चुदाई स्टोरी अब आयेज से-
रेखा: वो आपकी पंत में देख कर पता चल रहा है. आज आप मेरी हालत खराब करोगे. आपके चेहरे की उदासी भी आज चली जाएगी. प्लीज़ बेबी आप तोड़ा आराम से करना.
अब आयेज से-
मैने उसका मूह पकड़ कर तोड़ा गुस्सा दिखा कर कहा.
मैं: क्या बोली तू साली?
रेखा: कुछ नही जी, आपको जो करना है करो. मुझे भी आज आपसे खुल कर सेक्स करना है. अपने पति और बाय्फ्रेंड को खुश करना है.
मैं: ह्म, गुड.
रेखा ने फिर मुझे अपने गले से लगा लिया, और हल्के आँसू लाते हुए बोली-
रेखा: सच बताओ आप मुझे कभी छ्चोढ़ कर नही जाओगे ना? मैं आपसे बहुत प्यार करती हू.
फिर मैं उसके रसीले होंठो को अपने थंबनेल से मसालते हुए बोला-
मैं: मेरी रानी, तुझे कहीं छ्चोढ़ कर नही जाने वाला हू. तुझे अपनी बीवी और रंडी बनौँगा.
रेखा: रंडी मैं सिर्फ़ आपके लिए हू. लोवे योउ.
ऐसा बोल कर वो मुझसे चिपक गयी. उसके बूब्स के कड़क निपल मुझे चुभ रहे थे.
मैं: साली तू तो अभी बहुत जवान है. तेरे सारी जवानी आज निकाल दूँगा.
रेखा: ये जवानी सिर्फ़ आपके लिए है. जो करना है करना, सब कुछ आपका है.
अब मैने उसका गोरा और प्यारा सा चेहरा पकड़ा. फिर उसे देखने लगा. वो भी प्यार से देखने लगी. पता नही कब देखते हुए मेरे होंठ उसके होंठो से लग गये.
रेखा के मुलायम होंठो को चूसने लगा. वो अपनी आँखें बंद करके मेरे चूसने का मज़ा ले रही थी.
रेखा: उहह ष्ह ह्म.
मेरा पूरा साथ देते हुए उसने अपने होंठ खोल दिए. फिर दोनो हाथ मेरे बालों में घूमते हुए मेरे लिप्स और ज़ुबान को चूसने लगी. हम दोनो एक-दूसरे की दुनिया में खोए हुए थे.
दोनो की गरम सिसकियाँ चल रही थी. मेरा एक हाथ उसकी गरम गंद को सहला रहा था, तो दूसरा हाथ उसकी कमर. करीब 10 मिनिट मैने उसके होंठ, गाल, आँखें चूमे-छाते.
अब मेरे अंदर सेक्स की आग और उबलने लगी. मैं उसकी गंद ज़ोर-ज़ोर से मसालते हुए मौसी के होंठो को काटने लगा. रेखा का एक होंठ चूस्टे हुए कट्ट गया था.
रेखा: उहह ना धीरे.
मैं: चुप साली, आज तेरे इस भरे हुए जिस्म का पूरा मज़ा लूँगा.
फिर मैने उसे गोद में लिया और बेड पर पटक दिया. मैं जुंगली शेर की तरह अपने शिकार पर टूट पड़ा. रेखा के उपर आते ही मैं उसके गाल और होंठो को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा. मैं एक हाथ से कुर्ता के उपर से बूब्स दबा रहा था.
इससे उसकी सिसकियाँ बढ़ने लगी. मुझे बस आज चुदाई देख रही थी. उसका दर्द नही देख रहा था. आज मैने सोच लिया था मौसी की गंद फाड़ चुदाई करूँगा.
अब मैने अपनी शर्ट निकाल दी, और साथ में मौसी के कपड़े भी. रेखा की सलवार और कुर्ता हटा दिया. वो मेरे सामने ब्रा पनटी में थी. उसका गड्राया हुआ बदन मेरे अंदर और भूख जगा रहा था.
