तो जैसा की पिछले पार्ट में आप सभी ने पढ़ा होगा मैं और शिखा, रोहिणी के फ्लॅट से निकले च्छुपते-च्छूपाते ताकि शिखा को कोई देख ना ले. और हम मेरे फ्लॅट की तरफ चल दिए.
हम स्टेर्स पर पहुँचे तो शिखा ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे स्माइल करते हुए देखा. हम फिर उन्ही स्टेर्स पर पहुँचे जहाँ शिखा की चुदाई की थी.
शिखा: भैया कुछ याद आया?
विवेक: नही, मुझे तो कुछ याद नही आया. तू बता क्या याद आया?
शिखा: ज़्यादा बनो मत समझे. आए बड़े, सब याद है आपको. वो सीडीयान, ये हॉल, सब.
मैने शिखा को उसी हॉल के सामने रोका और अंदर जाने लगा.
शिखा: नही-नही भैया, सोचना भी मत. चुप-छाप रूम पर चलो. यहाँ-वहाँ मत शुरू करो.
मैने उसे अंदर खींचा और दीवार से लगाया. फिर उसके होंठो पर होंठ रख दिए, और चूसने लगा. वो मेरे हाथ पर मार कर माना करने लगी, पर मैं चूस्टा रहा उसके होंठ और बूब्स दबाता रहा. वो मेरे हाथ पकड़ कर झटक देती बूब्स के उपर से.2-3 मिनिट्स की किस के बाद मैने उसे छ्चोढा.
विवेक: दर्र मत, यहाँ नही छोड़ूँगा. बस अपनी इस स्पेशल जगह को याद कर रहा था.
फिर शिखा को बाहों में उठाया और अपने फ्लॅट पर पहुँचा. शिखा ने गोद में रहते हुए ही दरवाज़ा खोला और फिर उसे अंदर ले जेया कर सीधा बेड पर पटक दिया और अपने कपड़े निकालने लगा.
शिखा: अरे-अर्रे रूको भाई, इतने क्या उतावले हो रहे हो. कितना गंदा कर रखा है पूरा रूम भैया. ऐसे गंदे ससुराल में तो मैं बिल्कुल नही रुकना चाहूँगी. भैया चूड़ना तो बहुत डोर की बात है, चलो हटो मुझे मेरा घर सॉफ करने दो पहले.
फिर हम दोनो ने मिल कर फ्लॅट की सफाई की आचे से. किचन, बेडरूम सब बढ़िया सॉफ हुआ. सफाई करते-करते हम दोनो ही गंदे हो गये, और पसीना भी आ गया. पर जैसे ही सफाई ख़तम हुई, और हमने एक-दूसरे को पसीने में लिटपते देखा, हम दोनो ने किस्सिंग शुरू कर दी.
शिखा ने उछाल कर अपने पैर मेरी कमर में लपेटे और अपने हाथ मेरी गर्दन में लपेट लिए और बहुत ज़ोर-शोर से किस करने लगे. हम दोनो किस करते-करते मैं वहीं फर्श पर लेट गया और शिखा के उपर चढ़ गया.
हम दोनो एक-दूसरे की बॉडी चूस रहे थे. बॉडी जो पसीने से पहले ही तार बतर थी, और अब हवस की गर्मी की वजह से और ज़्यादा हो रही थी. फिर हम दोनो 69 में आए और एक-दूसरे के छूट और लंड को चूसने लगे. चूसने भी क्या लगे खाने लगे.
शिखा इतनी ज़ोर से लंड चूस रही थी की मानो मूह के प्रेशर से उखाड़ देगी मेरा लंड. हम दोनो ही बुरी तरह और फुल जोश में चुसाई में गुम थे. कमरे में बस हमारी आ और चुसाई की लापर-लापर सुपर-सुपर की आवाज़ आ रही थी.
लगभग 10-15 मिनिट ऐसे ही चुसाई की होगी. फिर शिखा ने लंड छ्चोढा और मेरे सिर पर हाथ से मार कर बुलाया. अब मैं घूमा और उसकी साइड में लेट कर एक टाँग उठाई उसकी और लंड छूट में डाल दिया. अब लंड उसकी चिकनी छूट में अंदर-बाहर करते-करते एक हाथ से उसकी छूट उपर से मसल रहा था, और उसे किस कर रहा था गले पे, गाल पे, कंधे पे, बूब्स पे और चेस्ट पे.
