थियेटर में की विधवा मौसी की चुदाई कहानी

रेखा: आप जब साथ हो. तो मुझे टेन्षन किस बात की? आप बहुत बड़े वाले शैतान हो. मेरे प्यारे शैतान रोहित हो आप. आप जैसा बोलॉगे वैसा ही करूँगी. मेरी लाइफ और मेरा सब कुछ आपका है. जैसे मॅन हो वैसे आप अपनी मर्ज़ी से करना.

अब कहानी आयेज से-

अब मैं और रेखा तैयार हो गये. रेखा मौसी ने विधवा वाली नॉर्मल स्काइ कलर की सारी पहन ली. मुझे उसको उस सारी में देख कर बहुत दुख हुआ. रेखा मेरे रूम में ही थी. मैने कहा-

मैं: तुझे इस तरह इस सारी में देख कर अछा नही लगता.

रेखा: तो, क्या करू? अब ऐसे ही तो रहना पड़ता है, एक विधवा औरत को. आप चिंता मत करो मेरी.

मैं: अभी हम माल में चलेंगे. और वहाँ से तेरे लिए आज किराए पर आचे कपड़े लेंगे. तू वही पहनना आज.

रेखा: पागल हो आप. ऐसे-कैसे यार, मेरा बेटा भी साथ में होगा. और मुझे कोलोरफुल कपड़े में देख कर लोग क्या बोलेंगे?

मैं: तुझे लोगों की चिंता है या मेरी?

रेखा: अछा ठीक है. लेकिन, मेरे बेटे का क्या करोगे?

मैं: मैं हू ना.

इतने में उसका बेटा अनिल आ गया. वो बोला हुंसे जल्दी चलने को. वो काफ़ी खुश नज़र आ रहा था. मैने मौसी से कहा-

मैं: देखो मौसी, अनिल कितना खुश है, बाहर घूमने के लिए.

रेखा (धीरे से हेस्ट हुए बोली): और उसकी मम्मी भी.

मैने भी उसे स्माइल दी. फिर हम घर से चल दिए. मैने अपनी बिके पर बिताया. अनिल मेरे आयेज था, और रेखा मेरे पीछे थी. उसने एक हाथ मेरे कंधे पर रखा. हम घर से चल दिए. मैने धीरे से कहा-

मैं: तोड़ा सा और आयेज होके बैठ. तुझे अब किस बात की शर्मा है?

रेखा भी मेरी बात मानते हुए, आयेज आई. और उसका एक बूब मेरे से चिपक गया. मैने अपना एक हाथ उसकी जाँघ पर रखा. फिर सहलाते हुए, बिका चला रहा था. वो चुप-छाप बैठी हुई थी. मैने साइड मिरर में देखा, उसकी नज़रें नीचे झुकी हुई थी.

फिर हम 10 मिनिट में एक माल में गये. वहाँ मैं लेडी कपड़ों की शॉप पर, मौसी को साथ ले गया. मैने रेखा का हाथ पकड़ा हुआ था. वो भी साथ में खुशी से चल रही थी. अनिल ने तभी कहा-

अनिल: भैया, हम यहाँ क्यूँ आए है? देखो ना, कितनी सारी दुकाने है. और कितना बड़ा माल है ये.

मैं: मज़ा आ रहा है ना? हम मौसी के लिए कपड़े लेने आए है. तेरी मम्मी ऐसी सारी में अची नही लग रही ना?

अनिल: हा, भैया. मम्मी को नये कपड़े दिलाओ आज.

अनिल भी मेरे बात से खुश हो गया. मैने उसकी मा की तरफ आँख मारते हुए कहा-

मैं: देख कैसे खुश है. तू फालतू टेन्षन लेती है.

रेखा मेरी और देख कर मुस्कुरा रही थी. मैने उससे कहा.

मैं: मेरी जान. तू खुश है ना?

रेखा: हा, बहुत ज़्यादा. आज मज़ा रहा है लाइफ में जीने का.

