हे गाइस इट’स ःओतBओय्णिल. इस कहानी का पार्ट 1 ड्रॉप होने के बाद मुझे बहुत रीडर्स के मेल्स आए. उनमे से पुराने रीडर्स थे जो बहुत खुश थे मेरा कंबक देख के. आप सब को पार्ट 1 बहुत पसंद आया, ये पढ़ के बहुत अछा लगा.
कुछ देर ऐसे ही हग करने के बाद मैं अपना कंट्रोल खो रहा था. और मेरा हाथ उसकी कमर से फिसलता हुआ धीरे-धीरे नीचे जेया रहा था. अंकिता इस बात को फील कर रही थी. लेकिन उसने मुझे रोका नही. शायद वो भी यही चाहती थी.
फिर मैने अपने दोनो हाथो को उसकी गांद पे रखा, और सहलाने लगा. अंकिता ने सिसकारी ली और मैं समझ गया उसे ये बहुत पसंद आया. मैं उसकी गांद को आचे से सहलाने लगा और मुझे बहुत मज़ा आने लगा था. अंकिता ने अचानक से मेरे कान पे बीते किया जिससे मेरे मूह से सिसकारी निकली.
अंकिता: बस तुम ही हो जो मुझे इतना स्पेशल फील करवा सकते हो. इतना मज़ा मुझे कभी मेरे एक्स के साथ भी नही आया.
उसने इतना कहा और हम अलग हुए. वो मेरी आँखों में देखते हुए मेरे करीब आने लगी. और देखते ही देखते हमारे होंठ मिल गये. मैं उसके नीचे वाले होंठ को चूस रहा था. मैने सोचा नही था ये सब इतना जल्दी हो जाएगा.
हम दोनो एक-दूसरे में खो गये थे. हमे पता भी नही चला के कब ये सब शुरू हुआ. ये सब अनकंडीशनल था. धीरे-धीरे मैने स्पीड बधाई और उसे तोड़ा वाइल्ड किस करने लगा. इससे अंकिता समझ गयी के मैं उसे पाने के लिए कितना बेताब था. वो भी मेरा साथ देने लगी. उसने अपने एक हाथ से मेरे बालों को सहलाते हुए मुझे किस करना शुरू किया, और हम पागलों की तरह प्यार करने लगे.
तो चलिए आयेज क्या हुआ वो जानते है…
काफ़ी देर की किस्सिंग के बाद हम अलग हुए. जब हम होश में आए तो दोनो ही एक-दूसरे से नज़र चुरा रहे थे. हमे अंदाज़ा हो गया था की पिछले कुछ वक़्त में हमारे बीच क्या हुआ था. वो काफ़ी अनकंफर्टबल मोमेंट था. रोमॅन्स के फ्लो में इतना सब हो गया जिसमे मैने अंकिता के निपल्स को फील किया, उसकी गांद पर हाथ रख के उसे सहलाया, और अंकिता को सिड्यूस किया. उसने प्यार के नशे में मेरे कान को बीते किया और ये सब के बाद हमने काफ़ी देर तक किस्सिंग की थी.
हम दोनो जैसे-तैसे करके गाड़ी में बैठे और वहाँ से निकल गये. अंधेरा होने लगा था और गाड़ी में पिन ड्रॉप साइलेन्स था. हम दोनो काफ़ी ऑक्वर्ड मोमेंट में थे, और दोनो ही बीते हुए मोमेंट्स को याद करने लगे.
कैसे हुआ, क्या हुआ, क्यूँ हुआ… आयेज इसका हमारे रिश्ते पे क्या इंपॅक्ट होगा? ये सब सोचने का रीज़न ये था क्यूंकी हमने कभी भी एक-दूसरे को प्रपोज़ नही किया था, और ना ही ई लोवे योउ कहा था. जब ऐसा कुछ होता है तो काफ़ी अनकंफर्टबल हो जाता है एक-दूसरे से मिलना, बातें करना. और हमारा भी कुछ यही चल रहा था. मैं ये सोच रहा था के अगर अंकिता बुरा मान गयी तो? क्या हम एक-दूसरे से प्यार करते है? या बस फ्लो-फ्लो में हो गया? प्यार करते है तो ठीक है, ये रिश्ता आयेज बढ़ सकता है. लेकिन अगर सिर्फ़ ये एक मोमेंट में हो गया, तो इसकी मेमोरी हम ज़िंदगी भर नही भूल सकते.
