ननद-भाभी के ग्रूप सेक्स की शुरुआत

चुदाई कहानी अब आयेज-

किंजल भाभी की आँखें हैरानी से बड़ी हो गयी. उन्होने अपना हाथ मेरे हाथ पर और कस्स दिया. उनके चेहरे पर अब गहरा शॉक था, साँसें तेज़ हो गयी थी.

किंजल भाभी (सिसकारी भरते हुए): सच में दीदी. क्या आपने दूसरे धरम वाले से चुडवाया?

मैं: हा भाभी. वो होटेल का मालिक था. उनका असली नाम युसुफ ख़ान है. एक बार मैं उनके होटेल पर नाश्ता करने गयी थी. उस टाइम वो मुझे बहुत घूर रहे थे. जब हम उनको पैसा देने गये, तब उन्होने मुझे अपना विज़िटिंग कार्ड दिया. मुझे वो आचे लगे तो मैने वो कार्ड संभाल कर रखा था. अब होटेल का नाम शिवम था और कार्ड पर उनका नाम लाला लिखा था, तो मैं मिलने चली गयी. अब मुझे क्या पता था वो दूसरे धरम के निकलेंगे.

किंजल भाभी का मूह खुला रह गया. उनकी आँखों में शॉक के साथ अब एक अजीब सी उत्सुकता और लालच दिख रहा था. उन्होने मुझे उपर से नीचे तक देखा, जैसे वो मेरे जिस्म में उसके लंड का नशा ढूँढ रही हो

किंजल भाभी (धीमी, कामपति आवाज़ में): उनका लंड कैसा होता है दीदी? क्या वो सच में अलग होता है? मैने तो बस सुना ही है. पर आपने तो खुद एक्सपीरियेन्स किया है.

मैं (उनके करीब झुक कर, मेरी साँसों में गर्मी थी): भाभी. जैसा मैने कभी सोचा भी नही था. उनका लंड. वो सिर्फ़ टोपी-कटा ही नही था. उसमे एक अजीब सी गर्मी थी, एक ताक़त. जब वो मेरी छूट में घुसा ना, तो लगा जैसे मेरी छूट को आज तक किसी ने ठीक से छोड़ा ही नही था.

किंजल भाभी (अपने होंठो को चाट-ते हुए): इतना मज़ा. सच में दीदी. तो क्या वो परेश जी से भी ज़्यादा तगड़ा था? क्या वो आपकी छूट को पूरी तरह से भर पाया?

मैं (एक नॉटी स्माइल देते हुए): भाभी, परेश जी से बिल्कुल अगाल सा अनुभव हुआ. युसुफ जी के लंड ने मेरी छूट को ऐसे भरा की लगता है अब मेरी छूट को हर प्रकार के लंड लेने चाहिए. उन्होने कहा, ऐसी छूटों में जो प्यास होती है, वो हम लोगों को पागल कर देती है. और सच काहु तो उसकी हर बात सच लगी. मेरी छूट तो अब उनकी रंडी बनने को तैयार है.

किंजल भाभी की आँखों में अब वासना सॉफ दिख रही थी. उनका हाथ धीरे से मेरी जाँघ पर आया और उसने हल्का सा दबाव डाला.

किंजल भाभी (धीरे से, उनकी आवाज़ में एक बेचैनी थी): रंडी. तो क्या वो आपको ऐसी गंदी बातें भी बोल रहे थे? और आपको अछा लगा?

मैं (उनके हाथ पर अपना हाथ रखते हुए): भाभी, जब उनका लंड मेरी छूट में था ना, तो उनकी हर बात नशा लग रही थी. उसकी बातें, उनकी ताक़त. उन्होने कहा, एक बार जो औरत हमारा लंड चख लेती है, वो फिर कभी अपने पति के पास नही जाती. उसका जिस्म और रूह दोनो हमारे हो जाते है.

किंजल भाभी ने एक गहरी साँस ली. उनकी नज़रें कही डोर हवा में ठहरी थी, जैसे वो कुछ सोच रही हो उनका हाथ मेरी जाँघ पर अब हल्का-हल्का सहला रहा था.

किंजल भाभी (धीमी, सिसकते आवाज़ में): तो क्या दीदी. क्या हम औरतें सच में इतनी प्यासी होती है? क्या हमारी छूट की प्यास को सच में उनका लंड ही बुझा सकता है?

मैं (उनका हाथ और उपर अपनी जाँघ पर ले जाते हुए): भाभी. मुझे तो यही लगता है की हम औरतें कभी एक लंड से खुश नही रह सकती. मेरी छूट को तो अब बस नये-नये लंड लेने की आदत पद गयी है. और उन्होने कहा, उसके दोस्त भी उनके जैसे ही है. सब एक-दूसरे को सपोर्ट करते है इश्स खेल में.

