मों-सोन सेक्स स्टोरी अब आयेज-
सनडे दोपहर थी, घर में सब सो रहे थे. पर मेरे और मम्मी के बीच की च्छूपी समझ ने इस दिन को ख़ास बना दिया. रात भर मम्मी के जिस्म का एहसास और उनकी छूट का स्वाद मेरे ज़हन में था. आज अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर जाना था, जो अब सिर्फ़ मम्मी की चुदाई का ज़रिया नही, बल्कि मेरे कंट्रोल और हवस के नये खेल का मैदान बन चुका था.
मम्मी तैयार हो कर मेरे पास आई, एक गहरी ग्रीन सिल्क सारी में. सारी उनके बदन पर ऐसी चिपकी थी की उनकी भरपूर चुचियों की गोलाई और पतली कमर की गहराई सॉफ दिख रही थी. ब्लाउस का डीप कट क्लीवेज की हल्की झलक दे रहा था. उनके बुन में बँधे बालों से नंगी गर्दन और पीठ सॉफ दिख रही थी. उनकी आँखों में एक च्छूपी हुई बेचैनी और नॉटी शाइन थी.
मम्मी: आराव, अब चले क्या? मार्केट में कुछ ज़रूरी काम है.
उनकी आँखों ने मुझे शरारती इशारा दिया.
मैं: हा मम्मी, चलिए. मैं भी फ्री ही हू.
हम पापा और दादी को मार्केट का बहाना देकर घर से निकले. कार में बैठते ही, मम्मी ने पल्लू अड्जस्ट किया, जिससे उनके बूब्स का अप्पर पोर्षन और सॉफ दिखने लगा. उन्होने मेरी तरफ स्लो, सेक्सी स्माइल दी. मेरी आँखें उनके क्लीवेज पर थी. कुछ ही देर में हम अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर पहुँचे. वो नीचे ही खड़े थे, आँखों में मम्मी की चुदाई करने का इंतेज़ार था.
अनिरुढ़ भाई: नमस्ते यामिनी जी, आइए-आइए. आराव, तुम भी अंदर आओ.
मम्मी ने दिलकश स्माइल दी और अनिरुढ़ भाई से हाथ मिलाया. मैं उनके पीछे-पीछे अंदर गया. लिविंग रूम में मम्मी और अनिरुढ़ भाई सोफे पर बैठे थे. मम्मी अनिरुढ़ भाई से बात करते हुए भी, हर कुछ देर में मेरी तरफ पलट कर देख रही थी. उनकी आँखों में च्छूपी हुई ताक़त और शैतानियत थी. अनिरुढ़ भाई ने कॉफी और स्नॅक्स लाए. मम्मी ने कॉफी कप लिया.
मम्मी (अनिरुढ़ भाई की आँखों में देखते हुए, नॉटी स्माइल के साथ): अनिरुढ़ जी, आपकी कॉफी तो आज कल और भी ज़्यादा अची हो गयी है. पहले से भी ज़्यादा नशा है इसमे.
उन्होने सीप ली और ज़ुबान होंठो पर फिराई, जो मेरे लिए खुला इशारा था.
अनिरुढ़ भाई (तोड़ा शरमाते हुए): यामिनी जी, वो बस आपको पसंद आनी चाहिए. कुछ चीज़ें तो टाइम के साथ और अची होती है ना?
मम्मी ने अनिरुढ़ भाई को तेज़, कामुक नज़र दी. फिर मेरी तरफ पलट कर धीरे से आँख मारी.
मम्मी (धीमी आवाज़ में): हा, अनिरुढ़ जी. कुछ चीज़ें तो बिल्कुल पर्फेक्ट होती है, उन्हे बार-बार ट्राइ करने का मॅन करता है. जैसे वो बेड जो आपने नया लिया है.
उन्होने बेडरूम की तरफ इशारा किया, आँखों में अलग ही बात थी. अनिरुढ़ भाई के चेहरे पर उत्तेजना सॉफ दिख रही थी.
अनिरुढ़ भाई: यामिनी जी, वो बेड तो… हा, बहुत कंफर्टबल है. क्या आप अंदर आ कर उसे ठीक से चेक करेंगी? शायद आपको और पसंद आए.
