नमस्कार दोस्तों, मैं अमृता अपनी चुदाई कहानी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा, और आपको पसंद भी आया होगा.
पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की कैसे मैं अपने नौकर मोनू के लंड की दीवानी हो गयी थी. फिर मैं उसका लंड देखने के लिए उसके कमरे के बाहर गयी, और फिंगरिंग करते हुए खो सी गयी. मोनू ने मुझे देख लिया, लेकिन मैने उल्टा उसको दांता.
फिर मैं मूडी, और अपने कमरे में जाने लगी. तभी पीछे से मोनू ने मेरा हाथ पकड़ा, और मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं घूम कर उसकी बाहों में आ गयी. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. फिर मोनू बोला-
मोनू: दीदी, आपको पसंद आया ना मेरा लोड्ा?
मैं घबरा गयी और बोली: क्या मतलब? छ्चोड़ो मुझे तुम.
अब आयेज-
मैं मोनू को मुझे छ्चोढने के लिए बोल रही थी, लेकिन उसकी तरफ से कोई रिक्षन नही था. उसने मुझे उसके साथ चिपकाया हुआ था, और उसका लंड मुझे अपनी जांघों पर महसूस हो रहा था.
फिर उसने मुझे पीछे दीवार के साथ लगा लिया, और मेरे होंठो के बिल्कुल करीब आके बोला-
मोनू: दीदी मैं जानता हू आप प्यासी हो. मेरे लंड को भी आपकी छूट की प्यास है. तो क्यूँ ना हम दोनो एक-दूसरे का सहारा बन जाए?
जब वो ये बोल रहा था, तो उसकी गरम साँसें मेरे मूह पर पद रही थी. मैं इतनी गरम हुई पड़ी थी, की उसकी गरम साँस मुझे मदहोश कर रही थी. एक तरफ मुझे उससे अलग होना था, और एक तरफ मैं उसके और करीब जाना चाहती थी. इसी उढेढ़ बुन में मैं अब कुछ बोल भी नही रही थी.
जब तक मैं सोच रही थी, मोनू अपने होंठो को मेरे होंठो के और करीब लाया, और उसने अपने होंठ मेरे होंठो के साथ जोड़ दिए. ये एक अलग एहसास था. पहली बार किसी मर्द के होंठो ने मेरे होंठ च्छुए थे. मेरा शरीर सुन्न सा पद गया था.
अब मोनू मेरे होंठो को चूसने लग गया. उसके होंठो का नमकीन स्वाद मेरे मूह में भी आ रहा था. मेरा दिल और दिमाग़ अब यहीं कह रहे थे की जो करना है कर ले आज. देखा जाएगा जो भी होगा बाद में.
ये सोच कर मैने भी मोनू का साथ देना शुरू कर दिया. जैसे ही मैने उसके होंठो को चूसना शुरू किया, मेरे जिस्म में करेंट सा दौड़ने लगा. मैं जोश से भर गयी, और मेरी छूट पानी छ्चोढने लग गयी.
हम दोनो की किस्सिंग और तेज़ी से होने लगी. मोनू ने किस करते हुए मेरी पीठ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. ये मुझे बहुत अछा लग रहा था. फिर वो धीरे-धीरे अपने हाथ मेरी गांद पर ले गया, और उसने ज़ोर से मेरे चूतड़ दबाए.
जैसे ही उसने मेरे छूतदों को दबाया, मेरा शरीर काँपने लग गया, और मेरी छूट ने पानी छ्चोढ़ दिया. इससे आप अंदाज़ा लगा सकते है की मैं कितनी प्यासी थी.
हमारी किस्सिंग चलती जेया रही थी. कुछ देर और किस्सिंग करने के बाद हम दोनो अलग हुए. हम दोनो की साँसें चढ़ि हुई थी. मैं मोनू से ज़्यादा हाँफ रही थी. हम दोनो एक-दूसरे को देख रहे थे. मुझे अब समझ नही आ रहा था की आयेज क्या करना था.
