बाप-बेटी में चुदाई का दिन

हेलो दोस्तों, माफी चाहूँगा की आप सब को मेरा वेट करना पड़ा. आयेज की सेक्स स्टोरी समझने के लिए आप सभी न्यू रीडर्स से अनुरोड है की पिछले 2 पार्ट्स पढ़ ले. अब आयेज की स्टोरी-

अब तक आपने पढ़ा की कविता मेरी बेटी तोड़ा कंफर्टबल हो गयी थी. बुत वो मेरे सवाल का आन्सर नही दे रही थी, और मेरी हवस बढ़ती जेया रही थी. मैं अपने आप को रोक नही पा रहा था. मैने उसकी थाइ आंड बॅक सहलाना जारी रखा और फिर बोला-

मैं: अछा मुझे बता तूने किसी और का भी लंड देखा है?

वो शर्मा रही थी तो मैने उसको बोला: ऐसे शरमाओगी तो हम बात नही कर पाएगे.

बेटी: हा देखा है.

मैं: किसका?

बेटी: एक पागल का रोड पर.

मैं: कैसा था? खड़ा था या सोया हुआ?

बेटी: खड़ा था. वो हिला रहा था.

मैं: मेरे से बड़ा था?

बेटी: नही आपका बड़ा है.

मैं: तुझे अछा लगा मेरा?

बेटी: ह्म.

मैं: तूने बताया नही की मेरे साथ करेगी?

उसने फिर कोई आन्सर नही दिया और चुप होके बैठी रही. मैने बार-बार पूछा, बुत शी डिड नोट रिप्लाइ. तो फिर मुझे लगा अब और ज़्यादा फोर्स करना उचित नही है. शायद वो मेंटली रेडी ना हो. क्यूंकी अब मुझे इतना तो पता चल ही गया था की वो अब खुल चुकी थी. आज नही तो कल मान जाएगी.

मैं: ठीक है, मैं समझ गया. तुझे मैं अछा नही लगता.

ये बोल के मैं उसकी थाइ से हाथ हटा के उठने लगा. तभी अचानक वो हुआ जिसकी मुझे उमीद ही नही थी. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरी तरफ देखने लगी. मुझे उसकी आँखों में प्यार, हवस और मासूमियत दिखने लगी. शरम से उसका चेहरा लाल हो रहा था. उसने मेरा हाथ कस्स के पकड़ रखा था, और फिर मेरे गले लग गयी. फिर धीरे से बोली-

बेटी: ई लोवे योउ पापा.

मैं: ई लोवे योउ मेरी जान. इतनी देर से क्यूँ शर्मा रही थी?

बेटी: मुझे आपसे दर्र लग रहा था.

मैं: मेरे से या मेरे लंड से?

बेटी (तोड़ा और मेरे से चिपक के बोली): आपके लंड से तो प्यार है.

पहली बार उसके मूह से लंड सुना मैने और वो बोल के मेरे से चिपक गयी. मैं उसको सहलाता रहा. फिर उसके चेहरे को पकड़ के उपर किया और उसके लिप्स पर अपने लिप्स रख दिए. अब मैं उसको किस करने लगा. वो तोड़ा कसमसा रही थी, बुत मेरा साथ देने लगी. मैं उसके बूब्स सहलाने लगा कपड़ों के उपर से. किस तकरीबन 10 मिनिट चली. फिर मैने उसका चेहरा चूमना शुरू किया. मैं उसको बोला-

मैं: तुम लंड, छूट, चुदाई, जानती हो?

बेटी: ह्म.

मैं: कैसे, तुमको किसने सिखाया?

बेटी: मैने बुक्स पढ़ी है.

मैं: कों सी बुक्स?

बेटी: गंदी स्टोरी वाली और फोटो वाली.

मैं: कैसे, तुमको कहाँ से मिली?

बेटी: मेरी फ्रेंड्स ने दी.

और ये बोल के वो अपने रूम में गयी और 6-7 बुक्स लेके आई. वो बुक्स चुदाई स्टोरीस की थी, न्यूड पिक्स भी थी. मैं देख के शॉक हो गया.

मैं: तू ये पढ़ती है, तू तो एक नंबर की निकली.

बेटी: हा मैं 1 साल से पढ़ रही थी, और एक नंबर की क्या निकली?

मैं: चुड़क्कड़.

बेटी: नही मैने अभी तक कुछ नही किया.

वो मेरी गोद में बैठी थी, और मैं उसको सहला रहा था. मेरे से अब बर्दाश्त नही हो रहा था, तो मैं उसकी त-शर्ट में हाथ डाल के उसके काससे हुए चुचे दबाना लगा.

बेटी: रूको ना, अभी नही.

मैं: क्यूँ?

बेटी: यहाँ नही.

मैं: मतलब?

बेटी: मैं उसके बेड पर कुछ नही करूँगी.

