मों सेक्स स्टोरी अब आयेज से-
हर बार की तरह, एक बार मैं मम्मी को अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर छ्चोढ़ कर उनके अपार्टमेंट के गार्डेन में बैठा था. मम्मी को छोड़ने के बाद अनिरुढ़ भाई का मेसेज मिलते ही मैं उनके फ्लॅट पर गया.
मैने डोरबेल बजाई तो अनिरुढ़ भाई ने दरवाज़ा खोला. उनके चेहरे पर आस यूषुयल मम्मी को छोड़ने की खुशी थी. अब ये इतना रेग्युलर हो गया था की उनको कोई झीजक नही बची थी. उनकी आँखों में वही भाव था जो हर बार दिखता था.
मैं सोफा पर बैठा तो देखा बेडरूम का डोर खुला था और मम्मी अंदर अपनी सारी पहन रही थी. मेरी नज़र उन पर पड़ी. मम्मी ने भी मुझे देखा और उन्होने एक नॉटी स्माइल दी.
मुझे तोड़ा अजीब लगा. मेरी मम्मी जो कभी कितनी संस्कारी थी, अब कितनी खुल गयी थी की गैर मर्द से छुड़वाने के बाद भी मुझे स्माइल दे रही थी. मम्मी को अब मेरे से कोई दर्र नही था. वो मेरे पर पूरा भरोसा कर रही थी.
एक दिन अनिरुढ़ भाई का मुझे कॉल आया. उनकी आवाज़ में एक नयापन और उत्तेजना थी जो सीधी मेरे दिमाग़ पर असर कर रही थी.
अनिरुढ़: आराव, मम्मी को अब तोड़ा और खूबसूरत बनाने का समय आ गया है. क्या कहते हो?
मैं: अब आप मम्मी को मेरे से ज़्यादा पहचान रहे हो. अब मैं क्या काहु?
अनिरुढ़ (हेस्ट हुए): बिल्कुल, तो फिर सुनो. किसी बहाने से मम्मी को माल लेकर चलते है. वहाँ उनके लिए कुछ ख़ास लेंगे.
मैं: ठीक है, मम्मी से बात करता हू.
मेरे दिमाग़ में चल रहा था की अनिरुढ़ भाई अब मम्मी को किस हद तक बदलना चाहते थे? और इस बात से मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी और उत्तेजना दोनो थे. मम्मी को सिंपल सारी में से सेक्सी सारी पे तो उन्होने ला दिया था. अब और क्या क्या हो सकता था? क्यूंकी मुझे भी अब मम्मी को किसी और अवतार में देखने की चुल्ल मची थी. मैने घर पर मौका देख कर मम्मी से बात की.
मैं: मम्मी, अनिरुढ़ भाई बोल रहे है सनडे को माल में जाते है. तोड़ा घूम फिर लेंगे.
मम्मी (थोड़ी सोच में पड़कर): लेकिन बेटा घर पर क्या बोलेंगे?
मैं: मम्मी, आप कुछ बहाना बना देना.
मम्मी ने उनके एक रिश्तेदार के यहाँ मिलने जाने का बहाना बनाया और रात को लाते होगा कहा. उनकी आँखों में एक च्छूपी हुई चमक थी. मम्मी ने पापा से बोला की मैं आराव को अपने साथ लेकर जाती हू. अब मैं साथ में होगा तो क्या किसी को शक नही होगा.
सनडे को माल के लिए रेडी होने के बाद, जब मम्मी मेरे सामने आई, तो उनको देख कर मैं डांग रह गया – एक बार फिर. उन्होने गहरे मरूं रंग की सारी पहनी थी और उसके साथ स्लीव्ले ब्लाउस था. ये वही सारी थी जो अनिरुढ़ भाई ने सेलेक्ट की थी, और मैने उनके बर्तडे पर गिफ्ट की थी. पर आज उसमे मम्मी एक नये रूप में दिख रही थी.
अनिरुढ़ भाई से छुड़वाने के बाद, उनका स्लीव्ले ब्लाउस उनके भरे हुए बूब्स पर इतना टाइट लग रहा था, की उनका फिगर और भी सेक्सी और उभरा हुआ दिख रहा था. अनिरुढ़ भाई की मेहनत मम्मी के जिस्म पर रंग ला रही थी. मम्मी के बूब्स और गांद का साइज़ बढ़ गया था.
हम दोनो घर से कार लेकर निकले और रास्ते में से अनिरुढ़ भाई को पिकप किया. तोड़ा डोर जाने के बाद मम्मी ने कहा कार रोको. मैने कार साइड में लगाई. उसके बाद वो पीछे की सीट पर अनिरुढ़ भाई के साथ बैठ गयी. उस समय मुझे लगा मम्मी को मेरे से ज़्यादा अनिरुढ़ भाई इंपॉर्टेंट लग रहे थे.
