सेक्सी भाभी के साथ नज़दीकियाँ

गुड मॉर्निंग फ्रेंड्स, मैं शेज़ाद एक और नयी कहानी के साथ आपके सामने आया हू. उमीद करता हू आपको पसंद आएगी.

पहले मैं अपने बारे में बता डू. मेरा नाम शेज़ाद है. देल्ही में रहेता हू, और मेरी अपनी शॉप है यहाँ लक्ष्मी नगर में. मेरी हाइट 5’10” है और डिक की हाइट 6.10 इंचस है. आप मुझसे कनेक्ट हो सकते हो बात करने लिए और अपनी बात शेर करने के लिए. मिलने के लिए भी, लेकिन पहले हम बात करेंगे. अगर कंफर्टबल रहे हो आयेज बढ़ेंगे. मी मैल ई’द इस रॉय610800@गमाल.कॉम.

तो चलिए शुरू करते है बिना किसी बाकचोड़ी के. लक्ष्मी नगर में ही एक स्कूल है, नाम डिस्क्लोस नही करूँगा मैं. मेरी भतीजी जिस स्कूल में पढ़ती थी, उस स्कूल में एक भाभी अपने बच्चो को लेने आती थी. एक बार मेरी नज़र उसपे पड़ी और में दीवाना हो गया.

35-36 साल की भाभी थी. भरा हुआ शरीर, रंग डस्की था उनका मगर चेहरे पे नूवर ऐसा की देखते हुए ही पूरी रात काट दे इंसान. बड़ी-बड़ी आँखें, प्यारा सा लंबा और हल्का से चब्बी फेस. उस पर पतले-पतले लिप्स और हमेशा वेल मेंटेंड. किसी और का पता नही, मैं तो काट सकता हू.

मेरी एक आदत है, कभी पीछा नही करता किसी का भी. उस दिन के बाद से उनको देखने का मॅन होने लगा की बॅस देख लू एक बार. फिर उनकी आने की टाइमिंग चेक करी, नोट करी और उसी वक़्त में भी जाता. आसान इसलिए हो गया, क्यूंकी वो मेरी शॉप के सामने से जाती थी.

मैं ऐसी ही उनको देख-देख कर दिन खुश होने लगा, और ये बात उन्हे भी पता चल गयी की मैं उनपे ध्यान दे रहा था. फिर उन्होने भी नोटीस करा मुझे 2-3 दिन. एक दिन मैं उन्हे देख रहा था, तो उन्होने गुस्से में देखा मुझे.

उन्होने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें और बड़ी करके दिखाई. इससे मैं दर्र गया क्यूंकी मेरी शॉप है, और अगर ऐसे काम की वजह से कोई बात हो गयी, तो बहुत बदनामी होगी. इसलिए मैं पीछे हॅट गया तभी से.

मगर दिल में ख्वाहिश रहती थी देखने की, लेकिन कभी छोड़ने की नही सोची. 10-12 दिन ऐसे ही बस शॉप पे बैठ कर देखने लगा. पहले तो उनके आने के बाद ही अपनी भतीजी को लेने जाता था.

एक दिन मैं कहीं जेया रहा था, तो मैने देख भाभी अपने बच्चो को लेके जेया रही थी. वो मेरी शॉप से पीछे वाले रोड पे एक घर में गयी. तब मुझे पता चला की भाभी वहाँ रहती थी. उनकी भी शॉप थी, और वो कभी-कभी शॉप बैठती थी.

मुझे बहुत खुशी हुई ये देख कर, बुत हिम्मत नही हुई शॉप पे जाने की. वो इसलिए क्यूंकी उनकी शॉप मंदिर वगेरा की थी, और मैं दूसरे धरम का किस बहाने से जाता?

1 महीना ऐसे ही निकल गया. एक दिन मैने देखा भाभी आते-जाते वक़्त मेरी शॉप में देखती. ये रोज़ होने लगा और ये देख कर मेरी ख्वाहिश फिर से बढ़ने लगी.

मैने फिर उनके साथ ही स्कूल जाना शुरू कर दिया. पहले मैं थोड़ी डोर रहता था, मगर अब मैं उनके पास ही रहता था. तब मैने देखा उन्होने हाथ पे टॅटू कराया हुआ था, और एक बहुत ही अची स्मेल वाला पर्फ्यूम लगा हुआ था. ये रोज़ होने लगा, वो भी देखती और मैं भी. अब हम में स्माइल पास होने लगी. ये रेग्युलर होने लगा.

उनके चक्कर में मैं मॉर्निंग में भी जल्दी आने लगा की देख साकु. मगर बात कुछ नही हुई. अब तक आयेज इसलिए नही बढ़ा की कुछ ग़लत हो गया तो देख भी नही पौँगा.

एक बार वक़्त ने मेरा साथ दिया, तो हुआ ऐसा की मेरा एक दोस्त का फोन आया. वो बोला: भाई घर के लिए मंदिर लेना है, तू मार्केट में है तो जान पहचान होगी. सस्ता मंदिर दिलवा देगा?

मेरा माइंड एक-दूं से सेट हो गया.

मैने उसे बोला: आ जइयो, बात कर लेंगे.

फिर ओक बोल कर कॉल एंड कर दी. अब मुझे खुशी और दर्र दोनो एक साथ होने लगी, की किया करू अब.
मैं उसी वक़्त गया उनकी शॉप पे जिस वक़्त वो बच्चो को लेके आती है. दोस्त साथ था.

मैने बोला: देख भाई कों सा सही लग रहा है और पूच ले भैया से.