मैं: उसके बेड पर मतलब. वो तेरी मा है. उसके क्यूँ बोल रही है?

बेटी (मूह चिढ़ा के): हा पता है मेरी मा है. बुत अब तो सौतन बन गयी है ना.

मेरे से अब वो बिल्कुल खुल के बात कर रही थी. मैं उसको छोड़ने से पहले और खोलना चाह रहा था, जिससे छोड़ने में और मज़ा आए.

मैं: अभी कहाँ बनी है?

बेटी: तो बन जौंगी.

मैं: तुझे इन बुक्स में क्या अछा लगता था?

बेटी: बाप बेटी की चुदाई.

मैं: तुम जानती हो चुदाई?

बेटी (तोड़ा सर्मा के बोली): इतनी देर से आपके लंड पर बैठी हू, क्यूँ नही जानती.

मैने फिर उसको गोद में उठाया और उसके रूम में ले गया. फिर बेड पर लिटा के उसके उपर चढ़ गया और उसके लिप्स चूसने लगा. वो भी मेरा साथ दे रही थी. मैने उसकी त-शर्ट उतार दी. वाउ क्या सीन था. उसका गोरा बदन, ब्रा में काससे हुए चुचे, मैने उसको चाटना शुरू किया. फिर उसकी ब्रा निकाल दी, और उसके छ्होटे-छ्होटे चुचे दबाने लगा.

बेटी: पापा धीरे, दर्द हो रहा है.

मैं: मेरी जान, अब सबर नही होता. बहुत दिन से वेट किया है.

बेटी: कितने दिन से इंतेज़ार था पापा?

मैं: जब से पहली बार दिखी तू विंडो पर.

बेटी: मैं तो 1 साल से इंतेज़ार कर रही थी.

मैं उसके चुचे चूसने लगा. वो पागलों की तरह सिसकारियाँ ले रही थी.

बेटी: अहह पापा, और चूसो. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.

मैं: देखने में नही आता था क्या अपनी मा की चुदाई?

बेटी: उस कुटिया की बात ना करो. मुझे उससे जलन हो रही है.

मैं: तेरी मा है वो, कुटिया बोल रही है.

बेटी: साली कुटिया ही है.

मैने उसका शॉर्ट्स भी निकाल दिया. अब वो एक ब्लॅक पैंटी में थी. गोरा बदन और काली चड्डी क्या मस्त लग रही थी. मैने उसकी जाँघ को चूमना चाटना शुरू किया. वो पागल हो रही थी. उसकी पनटी गीली हो चुकी थी.

मैं: तेरी तो छूट पानी छ्चोढ़ रही है.

बेटी: हा पापा आपके लिए.

मैने उसकी पनटी भी निकाल दी. अब जो सीन मेरे सामने था, उसके लिए वर्ड्स नही बने. वो गुलाबी पंखुड़ियों वाले छ्होटे-छ्होटे बाल, उसकी छूट गीली चमक रही थी. मैं उसको देखे जेया रहा था.

बेटी: ऐसे ना देखो, मुझे शरम आ रही है.

मैं: साली नंगी पड़ी है अपने बाप के नीचे, और अब शरम आ रही है.

बेटी: हा तो ना शरमौ?

मैं: नही शरमाएगी तो छोड़ने में मज़ा नही आएगा.

बेटी: श तो आप अपनी बेटी छोड़ोगे?

मैं: साली तुझे अपनी रंडी बनौँगा

बेटी: पापा मुझे कुछ हो रहा है, करो ना कुछ.

मैने उसकी टाँगें फैला के उसकी गुलाबी छूट पर मूह लगा दिया. वाउ क्या छूट थी उसकी, कमसिन कक़ची छूट, उसका टेस्ट ही अलग था. मैं उसकी छूट को चाट रहा था, चूस रहा था.

बेटी: ह पापा, क्या कर दिया आपने. मुझे बहुत मज़ा आ रहा है. अब तक कहाँ थे तुम? मेरी छूट खा जाओ, और छातो इसको पापा. बहुत तदपि है ये तुम्हारे लिए.

मैं: साली तू तो इतनी सी आगे में ऐसे चूड़ेगी मैने सोचा ना था.

बेटी: अब सोचो मत, अपनी बेटी छोड़ो. आ पापा, जन्नत का मज़ा आ रहा है.

और मेरा सिर अपनी छूट पर दबाने लगी. जैसे पता नही कितनी बार मेरे से चुड चुकी हो, ऐसे कंफर्टबल हो गयी थी वो.

आयेज की स्टोरी नेक्स्ट पार्ट में, मुझे फीडबॅक दे ओं विकारँसेक्शी@गमाल.कॉम, और बताए अब तक कैसी लगी स्टोरी आंड सजेशन दे जिससे मैं इसको और अची तरह लिख साकु. मुझे अभी उतने मेल्स नही आए जिससे मुझे लगे आप लोग स्टोरी पसंद कर रहे है.

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