गाड़ी में हुई सामूहिक चुदाई

सेक्स कहानी का अगले पार्ट-

मैने मम्मी से पूछा की क्या चल रहा था. तभी मम्मी ने मुझे वो सारी बात बताई जो मैं आपको पिछले पार्ट में बता चुका हू. मतलब की पापा के साइड की फॅमिली का इंट्रोडक्षन.

मुझे यकीन नही हो रहा था की पापा की साइड की फॅमिली भी एग्ज़िस्ट करती थी. मुझे यकीन नही हो रहा था. मैं जब भी पापा से पूछता उनकी साइड की फॅमिली के बारे में, तो वो ताल देते थे. एक टाइम के बाद तो मुझे लगने लगा था की पापा अनाथ थे. यही सोचते-सोचते हम नीचे आ गये.

वहाँ देखा तो रवि आंड फॅमिली प्लस सोनिया पहले ही नीचे खड़े थे. तभी उन्होने हुमको देखा, देखते ही रेखा और रेशमी हमारी तरफ आ गये.

मैं: तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो?

रेखा: ये एक आदमी आया और बोला की हुमको कही ले जेया रहा है. फिर फूफा जी का भी कॉल आया और वो बोले की हम इनके साथ आ जाए.

मैं: अछा. लेकिन ये सोनिया…

रेखा: हा, इसको भी लाने को बोला है.

मैं: अछा. यार, मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा है.

तभी मेरी नज़र एक 7-सीटर फोरटुनेर पर पद गयी. तभी वो आदमी बोला की चलो, बैठो, आप लोगों को वहाँ तक पहुचने में एक से डेढ़ घंटा लगेगा.

अब एक दिक्कत थी 7-सीटर गाड़ी और लोग 9 थे. ये बात तो तय थी की दो लोगों को किसी ना किसी की गौड़ में बैठना पड़ेगा. तो सब लोग सीटिंग अरेंज्मेंट ढूँढ रहे थे. मैं सुमन आंटी के पास गया और कान में बोला-

मैं: आप और मैं एक साथ बैठेंगे, वो काम भी पूरा करना है.

सुमन: स्स्स, कोई देख लेगा तो…

मैं: उसको मेरे उपर छ्चोढ़ दो.

सीटिंग अरेंज्मेंट फिक्स हुआ. ड्राइवर के बगल में मम्मी. फिर मिड्ल सीट में मामी, रेखा, प्रिया दीदी और प्रिया दीदी की गौड़ में सोनिया. लास्ट सीट में सुमन आंटी, मैं, मेरी गौड़ में रेशमी दीदी और दूसरे साइड में रवि. पता नही रवि की ज़िद थी की वो लास्ट में बैठेगा.

अब गाड़ी चलने लगी. आयेज सब ने इयरफोन्स डाले थे. असली खेल अभी शुरू हुआ था. मैने अपना एक हाथ सुमन आंटी की सारी के अंदर से उनकी छूट में डाला हुआ था. उन्होने पनटी नही पहनी थी. उनको फिंगरिंग करते-करते मेरा लंड खड़ा हो गया था, जो अब रेशमी दीदी की गांद को पोक कर रहा था.

रेशमी दीदी ने नोटीस किया, वो मूड के मेरे उपर बैठ गयी और मुझे किस करने लगी. सुमन आंटी ये सब देख के शॉक हो गयी थी. पर रवि वो अपना लंड बाहर निकाल के उसको हिलने लग गया था.

सुमन: ये क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा तो? और रवि ने देखा तो क्या बोलेगा?

मैं: अर्रे रिलॅक्स. वो देखो (पायंटिंग अट रवि), हुमको देख कर मूठ मार रहा है.

तभी रवि उन्हे देख कर मुस्कुराया.

मैं: आज आपकी सेवा एक नही, दो दो लंड से करी जाएगी.

