दोस्तों मेरा नाम जसमीन है. आप मुझे प्यार से रंडी, गस्ति, च्चिनाल, घोड़ी, हरमज़ड़ी भी बुला सकते है. हा, सही पढ़ा आपने. अब मुझे इन नामो की आदत लग गयी है. और जब भी कोई मुझे इन नामो से बुलाता है, तो लगता है प्यार से बुला रहा है.
मैं मुंबई की रहने वाली हू. मेरी उमर 26 साल है. फिँगूरे मेरा 36-30-36 है, और मेरी छूट हर वक़्त लंड मांगती है. मैं इतनी बड़ी चुड़क्कड़ हो चुकी हू, की सोते वक़्त भी डिल्डो छूट में तूस कर सोती हू. लेकिन पहले मैं ऐसी नही थी. मैं एक शरीफ लड़की थी, जिसने एक हरमज़ाड़े लड़के ने प्यार के जाल में फाँस कर रंडी बना दिया. चलिए बताती हू सब कैसे हुआ.
19 की उमर में मैं कॉलेज के फर्स्ट एअर में गयी. मैं पढ़ाई में अची थी, और बहुत एग्ज़ाइटेड थी. वहाँ मुझे स्कूल की काफ़ी सहेलियाँ मिल गयी, इसलिए शुरू से ही कंफर्टबल हो गयी.
मैं गर्ल्स स्कूल में पढ़ी थी, लेकिन यहाँ लड़के भी थे. इसका भी अपना अलग ही एहसास था. कुछ दिन बीट गये, और मेरी लड़कों और लड़कियों दोनो से बातें होने लगी. सब सही चल रहा था, लेकिन फिर राज मेरी ज़िंदगी में आया.
राज 2न्ड एअर का लड़का था. दिखने में स्मार्ट था, और बॉडी भी बनाई हुई थी. मैं एक दिन क्लासमेट्स के साथ कॉलेज के गार्डेन में बैठी पढ़ रही थी. मैने सफेद रंग का पाजामी-सूट पहना हुआ था. तभी राज मेरे पास आया, और बोला-
राज: एक्सक्यूस मे, आपका नाम क्या है?
मैं: जी जसमीन.
राज: अछा, तो जसमीन मेरा नाम राज है. और मैं आपसे प्यार करता हू.
उसकी ये बात सुन कर मैं हैरान हो गयी, और बाकी लड़कियाँ हासणे लगी.
मैं बोली: लेकिन मैं तो आपको जानती तक नही. और मैं यहाँ पढ़ने आई हू, प्यार करने नही. आप प्लीज़ चले जाइए यहाँ से.
राज उस वक़्त तो चला गया, लेकिन उस वक़्त से हर दिन वो मुझे जगह-जगह मिलने लगा. फिर मैने अपनी क्लास के लड़कों को बताया, तो वो उससे बात करने गये. लेकिन राज एक पॉलिटीशियन का बेटा था, और सब उससे डरते थे.
धीरे-धीरे पुर कॉलेज में मैं राज की गर्लफ्रेंड के नाम से फेमस हो गयी. मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या करू. फिर एक दिन राज कॉलेज की च्चत पर चढ़ गया, और सब के सामने उसने अपने प्यार का इज़हार किया. फाइनली मेरा दिल पिघल गया, और मैने भी उसके प्यार को आक्सेप्ट किया.
उस दिन से मेरी लाइफ बदल गयी. हम सारी-सारी रात बातें करने लगे. वो मुझे हर वीक कहीं ना कहीं घूमने ले जाता. मुझे गिफ्ट्स देता. मुझे हसता, और बहुत खुश रखता.
मैं उसके प्यार में अब पूरी तरह डूब चुकी थी. उसने अभी तक मुझे कभी ग़लत तरीके से हाथ लगाने की कोशिश नही की थी. और ये बात भी मुझे बहुत इंप्रेस कर गयी.
फिर एक दिन हम गार्डेन में बैठे थे. वहाँ और भी कपल्स बैठे थे. उनमे से एक किस कर रहा था. राज उनकी तरफ देख रहा था. मैने उसके सर पर हल्के से टपली मारी और कहा-
मैं: खुद की गफ़ पास बैठी है. शरम नही आती दूसरो को किस करते देख के?
