सेक्स स्टोरी अब आयेज-
थोड़ी देर तक हम बस वैसे ही एक-दूसरे से चिपक कर लेते रहे. युसुफ ने मेरे माथे पर एक हल्का सा किस किया.
युसुफ: अब कैसा लग रहा है मेरी जान? तेरी छूट को शांति मिली या और चाहिए मेरा लंड?
मैं (नॉटी स्माइल दे कर, उनकी छ्चाटी पर अपना सिर रख कर): अभी तो तोड़ा सा ही मज़ा मिला है युसुफ जी. आपका लंड तो ऐसा है की मेरी छूट को बार-बार तरसेगा. अभी तो सिर्फ़ जिस्म को शांति मिली है, मेरी छूट तो और माँग रही है आपके लंड को.
युसुफ (हेस्ट हुए): ओह हो, तो मेरी रानी अभी से इतनी हवस में आ गयी है? लगता है मेरे लंड का जादू तेरी छूट पर चढ़ गया है. सिर्फ़ मेरा लंड ही तेरी प्यास बुझाएगा.
मैं: अगर आपका लंड हर बार इतना ही मज़ा देगा, तो मैं क्यूँ किसी और की तरफ देखूँगी? मेरी छूट तो अब सिर्फ़ आपकी रंडी बनेगी. पर आपको भी कसम खानी पड़ेगी की जब भी मेरी छूट तरसेगी, आपका लंड उसके लिए हमेशा तैयार रहेगा.
युसुफ (मेरे बूब्स पर हाथ फिरा कर): तेरी कसम मेरी जान. जब तक तेरा जिस्म हमारे सामने है, मेरा लंड हमेशा तेरी छूट को छोड़ने के लिए तैयार रहेगा.
मैं: ह्म, देखते है आपके लंड में कितनी ताक़त है, युसुफ जी. वैसे आपकी बीवी क्या करती है जब आप ऐसे दूसरी औरतों को छोड़ते है?
युसुफ एक नॉटी स्माइल के साथ बोले: बीवी? वो तो अपनी ज़िंदगी में मस्त है. उसे क्या पता की उसके शौहर बाहर कितनी छूटों को छोड़ रहा है. उसे अभी मेरा लंड पसंद नही. अब तो बस आप जैसी जवान औरतों की छूट में ही मज़ा आता है.
मैं हासणे लगी. युसुफ के साथ बातें करके और भी मज़ा आ रहा था. मेरी छूट फिर से गरम होने लगी थी. युसुफ ने अब अपनी नज़रें मेरे चेहरे पर टिकाई.
युसुफ: मेरी जान, तुम तो मेरे लिए एक राज़ हो. तेरा नाम क्या है, ये तो बता दो, मेरी मस्तानी?
मैं (उनकी आँखों में देख कर): नाम… मेरा नाम संगीता है, युसुफ जी. और बाकी चीज़ें? वो तो आपको धीरे-धीरे पता चलेंगी, जब आपका लंड मेरी छूट में और गहरा उतरेगा.
युसुफ (हेस्ट हुए): संगीता. क्या खूबसूरत नाम है. और तुम्हारे जैसी जवान औरत के लिए तो ये नाम बिल्कुल पर्फेक्ट है. अब जब नाम पता चल गया है, तो अब बताओ, तुम्हारी उमर क्या है? और ये जिस्म इतना भरा-भरा कैसे है?
मैं: युसुफ जी, उमर पूचोगे तो मैं रूठ जौंगी. (मैने एक नॉटी स्माइल दी) और जिस्म? ये तो आपके लिए बना है. बाकी आप खुद ही देख लो, मैं कैसे और किस जगह से भारी हुई हू.
मैने उनके गाल पर एक किस किया. हम दोनो कुछ देर तक ऐसे ही लेते रहे. फिर मेरे दिमाग़ में वो बात फिर घूमने लगी जो युसुफ ने शुरू में कही थी.
मैं (उत्सुकता के साथ): युसुफ जी, एक बात पूचु? आप और आपके दोस्त सिर्फ़ हमारी औरतों के दीवाने है?
युसुफ ने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में एक तेज़ चमक आई. उन्होने एक नॉटी स्माइल दी और मेरे कान में धीरे से बोले: मेरी जान, तुम्हारी औरतों में जो नशा है, वो और कहीं नही. तुम लोगों की छूट में जो गर्मी और प्यास होती है, वो हमारे लुंडों को पागल कर देती है. तुम लोगों को छोड़ने में जो सुकून मिलता है, उसका तो कोई जवाब ही नही. मेरी जाना, तुम औरतों को छोड़ने में अलग ही मज़ा है.
