भनजे ने की मौसी की चुदाई

एरॉटिक सेक्स स्टोरी अब आयेज से-

मैने धीरे से अरुण के कमरे का दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रखा. कमरे में हल्का अंधेरा था, सिर्फ़ एक दीं लाइट जल रही थी. जैसे ही मैं अंदर गयी, मुझे लगा जैसे वो बस मेरा ही इंतेज़ार कर रहा था.

अरुण बेड पर बैठा था, और उसकी नज़रें दरवाज़े पर ही टिकी हुई थी. जैसे ही उसने मुझे देखा, उसके चेहरे पर एक लंबे इंतेज़ार की शांति और बड़ी खुशी सॉफ दिखी. उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो सॉफ कह रही थी की उसने मेरी हा का विश्वास कर लिया था.

मैने धीरे से अंदर चलते हुए दरवाज़ा बंद किया. उसके चेहरे पर बेचैनी और उत्तेजना का मिला-जुला भाव था, जो मुझे और भी उत्सुक कर रहा था.

अरुण (धीरे से, उत्तेजित आवाज़ में): मौसी आप आ गयी? मुझे लगा आप नही आएँगी.

मैं (उसके करीब आ कर, बेड के किनारे बैठते हुए, हल्की मुस्कान के साथ): क्यूँ, अरुण? इतना यकीन नही था अपनी मौसी पर? और मैने कहा था ना, मैं अवँगी.

अरुण ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ लिया. उसका हाथ गरम और काँप रहा था. उसने मेरी उंगलियों को सहलाना शुरू कर दिया.

अरुण (मेरी आँखों में देखते हुए): मौसी, आपको देख कर तो नींद ही नही आ रही थी. दिन भर से बस आप ही आप मेरे दिमाग़ में हो. आपकी रेड सारी में तो आपने सब को पागल कर दिया था. और फिर (उसकी नज़रें मेरी मॅक्सी के उपर से मेरे बूब्स पर टिक गयी) ये मॅक्सी, इसमे तो आप और भी…

मैं (हल्की सी शर्मीली मुस्कान के साथ. अपना हाथ उसके हाथ से धीरे से च्चूधते हुए): चुप कर, बदमाश! क्या बोल रहा है अपनी मौसी को? इतना बेशरम हो गया है? और ये सब बातें? हम तो दोस्त है ना.

अरुण (फिर से मेरा हाथ पकड़ कर, और करीब आते हुए): मौसी, आप इतनी खूबसूरत हो तो मैं क्या करू? और दोस्त है तो क्या हुआ? दोस्त तो हर बात कह सकते है ना? मैं तो बस इतना कहना चाहता हू की आप बहुत सेक्सी लग रही हो. मेरी आँखें आप पर से हॅट ही नही रही है.

उसने धीरे से मेरा हाथ अपने चेहरे पर रख लिया और मेरी हथेली को चूमने लगा. उसकी साँसें तेज़ हो रही थी.

मैं (अपना हाथ वापस खींचते हुए, थोड़े नखरे दिखाते हुए): अरुण, ये सब क्या कर रहा है? यहाँ घर में सब लोग है. कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा? और ये सब सही नही है. मैं तेरी मौसी हू.

अरुण (मेरी कमर के पास और करीब सरकते हुए, धीमे से): मौसी, कोई नही आएगा. सब सो चुके है. आप दररो मत. मैने कहा था ना, मैं किसी को नही बतौँगा. और आप भी तो मेरी दोस्त हो ना?

उसने अपना एक हाथ धीरे से मेरी कमर पर रखा, मॅक्सी के उपर से. उसकी उंगलियाँ मेरी पतली कमर को हल्का सा सहला रही थी. मुझे उसकी टच से एक अजीब सी गर्मी महसूस हुई.

अरुण (उसकी आवाज़ और धीमी हो गयी): मौसी, प्लीज़ मैं आपको बहुत प्यार करता हू. मैं आपको कोई तकलीफ़ नही दूँगा. बस आज रात यहाँ रुक जाओ ना.