मम्मी ने लंबी साँस ली, जो उनके उभरे हुए सीने को और उछाल गयी. उन्होने मेरी तरफ गहरी, लंबी नज़र डाली, जिसमे कंट्रोल, मज़ा, और नया चॅलेंज था. वो धीरे से उठी, सारी उनके बदन पर रेशम की तरह फिसल रही थी.
मम्मी (अनिरुढ़ भाई से, पर उनका पूरा ध्यान मेरे पर था): ठीक है, अनिरुढ़ जी. मैं अंदर चेंज्ड कर लेती हू.
अनिरुढ़ भाई उठे और मम्मी को रास्ता दिया. जैसे ही मम्मी बेडरूम की तरफ मूडी, उन्होने पल्लू को तोड़ा अड्जस्ट किया. इससे उनकी कमर का बड़ा हिस्सा और गांद की आउटलाइन सॉफ दिखने लगी. उन्होने तेज़, नॉटी विंक मेरी तरफ किया. मम्मी मुझे आँख मार कर बेडरूम की तरफ चले गयी. दरवाज़ा हल्का सा खुला रह गया. मैं वहीं बैठा, मेरा लंड हरकत करने लगा. ये जलन नही थी, नये तरह की हवस थी, और एक च्छूपी हुई जीत भी.
अनिरुढ़ भाई मेरे सामने बैठे ब्लश कर रहे थे. कुछ समय बाद मम्मी ने अनिरुढ़ भाई को आवाज़ लगाई और वो उठ कर बेडरूम की तरफ जाने लगे. जैसे उन्होने गाते खोला मैने देखा मम्मी ने बोल्ड मरून सॅटिन स्लिप पहना था. मम्मी उनको बेड पर आने का इशारा कर रही थी.
अनिरुढ़ भाई के अंदर जाते ही, कमरा लॉक हो गया. मेरे अंदर अजीब सी खामोशी छ्छा गयी. मैं सोफा पर बैठा, कान और आँखें बेडरूम पर थे. हल्की सरसराहट के बाद मम्मी की धीमी, नशीली सिसकारी सुनाई दी. उसके बाद अनिरुढ़ भाई की भारी साँसों की आवाज़ आई. मेरे लंड में झटका लगा.
कुछ देर बाद, मम्मी की आवाज़ आई, जो अभी भी नशीली थी, पर उसमे एक च्छूपी हुई शरारत थी-
मम्मी: अनिरुढ़ जी… बस, धीरे… आराव बाहर है.
मेरी आँखें बड़ी हो गयी. मम्मी ने मेरा नाम लिया था. उन्हे पता था मैं बाहर था, और वो ये सब जान-बूझ कर कर रही थी. ये एक नया लेवेल का टीज़ था. मैं अब कंट्रोल नही कर पा रहा था. मैं वॉशरूम की तरफ भागा.
मम्मी (थोड़ी हँसी के साथ, पर आवाज़ में अब एक सॉफ कामुकता थी): अनिरुढ़ जी, तुम तो… बिल्कुल बेकाबू हो जाते हो… तोड़ा साबरा करो… पूरा मज़ा तो बाद में आता है ना.
अनिरुढ़ भाई की एक गहरी, संतुष्ट आ सुनाई दी. मम्मी की इस बात ने मेरे लंड को फाड़ने की हड्द तक टाइट कर दिया. वो अनिरुढ़ भाई से बात कर रही थी, पर उनका मेसेज मेरे लिए था. मैं तेज़ी से वॉशरूम में घुसा. मेरा दिमाग़ और लंड दोनो पागल थे.
मम्मी का अनिरुढ़ भाई के सामने मुझसे बात करना, वो भी ऐसे डबल मीनिंग में, मेरे कंट्रोल की हड्द थी. मैने बिना देर किए लंड बाहर निकाला. मम्मी की वो सॅटिन स्लिप पहने अनिरुढ़ भाई को नॉटी इशारा करना, उनकी गहरी क्लीवेज, और उनकी हर अदा मेरे सामने घूम रही थी.
