अंतर्वसना सेक्स स्टोरी के पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की मेरे जीजू मुझे छोड़ना चाहते थे. फिर एक दिन दीदी अपनी फ्रेंड के यहाँ गयी. अब आयेज-
जीजू ने मेरा हाथ पकड़ लिया. फिर थोड़ी देर बाद मेरी कमर से मुझे पकड़ कर अपने उपर बिता लिया. मैने कहा, “जीजू, रहने दो, सही नही है.” कहते, “सब सही है, तुम घबरा क्यूँ रही हो? तुम्हे पता है ना तुम मेरी कौन हो, और जीजू-साली के बीच इतना तो चलता ही है.”
कहते, “तुम पर मेरी नज़र शादी से ही थी.” मैने बोला, “क्यूँ, दीदी पर रखनी थी, दीदी पसंद नही आई?” कहते, “तुम्हारी दीदी अची है, डेली चुड्ती भी है. पर मुझे तुम्हारी जैसी पतली और सेक्सी पार्ट्नर चाहिए थी.”
मैने कहा, “चलो कोई नही, जो मिल गया उसमे खुश रहो अब.” हस्स कर बोले, “हा, जो अब मिलेगा उसमे ज़रूर खुश रहूँगा मैं.”
उन्होने मुझे लिटा दिया. और मेरे गालों को चूमना शुरू कर दिया. वो मेरी गर्दन को जब चूमते तो मैं गहरी-गहरी साँसें भरने लगती. जीजू समझ गये की गर्दन पर किस करने से मैं तुर्न-ओं हो रही थी. जीजू ने 5 मिनिट मेरी गर्दन और गालों को ही चूमा.
उस टाइम जीजू एक शरीर के भूखे इंसान में बदल गये थे. एक-दूं अलग, उनकी नज़रें भी गंदी नही थी. लेकिन बस ये था की उन्हे मुझे छोड़ना था, और बहुत बुरी तरह छोड़ने वाले थे, ये समझ आ रहा था. फिर उन्होने मेरे गुलाबी होंठो को अपने होंठो में दबा लिया और उन्हे चूसने लगे.
वो मेरे चुचो को त-शर्ट के उपर से ही दबा रहे थे. जीजू मेरे उपर थे तो उनका लंड मुझे फील हो रहा था. मेरी छूट भी धड़कने लगी थी. वो अपने लंड को मेरी छूट पर दबा रहे थे.
मैने कहा, “जीजू, कपड़े उतार दो पहले.” बोले, “रुका नही जेया रहा? पहले छोड़ डू?” कहते, “अभी रुक ना मेरी जान, पुर मज़े ले, छोड़ूँगा भी, खूब छोड़ूँगा तुझे अपनी रंडी बना कर, जैसे तेरी जीजी को छोड़ता हू हर रात.”
मैने कहा, “हा, वो तो मैने सब देख लिया.” मुस्कुरा कर कहते, “वो तो मैं कल तेरी बातों से ही समझ गया था.” कहते, “तो बता, उस तरह ही चूड़ना है या उससे भी बुरी तरह?” मैने कहा, “जितनी बुरी तरह आप मेरी छूट फाड़ोगे, उतनी ही शांति मिलेगी मुझे.”
कहते, “तब बढ़िया है. अब से तू जब तक तेरी दीदी नही आती, तब तक मेरी रंडी है. मैं जब चाहु तुझे तब छोड़ सकता हू. और तब तक छोड़ता ही रहूँगा तब तक मेरी दूसरी रंडी नही आ जाती.”
मैं उनके लंड को कपड़ों पर से ही सहला रही थी. वो मेरे होंठो को चूस रहे थे और अब ये सब बातें सुन्न कर मैं भी फुल मस्ती में, खुश हो कर उनका साथ देने लगी. हम दोनो ने अपनी-अपनी जीभ एक-दूसरे के मूह में डाली हुई थी, अब हम उसे चूस रहे थे.