उसकी आँखों में बेचैनी, तड़प, और एक गहरी चाहत सॉफ दिख रही थी. वो इतनी मिन्नटे कर रहा था. उसका हाथ मेरी कमर पर हल्का दबाव बना रहा था. मेरे नखरे अब धीरे-धीरे कम हो रहे थे. उसके चेहरे पर मासूमियत और हवस का जो मेल था, वो मुझे और भी पागल कर रहा था.

मैं (कुछ देर तक चुप रहने के बाद, एक लंबी साँस लेते हुए, धीरे से अपना सर हिलाते हुए): अछा ठीक है.

हम दोनो धीरे से बेड पर लेट गये. मैने अरुण की तरफ पीठ कर ली, जैसे नींद में जाने की कोशिश कर रही हू. मेरी आँखों में नींद का नाम-ओ-निशान नही था, पर मैं सोने का नाटक करती रही.

थोड़ी देर तक कमरे में खामोशी च्छाई रही, सिर्फ़ हमारी साँसों की आवाज़ थी. फिर मुझे अपने पीछे अरुण की साँसों की गर्मी महसूस हुई. उसका हाथ धीरे से मेरी कमर पर आया और मेरी मॅक्सी को सहलाने लगा. उसका टच बहुत हल्का और नाज़ुक था, जैसे वो दर्र रहा हो की मैं जाग ना जौ. उसकी उंगलियाँ मेरी कमर से होते हुए धीरे-धीरे मॅक्सी के उपर से मेरे जिस्म पर घूमने लगी. वो मेरे जिस्म से खेलने लगा था.

धीरे-धीरे उसका हाथ मेरी कमर से उपर बढ़ा और मेरे कमर के कुवर्व्स को महसूस करने लगा. फिर उसने हल्के से मॅक्सी को उपर सरकाना शुरू किया. पहले मेरी कमर, फिर मेरी गांद, और धीरे-धीरे मेरी पीठ नंगी होने लगी. जब मॅक्सी मेरी कमर तक पहुँची, तो उसने रुक कर मेरी नंगी कमर पर अपने होंठ रख दिए और हल्के-हल्के चूमने लगा. उसके होंठो की गर्मी मेरी स्किन पर आग लगा रही थी. मैं अपनी साँसें रोके बस चुप-छाप लेती रही.

उसका हाथ अब मेरी गांद तक पहुँच गया था और वो मॅक्सी के उपर से ही मेरी गांद को सहलाने लगा. उसके टच में एक अजीब सी तड़प थी, जैसे वो मेरे हर अंग को महसूस करना चाहता हो. फिर उसने धीरे से मॅक्सी को पूरा उपर सरका दिया. जैसे ही मेरी मॅक्सी पूरी तरह उतार गयी, मैं अरुण के गिफ्ट की हुई रेड डिज़ाइनर ब्रा और मॅचिंग पनटी में उसके सामने थी.

कमरे की दीं लाइट में. मेरी रेड ब्रा और पनटी मेरे गोरी जिस्म पर और भी चमक रही थी. मैने महसूस किया की अरुण ने अपनी साँस रोक ली थी. वो कुछ देर तक मुझे घूरता रहा.

अरुण (उसकी आवाज़ हल्की और हवस भारी थी): मौसी आप तो, आप तो जैसे कोई अप्सरा हो. मैने सोचा नही था की आप अंदर इतनी खूबसूरत और सेक्सी लगोगी. ये रेड ब्रा और पनटी, ये तो आप पर कमाल लग रही है. आपको तो मैं बस देखता ही राहु.

उसकी नज़रें मेरे भरे हुए बूब्स पर टिक गयी, जो रेड ब्रा में और भी उभरे हुए लग रहे थे. फिर उसकी आँखें मेरी पतली कमर और भारी हुई गांद पर घूमने लगी, जो रेड पनटी में और भी आकर्षक लग रही थी.