मैने अब उसकी टाँगों से ज़ुबान घूमते हुए धीरे-धीरे पनटी के उपर से होते हुए नाभि तक छाता. रेखा बेड पर मचलने लगी. उसकी सिसकियाँ गरम हो रही थी. रेखा एक हाथ से बेडशीट और दूसरे से मेरे बाल सहला रही थी.
रेखा मौसी: ष्ह ह बहुत मज़ा आ रहा है. आपने मेरे अंदर आग लगा दी है. उहह मा ष्ह ह्म्म्म्म.
मैं: मज़ा आया ना मेरे रंडी?
रेखा: हा ह्म्म्म्म उहह. बहुत एक्षपरट हो आप.
अब नाभि से ज़ुबान घूमते हुए उसके बूब्स से लेके सिर तक खूब चूसा और छाता. रेखा आँख बंद करके मज़े ले रही थी. करीब 20 मिनिट उसके बदन को खूब चूसा. पनटी उसने गीली कर दी थी. मैने पनटी के उपर से भी आचे से रस्स छाता था.
अब मौसी उठी और मुझे अपने नीचे किया. उसने भी सेम वैसा ही किया. रेखा ने मेरे कपड़े हटा दिए. मेरा लंड ककचे पर पत्थर बना हुआ था. 7 इंच के लोड को देख कर उसके अंदर की आग और बढ़ने लगी. रेखा के काले बाल खुले हुए थे.
वो अब झुक कर अपनी ज़ुबान से मेरे लेग्स घुटने और लंड के उपर से खूब छाता. उसके बाद मेरे नाभि और चेस्ट को चाटने लगी.
उसके बाद मैने उसे नीचे किया, और उसकी कड़क ब्रा निकाल फेंक दी. फिर बूब्स पर टूट पड़ा. वो भी अब जोश में साथ दे रही थी. रेखा के ब्राउन निपल्स को मूह में लेके दाँत से काट कर चूस रहा था. उसकी हालत बिगड़ रही थी.
दोनो बूब्स को मसल-मसल कर चूसने लगा. निपल को दाँत से चबा रहा था. रेखा बेड पर मचल रही थी. उसे दर्द हो रहा था, लेकिन मुझे रोका नही उसने.
रेखा: ह मा एस और चूसो मेरे बूब्स. पी जाओ इन्हे. उहह ष्ह उम्म्म.
मैं: आज खा जौंगा इन्हें मैं.
रेखा: खा जाओ, सब आपका है. लेकिन तोड़ा धीरे ह काटो ना.
मैं: चुप साली, तेरी जवानी का रस्स पी जौंगा.
रेखा: दर्द होता है बाबा. उहह मा बहुत ज़ोर से करते हो.
मैं उसके दोनो बूब्स खूब ज़ोर से मसल रहा था. इससे बूब्स गोरे से लाल हो गये. निपल मैने काट लिया था और बूब्स पर मेरे दाँत के निशान बन गये थे.
रेखा मेरे बालों में हाथ घुमा रही थी. ज़ोर-ज़ोर से सिसकियाँ लेके मुझे और जोश भर रही थी. उसके बाद मैं नाभि को चूसने लगा. उसका उभरता हुआ पेट में मूह दबा के चूसने लगा. रेखा मेरा मूह जोश में आके अपनी नाभि में दबा रही थी.
रेखा: ष्ह ह उहह छातो.
मेरा एक हाथ उसकी पनटी के उपर से छूट सहला रहा था. इससे वो और जोश में उछालने लगी. पनटी गीली थी, उसने झाड़ दिया था. पनटी के उपर से मैं छूट को मसल रहा था. रेखा की जवानी और उफान मारने लगी.
रेखा: उनह ष्ह क्या कर दिया. आपका हाथ छूट पर जादू कर रहा है. प्लीज़ ह उहह उफफफ्फ़.
मैं: मेरी जान मज़ा आ रहा है ना? बहुत गर्मी है साली तेरे अंदर.
रेखा: ह मा सारी गर्मी आप निकाल दो. बहुत मज़ा दे रहे हो आप. इस दिन के लिए कब से इंतेज़ार था. प्लीज़ कुछ करो. मुझसे अब नही रहा जाता.