ये बात सुन कर वो शर्मा गयी और रवि खुश हो गया. मैने रेशमी को एक तरफ किया और अपना लंड बाहर निकाला. रेशमी रवि का, सुमन आंटी मेरा लंड चूस रहे थे. मैं एक-एक हाथ से दोनो के बूब्स दबा रहा था. ऐसा चलता रहा.

फिर रेशमी दीदी और आंटी हमारी गौड़ में चढ़ि. रेशमी दीदी के पिजामा और पनटी नीचे की और आंटी ने अपनी सारी उपर उठाई. हम दोनो ने उन दोनो की छूट में लंड डाल दिया. उन दोनो की चीख निकालने वाली थी, पर हमने उनका मूह दबा दिया.

अब हम उन दोनो को छोड़ने लगते है, और गाड़ी में किसी को भनक तक नही लगती. मैं आंटी के बूब्स उनके ब्लाउस से निकाल देता हू, और रवि भी रेशमी की बूब्स बाहर निकाल देता है.

हम दोनो उन दोनो को छोड़ते रहते, कभी बूब्स चूस्टे या कभी किस करते. रवि का ध्यान सुमन आंटी के बूब्स में गया. सुमन आंटी बीयिंग आ मिलफ, उनके बूब्स रेशमी से बड़े थे. रवि उनके बूब्स दबाने लग गया. वो बहुत ज़्यादा उत्तेजित हो गया था.

तभी वो सुमन आंटी को लिप्स में किस कर देता है. सुमन आंटी अनएक्सपेक्टेड्ली किस में उसका साथ दे रही थी. तभी वो बोला, “भाई, चल, स्वाप करते हैं.” ये सुन कर सुमन आंटी खुश हो गयी थी. तभी वो उठी और रेशमी और सुमन आंटी सीधे रवि के लंड में बैठ गयी.

मैं रेशमी को छोड़ने लगा. मेरे अंदर तोड़ा गुस्सा था की आंटी डाइरेक्ट कैसे मान गयी. अब मैं रेशमी को हार्डकोर छोड़ने में आ चुका था. एक बार आंटी मेरे साथ झाड़ चुकी थी. रेशमी को ऐसा चूड्ता देख कर रवि का भी होने वाला था.

तभी सुमन आंटी उसके लंड को बाहर निकलती है, और रेशमी रवि के लंड को मूह में लेके उसका माल पी जाती है. रवि का हो चुका था, फिर भी वो आंटी के बूब्स से खेल रहा था. उनके बदन को लिपटा हुआ था. कभी आंटी रवि को और कभी मेरे को किस करती.

हार्डकोर के चक्कर में रेशमी 2 बार झाड़ चुकी थी. मेरे भी होने वाला था, तब भी रेशमी नही उठी. अंत में, मैं रेशमी के अंदर ही झाड़ गया. ये देख कर रवि का लंड दोबारा खड़ा हो गया. तो सुमन आंटी उसको ब्लोवजोब देने लगी. वो मामी से बहुत अछा ब्लोवजोब दे रही थी. लेकिन अब हम वहाँ पहुँचने वाले थे तो सब ने अपने-अपने कपड़े ठीक किए.

रवि: यार, मज़ा आ गया. आज से मैं तेरे को कभी धोखा नही दूँगा.

मैं: सच बोल रहा है?

रवि: भाई, ऐसे ही मज़े करते रहेंगे.

सुमन: आज दो-दो लंड के साथ तो मज़े ही आ गया.

रेशमी: हा, मज़ा तो बहुत आया, पर हम यहाँ आए क्यूँ है…?

इस सवाल के साथ हम अपनी डेस्टिनेशन में पहुँच गये थे.

एंड ऑफ थे आर्क

स्टोरी विल कम आर्क वाइज़. नेक्स्ट आर्क विल बे मोरे एरॉटिक. अपडेट्स विल कम सून. तब तक हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए और मुट्ठी मारते रहिए. किसी महापुरुष ने बोला है, “चने खाओ चबा के और मूठ मरो दबा के.”

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“तो बे कंटिन्यूड…”

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