युसुफ (मुझे लिप्स किस करते हुए): तुम्हारी छूट तो मक्खन की तरह चिकनी और रसीली है. क्या माल हो तुम.
मैने युसुफ की बात सुन कर अपनी कमर को हल्का सा उठाया. मेरी छूट अब दोबारा से गीली हो रही थी. मैने उनकी आँखों में देखा, मेरी साँसों की रफ़्तार बढ़ चुकी थी.
मैं: तो युसुफ जी, आप लोग हम हम औरतों को सिर्फ़ छोड़ने के लिए ही पसंद करते हो, या और भी कुछ? क्या ये सिर्फ़ जिस्म का खेल है आपके लिए?
युसुफ: देखो मेरी जान, तुम औरतों में एक अलग ही कशिश होती है, एक अलग ही प्यास. तुम लोग शुरू में थोड़ी शरमाती हो, पर जब एक बार गरम हो जाओ, तो हम मर्दों को और मज़ा देती हो. ये सिर्फ़ जिस्म का खेल नही, ये एक नशा है जो हम तुम्हारी औरतों में पाते है. सच काहु तो तुम लोग कुछ ज़्यादा ही रंडी होती हो हमारी औरतों से और जब हमारा लंड मिलता है, तो अपनी असल औकात पर आती हो.
उन्होने मेरी छूट पर धीरे से हाथ रखा, जो अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
युसुफ: और तुम्हारी छूट, ये तो जैसे रब ने सिर्फ़ मेरे लिए बनाई है.
मेरी आँखें बंद होने लगी थी. मेरा सारा जिस्म उनकी हवस के आयेज सरेंडर कर चुका था. युसुफ के चेहरे पर एक जीत की मुस्कान फैल गयी. उन्होने मेरा चेहरा अपने हाथों में लिया और मेरे होंठों को फिर से चूमने लगे, ये किस पहले से ज़्यादा गहरा और बेचैन था.
युसुफ (किस के बाद हानफते हुए): जितनी भी औरतें हुंसे चूड़ी है, वो बताती है की उनके मर्द हमारे जितना तगड़ा चुदाई नही करते.
मैं: युसुफ जी, ऐसा नही है की हमारे मर्द आचे नही है. वो भी अपनी जगह बहुत आचे होते है. (उनकी आँखों में देखते हुए) पर सच काहु, जब मुझे पता चला आपके बारे में, तो पता नही क्यूँ, मैं ऐसे ही गरम हो गयी. आपकी तरफ मेरा जिस्म और छूट खुद ही खींची चली आई. शायद आप लोगों में कुछ अलग बात है, जो हम औरतों को पागल कर देती है. आज आपके साथ जो मज़ा मिला है, वो पहले कभी नही मिला.
युसुफ ने मेरे होंठों पर एक ज़बरदस्त किस किया. उनकी आँखों में हवस सॉफ दिख रही थी. युसुफ ने मेरे बूब्स पर अपना हाथ फिर से रखा और उन्हें धीरे-धीरे दबाने लगे.
युसुफ: देखो जान, तुम्हारी छूट मेरा लंड लेकर और प्यासी हो गयी है. इसमें अब और गहराई आ गयी है. इसमें अब सिर्फ़ मेरे लंड की ही जगह है. अब तेरी छूट किसी और को कबूल नही करेगी.
उनकी बातें सुन कर और उनके हाथों का स्पर्श महसूस करके मेरी साँसें तेज़ हो गयी. मेरी छूट में एक अंजान सी हलचल होने लगी थी.
मैं: शायद आप सही कह रहे हो युसुफ जी. मेरी छूट को भी अब आपके लंड की आदत पद गयी है. लगता है, अब ये छूट बिना आपके लंड के शांत नही रह पाएगी.
मैं (तोड़ा शर्मा कर): आपके सभी दोस्त आपके जैसे ही चुदाई करते है क्या?
युसुफ (हेस्ट हुए): मेरी जान, मेरे दोस्त भी मेरे ही जैसे है. उनका लंड भी उतना ही तगड़ा और प्यासा है. जो औरत एक बार हमारे गिरेह में आ जाती है, वो फिर हमारी रंडी बन कर ही रहती है. उन्हें सिर्फ़ और सिर्फ़ मज़ा चाहिए होता है. हम सब एक-दूसरे के उस्ताद है इस खेल में. हमारा तो काम ही यही है, प्यासी औरतों की प्यास बुझाना.
मैं:तो यहाँ कैसी औरतें आप लोगों से छुड़वाने आती है?