हम दोनो ही एक-दूसरे से कुछ नही बोल रहे थे. शिखा भी बस धीरे-धीरे आहें भर रही थी और मगन हो कर हम दोनो चुदाई में लगे थे. कमरे में पूरी तरह शांति थी, और बस लंड अंदर-बाहर होने की चिपचिपी पच पच की आवाज़ आ रही.
मैं लंबे-लंबे शॉट्स मार रहा था, जिससे लंड एक-दूं आखरी एंड तक घुसा देता था. ऐसे ही 10 मिनिट छोड़ा होगा. फिर शिखा घूम कर उठी और उपर आ गयी और आयेज-पीछे हो कर लंड छूट में लेने लगी. अब वो मस्ती में पूरी तरह चूर थी और ठप ठप करके लंड खिला रही थी छूट को. मैं उसके उछलते बूब्स देख कर पागल हो रहा था.
शिखा: पकड़ लो भैया, शर्मा क्यूँ रहे हो?
मैं उसके बूब्स पकड़े और उसे अपने मूह के पास खींच लिया.
विवेक: बहुत बड़े और बहुत भारी नही हो गये है तेरे?
शिखा: अब साल भर से चूस रहे हो, और आते की तरह गूँथ रहे हो. तो बड़े तो होंगे ही ना भैया. मेरी सारी ब्रा टाइट होने लगी है मुझे और पूरी औरत लगने लगी हू.
वो अब पलट गयी और अपने हाथ पीछे रख कर छूट में लंड अंदर-बाहर करने लगी. मैं तोड़ा उठा और उसके बूब्स पकड़ लिए पीछे से, और उसकी गर्दन चूसने लगा. क़रीब 20 मिनिट तक उसने लंड की सवारी की उलट-पलट हो-हो कर, और फिर उसकी छूट झड़ने को हुई. तो जैसे ही पानी निकला, उसने खड़े हो कर मेरी पूरी बॉडी पर गिरना शुरू कर दिया.
मेरे चेहरे से लेकर मेरी च्चती पेट लंड हर जगह छूट को मसल-मसल कर पानी गिराया और फिर मेरे उपर लेट कर अपनी पूरी बॉडी मेरी बॉडी से रग़ाद ली.
अब हम दोनो की बॉडी से पसीने और शिखा की मूट की बूंदे गिर रही थी, और हम दोनो की बॉडी स्मेल कर रही थी. शिखा तो मेरी चेस्ट पर सिर रख कर मुझे हग करके लेट गयी.
मैने जब दोबारा लंड डालना चाहा तो उसने माना कर दिया. तो मैने नहाने चलने को बोला. तब भी उसने माना कर दिया और बस मुझसे लिपट कर वहीं मेरे उपर लेती रही और हम दोनो वैसे ही सो गये.
जब मेरी आँख खुली तो मैने शिखा को बाहों में कस्स कर पकड़ा और उठ कर बेड की तरफ गया. शिखा ने नींद में ही मुझे टाइट हग कर लिया. मैने उसे धीरे से बेड के कॉर्नर पर लिटाया और उसके उपर झुक कर एक हाथ से अपना लंड सहलाया. इससे लंड थोड़ी देर में टाइट हो गया.
फिर लंड पकड़ा और शिखा की छूट को लंड से ही खोला और दे मारा एक झटके में ही. शिखा की आँखें खुल गयी झटके से और वो आअहह चिल्लाते हुए मेरी तरफ देख कर मेरे सीने पर मारने लगी.
शिखा: कुत्ते कमीने भैया, जगा कर छोड़ लेते यार. मैं कितना अछा सपना देख रही थी. हमारी शादी हो रही थी, और हम फेरे ले रहे थे.
मैने कुछ नही बोला, बस उसके माथे पर हाथ फेरते हुए उसे किस किया. तो वो मेरे गले से लग गयी, और मैने भी उसे कस्स कर गले लगा लिया. फिर नीचे से फुल जोश में झटके पेलने लगा हचक हचक कर. शिखा ने मुझे बहुत टाइट पकड़ लिया और हर झटके को एंजाय करने लगी.
शिखा: ह्म एयाया मा एस भैया अफ रे, मारो और ज़ोर से यॅ फक मे हनी, फक मे हार्डर. नींद से अब हर बार ऐसे ही जगाना भैया मेरे. एम्म्म फक फक ऐसे ही छोड़ते रहो मा हाए.
