फॅमिली सेक्स स्टोरी अब आयेज-
सुबह हुई तब बाहर से डोर पे नॉक हुआ. सर्वेंट्स ब्रेकफास्ट के लिए बोल के चले गये. दीदी मेरे उपर नंगी लेती थी. उनकी आँख खुली.
प्रिया: गुड मॉर्निंग.
मैं: गुड मॉर्निंग. फ्रेश हो जाओ, ब्रेकफास्ट के लिए बुलाया है.
प्रिया: ब्रेकफास्ट के बाद मेरे रूम में आना. मैं डोर ओपन रखूँगी. 2 बार नॉक करके आना. आज दिन भर करेंगे (इतना बोलते ही वो मुझे किस करने लगी).
इतना बोल के उन्होने अपने कपड़े पहने और वो अपने रूम में चली गयी. फिर सब ब्रेकफास्ट करने के लिए आए. मुझे वहीं पे म्र्स मिश्रा और सोनिया मिली.
म्र्स मिश्रा: बेटा अभी कैसा है? कल तू तोड़ा तका लग रहा था.
मैं: आंटी अब सही है. कल तोड़ा मोशन सिकनेस हो गया था.
म्र्स मिश्रा: अर्रे बेटा, आंटी नही मम्मी जी, या सासू मा बोलो.
सोनिया (शरमाते हुए): क्या मम्मी आप भी ना!
म्र्स मिश्रा: अभी ये शर्मा रही है. कल ये तेरे पास से हिल भी नही रही थी. वो तो मैं इसको यहाँ से ले गयी, ये मुझे ही मालूम है.
अब सब ब्रेकफास्ट करने लगे. सब शांत थे. मम्मी, बुआ और दादी कुछ नही बोले. लिषा प्रिया दीदी को घूर के देख रही थी. घर का एक रूल था की खाते समय कितना भी अर्जेंट काम हो, जो खाना खाने बैठ गया, खाना ख़तम होने से पहले नही उठेगा. और खाने के बीच में बात-चीत नही होगी. कल ये रूल टूटा था, तो आज कुछ ज़्यादा ही सन्नाटा था.
ब्रेकफास्ट हुआ. आज सनडे था तो सब घर में ही थे, पापा भी. अभी पापा घर में थे तो मम्मी के साथ भी कुछ नही कर पा रहा था. ब्रेकफास्ट के बाद दीदी ने मुझे इशारा करके मुझे उनके रूम में बुलाया. जैसे ही मैं ब्रेकफास्ट करके उठा, तभी बड़े दादा जी ने मुझे रोका और पूछा की-
हरी लाल: बेटा अभी ठीक है ना तू?
मैं: हा दादा जी, अभी एक-दूं बढ़िया.
हरी लाल: वैसे कल का प्रोग्राम कैसा लगा?
मैं (हकबकते हुए): दादा जी आप क्या बोल रहे हो? मुझे समझ नही आ रहा है.
दादा जी के हाथ में एक टॅबलेट था. उन्होने टॅबलेट मेरी तरफ किया, जिसमे मेरी और दीदी की चुदाई कॅमरा में रेकॉर्ड हो गयी थी. मुझे उस समय पता चला की अदर तन थे पर्सनल रूम, हवेली में हर जगह कॅमरास लगे हुए थे. मैं कुछ बोल पाता दादा जी बोल दिए-
हरी लाल: अर्रे दररो नही. तूने कल मुझे मेरी बेटी को छोड़ते देखा. वैसे मानना पड़ेगा बेटा, तू भी मेरे जैसा है.
मैं नर्वस होके हंस रहा था.
हरी लाल: अर्रे शर्मा क्या रहा है. रुक तेरे लिए एक गिफ्ट है.
मैं: क्या दादा जी.
हरी लाल (दादी को बुलाया): सौंदर्या सुन, इसको जो गिफ्ट देने को बोला वो दे देना. और आज अपने काम में हेल्प करवा लेना इससे.
सौंदर्या: ठीक है.
देखते ही देखते पूरा दिन बीट गया, पता ही नही चला. मैं अपने रूम में रात 11 बजे पहुँचा और थकान के कारण सो गया. सुबा उठा तो याद आया की कल ब्रेकफास्ट के बाद तो प्रिया दीदी ने मुझे रूम में बुलाया था. भाई मैं तो उनसे कल पूरा दिन नही मिला यार, अभी तो वो मूह फुलाए बैठी होंगी.