कुछ टाइम ड्राइव करने के बाद अंकिता का घर आ गया, और वो गाड़ी से उतार गयी. वो बाहर वेट करने लगी मुझे बाइ बोलने के लिए, जैसे हमेशा ही हग करके बाइ कहते है वैसे. लेकिन मुझे तोड़ा ऑक्वर्ड लग रहा था फिर से उसे हग करने में.
लेकिन वो मेरे लिए वेट कर रही थी, तो मैं गाड़ी से बाहर आया और उसकी आँखों में देखा. एक आइ कॉंटॅक्ट के बाद हमने नज़रे चुरा ली और हग किया. वो बहुत छ्होटा सा हग था जिसमे सॉफ फील हो रहा था की वो सिर्फ़ फॉरमॅलिटी थी. एक-दूसरे को बाइ कहा और मैं वहाँ से निकल गया.
घर जाने के बाद मैं बेड पे लेट गया. लेकिन मेरे दिमाग़ में अभी भी वो सारे विष्वल्स आ रहे थे. जैसे मैं वो सब फील करने लगा, मेरा लंड खड़ा होने लगा था. मेरे अंदर गिल्ट भी था, लेकिन वो सब सोच के मैं काफ़ी गरम हो गया था. रात को काफ़ी देर तक मुझे नींद नही आई, और ना मेरा लंड शांत हो रहा था.
अंकिता को छोड़ना मेरा सपना था. उसकी तरफ अट्रॅक्ट होना और उसके बूब्स को फील करने के बाद मैं काफ़ी डेस्परते होने लगा उसे छोड़ने के लिए. मेरे दिमाग़ में हर जगह सिर्फ़ वो ही थी. उसकी फिगर का मैं दीवाना बन चुका था.
अफ क्या कुवर्व्स थे उसके. जब उसके बूब्स को फील किया तो समझ गया था काफ़ी पर्फेक्ट शेप में थे उसके बूब्स, ना ज़्यादा बड़े ना ज़्यादा छ्होटे. मैं बेड पर लेट के सब इमॅजिन करने लगा था. अंकिता की गांद मुझे बहुत पसंद थी, बहुत ही सेक्सी शेप और साइज़ था. मैं जब भी देखता था तो सोचता था कब उसे देखने का मौका मिलेगा. लेकिन आज मैने उसकी गांद को आचे से फील किया था.
कॉलेज में बहुत लड़के थे जो अंकिता के लिए पागल थे. हमारे कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़कियों में से एक थी वो. लड़के मोस्ट्ली गोरी लड़कियों के पीछे पागल होते है. लेकिन अंकिता ब्राउन गर्ल होने की वजह से फेमस थी. मैने काई बार देखा है उसे लड़कों से प्रपोज़ल रिसीव करते हुए. लेकिन वो हमेशा से ही माना कर देती थी. लेकिन मैं इतना स्पेशल था, जो उसने मुझे चूज़ किया.
ये सब सोचते हुए मुझे पता नही चला कब मेरा हाथ अपने लंड पर चला गया और मैं उसे सहलाने लगा. मुझे बहुत सुकून मिल रहा था. उस वक़्त मैं अंकिता के लिए बहुत पोज़ेसिव होने लगा था, जैसे वो सिर्फ़ मेरी है. धीरे-धीरे मैने अपनी आँखें बंद की और लंड को हिलने लगा और कुछ ही देर में मैं झाड़ गया. लंड से बहुत सारा कम निकला था जो सॉफ बता रहा था मैं कितना वाइल्ड हो गया था उसे छोड़ने के लिए. फिर पता नही कब मैं सो गया.
नेक्स्ट दे हम मिले और मैं तोड़ा दर्र रहा था की अंकिता कैसे रिक्ट करेगी. लेकिन जब उससे मिला तो वो एक-दूं नॉर्मल थी, जैसे कल कुछ हुआ ही नही. हम मिले, हमने हग किया और बिल्कुल पहले की तरह. मैं समझ गया अंकिता नॉर्मल थी, मतलब सब ठीक था. फिर मैं भी नॉर्मल हो गया उसे देख के.
नील: अंकु तुम मुझसे गुस्सा नही हो?
अंकिता: किस बात के लिए?
नील: कल जो हमारे बीच हुआ.
अंकिता (मेरी आँखों में देख के): मुझे नही पता तुम क्या सोच रहे हो. लेकिन कल जो भी मैने फील किया वो मुझे बहुत अछा लगा. ऐसा लगा जैसे मुझे वो चाहिए था. पिछले काफ़ी वक़्त से मुझे वो प्यार चाहिए था, जो नही मिल रहा था. और मैं वो सब तुमसे ही एक्सपेक्ट कर रही थी. और फाइनली वो हुआ.