युसुफ ने एक लंबी साँस ली, उनकी आँखों में एक गहरा राज़ था. उन्होने अपने हाथ मेरी कमर पर रखे और मुझे और करीब खींचा.
युसुफ: मेरी जान, यहाँ हर तरह की औरतें आती है. कुँवारी लड़कियाँ, शादी-शुदा औरतें, विधवाें, हर उमर की, हर रंग की. कोई पति से ना-खुश होती है, कोई नये मज़े की तलाश में होती है, और किसी को बस हुमारे लंड का नशा चाहिए होता है. उन्हें घर पर मर्द तो मिलते है, पर हुमारे जैसा लंड और हमारी चुदाई का मज़्ज़ा नहीं मिलता. हम उन्हें वो सुख देते है जो उनके पति कभी नही दे सकते. यहाँ आ कर वो अपनी असल फ़ितरत में आती है, अपनी हवस को खुलकर जीती है. हम उन्हें रंडी बनाते है, और वो खुशी-खुशी हमारी रंडी बनती है.
मैं: तो यहाँ सिर्फ़ हमारी औरतें और लड़कियाँ आती है या और भी होती है?
युसुफ ने मेरी आँखों में देखा, उनके चेहरे पर एक नॉटी स्माइल फैल गयी. उन्होने अपना हाथ मेरे नंगे पेट पर रखा.
युसुफ: मेरी जान, जब से हमारा लंड तुम्हारी छूट में घुसा है, तब से तुम्हारी उत्सुकता बहुत बढ़ गयी है. वैसे, यहाँ तुम्हारी औरतों की तादाद सबसे ज़्यादा होती है. उनकी प्यास कुछ अलग ही होती है, और उन्हें हुमारा लंड कुछ ज़्यादा ही पसंद आता है. पर ऐसा नही है की सिर्फ़ वही आती है. और काई तरह की औरतें भी आती है, मेरी जान. हर धरम, हर जाती की. जब हवस चढ़ती है ना, तो धरम-जाती सब भूल जाते है. बस जिस्म की भूख रह जाती है, और उस भूख को हम अपने लंड से शांत करते है.
मैं: युसुफ जी, आपको सबसे ज़्यादा किसको छोड़ने में मज़ा आता है? हुमारी औरतों को या आपकी औरतों को?
युसुफ ने मेरी बात सुन कर एक नॉटी स्माइल दी, और उनकी आँखों में एक गहरी चमक आ गयी. उन्होने मेरा चेहरा अपने हाथो में लिया और मेरे होंठों पर किस किया.
युसुफ: मेरी जान, सवाल तो बहुत गहरा है. सच काहु तो, तुम्हारी औरतों में जो बात है, वो और कहीं नही. तुम लोगों की छूट में एक अलग ही गर्मी और तड़प होती है, जो हुमारे लुंडों को पागल कर देती है. तुम्हारी शरम, तुम्हारी हिजरत, और जब वो टूट-ती है, तो उसमें जो मज़ा मिलता है, उसका तो कोई जवाब ही नही. हमारी औरतों को तो हम बचपन से छोड़ते है, उनमें वो नया-पं और जुनून नही मिलता जो तुम्हारी औरतों में मिलता है. जब तुम जैसी कोई संस्कारी औरत हमारे सामने अपनी छूट खोलती है, तो उस पल का मज़ा ही कुछ और होता है.
उन्होने मेरे होंठों को छ्चोढा और मेरी गर्दन पर अपने होंठ उतार दिए. उनकी गरम साँसें मेरी स्किन पर आग लगा रही थी. उनकी ज़ुबान मेरी गर्दन के नीचे सरक्ति गयी, और मेरे जिस्म में एक तेज़ सिहरन दौड़ गयी. उनका हाथ धीरे से मेरी कमर से होता हुआ मेरी छूट की तरफ बढ़ा. उन्होने मेरी पनटी को एक तरफ सरका कर मेरी छूट को सहलाना शुरू किया.
मैं (सिसकारी भरते हुए): अया… युसुफ जी… आपकी बातें… और आपके हाथ… ये मुझे फिर से पागल कर रहे है. मेरी छूट तो आपके लंड के लिए तड़प रही है.
युसुफ ने मेरी छूट पर उंगली फिरते हुए एक नॉटी स्माइल दी.
युसुफ: मेरी जान, जब तेरी छूट ही इतनी प्यासी है, तो मैं कैसे माना कर सकता हू. तुम्हारी ये गीली छूट और उसकी ये गर्मी मुझे अपनी तरफ खींच रही है. अब देखना, तेरा ये जिस्म कैसे मेरे लंड के आयेज मचलेगा.