मैने देर नही की, और उनके रूम की तरफ जाने लगा. मैने देखा उनका रूम अंदर से बंद था. अभी सुबा के 7 बाज रहे थे, तो मुझे लगा सो रही होंगी. एक बात बता डू, वैसे तो यहाँ हवेली है. साल दो साल पहले रेनवेशन हुआ था, तो सारे डोर्स में ट्रडीशनल कुण्डी नही डोर नॉब्स थे, जो भी चाबी से खुलते थे.
तो मैं अपने रूम में जाने लगा. तभी वहाँ लिषा आ गयी.
लिषा: रोहन भैया कहाँ जेया रहे हो?
मैं: कहीं नही, मैं अभी नींद से उठा था. तो सोचा बाहर को आ जौ.
लिषा: भैया झूठ बोलना बुरी बात होती है.
मैं: अर्रे लिषा, मैं झूठ नही बोल रहा हू.
लिषा: तो आप ऐसे ही बाहर आए थे, या प्रिया दीदी के रूम मैं जाने वाले थे?
मैं: नही तो, ऐसे ही बाहर आया था.
लिषा: अर्रे सच बताओ. वैसे भी मैने आपको और प्रिया दीदी को सेक्स करते देखा था उस दिन.
मैं कुछ बोल नही पाया.
लिषा: जैसे प्रिया दीदी के साथ करते हो, मेरे साथ भी करो ना. मैं भी आपकी छ्होटी बेहन हू. और मैं तो प्रिया दीदी से ज़्यादा लायल हू.
मैं: तुम ये क्या बोल रही हो?
लिषा: जो आपने सुना. मेरे साथ भी कर लो एक बार. मैं अभी तक वर्जिन हू.
मैं: वो सब ठीक है, पर तुम प्रिया दीदी से ज़्यादा लायल्टी की बात कर रही हो. उनकी वर्जिनिटी भी मैने ही तोड़ी थी, और उन्होने मेरे अलावा किसी और आदमी के साथ नही किया है.
लिषा: अछा तो अंदर मामा जी क्या कर रहे है?
मैं: कौन मामा जी?
लिषा: मतलब आपके पापा और दीदी अंदर क्या कर रहे है?
मैं: लिषा तुम ये क्या बकवास कर रही हो?
लिषा: वही की प्रिया दीदी पीठ पीछे अपने पापा के साथ चुड रही है.
एक बार मैने रवि वाली बात मैं फ़ासस के मम्मी पे शक़ किया था. पर इस बार मैं लिषा की बात में आके दोबारा अपनी दीदी पे शक़ नही करना चाहता था.
मैं: तुम झूठ बोल रही हो. और अंदर तो कितनी शांति है, ये सब कैसे चल सकता है?
लिषा: सारे रूम साउंडप्रूफ है. मतलब डोर बंद होने के बाद अंदर की आवाज़ बाहर और बाहर की आवाज़ अंदर नही जाएगी.
मैं: अब तुम नयी-नयी बात बना रही हो.
लिषा: आपको यकीन नही हो रहा तो मेरे पास मास्टर के है. इस के से सारे रूम के डोर्स खुल जाते है.
मैं: और ये तुम्हारे पास क्या कर रही है?
लिषा: ये सब छ्चोढो और बोलो अभी दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.
मैं अभी दोबारा असमंजस में था. पर एक बार संतुष्टि के लिए मैने लिषा को हा बोल दिया. लिषा की मास्टर के का उसे किया और डोर खोला. मुझे पूरा कॉन्फिडेन्स था की लिषा झूठ बोल रही थी. पर डोर ओपन होते ही मेरा दिल टूट सा गया.
मैने देखा की पापा नंगे होके, दीदी को घोड़ी बना के छोड़ रहे थे. दीदी भी पूरी नंगी थी और उन दोनो का मूह डोर की तरफ था. पापा ने दीदी के दोनो हाथ पकड़े थे और वो ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड अंदर-बाहर कर रहे थे.
प्रिया: अया उम्म्म अफ एस डॅडी. अपनी बेटी को चोदो, और ज़ोर से चोदो. मज़ा आ रहा है.
पापा: बेटा मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा है. इतने साल बाद ऐसा मज़ा आया है.
डोर ओपन होता है. मेरी आँखों से आँसू निकल जाते है और वो दोनो मुझे देखने लगते है.
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