राज: मैं आक्च्युयली सोच रहा था की जब मैं तुम्हे किस करूँगा तो कैसा लगेगा?
मैं: ये तो करके ही पता चलेगा.
राज: तो कर लू?
मैं (शर्मा कर): ह्म.
फिर वो आयेज बढ़ा, और हम दोनो किस करने लगे. ये मेरी ज़िंदगी की पहली किस थी, और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. राज मेरे होंठो को अपने मूह में लेके चूस रहा था, और मैं भी उसको फॉलो करके वहीं कर रही थी.
मैने उस दिन जीन्स और त-शर्ट पहनी हुई थी. किस करते हुए राज अपना हाथ मेरी जाँघ पर ले गया, और सहलाने लगा. इससे मेरे जिस्म में करेंट सा दौड़ने लगा. आज तक किसी लड़के ने मुझे इस तरह से नही च्छुआ था.
हमारी किस लगभग 5 मिनिट चलती रही. अचानक मेरा जिस्म तोड़ा सा काँप गया, और मेरी छूट पानी छ्चोढ़ गयी. मेरी पनटी मेरे पानी से गीली हो गयी. मैं सोच रही थी की कहीं जीन्स गीली ना हो जाए, और राज को ना पता चल जाए इस बारे में. लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ. फिर कुछ देर और वहाँ बैठने के बाद हम वहाँ से निकल गये.
अब रातों की बातों में सेक्स के टॉपिक आने लगी. उससे सेक्सी बातें करके मेरी पनटी गीली हो जाती थी. इसमे मुझे बड़ा मज़ा आने लगा. पहली-पहली बार सेक्षुयल होने लगी थी, तो बहुत एग्ज़ाइटेड थी.
फिर एक दिन उसने मुझे उसके साथ शिमला चलने को कहा. मैने हा कर दी, और घर पर झूठ बोल कर उसके साथ चली गयी. हम वहाँ कार में गये. मैने जीन्स और शर्ट पहनी थी, और उसने जीन्स और त-शर्ट. रास्ते में हम रोमॅंटिक बातें करते हुए गये. मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मैं शादी के बाद हनिमून पर जेया रही थी.
शिमला पहुँचने के बाद हमने एक आलीशान होटेल में चेक-इन किया. कुछ देर हमने रूम में आराम किया, और फिर एक बढ़िया से रेस्टोरेंट में जाके लंच किया. उसके बाद हमने टॅक्सी बुक की, और घूमने निकल पड़े.
हमने काफ़ी जगह घूमी, और अड्वेंचर पार्क में बहुत मज़े किए. मैं अपनी लाइफ का सबसे अछा टाइम बिता रही थी. कुफरी में एक जगह साइड पे हो कर हमे किस भी की. बहुत मज़ा आया. घूमते-घूमते रात के 8 बाज गये. हम डिन्नर करने एक जगह रुक गये, और फाइनली 9 बजे अपने होटेल रूम में पहुँच गये.
हम दोनो बहुत तक चुके थे. मेरे पैर भी दर्द कर रहे थे. ये सुन कर राज बोला-
राज: ऐसा करते है, थोड़ी-थोड़ी बियर पी लेते है. इससे थकान भी उतार जाएगी, और तुम्हारा दर्द भी चला जाएगा.
मैं: लेकिन मैं पीटी नही हू.
राज: शराब थोड़ी है. बियर है. आज-कल तो बच्चे भी पी लेते.
फिर वो जाके बियर लेके आया. मैने देखा की वो एक और बॉटल भी लेके आया था. जब मैने उससे पूछा, तो उसने कहा-
राज: ये वोड्का है. तुम्हारे लिए बियर, और मेरे लिए वोड्का.
मैं: क्यूँ, तुम अकेले वोड्का क्यूँ पियोगे? मैं बच्ची नही हू.
राज: अर्रे ये चढ़ जाएगी.
मैं: कोई ना तुम हो ना मुझे संभालने के लिए.
राज: चलो, तुम्हारी मर्ज़ी है.