ही फ्रेंड्स ये क्विनटेट सीरीस की लास्ट सीरीस है. फर्स्ट फोर है: “ये मेरी फॅमिली”, “मदद का हाथ”, “सफ़र नयी ज़िंदगी का (डेसिमनीषा)”, “लंड का खेल (डेसिमनीषा)” आंड लास्ट सीरीस है “अंकिता की जवानी”. ये क्विनटेट मतलब 5 सीरीस ऑफ 5 इन्सेस्ट फॅमिलीस. सीरीस के मुख्या किरदार है रोहन, सुनील, मनीषा, काव्या आंड अंकिता. और मुझे तो जानते ही होंगे, मैं रोहन. तो बिना किसी देरी के स्टार्ट करते है अंकिता की कहानी उसी की ज़ुबानी.
ही, मेरा नाम अंकिता है. आपने मेरे बारे में “कज़िन सिस्टर के साथ हज़्बेंड स्वापिंग” में पढ़ा होगा. तो मेरी कहानी स्टार्ट होती है जब मैं होली में अपने माइके आई थी.
अपने माइके आने के बाद पता चला की मनीषा (प्रोटॅगनिस्ट ऑफ “सफ़र नयी ज़िंदगी का”) अपनी फॅमिली के साथ यहीं देल्ही शिफ्ट हो गयी थी और उसका भाई नील और उसकी वाइफ रिया भी वहीं शिफ्ट हो गये थे. तो मैं मनीषा को सर्प्राइज़ देने गयी, पर सर्प्राइज़ मुझे मिला.
मैने देखा मनीषा पूरी नंगी बेड में लेती थी, और उसके आस-पास चार लंड थे. एक तो उसके भाई का था. और यही देख के मुझे मनीषा के पास रहने की इक्चा जागी. फिर मैने मेरे हज़्बेंड आकाश को बोला की वो भी ट्रान्स्फर ले ले.
तारीख थी 29 मार्च और हम गाड़ी में देल्ही जेया रहे थे.
आकाश: यार तुमको अचानक क्या हुआ जो तुमको यहाँ आने की इक्चा हुई?
मैं: आबे यार तुमको मैं क्या ही बतौ. यार वैसे भी कुछ समय में छ्होटी की शादी होगी तो मुम्मा-पापा अकेले हो जाएगे.
आकाश: वो तो छ्होटी और उसके हज़्बेंड भी कर लेंगे, इसमे हमारा अचानक आना ज़रूरी था?
मैं (गुस्सा होके): क्यूँ? मेरे पेरेंट मेरी भी तो ज़िम्मेदारी है. पहले हम कुछ दिन इनके घर रहेंगे. फिर अपना अपार्टमेंट ले लेंगे और तुम्हारी फॅमिली वालों को भी बुला लेंगे.
आकाश: वो सब ठीक है. लेकिन ये ट्रान्स्फर मुझे मिला कैसे? कंपनी वाले इतनी आसानी से तो ट्रान्स्फर देते नही. तुमने उनसे ऐसी क्या बात की?
मई (मुस्कुराइ): कुछ नही डार्लिंग, बस थोड़ी रिक्वेस्ट की.
एक हफ्ते पहली की बात है, आकाश ने ट्रान्स्फर के पेपर्स फिल कर दिए थे. पर ट्रान्स्फर होगा नही होगा, पता नही था. पर एक होटेल रूम में…
मान 1: तो तुम चाहती हो की तुम्हारे हज़्बेंड का ट्रान्स्फर हो?
मान 2: तो वो तो तुमको चाहिए. हुमको क्या मिलेगा?
मैं: सिर, मुझे ये ट्रान्स्फर ज़रूरी चाहिए. मैं इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हू.
मान 3: तुमको ज़्यादा कुछ नही करना. बस हम चारों को खुश करना है.
मैं (मुस्कुराते हुए): ठीक है.
ये सुन के उन्होने मुझे चारों और से घेर लिया. दो लोग मेरे बूब्स की तरफ गये, बाकी दो मेरे कपड़ों के उपर से मेरी छूट सहला रहे थे. फिर अचानक से उन्होने मेरे कपड़े उतार दिए, मैं ब्रा और पनटी में थी.