किंजल भाभी ने मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में अब जुनून था. वो शरम और उत्सुकता के बीच झूल रही थी.

मैं: मैं तो अब युसुफ जी के दोस्तों के साथ चूड़ना चाहती हू. अगर आप का भी मॅन है तो मेरे साथ चलना.

किंजल भाभी: ठीक है.

उसके बाद, किंजल भाभी के चेहरे पर एक अजीब सी एग्ज़ाइटिंग स्माइल थी. उनकी आँखों में वही चमक थी जो कुछ देर पहले मेरे चेहरे पर थी. हम दोनो की साँसें अब और तेज़ थी, और हमारे जिस्म में एक नया जुनून उभर रहा था.

हमने फैंसला किया की देर नही करनी चाहिए. मैं और किंजल भाभी प्फो पर गये. युसुफ जी का नंबर मेरे दिमाग़ में घुल चुका था. मैने नंबर मिलाया. किंजल भाभी मेरे बगल में खड़ी, मेरी बातें सुन कर शर्मा रही थी.

कॉल पर बातें:-

मैं: हेलो युसुफ जी. मैं संगीता बोल रही हू.

युसुफ (आवाज़ में हवस थी): अया, संगीता मेरी जान. तेरी आवाज़ सुनते ही मेरा लंड फिर हलचल करने गया. कैसी है मेरी प्यासी छूट? क्या अभी से मेरे लंड को तरसने लगी?

मैं (धीरे से हस्सी): तरस तो रही हू युसुफ जी. आपके लंड का नशा ही कुछ ऐसा है. पर मैं सिर्फ़ अपने लिए नही, आपके लिए एक नया शिकार लेकर आई हू.

युसुफ (आवाज़ में उत्सुकता थी): नया शिकार. क्या मतलब मेरी जान? कोई रसीली छूट और मिली है जो हमारे लंड को चखना चाहती है?

मैं (किंजल भाभी की तरफ देखा, उन्होने आँखों से इशारा किया): हा युसुफ जी. मेरी भाभी भी आपके और आपके दोस्तों के लंड का कमाल देखना चाहती है. उन्हे भी आपके लंड का नशा चढ़ गया है मेरी बातें सुन कर. वो भी अब आपकी रंडी बनने को तैयार है.

युसुफ (ज़ोर से हास्से): ओह हो, संगीता मेरी जान. तुम तो कमाल हो. एक औरत को छोड़ा, और वो अब अपनी भाभी को भी हमारे पास ले आई. बहुत खूब. बताना कब आ रही हो तुम दोनो. हमारे लंड तो हमेशा तैयार है तुम जैसी प्यासी रंडियों के लिए.

मैं: जल्दी ही युसुफ जी. हमारी छूट बहुत तड़प रही है. आप और आपके दोस्त तैयार रहना. इस बार आपकी और आपके दोस्तों की ताक़त देखेंगे.

युसुफ: हम तैयार है मेरी जान. तुम्हारी और तुम्हारी भाभी की छूट को तबाह करने के लिए. जब मॅन करे आ जाना. हमारा दरवाज़ा और हमारे लंड हमेशा खुले है तुम औरतों के लिए.

मैं: धन्यवाद युसुफ जी. जल्दी मिलते है.

कॉल ख़तम होते ही, किंजल भाभी ने शरमाते हुए मुझे देखा. उनके चेहरे पर एक गहरी लाली थी, पर आँखों में एक अजीब सा जुनून चमक रहा था. उनकी साँसें भी तेज़ चल रही थी. हम दोनो ने एक-दूसरे को देखा, और हमारी आँखों में एक नया, साझा इरादा चमक रहा था. अब देर करना बेकार था. हमने युसुफ जी के होटेल जाने का प्लान बनाया.

एक दिन मैने घर पर झूठ बोला की हम दोनो मेरी एक दोस्त के घर पर पूजा रखी है तो उसके घर जाना है. और मैने मेरे छ्होटे भाई अमरदीप से कहा की मैं किंजल को मेरे साथ लेकर जाती हू. मैने मम्मी को बोल दिया की मैं और किंजल भाभी जेया रहे है, आप बच्चो का ध्यान रखना.

पूजा के बहाने हम घर से निकले. सब को लगा हम संस्कारी औरतें है, पर अंदर से हम हवस से भारी थी, उन मर्दों की प्यासी जो हमारी छूट और गांद का स्वाद लेंगे.

किंजल भाभी ने ब्राइट येल्लो कॉटन सारी पहनी, जिसका पल्लू उड़ता हुआ उनकी जवानी को इन्वाइट कर रहा था. उनका डीप पिंक स्लीव्ले ब्लाउस उनके भरे हुए बूब्स को इतना टाइट्ली रॅप किए था, की हर नज़र वहीं ठहर जाए, उनकी हर साँस पर च्चती उछाल रही थी. सारी उनकी गोल गांद पर ऐसे लिपट रही थी की हर स्टेप पर उसकी शेप क्लियर्ली दिख रही थी, किसी भी मर्द को पीछे से छोड़ने के लिए उकसाने को काफ़ी.