विवेक: शिखा मुझसे शादी करेगी?
शिखा ने मुझे छ्चोढा और मेरे चेहरे की तरफ देखने लगी कन्फ्यूषन में, की मैं चुदाई के नशे में बोल रहा था, या सच में पूच रहा था.
शिखा: भैया ये चुदाई का नशा बोल रहा है ना?
विवेक: नही शिखा, मैं सच में पूच रहा हू तुझसे, शादी करेगी मुझसे? मेरे घर वाले लड़की देख रहे है मेरे लिए, तू कहे तो तेरी फोटो दिखा डू उनको?
शिखा मुझे देखते-देखते रोने लगी, और फिर मेरे होंठो पर किस करके अपना सिर हा में हिलने लगी. हम दोनो हग किए हुए चुदाई का मज़ा ले रहे थे. मैं बड़ी बेदर्दी से उसकी छूट बजा रहा था.
शिखा: भैया, अब आज ही एम्म आहह आज ही फाड़ दोगे क्या एम्म री कुट्टी. एम्म आ आअहह आअहह रूको, प्लेआसी धीरे छोड़ो यार. हट्तो मुझे नही करनी तुमसे शादी जानवर कही के. अभी तो डोर भी जेया सकती हू. फिर तो दिन-रात आपकी हो जौंगी. आप तो मार दोगे छूट मार-मार कर भैया. सारा दिन सारी रात मेरे ही उपर चढ़े रहा करोगे. ना बाबा ना! मुझे नही करनी आपसे शादी एम्म्म आआहानं भैया प्लीज़ धीरे छोड़ा करो ना.
मैं हासणे लगा तो मुझे देख कर वो भी हासणे लगी. फिर मैने उसे गोदी में उठाया और बातरूम ले कर गया. वैसे ही उसकी छूट में लंड डाले हुए वहाँ शवर ओं किया और उसे वैसे ही लिए हुए नहाने लगे. वो मेरे होंठो को किस कर रही थी. फिर खुद ही उच्छल-उच्छल कर अपनी छूट छोड़ने लगी.
विवेक: शिखा नीचे लिटा कर छोड़ू या दीवार से लगा कर?
शिखा: जैसे आप चाहो भैया, अब तो पूरी आपकी ही हू.
मैने उसे दीवार से लगाया और तोड़ा पीछे हो कर उसे हल्का झुकाया. इससे लंड पूरा बाहर निकाल कर अंदर डालने में धक्के आचे से पद रहे थे और अंदर तक पेलने में शिखा को बढ़िया दर्दनाक मज़ा मिल रहा था. लंबे-लंबे धक्के पेल-पेल कर उसे छोड़ा.
विवेक: शिखा मेरा होने वाला है जान, कहाँ निकालु?
शिखा: भैया इतने टाइम एम्म से छोड़ रहे हो. कभी मेरा आहह हाए रे कुट्टी कहा माना है? जहाँ मर्ज़ी होती है वहीं निकाल देते हो. आज भी निकाल दो ना आहह एम्म.
मैने धक्के पेले और जैसे ही एक पिचकारी छूट में निकली धक्का पेलते हुए शिखा को पूरा दीवार से सता दिया, और लंड और अंदर पेलने के चक्कर में शिखा को इतना पुश किया अंदर की तरफ की मैं अपने पंजे पर आ गया.
शिखा: आहह बस करो भैया. अब क्या मूह से बाहर निकालोगे? छूट में दो बार छ्चोढ़ चुके हो. याद रखना अभी पीरियड्स ख़तम हुए थे परसो ही. बच्चा ठहर गया ना तो गंद फटत जाएगी.
विवेक: ठहर जाने दे मेरी जान. तुझे तो मा बनाने का हक़ है मुझे. आज नही तो कल मेरे बच्चे की मा तो बनेगी ही तू मेरी जान.
शिखा शर्मा कर मेरे सीने में अपना सिर च्छूपा लेती है.
विवेक: आबे इतना कुछ होने के बाद अब शरमाना याद आया, साली रंडी कुटिया.
शिखा: एक सेक भी मेरी खुशी बर्दाश्त नही हुई कुत्ते. पर भैया क्या सच में हमारी शादी होगी? सब मान तो जाएँगे ना?
विवेक: देख अपने घरवालो को तो मैं माना लूँगा. पर तेरे घरवालो के लिए बस मुझे सिद्धि ही एक रास्ता दिखाई दे रही है. तू हा बोल तो मैं प्लान बनौ यार.