अरुण (धीरे से मेरे करीब आते हुए): मौसी आपने तो मुझे पागल कर दिया है. मुझे यकीन नही हो रहा की आप सच में यहाँ मेरे साथ हो. आप तो पूजा से भी लाख गुना ज़्यादा हॉट हो.

उसने धीरे से अपने होंठ मेरी नंगी पीठ पर रखे, और मेरी गर्दन तक चूमते हुए आया. मुझे उसकी हर साँस और उसके होंठो की गर्मी महसूस हो रही थी. उसने धीरे से मेरा चेहरा अपनी तरफ घुमाया. अब हम दोनो एक-दूसरे के सामने थे, आँखों में आँखें डाले. उसकी आँखों में शूध हवस और एक गहरी चाहत थी.

अरुण (धीमी, गरम आवाज़ में): मौसी आपकी आँखों में तो मैं खो गया हू.

उसने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए. पहले एक हल्का सा किस, फिर वो धीरे-धीरे गहरा होने लगा. मैने भी अपनी आँखें बंद कर ली और उसके होंठो का जवाब देने लगी. हम दोनो एक-दूसरे के होंठो को चूस रहे थे, जैसे सारी प्यास बुझा लेना चाहते हो. उसके हाथ धीरे से मेरी कमर पर घूम रहे थे, और वो मुझे अपने करीब खींचने लगा.

जब हमारी साँसें तेज़ होने लगी, तो उसने अपने होंठ मेरे होंठो से अलग किए और धीरे-धीरे मेरी गर्दन, फिर मेरे कंधो को चूमने लगा.

अरुण (मेरी गर्दन पर होंठ रखते हुए): मौसी आपका बदन आप तो जैसे मक्खन हो.

उसका हाथ धीरे से मेरी रेड ब्रा के हुक्स की तरफ बढ़ा. एक झटके में उसने ब्रा के हुक खोल दिए, और मेरे बूब्स आज़ाद हो गये. मेरे भरे हुए, गोरे बूब्स दीं लाइट में चमक रहे थे.

अरुण (आँखें बड़ी करते हुए): अफ मौसी आपके बूब्स तो सपने जैसे है. मैने कभी सोचा नही था की इतने बड़े और भारी होंगे.

उसने अपने दोनो हाथ मेरे बूब्स पर रखे और धीरे-धीरे मसालने लगा. उसकी उंगलियाँ मेरे निपल्स पर घूमने लगी. मुझे उसके टच से एक अजीब सा करेंट लगा. मैने अपनी आँखें बंद कर ली और उसके हर टच को महसूस करने लगी. उसने धीरे से मेरे एक निपल को अपने मूह में लिया और चूसने लगा. दूसरे निपल को वो अपने अंगूठे और उंगलियों से सहला रहा था. मैं धीमी-धीमी सिसकारियाँ भरने लगी.

मैं (धीरे से): अया… अरुण… धीरे…

वो एक निपल को चूस्टा रहा, और फिर दूसरे को. कभी ज़ोर से चूस्टा, कभी हल्का सा काट-ता. मेरे निपल्स तंन गये थे. मैं पूरी तरह उसकी हवस में डूब चुकी थी.

उसने मेरे बूब्स को चूमते और चूस्टे हुए नीचे सरकना शुरू किया. मेरी कमर, फिर मेरे पेट पर होंठ रखते हुए. जब वो मेरी पनटी तक पहुँचा, तो उसने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा.

अरुण (हवस भारी आँखों से): मौसी… क्या मैं…?

मैने अपनी आँखें बंद कर ली और धीमे से सर हिलाया. मेरी हा मिलते ही उसने बिना देर किए मेरी रेड पनटी को धीरे-धीरे नीचे सरकाना शुरू किया. पनटी जैसे ही मेरी जांघों तक आई, उसने उसे पूरा निकाल दिया. अब मैं पूरी तरह नंगी थी, दीं लाइट में मेरा बदन चमक रहा था. मेरी चिकनी छूट उसके सामने खुली हुई थी.