फिर हम शॉप पर गये. वहाँ सेल्समन ने मौसी को आचे-आचे कपड़े दिखाए. रेखा मेरी और देख रही थी. वो चाहती थी मैं उसके लिए पसंद करू. मैने वहाँ मौसी के लिए एक लेग्गी और कुरती पसंद की. लेग्गी ब्लू और ब्लू कुर्ता था.

मौसी को वो ट्राइ करने को कहा. रेखा मेरे बात मानते हुए, वो रूम में ट्राइ करने गयी. 10 मिनिट बाद वो बाहर आई. दोस्तों उसका रूप उस कपड़े में क्या मस्त लग रहा था. मैने कहा-

मैं: वाह मेरी रानी. तू तो आज छा गयी. क्या बॉम्ब लग रही है. ये कपड़े तुझ पर आचे लग रहे है. आज इन्हे ही पहन तू.

रेखा: हा, लेकिन. मुझे शरम आ रही है. देखो, कितनी टाइट लेग्गी है.

उसमे उसकी टाइट गंद उभर रही थी. जो मेरे लंड को टाइट कर रही थी. मैने कहा-

मैं: साली तू फालतू बातें मत सोच. आज इतने टाइम बाद तुझे खुल कर एंजाय करने को मिला है. मेरे साथ एंजाय कर. भूल जेया सब शरम.

रेखा ने मेरी बात मानी और उसने वही कपड़े पहने. उसके बाद हम वहाँ से निकले. अनिल ने भी फिर कहा-

अनिल: मम्मी आप बहुत अची लग रही हो. ऐसे रहा करो आप हमेशा.

मैं: देख तेरा बेटा भी तुझे सपोर्ट कर रहा है.

रेखा: हा, अब मैं बहुत खुश हू. आप मेरे साथ जो हो. अब कहाँ जाना है बेबी?

मैं: मेरे जान, चलो आइस्क्रीम खाते है.

दोस्तों रेखा ब्लू लेग्गी और कुरती में बहुत ही मस्त लग रही थी. उसमे उसकी जवानी उभर के बाहर आ रही थी. फिर हम आइस्क्रीम खाने लगे. तभी धीरे से मैने उससे कहा-

मैं: साली, तुझे ऐसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया है. कब से पंत में मचल रहा है.

रेखा (हेस्ट हुए): तो, मैं क्या करू? यहाँ थोड़ी ना शांत कर सकती हू आपको. आप ना बहुत शैतान हो रहे हो.

मैने उसका एक हाथ धीरे से टेबल के नीचे, मेरे लंड पर रख दिया. रेखा शर्मा रही थी, आँखों से ना का इशारा कर रही थी. उसका बेटा सामने आइस्क्रीम ख़ाआ रहा था. मैने उसे शांत रहने को कहा. वो भी अब क्या करती. उसने लंड को पंत के उपर से पकड़ लिया.

हम ऐसे ही मस्ती करते रहे. रेखा मेरा लंड मसल रही थी. तभी मैने फिर अनिल से कहा-

मैं: अनिल मज़ा रहा है ना? कैसे लगी आइस्क्रीम?

वो बस हा में सिर हिलाते हुए, हेस्ट हुए खा रहा था. रेखा मेरे कान के पास बोली-

रेखा: मुझे भी आपके साथ बहुत मज़ा रहा है. ऐसा एंजाय कभी नही किया. थॅंक्स बेबी.

वो मेरा लंड मसल रही थी. और हम ऐसे ही नोक-झोक करते रहे. उसके बाद हम वहाँ से मोविए देखने गये. माल से बाहर निकल कर बढ़िया थियेटर में गये. और मोविए देखने अंदर चले गये.

मैने पहले ही रोमॅंटिक मोविए की टिकेट ली थी. हम तीनो अंदर गये तो वहाँ ज़्यादा भीड़ नही थी. पुर हॉल में 40 से 50 लोग होंगे. मौसी ने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था. हम तीनो पीछे की तरफ जहाँ लाइट कम आती है, वहाँ कॉर्नर में चले गये.

