नौकर और मौसी की चुदाई कहानी

नमस्कार दोस्तों, मैं विनीत आपके लिए एक न्यू सेक्स स्टोरी लेके आया हू. इसमे मैं आपको बतौँगा की कैसे मैने अपनी मौसी को नौकर से चूड़ते देखा.

मेरी उमर 21 साल है, और मैं कॉलेज स्टूडेंट हू. मेरी फॅमिली में मैं और मेरे मम्मी-पापा है. मेरे दादा-दादी हमारे गाओं के घर में रहते है. मम्मी गूव्ट. जॉब करती है, और पापा का बिज़्नेस है, तो पैसों की कमी नही है.

क्यूंकी दोनो सारा दिन काम पर रहते है, तो घर का काम करने के लिए हमने एक नौकर रखा हुआ है. वो नौकर तब से हमारे घर में काम कर रहा है, जब मैं 10त क्लास में था. उसका नाम मनोज है, और मैं उसको मनु काका कह कर बुलाता हू.

मनु काका की उमर 40 साल के आस-पास है. वो हमारे ही घर में सर्वेंट रूम में रहता है. उसकी कोई फॅमिली नही है. उसकी बीवी और बच्चे थे. लेकिन उसकी बीवी बच्छालन निकली. इस वजह से दोनो का डाइवोर्स हो गया, और उसकी बीवी बच्चो को साथ लेके चली गयी.

मैं काई बार सोचता था की मन्नू काका अकेले क्या करते होंगे. लाइफ से बोर हो जाते होंगे. लेकिन मुझे नही पता था की वो मेरे ही घर की औरतों को छोड़ रहे थे.

एक दिन मम्मी ने मुझे बताया की मेरी मौसी हमारे घर आने वाली थी. वो एक हफ्ते के लिए हमारे घर ठहरने वाली थी. मैं ये सुन कर बहुत खुश हो गया, क्यूंकी मौसी से मेरी खूब बनती है.

मेरी मौसी 35 साल की एक सेक्सी लेडी है. उनका रंग सावला है, बुत फिगर बड़ा ज़बरदस्त है. उनका साइज़ तकरीबन 36-30-38 है. उन्होने शादी की थी, लेकिन कुछ सालों बाद उनके हज़्बेंड की डेत हो गयी. फिर उनके ससुराल वाले उनसे ठीक से बिहेव नही कर रहे थे, तो वो अपने घर आ गयी. वो भी गूव्ट. जॉब पर है, तो अपना खर्चा खुद उठती है.

जब फॅमिली वालो ने उनको दोबारा शादी करने के लिए मजबूर किया, तो उन्होने अपना फ्लॅट ले लिया और उसी में रहने लगी. मौसी को हमारे घर के पास कुछ काम था, तो वो हमारे यहाँ रुकने वाली थी.

फिर मौसी आ गयी, और उनके आते ही हमारी मस्ती शुरू हो गयी. रात को डिन्नर टेबल पर हम दोनो ने खूब जोक्स क्रॅक किए जिन पर सब हस्स रहे थे. फिर हम सोने चले गये.

मौसी जिस रूम में सोने वाली थी, वो 1स्ट्रीट फ्लोर पर मेरे रूम के साथ था. ये एंड वाला रूम था फ्लोर का. मतलब अगर उनको कहीं जाना था, तो मेरे रूम के आयेज से होके जाना पड़ना था. फिर मैं सो गया.

आधी रात को मेरी नींद खुली. मैने एक बुरा सपना देखा था, तो मुझे घबराहट सी होने लगी. मैने च्चत पर जेया कर थोड़ी हवा खा लेता हू. ये सोच कर मैं रूम से बाहर निकला. फिर मैं स्टेरकेस की तरफ जेया ही रहा था की मुझे मौसी के कमरे से कुछ आवाज़ आई.

मैने सोचा की इस वक़्त मौसी जाग क्यूँ रही थी. उनके कमरे की लाइट भी जल रही थी. फिर मैं उनके कमरे की तरफ बढ़ा. आयेज जाते हुए मुझे उनकी ज़्यादा आवाज़े आने लगी. ये आवाज़े सेक्स के दौरान की जाने वाली आवाज़े थी.