नील: मतलब, मैं कुछ समझा नही? क्या तुम मुझसे प्यार करती हो?
अंकिता (मेरा हाथ पकड़ के): देखो ये मुझे भी नही पता… शायद धीरे-धीरे ये सब समझ आ जाएगा, इसलिए ज़्यादा मत सोचो.
इतना बोल के हम वहाँ से निकल गये. वहाँ से हम दोनो और भी क्लोज़ आने लगे थे. जैसे अंकिता मुझे हग करती थी, तो वो मुझे गाल पे किस करने लगी. हम दोनो बस बहाना ढूँढते थे एक-दूसरे को टच करने के लिए. हम पहले से ज़्यादा फ्लर्ट करने लगे, जो अब रेग्युलर बन गया था.
रात को हम चाटिंग करते थे तो डबल मीनिंग जोक्स और सेक्सी बातें करने लगे. धीरे-धीरे ये सब सेक्स छत में कॉनवर्ट हुआ और हम लाते नाइट चाटिंग करने लगे.
मुझे अंकिता के बारे में इतना पता लग गया के उसको प्यार चाहिए, वो मुझसे चूड़ना चाहती थी. हम एक-दूसरे को अपनी फॅंटसीस शेर करने लगे. कुछ दीनो बाद हमारी रात को कॉल पे सेक्सी बातें होने लगी. हम दोनो अपने रिलेशन्षिप के पीक पर पहुँच गये. अब सिर्फ़ हम उस मौके को तलाश रहे थे जहाँ हम सेक्स कर सके.
मौके की तलाश थी और वो मौका भी मिल गया. कॉलेज में ‘सारी दे’ की अनाउन्स्मेंट हुई और सब लोग बहुत एग्ज़ाइटेड थे. लड़कियाँ बहुत खुश थी की उन्हे अपनी पसंदीदा सारी पहनने का मौका मिलेगा और लड़के इसलिए खुश थे की उन्हे अपनी पसंदीदा लड़की को सारी में देखने का मौका मिलेगा. मैं और अंकिता बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड थे क्यूँ के कॉलेज में ये पहला सेलेब्रेशन था, जिसे हम बहुत स्पेशल बनाना चाहते थे.
अंकिता सारी तैयारी करने लगी की उस दिन वो क्या-क्या पहनेगी और उसे क्या शॉपिंग करनी थी. वो ये सब बाकी लड़कियों के साथ मिल के प्लान करने लगी, जो मेरे लिए सर्प्राइज़ था. मैने उसे काफ़ी पूछा, लेकिन उसने बताया ही नही. एक बार जब हम सारे दोस्त साथ में थे, तो मैने उससे पूछा ताकि सब के सामने वो माना ना कर पाए.
नील: अंकु बताओ ना यार तुमने क्या प्लान किया है? और कौन सी सारी पहनने वाली हो?
अंकिता: नील ये तुम्हारे लिए सर्प्राइज़ है ओके? तो इसके बारे में पूछना मत
नील: अर्रे लेकिन बताने से क्या होने वाला है? मैं बहुत ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हू यार.
अंकिता: ई नो बाबा तुम मुझे सारी में देखने के लिए बहुत एग्ज़ाइटेड हो. लेकिन तुम्हे बता दूँगी तो उतना मज़ा नही आएगा जितना डाइरेक्ट देखोगे तब आएगा.
नील: मतलब तुम नही बताॉगी?
अंकिता: जी नही.
नील: ठीक है, अब क्या वेट करना पड़ेगा?
अंकिता (मेरे गाल खींचते हुए): उस दिन तुम्हारे लिए 2 सर्प्राइज़ है.
नील: 2 सर्प्राइज़? यार यहाँ 1 का पता नही चल रहा, तुम 2-2 प्लान करके बैठी हो.
अंकिता: ई नो बुत ट्रस्ट मे, वो दिन हमारे लिए सबसे स्पेशल होने वाला है.
नील: अगर ऐसी बात है तो ठीक है. मैं उस दिन का वेट करूँगा.
अंकिता (मेरे गाल पे किस करते हुए): ये हुई ना बात.
