फॅमिली सेक्स स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट-
सबसे पहले मैं आप सब से माफी माँगना चाहता हू. कुछ लोग मैल करके बोल रहे थे की स्टोरी आंड फ्लॅशबॅक बोरिंग हो रहा है. पर क्या करू, स्टोरी का पार्ट है ये फ्लॅशबॅक भी. मैं इसको कम से कम पार्ट में ख़तम करने की कोशिश करूँगा.
फ्लॅशबॅक कंटिन्यूस:-
तीनो को एक-एक बार ऑर्गॅज़म आ गया था. दादी के चेहरे में पापा का माल लगा हुआ था. तीनो ऐसे ही लेते हुए थे. फिर बुआ उठी और दादी के चेहरे से सारा माल चाट कर उनको ज़ोरों से किस करने लगी. बुआ पापा के माल को दादी के मूह में लीप तो लीप किस से ट्रान्स्फर कर रही थी.
ये सब देख कर पापा का लंड दोबारा खड़ा हो रहा था. दादी भी बहुत एग्ज़ाइटेड थी, की वो वो काम कर रही थी, जो वो उनकी सास को बरसों से करते देख रही थी. फिर दादी बोली-
दादी: निधू अब ब्रिज के इसको तोड़ा सा चूस, दोनो को मज़ा आएगा.
निधि: अछा.
दादी: रुक, मैं बताती हू.
इतना बोल के दादी बुआ को पापा के लंड के पास ले गयी और उनको बताया की कैसे चूसना है की दाँत ना लगे और दोनो को मज़ा आए. फिर बुआ भी वैसा ही करने लगी. बुआ ने चूस कर पापा का लंड सॉफ किया और उसको दोबारा पहले जैसा खड़ा कर दिया. बुआ पिछली रात पापा से चूड़ी थी, तो इस बार दादी घोड़ी जैसे बनी और पापा ने एक बार में लंड उनकी छूट में उतार दिया. फिर पापा दादी को ज़ोर-ज़ोर से छोड़ने लगे.
बुआ पापा को किस कर रही थी और पापा बीच-बीच में बुआ के बूब्स चूस्टे. पापा कभी दादी को छोड़ते तो कभी बुआ को, और इसी तरह उनके इस रिश्ते की शुरुआत हुई.
पापा बुआ रात में दादा और दादी की चुदाई देखते तो कभी उनकी चुदाई को देखते-देखते आपस में चुदाई शुरू हो जाती. दादी बुआ और पापा के साथ कभी अकेले-अकेले तो कभी साथ में मिल कर इस जीवन का आनंद लेती.
दूसरी दादी को भी ये बात पता थी और वो भी पापा के साथ करना चाहती थी. पर पापा बुआ से बहुत प्यार करते थे, तो वो दादी और बुआ के अलावा किसी और के साथ नही करना चाहते थे. ऐसे ही सुख शांति वाली चुदाई वाली ज़िंदगी बीट रही थी. ये चुदाई की दास्तान शुरू हुए कुछ साल हो चुके थे. पापा 23 के हो गये थे. तभी कुछ ऐसा हुआ की उसने सब चीज़ बदल कर रख दी.
दादी की तबीयत अचानक खराब हो गयी. उनको हॉस्पिटल ले गये तो पता चला की उनकी लार्ज इंटेस्टिन में प्राब्लम थी. फिर ऑपरेशन हुआ और वो सक्सेस्फुल भी था, पर ऑपरेशन के कुछ 3-4 दिन बाद उनकी तबीयत ठीक होना छ्चोढ़ उल्टा बिगड़ने लगी.
डॉक्टर बोले की मल्टिपल ऑर्गन फेल्यूर का केस था. उन्होने बहुत कोशिश की पर दादी को बचाया नही जेया सका. पापा बुआ से जितना प्यार करते थे, उतना ही दादी से करते थे. उनकी डेत से वो टूट चुके थे. दिल में एक घाव सा था एक खाली-पन्न, पर प्रकृति का नियम है की जो आया है उसको जाना पड़ता है.