मैने मम्मी की गरम छूट का स्वाद याद किया, और अनिरुढ़ भाई से हो रही उनकी चुदाई को इमॅजिन करते हुए, एक तेज़ और जुनूनी मूठ मारी. हर झटके के साथ मम्मी की आवाज़ मेरे कानो में गूँज रही थी.
झड़ने के बाद, थकान और संतुष्टि के अलावा, मेरे अंदर एक नया रेज़ल्यूशन था. अनिरुढ़ भाई को मम्मी की ज़िंदगी से पूरी तरह हटाना था, और मम्मी को पूरी तरह से अपना बनाना था. खुद को सॉफ कर लिविंग रूम में आ गया, जैसे कुछ हुआ ही ना हो. अब मैं उनके बाहर आने का इंतेज़ार कर रहा था, पर अनिरुढ़ भाई से कोई जलन नही थी. अब सिर्फ़ एक ही टारगेट था – मम्मी को पूरी तरह से कंट्रोल करना.
थोड़ी देर में, अनिरुढ़ भाई बाहर आए. उनके चेहरे पर संतुष्टि और चमक थी, जिसमे हल्की शरम भी घुली हुई थी. सॉफ था, डेढ़ महीने बाद मम्मी की छूट मारने का मौका उन्हे मिला था. मेरी मौजूदगी में उनकी अकड़ ढीली पद गयी थी. वो मुझसे नज़र चुरा कर हल्का सा शर्मा रहे थे.
कुछ और वक़्त बीता, और तभी बेडरूम का दरवाज़ा खुला और मम्मी बाहर निकली. उन्होने अपनी सारी पहनी थी, पर अब वो और भी कामुक और बेबाक लग रही थी. उनके चेहरे पर च्छूपी हुई मुस्कान थी. आँखों में जुनून और नशा भरा था, और उनकी चाल में एक नया, बोल्ड घमंड सॉफ दिख रहा था.
उनका हर हिस्सा चुदाई के बाद की चमक से दमक रहा था. उनकी नज़र अनिरुढ़ भाई पर पड़ी और उन्होने उन्हे तेज़ शिकारी नज़र दी. इससे अनिरुढ़ भाई और ज़्यादा शर्मा गये. फिर मम्मी की नज़र मुझ पर आई. उन्होने मुझे देखा और एक धीमी, लंबी, और नॉटी स्माइल दी.
मम्मी मेरे पास आ कर रुकी, इतनी करीब की मैं उनकी गरम साँसें और जिस्म की चुदाई के बाद की खुश्बू महसूस कर सकता था. उन्होने अपना हाथ मेरे कंधे पर रखा और धीरे से दबाया.
मम्मी (मेरी आँखों में गहरी नज़र डालते हुए): आराव, तोड़ा और रूको. मुझे लगता है मुझे अनिरुढ़ जी को थॅंक योउ कहना है. उन्होने आज कॉफी कुछ ज़्यादा ही स्पेशल बनाई थी. बहुत मस्त चुदाई हुए. (ये आखरी लाइन उन्होने धीरे से मेरे कान में कही).
उनकी बात अनिरुढ़ भाई के लिए थी. पर उनकी आँखें मुझसे बात कर रही थी, मुझे और उत्तेजित कर रही थी. उन्होने हल्की सी हँसी दी, जो सिर्फ़ मैं सुन सकता था, और फिर अपनी जीभ धीरे से रसीले होंठो पर फिराई. उनका हाथ अभी भी मेरे कंधे पर था, और वो उसे हल्के से सहला रही थी. अनिरुढ़ भाई ने उपर देखा, और मम्मी ने उन्हे एक इनोसेंट, पर अंदर से हवस भारी मुस्कान दी.
मम्मी (अनिरुढ़ भाई की तरफ देखते हुए): अनिरुढ़ जी, आपने तो आज दिन बना दिया मेरा. ऐसा लगता है मुझे यहाँ आते रहना चाहिए, क्यूँ आराव?
मैं समझ गया, मम्मी मुझे अनिरुढ़ भाई के सामने खुल कर टीज़ कर रही थी.
अनिरुढ़ भाई: मैं भी आपको बहुत मिस कर रहा था. आप कितने दीनो बाद आज आए.