मैने अब उसकी पनटी निकाल दी, और छूट में मूह दबा दिया. ज़ुबान छूट में लगते ही वो बेड पर कमर उछालने लगी.
रेखा: ह हा उहह मा ष्ह और करो. रूको मत, चाट जाओ मेरी छूट.
मैं छूट में उंगली करते हुए छूट को चाटने लगा. छूट का दाना और लटका हुआ च्चिलका चूस रहा था. मौसी की हालत खराब होने लगी थी. उसने झट से बदन को कस्स लिया और छूट से काम रस्स निकल गया.
मैं छूट के रस्स को पी गया. रेखा की छूट अभी भी गरम ताप रही थी. छूट को मैने करीब 20 मिनिट तक चूसा था.
रेखा: आपने तो मुझे बिना छोड़े ही 2 बार पानी-पानी कर दिया. प्लीज़ अब अपना ये शैतान अंदर डालो.
मैं: बेहन की लोदी रंडी. चल पहले इसे चूस और अपनी जवानी देखा इसे.
रेखा: रूको, इसे दिखती हू जवानी.
रेखा बेड से नीचे आई और घुटनो के बाल बैठ गयी. मैने उसके बाल पकड़े वो स्माइल देते हुए मेरे 7 इंच के लंड को किस करने लगी. रेखा पूरी रंडी बन के मेरी आँखों में देखते हुए लंड को मूह में ले गयी.
आधा लंड मूह में था, जिसे वो बड़े मज़े से चूसने लगी. रेखा को भी बड़ा मज़ा आ रहा था. मेरे सिसकियाँ निकालने लगी.
मैं: ष्ह मेरे रंडी. क्या लोड्ा चूस्टी है.
रेखा: आपका लंड बहुत मज़ेदार है. देखो कितना गरम है ये. इसे रोज़ चूसा करूँगी.
मैने अब उसका मूह लंड में दबा दिया. उसकी नाक मेरे पेट में दबी हुई थी. मैं ज़ोर-ज़ोर से लंड से मूह चुदाई करने लगा. मौसी के आँख से आँसू निकालने लगे. लंड उसके गले तक ले जाता और आधा बाहर निकालता. उसके बाद हर झटके में अंदर तक घुसा देता था.
रेखा अपने हाथ से मुझे रोक रही थी. पर मैं नही रुका और मूह चुदाई किए जेया रहा था. मैने मूह में बिना रुके 15 मिनिट आचे से छोड़ा.
रेखा: उहह उहह ह्म्म्म्म.
उसके मूह से यही आवाज़ निकल रही थी. मैं बस छोड़े जेया रहा था. हर झटके पर उसके बूब्स और उसका बदन हिल जाता था. मैं बस जोश में रंडी की तरह उसे छोड़ने लगा.
5 मिनिट बाद मेरा रस्स निकालने वाला था. मैने जोश में छोड़ते हुए कहा-
मैं: ह मेरे रेखा रानी. अपने पति का काम रस्स पी जाना. बस उहह निकल रहा था.
रेखा की आँखें बंद थी. उसके बाल बिखर गये थे. कुछ लंड के साथ उसके मूह में जेया रहे थे. मैं बस हर झटके पर लंड अंदर गले तक दबा देता था. फिर एक-दूं से लंड ने पिचकारी मूह में छ्चोढ़ दी.
मैने लंड गले में रोक रखा था. रेखा को पता था पानी पीना है. उसने बिना देर किए मेरा कम-रस्स पेट में निगल गयी. मैने उसका मूह अपनी नाभि में दबा रखा था.
फिर मैने लोड्ा बाहर निकाल लिया. रेखा ज़मीन पर बैठी हुई थी और ज़ोर से साँसें लेने लगी. उसका मूह पसीने से भीगा हुआ था. बाल बिखरे हुए थे और बूब्स साँस के साथ उछाल रहे थे.
दोस्तों कहानी अब अगले भाग में मिलेगी. करवा चौथ पर मौसी को कैसे-कैसे छोड़ा.
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थॅंक्स.