मैं उन आवाज़ो को सुन के उत्तेजित होने लगा. मैने सोचा की मौसी फिंगरिंग कर रही होंगी. मेरा मॅन किया उनको ऐसा करते हुए देखने के लिए. फिर मैने रूम के दरवाज़े को तोड़ा धक्का दिया. अंदर से कुण्डी नही लगी थी, तो दरवाज़ा खुल गया.

मैं थोड़े खुले हुए दरवाज़े में से अंदर झाँकने लगा. जैसे ही मैने अंदर देखा, मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गयी. अंदर मौसी अकेली नही थी, मनु काका उनके साथ थे.

मौसी ब्रा पनटी में बिस्तर पर लेती हुई थी, और मनु काका उनके उपर अंडरवेर में लेते हुए थे. दोनो एक-दूसरे से लिपट कर एक-दूसरे के होंठो को चूस रहे थे. मैं ये देख कर हैरान रह गया की मौसी मनु काका के साथ कब से फ़ससी थी.

होंठो को चूसने के बाद मनु काका नीचे आए, और मौसी की क्लीवेज में मूह डाल कर उसको चूमने लगे. मौसी आ आ करती हुई काका के सर को अपने जुवैसी बूब्स में दबा रही थी.

फिर काका ने पीछे हाथ डाल कर मौसी की ब्रा खोली, और उसको निकाल दिया. मौसी के नंगे चुचे बहुत बड़े लग रहे थे. काका उसको पागलों की तरह चूसने लगे. मौसी सिसकियाँ भर रही थी.

फिर काका नीचे आए, और पेट को चूमते हुए मौसी की पनटी निकाल दी. अब मौसी पूरी नंगी काका के सामने थी. उसकी चिकनी छूट का गीला-पन्न मैं सॉफ देख रहा था.

मनु काका पेट चाटने के बाद नीचे आए, और छूट चूसने लगे. इससे मौसी तड़प उठी, और और ज़ोर से सिसकियाँ भरने लगी. वो मस्ती में अपनी गांद उठा-उठा कर काका से चूत चुस्वा रही थी.

कुछ देर छूट चूसने के बाद मनु काका खड़े हुए, और अपना अंडरवेर निकाल दिया. उनका लंड तकरीबन 6 इंच का था. मौसी लंड देखते ही उठी, और काका के सामने बैठ कर उनका लंड चूसने लगी. उनकी ब्लोवजोब देख कर मेरा लंड फटने वाला हो चुका था. मेरा दिल कहने लगा था की काश इस वक़्त वो मेरा लंड चूस रही होती.

कुछ देर लंड चूसने के बाद मौसी सीधी टाँगें खोल कर लेट गयी. फिर काका मौसी की टाँगों के बीच आ कर अपना लंड उनकी छूट पर सेट करने लगे. जैसे ही लंड सेट हुआ, काका ने धक्का मार कर लंड पूरा अंदर घुसा दिया. मौसी तड़प उठी, और उन्होने अपने मूह पर हाथ रख लिया चीख रोकने के लिए.

फिर काका ने मौसी के होंठो में होंठ डाले, और धक्के मार कर छोड़ने लगे. कुछ देर के दर्द के बाद मौसी मज़े से गांद उठा कर चूड़ने लगी. अब धक्के लगने पर ऐसी आवाज़ आ रही थी, जैसे किसी को थप्पड़ पद रहे हो.

काका धक्का लगते रहे, और साथ में कभी मौसी के होंठ और कभी बूब्स चूस्टे रहे. इधर मैं भी अपना लंड दबाता रहा, जिससे मेरा भी पानी निकल गया. कुछ देर की चुदाई के बाद काका ने अपना लंड मौसी की छूट से निकाला, और माल की पिचकारी उनके पेट पर निकाल दी. फिर वो कपड़े पहनने लगे, और मैं अपने कमरे में जल्दी से वापस आ गया.

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