मम्मी: आने का मॅन तो मेरा भी बहुत करता है. आपके साथ जो सुकून मिल रहा है, उसके लिए तो मैं भी तरस रही हू. पर क्या करू? घर पर काम ही इतने रहते है. और यहाँ से जाती हू ना तो कुछ लॅडीस मुझे ऐसे दिखती है जैसे उनको हमारा राज़ पता हो. मुझे बहुत दर्र लग रहा है.
अनिरुढ़ भाई भी ये बात सीरियस्ली सुन रहे थे.
मम्मी (तोड़ा अपसेट होते हुवे): अब तो घर पर भी सब बातें बनाते है की यामिनी आज कल बहुत समय तक मार्केट में घूमती रहती है. हर बार कितना काम लेकर जाती है.
मैं ये बात सुन कर मैं शॉक्ड हो गया. ये एक पवर प्ले था, या मम्मी सच में अपना दुख जाता रही थी. मम्मी का मेरे सामने अनिरुढ़ भाई को थॅंक योउ बोलना और फिर मुझसे पूछना, ये सब मेरी जीत का एहसास था. अनिरुढ़ भाई का चेहरा खुशी और शरम से लाल हो रहा था, उन्हे लगा मम्मी उन्हे स्पेशल फील करवा रही थी. पर वो नही जानते थे की असली खेल तो मेरी मुट्ठी में था, और उनकी ये चुदाई तो बस एक छ्होटा सा हिस्सा थी इस बड़े ग़मे का. मम्मी की असल चाहत तो मैं था.
मम्मी ने जब घर की बातों का ज़िक्र किया, तो उनके चेहरे पर हल्की सी चिंता दिखी. उनकी आँखों में अब भी वो च्छूपी हुई शैतानियत और गर्मी थी, पर अब एक नयी परेशानी भी थी.
मम्मी: चल बेटा, आराव, अब घर चलते है. तेरी चाची और दादी वैसे भी बहुत सवाल करती है. पता नही आज क्या-क्या पूछेंगी.
मम्मी ने फिर अनिरुढ़ भाई की तरफ देखा, जाने की बेकरारी सॉफ दिख रही थी.
मम्मी (अनिरुढ़ भाई की तरफ तोड़ा झुकते हुए): अनिरुढ़ जी, मैं आपको बहुत मिस करूँगी, जल्दी ही फिर से मिलने की कोशिश करूँगी.
ये कहते हुए मम्मी ने अपने हाथ अनिरुढ़ भाई की कमर पर रखे और उन्हे अपनी तरफ खींचा. अनिरुढ़ भाई भी तुरंत करीब आ गये. मम्मी ने उन्हे अपने सीने से लगा लिया, एक टाइट, जिस्म को झंझोड़ने वाला हग दिया. इस हग में मम्मी के भरे हुए बूब्स अनिरुढ़ भाई के सीने पर बुरी तरह डब रहे थे.
अनिरुढ़ भाई ने मेरी तरफ देखा. तब उनकी आंकों में मेरा दर्र दिखा और जो मम्मी के जिस्म को कस्स के फील कर रहे थे, वो बंद करके अलग हो गये. और मम्मी? उनकी नज़र इस हग के दौरान भी एक बार मेरे उपर आई, और उन्होने एक तेज़ नॉटी स्माइल दी, जैसे कह रही हो, देख आराव, ये सब तेरे सामने है, और तू बस देखता रह जाएगा.
जैसे ही हग ख़तम हुआ, मम्मी अनिरुढ़ भाई से अलग हुई, उनके चेहरे पर सॅटिस्फॅक्षन था. अनिरुढ़ भाई अब भी मेरे से नज़रें चुरा रहे थे.
मम्मी: चलो आराव, निकलते है.
हम अनिरुढ़ भाई को बाइ बोल कर फ्लॅट से बाहर निकले. कार में बैठते ही, मम्मी ने लंबी साँस ली और मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में अब भी वो चुदाई की गर्मी थी, जो कह रही थी की बेटा सिर्फ़ तू अकेला नही है, और भी है जो उनकी छूट की गर्मी शांत कर सकते है. मेरा दिमाग़ तेज़ी से चल रहा था, मम्मी का ये बोल्ड अंदाज़ मुझे और भी पागल कर रहा था.