उन्होने बिना देर किए अपना लंड फिर से मेरी छूट के मुहाने पर सेट किया. उनका टोपी-कटा लंड मेरी छूट के होंठों पर टिकते ही मुझे एक अजीब सा करेंट लगा. मेरी साँसें थम गयी.
युसुफ ने मेरी आँखों में देखते हुए एक भूखी मुस्कान दी और एक तेज़ धक्का मारा. उनका पूरा लंड एक ही झटके में मेरी छूट में समा गया. इस बार दर्द से ज़्यादा सुकून था.
मैं (तेज़ सिसकारी भरते हुए): अयाया… युसुफ जी… फिर से… आपका लंड… मेरी छूट…
युसुफ ने धक्के लगाने शुरू कर दिए. हर धक्के के साथ उनका लंड मेरी छूट की गहराइयों को चू रहा था, और मैं पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी. मैं अपनी कमर उठा कर उनका साथ दे रही थी. उन्होने मेरे बूब्स को अपने हाथों से मसलना शुरू कर दिया, और मेरे निपल्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगे.
युसुफ (धक्के मारते हुए): कैसा लग रहा है, मेरी रंडी? तेरा जिस्म अब पूरी तरह से मेरा है. तेरी छूट की प्यास मैं ही बूझौँगा.
मैं (आहें भरते हुए): अया… और… और तेज़… युसुफ जी… मुझे और छोड़ो… आपका लंड मेरी छूट को फाड़ रहा है…
युसुफ ने अपनी स्पीड और बढ़ा दी. उनका लंड मेरी छूट में ऐसे अंदर-बाहर हो रहा था. कमरे में हमारी चुदाई की आवाज़े गूँज रही थी. मैं अब पूरी तरह से हवस के नशे में डूब चुकी थी.
हर धक्के के साथ युसुफ की आँखों में एक अजीब सा जुनून और बढ़ता जेया रहा था. उन्होने मुझे कमर से पकड़ कर उपर उठाया और फिर नीचे पटका, जिससे उनका लंड मेरी छूट की गहराइयों में और ज़ोर से धँस गया. मेरी छूट के अंदर उनके लंड की रग़ाद से एक अजीब सी खुजली और बेचैनी हो रही थी.
मैं (ज़ोर से सिसकारी भरते हुए): ऊहह… युसुफ जी… मैं… मैं फिर से… आअहह…
मेरी छूट में फिर से वही तेज़ दबाव महसूस होने लगा. युसुफ ने भी शायद महसूस कर लिया था की मैं फिर से झड़ने वाली थी. उन्होने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी. उनकी हर साँस मेरे कान पर पद रही थी.
युसुफ (हानफते हुए): झाड़ जा मेरी जान… पूरी तरह से झाड़ जा… अपनी सारी गर्मी निकाल दे मेरे लंड पर… ये लंड बना ही तेरी छूट को शांत करने के लिए है.
उनके आखरी शब्दों के साथ ही मेरे जिस्म में एक तेज़ झटका लगा. मेरी टाँगें अकड़ गयी, कमर उपर उठ गयी, और एक लंबी, सुखदायक सिसकारी के साथ मैं फिर से झाड़ गयी. मेरी छूट से गरम रस की धार निकली और युसुफ के लंड को पूरी तरह से नहला दिया. मैं पूरी तरह से निढाल हो कर बेड पर गिर गयी.
युसुफ ने कुछ और धक्के लगाए, फिर धीरे से मेरा रस्स अपनी छूट में ही महसूस करते हुए, वो भी मेरे उपर ही गिर गये. उनकी साँसें तेज़ थी, और उनका लंड अब भी मेरी छूट के अंदर गरमा-गरम था. उन्होने मेरे माथे पर एक किस किया.
युसुफ (हानफते हुए): मज़ा आ गया मेरी जान. तेरी छूट तो जैसे नशा है, जितना छोड़ो उतना ही और छोड़ने का मॅन करता है.
मैं (धीरे से): आपका लंड… युसुफ जी… वो तो मेरी छूट को पागल कर देता है. अब तो लगता है, इसको सिर्फ़ आपके लंड की ही आदत पद गयी है.
हम दोनो कुछ देर तक वैसे ही एक-दूसरे से चिपक कर लेते रहे. युसुफ ने धीरे से अपना लंड मेरी छूट से बाहर निकाला. एक हल्का सा स्लर्प का साउंड आया.
युसुफ उठे और मेरे बगल में लेट गये. उन्होने मुझे अपनी बाहों में भर लिया.