खुले बाल और लाल होंठ, बस लंड चूसने को बेताब थे. उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो सॉफ बता रही थी की वो नये लंड से चूड़ने को कितनी बेचैन है.

मैने डीप बॉटल ग्रीन की सॉफ्ट सारी पहनी, जो मेरी टाइट बॉडी पर चिपकी थी. हेवी डिज़ाइनर ब्लाउस में मेरे बूब्स का उभार इतना क्लियर और टेंप्टिंग था की हर मर्द का हाथ खुद-बा-खुद मेरी च्चती तक पहुँचने को मचल जाए.

मेरी सारी मेरी बड़ी गांद पर ऐसे कस्स कर बँधी थी की हर मूव्मेंट पर उसके उभार सॉफ दिख रहे थे, हर आँख को अपनी तरफ खींचते हुए. बोल्ड रेड लिपस्टिक और तेज़ काजल मेरी च्छूपी हुई हवस को चीख-चीख कर बता रहे थे.

हम दोनो ने माँग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्रा पहना था. जो हमारे लुक को तोड़ा सांकारी भी बना रहा था. हम दोनो एक-दूसरे को देखते तो आँखों में सिर्फ़ आग थी.

हम दोनो घर से निकले और एक ऑटो पकड़ा. ऑटो होटेल की तरफ भागा. हर पल धड़कने तेज़ हो रही थी. प्यास बढ़ रही थी. होटेल में हमारी छूट और गांद का इंतेज़ार था.

हम ऑटो से उतार कर होटेल के सामने खड़े हुए. दिल इतना तेज़ी से धड़क रहा था जैसे अभी बाहर निकल आएगा. अंदर कदम रखते ही मेरी नज़र सीधे काउंटर पर बैठे युसुफ जी पर पड़ी.

मैं उनके पास गयी, और मेरे पीछे किंजल भाभी थी. हमने हल्की सी स्माइल दी. युसुफ जी ने हमे देखा तो उनकी आँखें चमक उठी. उनके चेहरे पर जोश और लालच सॉफ दिख रहा था. उन्होने हमे उपर से नीचे तक घूरा, उनकी नज़रें हमारे गरम जिस्म पर अटकी थी, ख़ास कर हमारी उभरी हुई गांद पर. उनके फेस पर लालिमा च्छा गयी थी.

युसुफ: आ संगीता जी, आप तो अकेली नही आई इस बार. और ये… ये तो आपकी भाभी है, रिघ्त?

मैं (किंजल भाभी की तरफ इशारा करते हुए): हा लाला जी, ये मेरी भाभी किंजल है. इन्हे भी आपके और आपके दोस्तों की कंपनी का मज़ा चखना है.

युसुफ (किंजल भाभी की और देखते हुए): संगीता जी आप दोनो नाश्ता करने के बाद अपनी भाभी को लेकर रूम नो 309 में आ जाना.

उनके हुक्म पर मैं किंजल का हाथ पकड़ कर आयेज बढ़ी. युसुफ जी ने किसी आदमी को हमारी खातिरदारी के लिए लगाया था. किंजल अभी भी शरम और दर्र के बीच फ़ससी थी, पर उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो सॉफ बता रही थी की वो अब पीछे नही हटने वाली. हम दोनो नाश्ता करने के बाद सीडीयों तक पहुँचे, हम दोनो एक-दूसरे को बिना कुछ कहे देखते रहे.

हम जैसे-जैसे उपर जेया रहे थे हमारी गरम साँसें और तेज़ धड़कनें बता रही थी की हम अब किस मोड़ पर खड़े थे.

किंजल भाभी ने धीरे से मेरे कान में फुसफुसाया: दीदी, मेरा दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा है. क्या हम ठीक कर रहे है?

मैं (उसके हाथ को हल्के से सहला कर): भाभी, अब पीछे मत हटना. जिस मज़े के लिए आए है, वो हमारे इंतेज़ार में है. बस सोच की उन तगड़े मर्दों के लंड तेरी छूट और गांद में उतरने वाले है. अब तो बस युसुफ जी और उनके दोस्तों की रंडी बनने की तैयारी कर.

किंजल के चेहरे पर एक अजीब सी लाली च्छा गयी, उसने अपने होंठ काट लिए. तीसरे फ्लोर पर पहुँच कर हम रूम 309 के सामने खड़े हुए. दरवाज़े पर एक हल्की सी दस्तक देने पर अंदर से युसुफ जी की आवाज़ आई: आ जाओ मेरी प्यासी रानियों, दरवाज़ा खुला है.

