पति और ननद के साथ ग्रूप सेक्स स्टोरी

दोस्तों मेरी सेक्स कहानी के लिए आपके आचे रेस्पॉन्स के लिए आपका धन्यवाद. पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की कैसे मेरा और रिया का लेज़्बीयन सेक्स हुआ. अब आयेज बढ़ते है-

झड़ने के बाद एक-दूसरे के उपर लेट गये. तभी दरवाज़ा खुला. हहे, मैं हर बार दरवाज़ा खुला छ्चोड़ देती हू. देखा तो वो दीपक था. वो अंदर आया और बेड के पास आके खड़ा हो गया. उसके चेहरे पे एक अलग एग्ज़ाइट्मेंट थी और ये बात उसकी पंत से भी सॉफ ज़ाहिर हो रही थी.

मैने और दीपक ने शादी के बाद कुछ आड्वेंचर्स किए थे, चाहे वो स्वापिंग हो या एम्म्फ (माले माले फीमेल) थ्रीसम. अभी दीपक मेरे से आँखों ही आँखों में पूच रहा था, “क्या अभी फफ्म (फीमेल फीमेल माले) वाला सीन पासिबल है?” मैने उसको वैसे ही जवाब दिया, “एक बार रिया से पूच लेती हू.” दीपक ने जिस रिया को कल कपड़े बदलते देखा था, आज वो उसके साथ करना चाहता था. दूसरी तरफ, रिया अपने आप को ढाके हुए थी.

मैं: “रिया, तो क्या ख़याल है? दीपक को भी जाय्न कर दे?”

रिया: “किसमे?”

मैं: “किसमे क्या? अभी तुम दीपक के साथ भी करना चाहोगी?”

और इतना बोलते ही मैने दीपक की ज़िप खोली और उसका तन्ना हुआ लंड बाहर निकाल दिया. उसके 6.5 इंच के लंड को मैने तोड़ा हिलाया और रिया के सामने उसको किस किया. तभी रिया बोली, “ओ, अछा ये बात कर रहे हो? एक सेकेंड रूको.” तभी रिया ने कॉल मिलाया.

रिया: “हेलो… वो दीपक है… अछा… ठीक है… ओके बाइ.”

दीपक और मैं एक-दूसरे को देख रहे थे, सोच रहे थे की रिया ने किसको कॉल लगाया होगा. दीपक को लगा की रिया ने नील को कॉल किया था पर्मिशन लेने के लिए. पर जब रिया ने कॉल रखा तब मुझे दिखा की रिया ने नील को नही, रोहन को कॉल किया था. मैं मॅन ही मॅन सोच रही थी की रोहन से क्या पूछा होगा रिया ने और ये “सेक्षुयल आड्वेंचर्स आंड इन्सेस्ट सोसाइटी” आख़िर है क्या?

तभी रिया बोली, “चलो, स्टार्ट करते है.” इतना बोल के रिया ने मुझे इशारा किया और हम दोनो मिल के दीपक को बेड में ले आए. हमने उनके कपड़े उतार दिए और दोनो मिल के उनके लंड और बॉल्स को चूस रहे थे, बारी-बारी.

दीपक: “आ, मज़ा आ रहा है, चूस्टे रहो… वैसे रिया, तुमने नील से पर्मिशन माँगी और उसने दे दी?”

रिया: “क्यूँ?”

दीपक: “अर्रे, उसको कुछ मिल नही रहा ना.”

मैं: “क्यूँ, तुम यहाँ भी स्वापिंग करना चाहते हो क्या?”

दीपक: “अर्रे, ये क्या बात कर रहे हो? ये कैसे पासिबल है? तुम दोनो भाई-बेहन हो.”

रिया (सेक्सी वाय्स में): “क्यूँ, कभी रिश्तों में चुदाई के बारे में नही सुना क्या, दीपक भैया?”

