नौकर ने मालकिन को चोद कर गुलाम बनाया

नमस्कार दोस्तों, मैं अमृता अपनी चुदाई कहानी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा, और आपको पसंद भी आया होगा.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की मेरे नौकर मोनू ने मुझे पकड़ लिया, और चूमने लगा. मैं भी बहुत गरम थी, और उसके काबू में आ गयी. फिर उसने मुझे उपर से नंगी करके मेरे बूब्स चूज़. उसके बाद मुझे लिटा दिया, और मेरे बूब्स चूसने के बाद नाभि चूसने-चाटने लगा. उसके बाद वो मेरी छूट पर आ गया. अब आयेज-

उसने मेरे पाजामे के एलास्टिक में कमर से हाथ डाला, और उसको नीचे खींचने लगा. पाजामे के साथ मेरी पनटी भी नीचे जाने लगी. पाजामा और पनटी नीचे जाते गये, और मेरी काम-रस्स से भीगी हुई छूट नंगी हो गयी.

मेरी छूट क्लीन-शेव्ड थी, पिछली सुबा ही मैने शेव की थी. छूट देख कर मोनू के चेहरे पर एक हवस भारी मुस्कान आ गयी. छूट को देखने के बाद उसने मेरी तरफ देखा. मैने अपनी आँखें शर्मा कर दूसरी तरफ कर ली.

फिर मोनू ने अपना फेस छूट की तरफ किया, और अपने होंठ मेरी छूट के होंठो पर लगा दिए. उसका मूह मेरी छूट पर लगते ही मेरे मूह से आ निकल गयी. अब वो मेरी छूट पर अपनी जीभ का जादू चलाने लगा. वो मेरी छूट चाटने लगा, और मूह में वकूँ क्रियेट करके उसको चूसने लगा.

मैं तो मानो जन्नत में पहुँच गयी थी, मुझे इतना मज़ा आ रहा था. इतने मज़े में कब मेरी गांद खुद बा खुद उपर उठने लगी, मुझे पता ही नही चला. फिर मैने अपना एक हाथ मोनू के सर पर रखा, और उसको छूट में दबाने लगी. स्वारग्लोक का मज़ा दे रहा था वो लौंडा मुझे.

फिर उसने एक हाथ से छूट के लिप्स को खोला, और उसके अंदर जीभ डालने लगी. इससे मेरा शरीर काँपने लगा, और मेरी छूट ने पानी छ्चोढ़ दिया. मोनू ने मूह लगा कर सारा पानी पी लिया.

फिर उसने अपने कपड़े उतार दिए, और पूरा नंगा हो गया. उसके बाद वो मेरी टाँगों के बीच आया. अब उसके लंड और मेरी छूट में कुछ इंचस का फांसला था. उसने अपना लंड अपने हाथ में लिया, और उसको मेरी छूट के मूह पर लगाया.

फिर वो लंड को छूट पर रगड़ने लगा. जब भी वो लंड रगड़ता, मेरे जिस्म में एक झटका लगता. मैं तरस रही थी लंड लेने के लिए, लेकिन वो डाल ही नही रहा था. अपनी वासना की आग से हार कर आख़िरकार मैने उसको बोला-

मैं: मोनू डाल दो ना अब अंदर.

वो हस्सा और बोला: साली रंडी, मैने तेरी छूट को अपने मूह से गीला किया. तू कुछ नही करेगी?

मैं समझ गयी वो मुझसे लंड चुसवाना चाहता था. मैं जल्दी से उठ के उसके सामने घोड़ी बनी, और उसका लंड हाथ में लेके हिलने लगी. फिर उसके लंड पर जीभ फेरने लगी. वो मुझे लंड मूह में डालने को बोला.

मैने लंड मूह में तो डाल लिया, लेकिन मुझे ब्लोवजोब देना नही आता था. फिर उसने मुझे बताया की कैसे करना था, और मेरे बाल पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से मेरा मूह छोड़ने लगा.

वो पागलों की तरह मेरे मूह की चुदाई करने लगा, जैसे मैं कोई रंडी थी. लेकिन सच ये भी है, की मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मूह चुदाई के दौरान वो पीछे से मेरी छूट की फिंगरिंग भी कर रहा था. मैं पूरी पागल हो चुकी थी.