दो आदमी मेरी नेक पे किस कर रहे थे. एक ने मेरी पनटी के अंदर हाथ डाल के मेरी छूट में फिंगरिंग स्टार्ट कर दी. पर लास्ट वाला जब मुझे लीप पर किस करने आया, तब मैने उसको सॉफ-सॉफ माना कर दिया और बोला की मैं सिर्फ़ अपने हज़्बेंड के ट्रान्स्फर के लिए कर रही हू, सो किस्सिंग ऑफ लिमिट्स. ये सुन के उन्होने मुझे बेड में गिरा दिया और अपने कपड़े खोलने लगे. मैने भी अपनी ब्रा और पनटी उतार दी.
सब नगञा अवस्था में थे. उनके लंड 5-5.5 इंचस के थे. उन्होने मुझे घोड़ी बनाया और एक मेरे पीछे बाकी मेरे आयेज थे. सभी ने कॉंडम पहने और पीछे वाले ने अपना लंड मेरी छूट में डाला. आयेज वेल ने अपना लंड मेरे मूह में डाला और मेरा भी मनीषा जैसे गंगबांग स्टार्ट हुआ.
पर मनीषा के पास जो लंड थे, उनके सामने ये थोड़े छ्होटे और कम मोटे थे. अब चुदाई स्टार्ट हुई. मेरा 36-30-38 का शरीर, मेरे बूब्स ज़िज्गले कर रहे थे. पिछले वाले का लंड मेरी छूट को मज़े दे रहा था. सामने वाले को मैं आचे से ब्लोवजोब दे रही थी.
पुर रूम से ‘फूच फूच’ ‘गवक गवक’ की और मोनिंग की आवाज़ आ रही थी. उनका लंड ज़्यादा मोटा नही था तो मैं डीप थ्रोट भी दे पा रही थी.
मैं: अया उम्म्म, छोड़ो और ज़ोर से.
मान 1: अया, ऐसे ही करती रहो. तुमहरे हज़्बेंड का ट्रान्स्फर पक्का.
मान 2: यार, तू रुक और हुमको करने दे.
मान 3: यार, क्या ब्लोवजोब दे रही है. मज़ा आ रहा है.
मान 4: भाई, अब मुझे भी मज़े लेने दे ना.
एक को मैं ब्लोवजोब दे रही थी और एक के साथ सेक्स कर रही थी. बाकी दो लोग हुमको देख के अपने-अपने लंड को हिला रहे थे. फिर उन्होने अपनी जगह बदली, और बाकी दो लोगों ने उनकी जगह ले ली. अब तक मैं डॉगी स्टाइल में थी. अब मैं अपने पीठ के बाल लेट गयी थी. मज़े आ रहे थे, पर मेरा मूह तक चुका था.
डूस मिनिट्स हो चुके थे चुदाई को. मज़े खूब आ रहे थे. पर ये मज़े ज़्यादा देर तक टिक नही पाए. क्यूंकी उनका स्टॅमिना उतना अछा नही था. सभी मुझे एक-एक बार छोड़ चुके थे. फिर सभी ने अपने कॉंडम निकाले और मेरे फेस के पास आके अपना-अपना लंड हिलने लगे. कुछ देर में सभी मेरे फेस में झाड़ गये.
यहीं सोचते-सोचते मुझे नींद आ गयी, जब आकाश ने मुझे उठाया.
आकाश: जान, उठो, हम पहुँचे गये.
मैने देखा तो हम मेरे माइके पहुँचे चुके थे. मेरे माइके में मेरी मा पापा और एक छ्होटी बेहन थी. मामा-मामी भी वहीं रहते थे पर अभी वो कहीं गये थे. उन्ही के रूम में हम रुकने वाले थे.
ये तो शुरुआत है, अंकिता की जवानी की कहानी तो बाकी है. और ये जवानी मुझे क्या-क्या सुख देती है, या क्या कुछ नयी परेशानी लेके आती है. और सबसे बड़ा और महत्वपुर्णा सवाल: क्या ये भी एक इन्सेस्ट स्टोरी होने वाली है? अगर हा, तो मैं किसके साथ करने वाली थी? ये सब प्रश्नो का उत्तर जानने के लिए पढ़ते रहिए और मुति या फिंगरिंग करते रहिए.
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