दीपक ये सुन के और ज़्यादा उत्तेजित हो गया. दीपक मॅन ही मॅन सोच रहा था की अगर मैं अपने भाई से चुड्ती हू और वो ये सब देखेगा तो क्या होगा. तभी रिया दीपक के लंड पे और मैं दीपक के चेहरे पे बैठ गयी. दीपक मेरी छूट को चाटने और चूसने लगा. दूसरी तरफ रिया की चुदाई शुरू हुई. रिया और मैं किस कर रहे थे. उसने आग में गीयी डालने के लिए बोला-

रिया: “अयाया उम्म दीपक भैया छोड़ो अपनी बेहन को. पानी निकाल दो उसका.”

दीपक मा-बाप का एक लौटा लड़का था. तो जब रिया ने दीपक को “भैया” बोला तो उसकी उत्तेजना का कोई ठिकाना नही था. कुछ देर ऐसे ही चुदाई हुई जिसमे रिया कभी दीपक को भाई बोलती तो कभी “बहनचोड़” वाली गाली देती. इसी बीच रिया एक बार झाड़ चुकी थी. अब मेरी चुदाई की बारी आई. दीपक ने मुझे घोड़ी बनाया और मेरा मूह रिया की छूट में दे दिया, और मेरी चुदाई शुरू हुई.

रिया: “अयाया अया उम्म अफ वैसे… अपनी… बेहन… को छ्चोढ़ के… कैसा लगा, दीपक भाई?”

दीपक: “बड़ा मज़ा आ गया आज तो.”

रिया: “तो… क्या… स्वापिंग करोगे हमारे… साथ?”

दीपक: “नील मान जाएगा तो ठीक है.”

रिया: “वो… मेरे पे छ्चोढ़ दो…”

चुदाई ऐसे ही चलती रही. अब मैं भी एक बार झाड़ चुकी थी और दीपक भी आख़िर में था. तभी रिया के मॅन में क्या विचार आया, की उसने बोला-

रिया: “उम्म अफ वैसे भाई, एक राज़ की बात बतौ?”

दीपक: “हा, क्या?”

रिया: “मैं ना अपने पापा से भी चूड़ी हू.”

दीपक: “क्या, बंटी अंकल से?”

रिया: “हा. और वो भी बड़े मज़े से छोड़े मुझे.”

दीपक (और भी ज़्यादा एग्ज़ाइटेड हो गया था): “अछा!”

रिया: “वैसे भाई, तुम्हारी मा भी तो अकेली है? तुम उनको छोड़ने का ट्राइ क्यूँ नही करते? दिखने में तो हॉट लगती है वो.”

ये सुन कर दीपक का कंट्रोल नही रहा और वो मेरे अंदर ही झाड़ गया. मैने अपने बेटे के बर्त के बाद दूसरे बच्चे की प्लॅनिंग नही की थी, तो मैं बर्त कंट्रोल में थी. फिर मैं और दीपक अपने रूम में आ गये थे. दीपक को नींद आ गयी थी. तभी मैने रोहन को कॉल किया.

मैं: “हेलो रोहन, कहाँ हो?”

रोहन: “क्यूँ, क्या हुआ?”

मैं: “रिया ने तेरे से पर्मिशन क्यूँ माँगी?”

रोहन ये सुन के हँसने लगा.

मैं: “वो सब छ्चोढ़, नील कहाँ है?”

मैने ध्यान से सुना तो पीछे से मोनिंग की आवाज़ आ रही थी.

रोहन: “हम रवि के घर है. हमारा प्लान बना तो हम दीपक जी को घर सेंड कर दिए. वैसे थ्रीसम कैसा रहा?”

मैं: “अछा, तुझे पहले से पता था?”

रोहन: “और नही तो क्या. और सुनो, नील, मैं और रवि रेखा, रेशमी और मामी को पेल रहे है. तो नील को आने में टाइम लगेगा.”

इतना बोल के रोहन ने कॉल कट कर दिया. मैं भी अब ये बात पचा के खाना बनाने को चली गयी. लंच का टाइम हुआ, दीपक उठ गया था और नील भी आ गया था. सब साथ में लंच कर रहे थे. सब नॉर्मल थे, जैसे कुछ हुआ ही ना हो. पर दीपक की नज़र सासू मा के लिए कुछ अलग लग रही थी. वो उनकी तरफ देखे जेया रहे थे.

क्या रिया ने दीपक के मॅन में उसकी मा के लिए काम वासना के भाव जगा दिए थे?

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