पापा अब दुखी-दुखी रहने लगे थे. बुआ भी अब पापा के साथ होती, पर चुदाई वाला कार्यक्रम ना के बराबर हो गया था. लेकिन बोलते है ना, जब गुम मिले तो उससे उभरने का रास्ता भी मिल जाता है. और वो रास्ता कोई और नही, मेरी मम्मी थी. इसी गुम के समय पापा मेरी मों से मिले थे.
कुछ समय मम्मी के साथ बिताने पर वो नॉर्मल हो गये थे. देखो कोई किसी को रीप्लेस नही कर सकता, जो घाव है वो वहीं रहता है. पर दर्द बाँटने वाला कोई मिल जाता है तो सफ़र आसान हो जाता है.
पापा को मम्मी पसंद थी, पर पापा बुआ से प्यार करते थे और ये बात मम्मी को नही बता सकते थे. पापा जब मिलने आते तो उनके साथ उनकी फ्रेंड भी आती कभी सौंदर्या जो की अब मेरी दादी है (स्टेप ग्रमे) या सुमन आंटी होती.
पर ये मेरी मों का पापा से मिलना बुआ को अछा नही लगता था. वो कुछ बोलती नही थी क्यूंकी मम्मी की वजह से पापा नॉर्मल हो रहे थे. पर उनको दर्र था की पापा बुआ को छ्चोढ़ के ना चले जाए. मॅन ही मॅन बुआ को मम्मी से ईर्ष्या थी.
फिर कुछ समय बाद पापा और बुआ की चुदाई जो छ्छूट चुकी थी, वो फिर से चालू हो गयी. पर चुदाई चालू होने के साथ-साथ पापा का मों से मिलना-जुलना भी बढ़ गया था. पर पापा मम्मी के साथ फ्रेंड्स से ज़्यादा का रिलेशन्षिप बनाना नही चाहते थे. क्यूंकी बुआ का प्यार उनको ये इजाज़त नही दे रहा था. पर एक दिन कुछ ऐसा हुआ की पापा को बुआ और घर से रिश्ते ख़तम करने पर मजबूर कर दिया.
पापा मम्मी के साथ एक फिक्स टाइम में मिलने जाते थे. ये बात बुआ और घर वालों को पता थी. पर एक दिन पापा मिलने गये तो पता चला की मम्मी आ नही पाई कुछ काम के चलते.
पापा उस दिन घर बहुत जल्दी आ गये. उन्होने देखा की बुआ के रूम से कुछ वाज़े आ रही थी. वहाँ जेया कर देखा की बुआ नंगी दादा जी से चुड रही थी डॉगी स्टाइल में, और बुआ के सामने छ्होटे दादा जी और किशोरे जिनका लंड बुआ के हाथो में था. बुआ बहुत कामुक तरीके से मोनिंग कर रही थी.
कट तो प्रेज़ेंट:-
पापा का लंड दीदी की छूट में था और पापा के सामने मैं. हिस्टरी अपने आप को दोहरा रही थी. पर इस टाइम जो चीज़ पापा के साथ हुई थी, वो अब मेरे साथ कर रहे थे. उनकी चुदाई डेक के मेरा दिल टूट सा जाता है. मैं तोड़ा पीछे हो जाता और मुझे लिषा संभाल लेती. अब मेरा दिमाग़ ब्लॅंक सा था.
पापा: बेटा रोहन, तू जैसा समझ रहा है वैसा कुछ नही है.
पर मैं उस समय कुछ सुनने समझने की हालत में नही था. मैं वहाँ से चला जाता पर मेरे पीछे-पीछे लिषा भी आ गयी थी. मुझे कुछ समझ नही आ रहा था की क्या करू, कहाँ जौ, ये सब अचानक से क्या हुआ. तभी लिषा ने मेरा हाथ पकड़ा और वो मुझे अपने रूम में ले गयी.
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