मैने उसके बेटे से कहा: अनिल, तू घर पर मम्मी को बताना मत की हम यहाँ आए थे. वरना तुझे अगली बार घूमने नही लेके अवँगा.

अनिल: ओक भैया. मैं कुछ नही बोलूँगा.

मौसी मेरे बगल में बैठी हुई थी. मैं बीच में था और मेरी साइड में अनिल था. 10 मिनिट बाद मोविए शुरू हुई. अनिल मोविए देखने में लगा हुआ था. मोविए की लाइट हम तक बहुत कम आ रही थी.

तभी मैने अपना हाथ साइड से लेते हुए रेखा के एक बूब्स पर रख दिया. वो धीरे से मुझसे बोली-

रेखा: आप भी ना, क्या कर रहे हो? देखो ना बच्चा साथ में है, थोड़ी तो शर्मा रखो.

तभी मैने उसके बेटे से कहा: अनिल तू आयेज वाली सीट पर बैठ जेया. वहाँ तुझे आचे से मोविए दिखेगी. वो सीट भी बड़ी है.

अनिल भी बात मानते हुए वहाँ चला गया. अब मैने कहा-

मैं: रेखा रानी. अब तो ठीक है ना? अब ज़्यादा नाटक मत कर. हम बाहर एंजाय करने आए है.

रेखा: मैने कब माना किया है. एंजाय खूब करो आप. बस बेटे का भी ध्यान रखना होगा.

ये कह कर उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया. मैने उसका एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया. मैने कहा-

मैं: देख साली. कब से खड़ा है ये.

रेखा: हा, अभी शांत करती हू इसे.

रेखा अब बिना झिझक के नीचे झुकी, और मेरी जीन्स की चैन खोल दी. तभी मैने उसे रोका-

मैं: रुक मेरी जान. पंत ही खोल देता हू.

रेखा: क्यूँ करना है? ऐसे ही ठीक है ना.

मैने उसकी नही सुनी और पंत मैने घुटनो तक कर दी. और साथ में जॉकी भी. मैं नीचे से नंगा था. रेखा को मैने नीचे झुका दिया. रेखा ने देर ना करते हुए मेरा 7 इंच का कड़क लंड पकड़ लिया. फिर उसे मूह में लेने लगी.

जब वो मूह में लंड ले रही थी, उसके हाथ की चूड़ियाँ खनक रही थी. मुझे सुकून मिल रहा था. मुझे उसके बेटे की कोई परवाह नही थी. मैं उसका गला पकड़ा के लंड ठोके जेया रहा था.

मैं: ह उहह बेबी, एस साली चूस. कितना आचे से चूस्टी है तू.

रेखा: ह्म, सब आपसे सीखा है. आपको खुश रखना मेरी ड्यूटी है. आपने मेरे लिए इतना सब किया है.

रखा वापस से लंड को चूसने लगी. वो लंड को हाथ से हिलाते हुए चूस रही थी. मैने उसका बूब्स कुरती के उपर से पकड़ा और मसालने लगा. रेखा के मोटे-मोटे बूब्स दबा रहा था.

रेखा: उम्म्म्म उम्म्म्म ष्ह.

हमारी गरम सिसकियाँ निकल रही थी. वो बिना दर्रे खुल के मज़े ले रही थी. 10 मिनिट तक मौसी ने लंड खूब चूसा. फिर मैने उसे सीधा किया, और उसे अपनी गोद में बैठा लिया. हेस्ट हुए वो बोली-

रेखा: मेरे पातिदेव, इतना मज़ा आज तक कभी नही किया. सच में आप बहुत आचे हो. ई लोवे योउ बेबी.

मैं: साली, तू बस देखती जेया. कितना मज़ा और आनंद देता हू.

फिर मैं उसके बाल पकड़ कर उसके होंठो को चूसने लगा. वो भी खुल के मेरे लिप्स चूस रही थी. मैने धीरे से उसके बाल खोल दिए. रेखा भी अब सब भूल कर, गरम सिसकी लेते साथ दे रही थी.