जीजू ने त-शर्ट उपर करके हाथ मेरी त-शर्ट के अंदर डाल लिया, अब वो ब्रा के उपर से मेरी चुचियों को दबा रहे थे. उन्होने 1 सेकेंड रुक कर त-शर्ट उपर करी और देखा की मेरे चुचे काली ब्रा के अंदर कैसे लग रहे थे. वो देख कर खुश हो गये, गोरे-गोरे चुचे काली ब्रा में.
उन्होने अपने दोनो हाथों का इस्तेमाल करा और मेरे चुचो को खूब दबाया. बीच-बीच में वो मेरी टाइट ब्रा के अंदर भी उपर से हाथ डाल कर चुचो को दबा रहे थे. होंठो का तो हम दोनो ने एक-दूसरे का सारा रस्स पी ही लिया था.
मुझसे रुका नही गया तो मैने उन्हे रोक कर उनके कपड़े उतार दिए. बोले, “हाए रे मेरी जान, मेरी कुटिया, रुका नही जा रहा ना मदारचोड़. तू सच में ही मेरी रंडी बनने लायक है, मेरी शादी तुझसे होनी चाहिए थी.”
मैने कहा, “मज़े तो ले ही रहे हो.” कहते, “डेली नही ले सकता ना, मुझे तेरी छूट को डेली छोड़ना है. तुझे हर रात अपनी रंडी बनाना है.” उन्होने मेरी ब्रा और पनटी दोनो उतार दी. अब हम दोनो एक-दूसरे के सामने एक-दूं नंगे थे. उन्होने मुझे लिटाया और मेरी छूट को सूंघने लगे.
कहते, “बढ़िया महक है और लग भी बढ़िया रही है, लेकिन शायद चूड़ी हुई है.” मेरी मुस्कुराहट देख कर समझ गये. कहते, “कोई दिक्कत नही. जैसी तू अब चूड़ेगी वैसी आज से पहले कभी नही चूड़ी होगी. बस तू मज़ा देख.” और ये बात उन्होने सच ही कही थी. मेरी नज़र में वहीं मेरी पहली और सबसे बढ़िया और यादगार चुदाई है, जिसने मुझे अंदर तक संतुष्ट किया था.
उन्होने मेरी छूट में अपनी 3 उंगली डाल दी और उसे अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. उनकी स्पीड बहुत फास्ट थी, आख़िर एक्सपीरियेन्स्ड जो थे. कहते, “अब देख, तेरी छूट में से कैसे पिचकारी की तरह पानी निकलता है.” मैने कहा, “इतनी जल्दी ना निकले तो?” कहते, “देखियो तू.” वो बहुत बुरी तरह जैसे लंड ही हो, ऐसे उंगली को चला रहे थे.
“आआहह ओह स्शह,” “धीरे!” मैं छूट को दबा रही थी, बार-बार उनका हाथ पकड़ रही थी. बार-बार बोलती, “रुक जाओ.” कहते, “अभी शुरू भी नही किया, अभी से रुक जाओ. अभी तो तुम्हे अपनी छूट फदवाणी है. तोड़ा सहन करो, मज़े आएँगे मेरी कुटिया.” और सच में बहुत जल्दी ही उन्होने मेरी छूट झाड़ दी अपनी उंगली से ही. इस बीच वो मेरे चुचो को भी बीच-बीच में चूस रहे थे. मैं आहह उहह करते नही तक रही थी.
अब वो रुके और उन्होने मेरी छूट पर अपना मूह अड़ाया. जीभ को छूट पर टच किया. मैने उनसे कहा की, “बस, यहाँ से मत हटाना. एक-दूं सही जगह है.” उन्होने जीभ को अंदर, छूट के पंखों को खोल कर मुझे अपनी जीभ से कुत्ते की तरह छोड़ना शुरू किया.
मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं “आहह उहह” और “अंदर और अंदर” ऐसा कह कर उनके सर को छूट में दबाए जेया रही थी. दूसरे हाथ की उंगलियों से छूट के उपर वाले भाग को सहला रही थी. वो जैसे ही मूह हटते मैं फिर से उनके मूह को छूट पर दबा देती और बोलती, “रूको मत ना जीजू, प्लीज़ बहुत अछा लग रहा था, चाट-ते रहो और अंदर तक डाल कर छातो.”