शिखा: भैया यार प्लीज़, फिर से वही बात मत शुरू करो. उस बात के चक्कर में देखो कितना चूड़ना पड़ा है मुझे इतनी डोर आ कर.
विवेक: फिर तू ही बता क्या करे?
उसके पास कोई जवाब नही था. फिर दोनो चुप हो गये नहा कर बाहर आए कपड़े चेंज किए और रोहिणी के फ्लॅट पर चले गये. फिर आराम किया और शाम में जब रोहिणी आई तो हम सभी ने डिन्नर किया साथ, जो आज शिखा ने तैयार किया था.
हमने रोहिणी को हमारे शादी करने के प्लान का बताया तो बहुत खुश हो गयी रोहिणी. हम दोनो की नज़र उतरी और गले लगा कर गाल चूमे और शिखा को तो बहुत प्यार किया, जैसे उसकी खुद की बेटी की शादी की बात चली हो.
फिर शिखा और रोहिणी ने खूब बातें की, मतलब एक-दूसरे की चुदाई की कहानी सुनी, की कैसे मैने उन दोनो को छोड़ा. फिर किसको कों सी पोज़िशन अची लगती है, किसमे ज़्यादा दर्द होता है, वगेरा-वगेरा डिसकस किया.
रोहिणी: देखो शिखा मुझे ग़लत मत समझना. पर विवेक जिस भी वजह से सिद्धि भाभी को छोड़ने के लिए कह रहा हो, पर ये बात तो सच है के सिद्धि भाभी को विवेक जैसे लड़के की ज़रूरत तो है.
शिखा: आंटी प्लीज़ अब आप तो मत शुरू करो ये सब. मुझे नही अछा लगता ये टॉपिक.
रोहिणी: बेटू बात को सुनो और समझो. मैं एक औरत हू, इसलिए तुम्हे बता रही हू इतने साल कैसे अकेले रही हू. और भाभी जी तो बहुत टॉर्चर से रही है. भैसाहब जिस तरह उन्हे ट्रीट करते है, वो डिज़र्व नही करती है. उन्हे विवेक जैसा केरिंग लड़का चाहिए, जो उनको एमोशनल और फिज़िकल दोनो तरह से सपोर्ट करे. अब ये बात और है के विवेक और तुम शादी का प्लान कर रहे हो, वरना तो विवेक पर्फेक्ट था.
शिखा: पर आंटी आप ही सोचो ना मेरा हज़्बेंड मेरी ही मम्मी के साथ फिज़िकल हो. मुझे केसा लगेगा यार, और जितना मैं भैया को जानती हू, ये बहुत हरामी है. ये एक-दो बार करके नही छ्चोधेंगे. फिर तो ये रोज़-रोज़ सेक्स करेंगे मुम्मा के साथ, और उससे भी ज़्यादा ये ना देखना किसी दिन फिर हम तीनो को साथ में करने का भी बोलेंगे. और हमे करना भी पड़ेगा.
अब आप ही बोलो आंटी आपको कैसा लगेगा अगर आप और मुम्मा एक ही बेड पर एक ही लड़के के लिए नंगी हो?
रोहिणी: मुझे तो बहुत मज़ा आएगा बेटू. सच में सिद्धि भाभी ने बहुत आचे से मेनटेन कर रखा है खुद को.
मैं और रोहिणी हासणे लगे, तो शिखा चिढ़ कर मूह बना कर बैठ गयी.
रोहिणी: बेटू मेरी बात पर आराम से सोचना ज़रूर. सिद्धि भाभी बहुत अकेली है. उन्हे किसी के सहारे की ज़रूरत है, ट्रस्ट मे.
ये सब बातें ऐसी ही होती रही. रोहिणी शिखा को मानने की कोशिश करती रही, और फिर ऐसे ही हम सोने चले गये. दूसरे दिन सनडे था, तो लाते से उठे और फिर नाश्ता वगेरा किया तो 12 बाज गये थे.
फिर मैने एक बार शिखा की चुदाई की, और एक बार रोहिणी की, और दोनो को किचन में ही छोड़ा जब वो लंच तैयार कर रहे थे.
फिर शिखा को बस पकड़ाय और वो वापस चली गयी कॉलेज.
स्टोरी कैसी लगी ज़रूर बताईएएगा