अंकिता ये भूल गयी थी की हम फ्रेंड्स के साथ खड़े थे, और उसने सब के सामने मुझे किस किया. इससे सारे लोग एग्ज़ाइट्मेंट में पूछने लगे की हमारे बीच क्या चल रहा था. जैसे-तैसे करके हमने उन्हे समझाया के ऐसा कुछ नही था. क्यूंकी फिलहाल हमे भी पता नही था की हमारे बीच क्या था. ये सिर्फ़ अट्रॅक्षन था या प्यार.
आख़िर वो दिन आ गया जिस दिन ‘सारी दे’ था. मैं सुबह आचे से रेडी हुआ. मैने वाइट शर्ट, ब्लॅक ट्राउज़र, ब्लॅक ब्लेज़र और एक ब्लॅक फॉर्मल शूस पहने. मैं काफ़ी हॅंडसम लग रहा था. लेकिन उस दिन मैं अंकिता को देखने के लिए मॅर रहा था. जल्दी-जल्दी में तैयार हुआ और अंकिता को पिक करने निकल गया.
उसके घर आते ही उसे कॉल किया और वो नीचे आई. ओह मी गोद! क्या खूबसूरत लग रही थी वो.
अंकिता ने आज पिंक सारी पहनी थी, स्लीवलेशस ब्लाउस और सारी उसने नेवेल से नीचे पहनी थी जिससे उसका पेट बहुत सुंदर लग रहा था. मॅन कर रहा था वही उसे किस करू. गले में उसने एक गोल्ड नेकलेस पहना था जो बहुत खूबसूरत था. उसका ब्लाउस तोड़ा टाइट था.
उसने अंदर ब्रा नही पहनी थी, तो उसके बूब्स का शेप बहुत सॉफ नज़र आने लगा था, और निपल्स भी ब्लाउस के उपर से दिख रहे थे. खुले बालों के साथ वो ‘मैं हूँ ना’ फिल्म में ‘सुष्मिता सेन’ की तरह दिख रही थी. उसे देख के मेरे दिल की धड़कन ही रुक गयी.
अंकिता मेरे पास आई और मेरी आँखों के सामने चुटकी बजा के पूछा-
अंकिता: हेलो मिसटर… कहाँ खो गये आप?
नील (होश में आते हुए): अफ यार क्या खूबसूरत लग रही हो तुम… मैने जितना सोचा था उससे काई ज़्यादा हॉट लग रही हो.
अंकिता: अछा जी… शुकरिया!
अंकिता (मेरे कंधे पे हाथ रख के): और आप भी कुछ कम नही हो. इस फॉर्मल वेर में बेहद हॅंडसम लग रहे हो. लगता है आज कॉलेज की सारी लड़कियों को पटना चाहते हो.
मैने उसकी कमर में हाथ डाला और उसे अपने करीब खीच के कहा-
नील: बाकी लड़कियों को छ्चोढो, मुझे तो मेरी अंकु चाहिए.
अंकिता (प्यार से मेरे गाल पर थप्पड़ लगते हुए): अछा जी… ठीक है… ये भी हो जाएगा. वैसे भी ये सिर्फ़ पहला सर्प्राइज़ था.
नील: ये पहला वाला ऐसा है तो दूसरा वाला कैसा होगा?
अंकिता (मेरे करीब आ कर): वो इससे भी ज़्यादा स्पेशल है.
नील: हाए, लगता है आज तुम मेरी जान ही ले लॉगी.
अंकिता (हेस्ट हुए): हा जी, कुछ ऐसा ही समझो… अब चले?
नील: मैं क्या कहता हू हमे कही जाने की क्या ज़रूरत है? क्यूँ ना कहीं डोर चले जहाँ सिर्फ़ हम दोनो ही हो
अंकिता: और ऐसा क्यूँ?
नील: तुम इतनी खूबसूरत लग रही हो की दिल कर रहा है तुम्हे पूरा दिन ऐसे ही देखता राहु.
अंकिता (शरमाते हुए): तुम भी ना… कुछ भी बोलते हो.
फिर हम दोनो गाड़ी में बैठ के वहाँ से कॉलेज के लिए निकल गये.
दोस्तों अंकिता का दूसरा सर्प्राइज़ क्या है, वो जानने के लिए आपको तोड़ा वेट करना पड़ेगा. अपनी एग्ज़ाइट्मेंट को तोड़ा कंट्रोल करो. आयेज आपको बहुत मज़ा आने वाला है.
ये पार्ट आपको कैसा लगा मुझे मैल करके ज़रूर बताना. नेक्स्ट पार्ट जल्दी चाहिए तो मैल करना पड़ेगा.
तो बे कंटिन्यूड…