मज़े इतने आ रहे थे की वो छूट की फलको को काट भी रहे थे बीच-बीच में, पर दर्द महसूस नही हो रहा था. बस तब तो ऐसा था की छूट पर से उनका मूह ना हटते. अब मेरे कहने पर वो 3 से 4 मिनिट रुक गये. जीभ को छूट के अंदर डाल कर बस जीभ को ही हिला रहे थे हल्का-हल्का, जैसे छोड़ रहे थे धीमे-धीमे. मुझे इसमे इतना मज़ा आ रहा था बस क्या बतौन. आज मुझे लग रहा था की मैं पहली बार चूड़ी हू.
अब जीजू तक से गये थे, और लेट गये. मैने उनका लंड अपने मूह में ले लिया और उसे चूसने लगी. जैसे ही मैं उनके टोपे पर जीभ फिरती वो आहह ऊहह बहुत धीमे-धीमे करने लगते. वो मेरी मंडी को अंदर की तरफ दबा रहे थे.
उनका लंड इतना ज़्यादा बड़ा था की मैं उसे पूरा मूह में नही ले पा रही थी. वो पूरा गले तक पहुँच गया था. मेरे गले में दर्द भी होने लगा था. जीजू मेरे बालों को पकड़ कर लंड पर मेरा मूह दबा रहे थे.
मैने जीजू का लंड चूस कर उन्हे बहुत मज़े दिए. वो कहते, “और चूस साली, अंदर तक ले मूह में. अब रंडी, अब मज़े ले तू मेरे लंड के. तब से तड़प रही थी तू इसके लिए मदारचोड़. मेरी माल है तू, और मज़े दे मुझे, चूस आचे से, चूस, चाट भी. मेरे अंडों को भी चाट, एक-एक करके.”
अब मैने जीजू के अंडों को भी छाता. उन्हे बड़ा मज़ा आ रहा था आँड और लंड दोनो को चुसवाने में. जैसे ही मैं अपना मूह निकालती, वो मुझे गाली देते हुए बोले, “साली, बहनचोड़ कुटिया, डाल इसे मूह में, निकाल मत अभी, मॅन नही भरा मेरा, आचे से चूस. अभी 10 मिनिट और चूस, मूठ निकल कर पी मेरे मूठ को आचे से. तब ही छ्चोढेगी तू इसे, उससे पहले नही. चूस इसे अंदर तक, मूह में भरके चूस.”
थोड़ी देर चूसने के बाद लंड झड़ने लगा. पूरा मूठ मेरे मूह में झाड़ा, मैने उनका मूठ पिया. अभी लंड मुरझा गया, और मुझे चूड़ना था. मेरे मूह में दर्द हो गया था लंड को चूस्टे-चूस्टे क्यूंकी उनका लंड बहुत मोटा था. पर उसके बाद भी मैने जीजू का लंड चूसा, उसे चूस-चूस कर मुझे छोड़ने लायक बनाया.
जीजू कहते, “वाह कुटिया, फुल ट्रेंड हो गयी, एक ही बार में इतनी उतावली हो रही है मेरी रॅंड मुझसे चूड़ने के लिए. अब मेरी रॅंड के इंतेज़ार की घड़ी ख़तम होगी. अब मैं अपनी रॅंड को एक अची रंडी की तरह छोड़ूँगा, पूरा सुख मिलेगा तुझे मेरी कुटिया, मेरी बीवी की बेहन.” अभी मैने कहा, “बातें बंद कर दो और मेरी चुदाई शुरू करो जल्दी से.”
अब उन्होने मेरी छूट पर अपना लंड रखा. मेरी छूट खुली हुई थी पर इतनी नही, और उनका लंड भी मोटा था तो उन्होने जब एक धक्का मारा, तो मुझे काफ़ी दर्द हुआ और मेरी चीख निकली.