कुछ देर की मूह चुदाई के बाद और छूट की फिंगरिंग के बाद उसने लंड मेरे मूह से निकाला. मैं जल्दी से सीधी लेट गयी, और टाँगें खोल दी. फिर मैं बोली-

मैं: अब डाल दो जल्दी.

उसने मेरी छूट को ज़ोर से मसला और बोला: पहले बोल तू मेरी रंडी है.

मैं: अब ये क्या तमाशा है?

मोनू: बोल साली, वरना ऐसे ही छ्चोढ़ दूँगा बिना छोड़े.

मुझे चुदाई की बहुत प्यास थी, तो मैं बोली: हा मैं तुम्हारी रंडी हू. तुम्हारे लंड की दीवानी ( ये मैने अपनी तरफ से बोला, ताकि वो खुश हो जाए).

मोनू: बोल तू मेरी नौकरानी है और मैं तेरा मालिक.

मैने कभी सोचा नही था की इतना सा लौंडा ये सब कर सकता होगा. फिर मैं बोली: हा मेरे मालिक, मैं आपकी नौकरानी हू. आपके लंड की गुलाम. अब खुश?

वो हस्सा और उसने अपना लंड मेरी छूट के मूह पर सेट किया. फिर उसने ज़ोर का धक्का मारा, जिससे एक ही बार में उसका आधा लंड मेरी छूट को चीरता हुआ अंदर चला गया. मेरे मूह से ज़ोर की चीख निकली, लेकिन वो रुका नही.

वो पीछे हुआ, और लंड को छूट के मुहाने तक ले गया. फिर उसने दोबारा ज़ोर का धक्का मारा, और इस बार पूरा लंड छूट में घुस गया. दर्द से मेरा जिस्म काँपने लगा. पूरा लंड डाल कर वो मेरे उपर लेट गया, और मेरे होंठ और बूब्स चूसने लगा.

वो लगातार होंठ और बूब्स चूस्टा रहा. मेरा दर्द धीरे-धीरे कम होता गया, और अब दर्द से ज़्यादा मज़ा महसूस हो रहा था. जब दर्द कम हुआ तो मैने गांद हिला कर उसको चुदाई शुरू करने का इशारा किया.

वो मेरा इशारा समझ गया, और लंड अंदर-बाहर करके मुझे छोड़ने लगा. अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मैं छूट चुड़वते हुए उसके मूह को अपने बूब्स में दबा रही थी. वो भी मेरे निपल्स को मूह में खींच-खींच कर चूस रहा था.

कुछ देर ऐसे ही चुदाई चलती रही. फिर उसने लंड मेरी छूट से बाहर निकाला. मैने नीचे देखा, तो उसके लंड और मेरी छूट पर तोड़ा ब्लड लगा हुआ था. फिर उसने वेट टिश्यू से अपना लंड और मेरी छूट दोनो सॉफ किए.

उसके बाद उसने मुझे एक तरफ घुमाया और मेरी दोनो टाँगें जॉब दी. फिर नीचे से वो मेरी छूट में लंड डाल दिया और छोड़ने लगा. इस पोज़िशन में भी बहुत मज़ा आ रहा था. चुदाई करते हुए वो मेरे चूतड़ को मसल रहा था.

धीरे-धीरे वो बहुत ज़ोर के धक्के मारने लगा, जिससे उसका लंड मेरी बच्चेड़नी पर लगने लगा. मैने उसको धीरे करने को कहा लेकिन वो नही माना. फिर उसने मुझे घोड़ी बना लिया, और पीछे से छोड़ने लगा.

चुदाई के दौरान वो मेरी गांद मसलता रहा. अब मैं तीसरी बार झड़ने वाली थी, और झाड़ते ही गिर पड़ी. वो मेरे उपर लेट कर छूट में लंड पेलता रहा, जब तक की उसके माल से मेरी छूट नही भर गयी. फिर साइड में होके लेट गया.

उस रात के बाद से वो जब चाहे मुझे छोड़ता है. उसका मॅन हो तो काम करता है, नही तो मुझे ही करना पड़ता है. लेकिन चुदाई का मज़ा बहुत आता है. इसीलिए मैं उसकी गुलामी झेल रही हू.

दोस्तों कहानी यहाँ ख़तम होती है. इसकी फीडबॅक आप औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर दे सकते है. गुड बाइ.

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