अरुण (उसकी आवाज़ और भी गरम हो गयी): मौसी आपकी छूट तो बिल्कुल चिकनी है. मैं तो बस इसको देखता ही राहु.

वो धीरे से मेरे पैरों के बीच आया और मेरी छूट को घूर्ने लगा. मेरी छूट से हल्का सा रस्स निकालने लगा था. उसने धीरे से अपनी उंगली मेरी छूट पर रखी और हल्का सा सहलाया. मुझे एक अजीब सी गुदगुदी हुई. उसने अपनी उंगली से मेरी छूट के दाने को हल्के से मसला. मेरी सिसकारी निकल गयी.

मैं (सिसकते हुए): अया… अरुण…

उसने धीरे से अपने होंठ मेरी छूट पर रखे और चूमना शुरू किया. पहले हल्का सा किस, फिर उसने अपनी जीभ बाहर निकाल कर मेरी छूट के दाने को चाटना शुरू किया. उसकी जीभ का हर स्ट्रोक मुझे जन्नत का एहसास दिला रहा था. मैं अपने हाथ उसके बालों में फ़ससा कर उसका सर और दबाने लगी.

मैं (तेज़ साँसों में): अयाया… अरुण… और तेज़… और तेज़ चाट…

वो मेरी छूट को तेज़ी से चाटने लगा. कभी पूरी छूट को चाट-ता, कभी सिर्फ़ दाने पर फोकस करता. मैं मस्ती में मचलने लगी थी. मेरे पुर जिस्म में एक अजीब सी आग लग गयी थी. कुछ ही देर में मैं झड़ने वाली थी. मेरी साँसें बेकाबू हो चुकी थी.

मैं (तेज़ साँसों में): अर्र्ररुउउन्न्ं… मैं… मैं आ रही हू…

और फिर मैं ज़ोर से झाड़ गयी. मेरी छूट से रस्स निकल कर उसके मूह पर आ गया. उसने बिना रुके सारा रस्स चाट लिया. उसने अपना मूह मेरी छूट से हटाया और मेरी तरफ देखा. उसके चेहरे पर मेरे रस्स की चमक थी और उसकी आँखों में जीत का एहसास.

अरुण (हल्के से हेस्ट हुए): मौसी आपका रस्स तो बहुत मीठा है.

मैं थोड़ी देर तक हाँफती रही. उसने धीरे से मेरे पैर उठाए और अपने होंठ मेरे पैरों पर रखे. उसने अपनी पंत उतरी. उसका मोटा और लंबा लंड मेरे सामने खड़ा था, पूरी तरह तन्ना हुआ. वो मेरी तरफ देखा, उसकी आँखों में एक सॉफ सवाल था.

मैं (अरुण के लंड को घूरते हुए, धीमी आवाज़ में): इतना बड़ा.

उसने धीरे से अपना लंड मेरे मूह के पास लाया. मैने बिना देर किए उसके लंड को अपने मूह में ले लिया. पहले उसका टोपा, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड. मैं उसके लोड को लॉलिपोप की तरह चूसने लगी. कभी धीरे, कभी तेज़. उसकी नास्से मेरे गले को छ्छू रही थी. अरुण की सिसकारियाँ निकालने लगी.

अरुण (सिसकते हुए): अया… मौसी… क्या चूस रही हो…

मैं पूरा लंड अपने गले में उतार रही थी. उसने अपने हाथ मेरे बालों में फँसा कर मेरे मूह को और ज़ोर से अपने लंड पर दबाया. मैं भी उसकी साँसों और उसकी गरम बॉडी को महसूस करते हुए चूस्टी रही. कुछ देर लंड चूसने के बाद, मैने उसका लंड मूह से बाहर निकाला. अब उसका लंड चमक रहा था, मेरे थूक से गीला.