मैने धीरे से दरवाज़ा धकेल कर किंजल भाभी के साथ अंदर कदम रखा. रूम तोड़ा अंधेरा था, एसी की ठंडक ने हमारी घबराहट को और बढ़ा दिया था. रूम में बड़े से बेड पर युसुफ के अलावा दो और तगड़े, भारी जिस्म वाले मर्द बैठे थे.

उनमे से एक, जिसका नाम असलम था (ऐसा ही युसुफ ने बाद में बताया). उसकी उमर 30 के आस-पास होगी. वो दिखने में बहुत हॅंडसम था. उसके सिल्की बाल किसी भी लड़की को उसका दीवाना बना देने को काफ़ी थी. मैने गौर से देखा तो उसकी आँखें नीली थी. मैने देखा किंजल भाभी की नज़र उसकी तरफ ठहर गयी थी. वो हमे देख कर अपने होंठो पर हाथ फेरने लगा.

दूसरा, साजिद, जो युसुफ की उमर का था पर उसकी आँखों में वही भूख थी. मैने महसूस किया की ये सभी अपनी मर्दानगी से किसी भी औरत की छूट में प्यास जगा देने को काफ़ी थे. तीनो की कशिश देख कर मैं और किंजल भाभी सहम गये.

तीनों की निगाहें हमारी सारी से ढके जिस्मों पर अटकी हुई थी. ख़ास कर मेरे टाइट ब्लाउस में क़ैद जवानी पर.

युसुफ (बेड से उठ कर): आओ मेरी प्यारी संगीता, मुझे बहुत खुशी हुई की तुम आज अपनी भाभी को भी साथ लेकर आई. हमारे दोस्त असलम और साजिद तुम दोनो का ही इंतेज़ार कर रहे थे.

असलम (उठ कर मेरे सामने आ गया, उसकी नज़रें मेरे सीने पर गाड़ी थी): संगीता जी आपके जलवे सुन लिए है. (मेरी आँखो में देख कर) युसुफ भाई आपकी बहुत तारीफ किए है. और भाई जान ने जितनी तारीफ की थी, उससे भी ज़्यादा रसीली लग रही हो. आपके बूब्स और गांद देख कर मेरा लंड तो अभी से तड़प उठा है.

असलम (किंजल भाभी की कमर में हाथ डाल कर खींच लेता है): तुम इस सारी में कितनी संस्कारी लग रही हो. मुझे ऐसी संस्कारी औरत को छोड़ने में मज़ा आता है.

किंजल भाभी का चेहरा शरम से लाल हो गया, वो पलट कर मुझे देखने लगी, पर वो वहाँ से हिल नही पा रही थी.

साजिद (मेरी तरफ देखते हुए): संगीता, अब देर मत करो. हमे तुम्हारी और तुम्हारी भाभी की छूट का स्वाद चखना है. तुम दोनो ने खुद ये रास्ता चुना है. अब बस हमारी घुलमी की तैयारी करो.

युसुफ जी ने मेरा हाथ पकड़ा और एक झटके में अपने सीने से लगा दिया.

युसुफ (मेरे कान में धीरे से बोले): आज तुम बेहद खूबसूरत लग रही हो. और तुमने अपनी भाभी को अपने साथ ला कर एक और संस्कारी को रंडी बनने का मौका दिया.

मैं उनकी बात सुन कर शर्मा गयी और किंजल कैसा अनुभव करेगी वो सोच कर थोड़ी सहम गयी. युसुफ जी मेरी गरदन के पीछे हाथ डाल कर मेरे लिप्स किस करने लगे. मैं भी बेशरम हो कर उसको किस में रेस्पॉन्स कर रही थी.

उन्होने किस करते हुए मेरा पल्लू हटा दिया और मेरे जिस्म को चूमते हुए मेरी सारी निकाल दी. मेरे डिज़ाइनर ब्लाउस में मेरे बूब्स इतने टाइट थे की उनका उभार सॉफ दिख रहा था.
किंजल भाभी को किस करते हुए असलम ने भी उसकी कमर पर हाथ रखा और उसकी येल्लो सारी को कस्स कर पकड़ लिया.

किंजल ने आँखें बंद कर ली, जैसे वो अब सरेंडर कर रही हो. अगले ही पल, असलम ने एक ही झटके में किंजल की सारी खोल दी. किंजल अब सिर्फ़ अपने डीप पिंक स्लीव्ले ब्लाउस और पेटिकोट में खड़ी थी. उसके भरे हुए बूब्स की गहराई और उसकी गांद की गोलाई अब और भी ज़्यादा टेंप्टिंग लग रही थी.

युसुफ (ज़ोर से हंसा): देखो दोस्तों, दो शिकार हमारे सामने नंगे होने को तैयार है. अब इनकी छूट और गांद को वो मज़ा मिलेगा जो इनके पति कभी नही दे सकते.

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