थे. मैने मेरे एग्ज़ॅम्स का बहाना बनाया है, अगर सब सेट हो गया, तो फिर हम एक नाइट मेरे घर मैं स्पेंड कर सकते है. ये सुन कर तो मेरे मॅन मैं लड्डू फूटने लगे. मैं प्राय करने लगा की, जैसा पीनाज़ ने सोच रखा था, वैसा ही हो.

उसने बताया, की वो नेक्स्ट सॅटर्डे ईव्निंग को निकलेंगे. और सॅटर्डे नाइट हमारी होगी. जो भी सीन बनता है, वो मुझे सॅटर्डे आफ्टरनून को बताएगी. और उसने मुझे अपने घर का पिछला गाते वो खुला रखेगी, उस दिन ये मुझे बताया.

मैं सॅटर्डे का बेसब्री से इंतेज़ार करने लगा. ऐसे लगता था जैसे टाइम स्लो हो चुका था. दिन निकालने लगे, और फिर फाइनली सॅटर्डे आ गया. आफ्टरनून को मैं हमारी फिक्स जगह पे पहुँच गया. मैने 1 घंटे तक वेट किया, पर वो नही आई. मुझे लगा की तमन्ना की तरह ये भी गच्चा दे गयी, मुझे.

तभी रोड की सामने वाली शॉप में मुझे पीनाज़ दिखाई दी. उसके चेहरे की हॅपीनेस को देख कर मैं भी खुश हो गया. उसने मुझे हाथो की उंगलियों से 11 का इशारा किया, और थंब्स उप दिखाया. मैने भी थंब्स उप किया, तो वो फिर वहाँ से स्माइल देते हुए चली गयी. वो शायद किसी हड़बड़ी में थी.

अब मुझे घड़ी में 11 बजने का इंतेज़ार था. मैने घर पे दोस्त के वहाँ नाइट रुकने का बहाना मार कर मैं 8 बजे ही घर से निकल गया, और दोस्तों के साथ घूम फिर के लास्ट में 11 के करीब पीनाज़ के घर आ गया. फिर उसने जैसे बताया था, मैं धीरे से पिछले गाते से एंटर हो गया. उसने वो गाते ओपन ही रखा था.

अंदर एंटर हुआ तो मैं हॉल में हल्की सी रोशनी थी, मैने एंटर हो कर गाते लॉक कर दिया. वहाँ देखा तो पीनाज़ भी एक कोने में बैठी थी. उसे पीछे से जेया कर मैने हग किया, और “डार्लिंग, मैं आ गया” बोला, उसने मुझे इशारे से चुप रहने को कहा.

मुझे तोड़ा अजीब लगा, क्यूंकी घर में सिर्फ़ हम दो ही थे, तो फिर दर्र किस का? तभी उसके मों-दाद वाले रूम से आ आ और छूट में लंड की वो पाचक-पाचक वाली यूनिवर्सल साउंड आने लगी. मैने पीनाज़ की तरफ देखा और उस कमरे की और जाने लगा, तो उसने मुझे रुकने का इशारा किया. पर मैं कहाँ सुनने वाला था. अंदर कमरे में देखा तो एक औरत बेड पे नीचे लेती हुई थी, और उपर से एक लड़का उन्हे छोड़ रहा था. लड़के की आगे उससे कम ही लग रही थी.

तभी वहाँ से मेरा हाथ पकड़ कर पीनाज़ मुझे खींच कर अपने बेडरूम में ले गयी.

मे: उस बेडरूम में क्या आंटी थी वो? पर वो तुम्हारे पापा नही थे? तो क्या वो किसी और के साथ…?

पीनाज़: बकवास मत कर तू. मम्मी-पापा घर पे नही है, तभी तो तुझे यहाँ बुलाया है, आज.

मे: तो फिर वो कौन है, जो दूसरे कमरे में छुड़वा रही है?

पीनाज़: वो… वो कुसुम आंटी है. मेरी पड़ोसन है. एक दिन घर में उसने मुझे तुम्हारे साथ किस्सिंग करते हुए देख लिया था, और ये बात उसने मों को नही बताई. उसने मेरे पास अकेले में आ कर कहा, की इस उमर में ये सब कामन है. फिर उसने कहा की उसके भी बाय्फ्रेंड है, जिन्हे वो अपने घर नही बुला सकती थी. सो उसने मुझे बोला की अगर कभी तुम्हारे घर चान्स बनता है, तो मैं अपने ब्फ को बुला लूँगी, और वो अपने ब्फ को. और हम दोनो का सीक्रेट किसी को पता नही चलेगा.

और वो स्माइल देने लगी.

मैने भी फिर देर ना करते हुए, उसको बाहों में भरते हुए, उसके पिंक होंठो पे अपने होंठ रख दिए. फिर उसका रस्स-पॅयन करने लगा.

क्या मुझे पीनाज़ की पूरी मिल पति है या नही, ये बतौँगा नेक्स्ट पार्ट मैं.

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