अरुण (अपनी साँसें ठीक करते हुए): मौसी… अब… अब आपकी बारी.

उसने धीरे से अपने घुटनो के बाल आया और मेरे पैरों के बीच अपनी जगह बनाई. उसने अपना मोटा और लंबा लंड मेरी छूट के मूह पर सेट किया. मैने अपनी टाँगें फैला दी. उसने मेरी आँखों में देखा.

अरुण (धीमी आवाज़ में): मौसी…

मैं (एक लंबी साँस लेते हुए): डाल दे अरुण…

उसने धीरे से एक धक्का मारा. उसका टोपा मेरी छूट में घुस गया. मुझे हल्का सा दर्द हुआ, पर उसकी गर्मी ने उसे तुरंत धार दिया. मैने एक हल्की सी सिसकारी भारी. उसने फिर एक और ज़ोर का धक्का मारा. और उसका पूरा लंड मेरी छूट में समा गया.

मेरी आँखों से एक हल्का सा आँसू निकल गया, पर उसके बाद जो मज़ा आया, वो बहनचोड़!

अरुण (सिसकते हुए, मेरी आँखों में देखते हुए): अया… मौसी… आपकी छूट तो… बहुत टाइट है.

उसने धीरे-धीरे धक्के मारना शुरू किया. पहले धीरे, फिर धीरे-धीरे अपनी स्पीड बधाई. मेरी छूट उसका लंड पूरी तरह से महसूस कर रही थी. उसका हर धक्का मुझे और भी जोश दे रहा था. मैं अपनी कमर उठा-उठा कर उसका साथ देने लगी.

मैं (सिसकते हुए): अया… अर्र्ररुउउन्न्ं… और तेज़… और तेज़…

वो मेरी बात सुन कर और भी तेज़ हो गया. उसके धक्के अब ज़बरदस्त थे. बेड की आवाज़ आ रही थी, पर हम दोनो हवस में इतने डूबे थे की दुनिया भूल चुके थे. वो कभी मुझे मिशनरी पोज़िशन में छोड़ता, कभी मेरे पैर उसके कंधे पर रख कर. मैं अपनी गांद उठा-उठा कर उसका साथ दे रही थी. मेरी छूट और उसका लंड एक-दूसरे के साथ टकरा कर एक मीठी आवाज़ निकल रहे थे.

हम दोनो की साँसें तेज़ हो चुकी थी. हमारे बदन पसीने से गीले थे. अरुण मेरी गर्दन पर होंठ रखता और मेरी साँसों को पीटा.

अरुण (तेज़ साँसों में): मौसी… मैं… मैं आने वाला हू…

मैं (उसकी कमर को पकड़ते हुए): अया… अरुण… मेरी छूट में… सब डाल दे…

उसने कुछ और तेज़ धक्के मारे. और फिर, एक लंबी सिसकारी के साथ, उसने अपना गरम वीर्या मेरी छूट में छ्चोढ़ दिया. मैं भी उसके साथ ही झाड़ गयी, मेरे जिस्म में एक तेज़ झटका लगा. हम दोनो तक कर एक-दूसरे पर गिर गये.

हम दोनो कुछ देर तक वैसे ही लेते रहे, साँसें ठीक करते हुए. उसने धीरे से मेरा माता चूमा.

अरुण (धीमी आवाज़ में): मौसी… आपने तो मुझे जन्नत दिखा दी. मुझे यकीन नही हो रहा की मैने अपनी मौसी को छोड़ा है. आप सच में बहुत मस्त हो.

मैं (उसके सीने पर हाथ फेरते हुए): तुम भी, अरुण… तुम भी. तुमने तो मुझे वो खुशी दी, वो तेरे मौसा जी ने कभी नही दी.

हम दोनो एक-दूसरे से लिपट कर लेते रहे. रात अभी बाकी थी.

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