“आआअहह” फिर उन्होने बिना रुके एक और शॉट मारा तो पूरा लंड छूट में चला गया. छूट एक-दूं गीली अंदर से. इस बार दर्द भी ज़्यादा नही हुआ. वो धीरे-धीरे छूट में लंड को अंदर-बाहर कर रहे थे. मैं मुस्कुराते हुए, “आआहह आहह, मज़े आ रहे है जीजू. ऐसे ही छोड़ते रहो मुझे, तोड़ा सा तेज़ छोड़ो.”
जीजू मुझे मज़े दे रहे थे. धीरे-धीरे मुझे छोड़ रहे थे, बीच-बीच में अपनी स्पीड को बढ़ा भी रहे थे तो मुझे मज़ा आ रहा था. “आआहह ऑश स्शह छोड़ो और छोड़ो” “हा-हा मेरी रंडी कुटिया, छोड़ तो रहा हू. मज़े कर तू, आज तक कभी नही छोड़ा होगा तुझे ऐसे. पता है मुझे.”
मैने कहा, “हा जीजू, बस छोड़ते रहो, मेरी छूट फाड़ दो आज.” बोले, “हा कुटिया, सबर कर ले, अभी शुरुआत है. अभी मज़े लेले, बाद में रोते-रोते चूड़ेगी.”
वो 1 मिनिट के लिए रुके तो मुझसे सबर नही हुआ, मैने खुद ने ही लंड को छूट में हिलना शुरू कर दिया. वो गाली देते हुए बोले, “मदारचोड़, रुक जेया, कैसे करेगी. साँस तो ले लेने दे कम से कम.” उन्होने पानी पिया और ज़ोर से छूट में लंड को पेलना शुरू करा.
अब में चिल्ला रही थी, मज़े आ रहे थे पर मेरी हँसी रुक गयी थी. क्यूंकी अब दर्द भी बहुत हो रहा था. अब जीजू मुझे एक जानवर की तरह, “चुड मेरी रंडी कुटिया, चुड मेरे लंड से, लेले इसे अपनी छूट में.” मैं “आहह सस्स्शह, मम्मी धीरे छोड़ो, बहुत दर्द हो रहा है. अहह ओहस्शह.”
“क्यूँ, क्या हुआ? अब कैसे दर्द हो रहा है? चुड अब, अब तो सबसे ज़्यादा मज़े आने चाहिए. अब तू बस मज़े ले.” वो मेरी छूट में लंड को पेले ही जेया रहे थे. बहुत ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करके. मुझे दर्द भी हो रहा था और मज़े भी आ रहे थे. उन्हे देख लग रहा था की उन्हे बहुत मज़े आ रहे थे.
“चुड मेरी रंडी चुड…” “किसकी रंडी है तू?” बार-बार मुझसे पूच रहे थे. अब उन्होने पोज़िशन बदली और मुझे कुटिया बना दिया. मुझसे मेरी पीठ नीचे और गांद को उपर उठाने करने बोला. मैने गांद उपर उठा ली तो उन्होने मेरी छूट में लंड एक बंदूक की तरह सेट कर दिया.
अब वो मुझे कुटिया बना कर छोड़ रहे थे. इसमे उनकी स्पीड कुछ ज़्यादा ही फास्ट थी. कहते, “तेरी दीदी की फॅवुरेट पोज़िशन है ये. ज़्यादा इसी में छोड़ता हू इसे. तू भी मज़े ले मेरी कुटिया, चुड और चुड.”
“आआहह…… स्शह…..” मैने कहा, “जीजू, अपने दीदी से शादी क्यूँ की? अपनी कोई गफ़ नही थी क्या?” कहते, “थी तो, पर घर वालो ने ज़बरदस्ती शादी करवा दी. अंजलि भी तेरी तरह ही पतली थी, बहुत ज़्यादा सेक्सी, उसे छोड़ने में बड़े मज़े आते थे मुझे. और ये मुझे इतना हवासी भी उसी ने बना दिया.