तभी मोनू फिर से मेरे करीब आया, और मेरी गर्दन पर किस करने लगा. उसके होंठ मेरी गर्दन पर पड़ते ही मेरी आ निकल गयी. सॉफ्ट होंठ और हल्की दाढ़ी वाला चेहरा जब आपकी गर्दन को छ्छूते है, तो हर लड़की समझ सकती है की कैसा महसूस होता है.
वो मुझे प्यार करने लगा और मैं मदहोश होती गयी. उसने मेरी शर्ट के बटन खोल लिए, और अपना फेस मेरी क्लीवेज में चूमते हुए रब करने लगा. मेरी छूट फिर से अपने चरम पर पहुँचने वाली थी.
फिर उसने मुझे घुमाया, और मेरी शर्ट को उतार दिया. मैने नीचे सिर्फ़ ब्लॅक ब्रा पहनी थी. अब वो पीछे से मेरी पीठ पर और मेरे शोल्डर्स पर किस करने लगा. मैं पुर मज़े में थी. फिर वो अपने दोनो हाथ आयेज लेके आया, और मेरे बूब्स पर रख दिए. मेरी दोबारा सिसकी निकली.
अब वो पीछे से मुझे चूमते हुए आयेज से मेरे बूब्स दबाने लगा. इससे क्या होना था, बस मेरी छूट ने फिर से पानी छ्चोढ़ दिया. मुझे चूमते और बूब्स दबाते हुए उसका लंड मुझे मेरी गांद में फील हो रहा था. मेरी छूट उससे लंड अंदर डालने की भीख माँग रही थी.
फिर उसने मेरी ब्रा खोल दी, और दोबारा मुझे अपनी तरफ घुमा लिया. उसके बाद उसने सामने से मेरी ब्रा में हाथ डाला, और उसको खींच कर मेरे बूब्स से अलग कर दिया.
अब मैं उसके सामने आधी नंगी थी. मेरे गोरे-गोरे टाइट बूब्स उसके सामने नंगे थे, और झूल रहे थे. वो हवस भारी आँखों से मुझे देख रहा था.
फिर वो मेरे करीब आया, उसने मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे उठा लिया. उसके बाद वो मुझे पीछे पड़े बिस्तर पर ले गया, और वहाँ आराम से लिटा दिया. फिर वो मेरे उपर आया, और मेरे दोनो बूब्स पकड़ लिए. वो दोनो बूब्स दबाने लगा, और एक पर मूह लगा कर उसको चूसने लगा.
बूब्स चुस्वा कर जो मज़ेदार एहसास मुझे मिल रहा था, मैं उसको बयान नही कर सकती. मैं हमेशा सोचती थी की औरत की च्चती पर ये बूब्स क्यूँ होते है. सिर्फ़ बच्चे को दूध पिलाने के लिए? लेकिन उस दिन समझ में आया की दूध पिलाने से पहले जब कोई मर्द इनको चूस्टा है, तो बहुत आनंद मिलता है.
मैं अभी ये सोच ही रही थी, की तभी मोनू ने मेरे बूब पर दाँत काट दिया, और मेरी चीख निकल गयी. फिर वो मेरे दूसरे बूब को चूसने लगा. उसने चूस-चूस कर मेरे निपल्स लाल कर दिए.
कुछ देर बूब्स चूसने के बाद वो नीचे गया, और मेरे पेट को अपनी जीभ से चाटने लगा. वो मेरे पेट को अपनी थूक से गीला कर रहा था, जिससे मुझे पेट पर ठंडी हवा लग रही थी. इससे मेरी छूट में गुदगुदी हो रही थी.
धीरे-धीरे वो मेरी नाभि तक पहुँचा, और उसमे जीभ डाल कर चूसने लगा. उस वक़्त मुझे लग रहा था की पता नही मैने नाभि आचे से सॉफ भी की हुई थी या नही. नाभि चूसने के बाद वो नीचे मेरी छूट की तरफ गया.
इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर अपनी फीडबॅक दीजिए.