इतने में वो भाभी भी आ गयी और मुझे देख शॉक हो गयी की मैं वहाँ कैसे. फिर दोस्त को मंदिर पसंद आया, मगर उसमे कुछ चेंज करना था. भाभी ने बच्चे अंदर भेज दिए और उससे पूछा की किया चेंज होगा. तो उशे कुछ-कुछ बताया.

फिर पैसे की बात होने लगी, रते वगेरा फाइनल हुआ. मैने अपना भी रेफरेन्स दिया की मेरी भी पीछे ही शॉप है. भाभी को तो पता था, मगर वहाँ उनके ससुर भी थे, तो पैसे थोड़े कम भी हुए और चेंज फ्री में. दोस्त खुश था, और हम जाने लगे.

फिर मैं भोला: कब मिलेगा?

भाभी ने बोला: 1 वीक लगेगा.

मैने कहा: कोई कॉंटॅक्ट नंबर?

तो उन्होने मुझे अपना विज़िटिंग कार्ड दे दिया.

मैने पूछा: ये आपका नंबर है?

तो अंकल बोले: मेरा है और दुनकन का है, किसी पे भी कर लेना, दोनो ओं है.

थॅंक योउ बोल कर हम आ गये. दोस्त भी चला गया, मगर मेरी खुशी का तीखना नही था. मुझे बहुत खुशी थी. रात में नींद भी नही आई मुझे और वीक ऐसे ही निकल गया. अब नंबर था नही, तो क्या करता? मैने 1 वीक बाद अंकल के नंबर पे कॉल किया, तो किस्मत से कॉल भाभी ने उठाया.

मे: हेलो.

भाभी: जी कों?

मे: जी 1 वीक पहले मंदिर ऑर्डर दिया था.

भाभी: जो वो हो गया है, आप आ जाए.

मे: ये नंबर यो अंकल का है?

भाभी: वो खाना खा रहे है.

मे: ओक मैं आता हू.

दोस्त को बोला तो उसने माना कर दिया आने को. वो बोला: तू भेज दे अपने आप.

तो मैं अकेले ही गया उनके यहाँ. भाभी की शॉप पे कोई नही था. अंकल सो रहे थे और लेबर खाना खाने गयी थी. मैने अछा मौका समझ कर बात करी-

मे: कैसे हो?

मेरा दिल तेज़-तेज़ धड़क रहा था.

भाभी: बढ़िया आप बताओ? कुछ ज़्यादा ही ध्यान देते हो आप आना-जाने वालो पर.

मैं हस्स दिया.

मे: सब पर नही बस आप पर.

भाभी: और ये ध्यान मुझ पे ही क्यूँ दिया जेया रहा है?

मे: ये मुझे भी नही पता. बस सुकून मिलता है आपको देख कर. ऐसा एहसास होता है जैसे मैं जून की तेज़ धूप में किसी पेड़ की चाओं की तरह हो तुम.

भाभी बस एक निगाह मुझे देखती रह गयी.

भाभी बोली: वाह, फिल्मी बातें कर रहे हो.

मे: नही भाभी, ये वो फीलिंग है जो मुझे आती आपको देख कर. अब आप फिल्मी बातें समझो या मेरा एहसास.

भाभी: देख कर लगता नही था के इतने समझदार होगे आप.

मे: देख कर कहाँ अंदाज़ा होता है, आज़माना पड़ता है पहले.

मे: वैसे आपका नाम नही पता अब तक मुझे.

भाभी: पता तो मुझे भी नही है. वैसे मेरा नाम रश्मि है.

मे: शेज़ाद.

भाभी: आपका मंदिर तैयार है.

मे: थॅंक योउ भाभी जी.

भाभी: अब नाम पता चल गया, अब भी भाभी?

मे: ओक थॅंक्स रश्मि जी.

और स्माइल पास करी दोनो ने. फिर मंदिर लिया, रिक्षव करा और पेमेंट करके फ्री हो गया. मैं जाने लगा तो याद आया कोई है नही तो नंबर डेडू.

मैने बोला: रश्मि जी.

रश्मि: जी.

मे: ये मेरा विज़िटिंग कार्ड है. कभी लगे बात करने चाहे तो आप याद कर सकते हो.

और मैने किस्मेट आज़माने के लिए अपना हाथ आयेज बढ़ा दिया हॅंड शेक के लिए. भाभी ने में मिला लिया हाथ. क्या ही एहसास था वो, जो भाभी का हाथ च्छुआ. एक-दूं मखमली एहसास जैसे दुनिया रुक गयी हो कुछ वक़्त के लिए. उसके बाद बाइ बोल कर आ गया.

अब इंतेज़ार था भाभी की कॉल या मेसेज का. मगर मैं ग़लत था. 15 दिन हो गये कोई मेसेज और कॉल नही आई इन 15 दिन. भाभी 2-3 बार ही दिखी मगर अलग बिहेवियर था, ना मुझे देखती और ना ही रुकती.

मैं परेशन होने लगा. कोशिस भी करी बात करने की, मगर पासिबल नही हो पाया. उस दिन के ठीक 21 दिन बाद मेरे नंबर पे कॉल आया टेलिग्रॅम पे और वो रश्मि भाभी थी. मेरी खुशी का ठिकाना नही बचा और मैं ख़ुसी से पागल होने लगा.

फिर हमारी बात शुरू हुई. क्या बात हुई ये नेक्स्ट पार्ट में. अब तक का सफ़र कैसा रहा, ज़रूर बताना.

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