अब मेरा कोई दिन नही बीट-ता बिना छोड़े.” बोलते हुए वो मुझे छोड़े जा रहे थे. बहुत बुरी तरह छोड़ रहे थे. लग रहा था छोड़ते-छोड़ते उनकी एनर्जी बढ़ रही थी. “चुड कुटिया, मेरी रंडी, मेरी कुटिया, चुड मुझसे.”
मैं “आहह स्शह ओह्ो ओइईई” करके चिल्ला रही थी. कहते, “अभी और छोड़ूँगा तुझे, इतने में ही परेशन हो गयी.” मैने कहा, “परेशन नही हुई, दर्द हो रहा है.”
उन्होने थोड़ी स्पीड को कम करा और मुझे खुश करने के लिए आराम-आराम से छोड़ा. मेरे चुचे भी दबा रहे थे, बीच-बीच में मेरी गांद दबा-दबा कर थप्पड़ बजा रहे थे. मैने बाद में देखा तो मेरी गांद लाल कर दी थी उन्होने थप्पड़ मार-मार कर.
अब उन्होने फिर से पोज़िशन चेंज की, मतलब मुझे अपने लंड पर बैठने बोला. मैने उनके उपर जेया कर अपने हाथ से उनके लंड को छूट का रास्ता दिखाया. अब मैं उनके लंड पर उछाल रही थी. इस पोज़िशन में उन्हे काफ़ी मज़े आ रहे थे. ऐसे में वो मेरे चुचो को आचे से दबा पा रहे थे.
मेरा मूह नीचे करके मेरे होंठो को चूस पा रहे थे. और छोड़ने का स्वाद तो उन्हे आ ही रहा था. “उछाल कुटिया, आचे से उछाल, मेरे लंड को ठीक से अंदर ले.”
मुझको भी काफ़ी मज़े आ रहे थे क्यूंकी इसमे लंड अंदर तक छ्छू रहा था. अछा लग रहा था. मैं उनके लंड पर ही बैठी रही. उन्होने मुझे पलट दिया, अब हम रिवर्स कॉवगिरल की पोज़िशन में थे. मतलब मेरी गांद उनकी तरफ थी और मैं चुड रही थी गांद को उठा-उठा कर.
वो मेरी कमर पर हाथ फेरते, कभी मेरी गांद पर तो कभी थप्पड़ मार कर कहते, “उछाल रॅंड, रुक क्यूँ गयी, चुड और चुड.” अभी मैं तक गयी थी तो उन्होने अपनी कमर उठा-उठा कर छूट में लंड के धक्के मारने शुरू करे. अब मुझे मज़े आ रहे थे, मैं भी उनका साथ देने लगी नीचे की तरह बैठ कर.
हमने बहुत देर तक ऐसे ही चुदाई की, अब हम दोनो ही तक गये थे. तो वो रुके और उन्होने मुझे अपनी गोद में बिता लिया. फिर मुझे चूमना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे हम दोनो एक-दूसरे की बाहों में लेट गये, और होंठो में होंठ लेकर एक-दूसरे को देख कर चूस्टे ही रहे.
बीच में वो बोले, “आ, अब तेरी गांद मारु.” मैने माना करा तो वो कहने लगे, “नही, मुझे मारनी है.” मैने उनसे बोला, “अभी तो मैं काफ़ी दिन हू यहाँ, और आती-जाती रहूंगी, बहुत मौके आएँगे. आज रहने दो ना, तक भी गयी हू.”
तो कहते, “ठीक है मेरी जान.” ऐसा बोलते हुए उन्होने मेरे माथे पर किस किया. फिर लेट गये. “लेकिन तुझे अब हमेशा मुझसे चूड़ना होगा जब भी तू यहाँ आएगी.” मैने कहा, “हा-हा जीजू, मैं यहाँ आपसे चूड़ने ही तो अवँगी.” अब जीजू मुझसे लिपट कर सो गये.
इसके अगले पार्ट में जीजू ने मेरी गांद मारी है, वो जल्द ही उपलोआड होगा.
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