रेखा: बहुत मज़ा आ रहा है. आप बहुत सेक्सी हो. ह्म्‍म्म्म उहह उम्म्म्म.

एक हाथ मेरा उसकी मोटी गंद दबा रहा था. रेखा की गंद बहुत ही मस्त और सॉफ्ट थी. मैने कहा-

मैं: मेरी जान. तेरे ये गंद बहुत अची लगी. आज इसे ही छोड़ूँगा.

रेखा: सब आपका ही है. जो मॅन करे वो करना, लेकिन यहाँ मत करना प्लीज़.

मैं: हा, यहाँ तेरी छूट मारूँगा.

रेखा: यहाँ कैसे होगा? अनिल देख लेगा ना. सब गड़बड़ हो जाएगी.

मैं: तू वो सब मत सोच. मुझसे अब रहा न्ही जेया रहा है. जो होगा मैं देख लूँगा. तू मेरा साथ दे.

रेखा: मैं तो हमेशा आपके साथ हू. जो करना है करो.

मैं: तो अब अपनी लेग्गी नीचे करके, सीधा लंड पर सीधी बैठ जेया.

रेखा ने वही किया. उसने लेग्गी नीचे की अंधेरे में कुछ नही देख रहा था. मुझे तो बस चुदाई चाहिए थी. रेखा भी गरम थी, बस उसे तोड़ा दर्र था.

अब वो भी नीचे से नंगी हो गयी. फिर मेरे आयेज आके धीरे से लंड पकड़ कर उसने छूट पर सेट किया, और बैठ गयी. उसके मूह से सिसकी निकल गयी. लंड अभी भी उसकी छूट के लिए बड़ा था. फिर भी वो बैठ गयी. मेरा पूरा लंड उसने छूट में ले लिया.

5 मिनिट तक वो ऐसे ही बैठी रही. मैने उसका मूह अपनी तरफ किया. और लिप्स को किस करने लगा. और धीरे से कहा-

मैं: बेबी, अब तू धीरे-धीरे उछाल लंड पर.

रेखा: हा, लेकिन आपका लंड बहुत बड़ा है. प्लीज़ धीरे से करने दो मुझे. वरना मेरी चीख निकल जाएगी.

उसने अपने दोनो हाथ आयेज वाली सीट पर सेट किए. रेखा अब धीरे से उपर-नीचे होने लगी. कमर हिला कर चूड़ने लगी. रेखा की गरम गीली छूट में, लंड पूरा अंदर था. वो बस 3 इंच उपर-नीचे होती. धीरे से सिसकियाँ भी निकल रही थी.

रेखा: ऑश ह उफफफ्फ़ मा. बहुत टाइट लंड है आपका. छूट में पहले से ही दर्द है.

मैं: बेबी, अभी तक तुझे दर्द हो रहा है?

रेखा: होगा नही क्या? कल रात कितना ज़ोर से किया था. आप बहुत बेरेहमी से सेक्स करते हो. मेरे जान निकल गयी थी.

उसकी बातें मुझे गरम कर रही थी. मुझसे रहा नही जेया रहा था. रेखा 10 मिनिट तक ऐसे ही धीरे-धीरे उछाल रही थी. उसके बाद, उसमे भी तोड़ा जोश आया, और झटके थोड़े तेज़ कर दिए.

रेखा मौसी अब ज़ोर-ज़ोर से उछालने लगी. वो अब लंड 6 इंच अंदर-बाहर कर रही थी. मैं आयेज से उसकी छूट मसल रहा था. उसकी छूट पर बाल देख कर बोला-

मैं: तूने साली अभी तक बाल नही हटाए?

रेखा: उहह उम्म्म. आज सॉफ कर दूँगी बेबी. आपको आयेज से सफाई मिलेगी. अब सब आपके लिए ही करना है.

मैं: एस बेबी, उहह उछाल और ज़ोर से.

रेखा पुर जोश में उछाल रही थी. मैं कुरती के उपर से उसके मोटे बूब्स मसल रहा था. उसकी सिसकियाँ बढ़ रही थी. अनिल मोविए की आवाज़ में बिज़ी था. उसे हमारी चुदाई की आवाज़ नही आ रही थी.

15 मिनिट बाद, मेरा अब निकालने वाला था. मैने उससे कहा-

मैं: मेरे रानी. तोड़ा और उछाल बेबी, बस मेरा होने वाला है.

रेखा: उहह एस बेबी, मेरा भी होने को है.

वो और ज़ोर से लंड पर झटके दे रही थी. मैं जोश में ज़ोर-ज़ोर से उसके बूब्स मसल रहा था. रेखा की सिसकियाँ ज़ोर से निकालने लगी. दोनो बस चुदाई के नशे में थे. वो पुर जोश में थी. रेखा आँखें बंद करके, लंड का मज़ा ले रही थी.

फिर तभी हम एक साथ झड़ने को हुए. रेखा बोली-

रेखा: रोहित जी. मैं गयी, अहह उफ़फ्फ़.

मैं: मैं भी.

हम दोनो साथ में वहीं झाड़ गये. वो लंड पर छूट दबाए हुए बैठ गयी. मेरा सारा रस्स छूट में चला गया. रेखा के चेहरे पर पसीना था. वो तक चुकी थी. मैने कहा-

मैं: वाह मेरी रानी. तूने तो आज पुर जोश में मज़ा लिया है.

रेखा मुझे चूमते हुए बोली: आप खुश हो ना? सब आपके लिए करूँगी.

मैं: बहुत खुश कर दिया तूने आज.

फिर हम प्यार से एक-दूसरे के होंठो को चूज़ जेया रहे थे. मेरा एक हाथ उसकी छूट को मसल रहा था. तभी उसने मेरा हाथ पकड़ कर कहा-

रेखा: राजा जी, अब रुक जाओ. मैं तक गयी हू. छूट में दर्द हो रहा है. अब और गरम मत करो मुझे.

मैं: मेरी जान. अभी से तक जाएगी तो रात भर कैसे चूड़ेगी?

रेखा: तब का तब देखेंगे. अभी रुक जाओ बस.

फिर वो उठी और कपड़े ठीक किए. मैने कहा-

मैं: मेरी जान. लंड को कों चाट के सॉफ करेगा?

वो बिना बोले झुकी और लंड चाटने लगी. आचे से 2 मिनिट तक चाट कर सॉफ किया. फिर बोली-

रेखा: अब खुश हो ना आप? आप बहुत बदमाश हो. कितनी चुदाई और सेक्स आता है आपको?

मैं: वो तुझे धीरे-धीरे सब पता चलेगा.

हमे हॉल में काफ़ी टाइम हो गया था. अभी मोविए 30 मिनिट की बाकी थी. अनिल मोविए में मस्त था. रेखा मेरे कंधे पर सिर रख के बैठी थी. मैं नीचे से अभी नंगा था. उसने फिर कहा-

रेखा: आप क्या ऐसे ही नंगे रहोगे? कपड़े ठीक कर लो आप भी.

मैं: रहने दे ना.

मैने उसका एक हाथ लंड पर रखा और उसके गाल चूमने लगा. वो भी लंड पकड़े हुए थी. रेखा अब मेरा साथ दे रही थी. वो भी मुझे चूमती. हम आधे घंटे तक ऐसे ही चुम्मा-छाती करते रहे. उसके बाद मोविए एंड हुई. मैने जल्दी से जीन्स ठीक की.

रेखा ने भी अपने बाल ठीक किए और सीधी बैठ गयी. अनिल हमारी तरफ आ गया. हम वहाँ से बाहर निकल आए. और मौसी तक गयी थी, इसलिए धीरे-धीरे मेरा हाथ पकड़ के चल रही थी.

अब कहानी नेक्स्ट पार्ट में मिलेगी. कैसे लगी मेरे ये सेक्स कहानी? मुझे गम0288580@गमाल.कॉम पर बताए.
आप मुझे मैल ज़रूर करे. मुझे आपका फीडबॅक चाहिए.
थॅंक्स ड्के.

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