मैं मिरर में देख रहा था, दोनो बिल्कुल पास चिपक कर बैठे थे और दोनो फुसफुसा कर बातें कर रहे थे. इतना धीरे की मुझे कुछ सुनाई नही दे रहा था. पर मम्मी की बीच-बीच में हस्सी सुनाई दे रही थी. उनके चेहरों पर एक अलग ही खुशी और एग्ज़ाइट्मेंट थी, जैसे वो दोनो मुझसे वो चीज़ च्छुपाना चाहते हो.
हम माल तोड़ा जल्दी पहुँच गये थे. सुबह के कुछ 9 बाज रहे थे, और माल में कुछ दुकाने 11 बजे खुलती थी. मम्मी को अब तक कोई प्लान का पता नही था. अनिरुढ़ भाई का मूह उतार गया, पर उन्होने एक दूं से कहा-
अनिरुढ़: चलो मोविए देखने जाते है.
मम्मी (चेहरे पर खुशी के साथ): मैने तो शादी के बाद थियेटर में गयी भी नही.
अनिरुढ़ (मम्मी की आँखों में देखते हुए, और मुझे देख कर): अब मैं हू ना यामिनी जी. आपको वो सब खुशी दूँगा जो आपको इन लोगों के घर में कभी मिलेगी नही.
मुझे अनिरुढ़ भाई की ये बात सुन कर ऐसा लगा की साला मेरी हेल्प से मेरी मा की मज़े ले रहा था, और मुझे और मेरी फॅमिली को ताना मार रहा था. मेरा चेहरा फीका पद गया. मम्मी ने मेरी तरफ देखा और वो समझ गयी की मुझे इस बात का बुरा लगा था.
मम्मी: ऐसा नही है, अनिरुढ़ जी. मेरा बेटा मुझे बहुत सपोर्ट कर रहा है. और आप ज़्यादा हवा बाज़ी ना करो और मेरी फॅमिली के बारे में उल्टा-सीधा ना बोलो. आप क्या जानते है हमारी फॅमिली के बारे में?
अनिरुढ़ (तुरंत): सॉरी-सॉरी मेडम जी, ग़लती हो गयी आपके घर वालो के बारे में उल्टा-सीधा बोल दिया. अब अपना गुस्सा भी शांत करो, मोविए देखने चलते है.
अनिरुढ़ भाई ने मम्मी को मानने के लिए उनकी कमर पर धीरे से उंगलियों से गुदगुदी की, और वो एक-दूं से हस्स पड़ी. उनकी हँसी माल के क्वाइयेट एन्वाइरन्मेंट में सॉफ सुनाई दी. उन्होने शरमाते हुए अनिरुढ़ भाई को हल्का सा धक्का दिया. पर उनके चेहरे पर अब गुस्से की जगह एक मीठी मुस्कान थी.
हम माल में मोविए देखने चले गये. जैसे ही मोविए शुरू हुई, मम्मी ने अपना सर अनिरुढ़ भाई के कंधे पर रख दिया. पर, उनका दूसरा हाथ, जो अनिरुढ़ भाई से डोर था, वो मेरे हाथ पर था. वो बीच-बीच में मेरे हाथ पर दबाव बनती, और मेरी तरफ अलग नज़र से देखती. उनकी आँखों में एक शरारत और चुप्पी हुई चाहत थी.
मोविए ख़तम होने के बाद हम माल में इधर-उधर घूमने लगे. मम्मी अनिरुढ़ भाई के बगल में चलती जेया रही थी, और मैं उनके तोड़ा पीछे था. लेकिन मेरी नज़र बराबर मम्मी पर ही टिकी हुई थी. उनकी मरून सारी उनके जिस्म पर ऐसे लिपटी हुई थी की हर गुज़रता आदमी उन्हे पलट कर दोबारा देखने को मजबूर हो जेया रहा था.
मम्मी अपनी देसी अदाओं और कमर-तोड़ फिगर से सब का ध्यान अपनी तरफ खींच रही थी. उनकी स्लीव्ले ब्लाउस से झलकती हुई गोरी स्किन और टाइट फिट उनके भरे हुए बूब्स को और भी नुमाया कर रहा था. उनकी पतली कमर और घूमती हुई गांद हर नज़र को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी.
काई यंग लड़के तो उन्हे आँखें फेड देख रहे थे, और कुछ तो अपने दोस्तों को कह कर उनकी तरफ इशारा कर रहे थे. बड़ी उमर के आदमी भी अपनी फॅमिली के साथ चलते हुए भी एक पल के लिए मूड कर उन्हे चोरी से देख लेते थे.
मम्मी, इस सब से अंजान, या शायद जान कर भी अंजान बने हुए, अनिरुढ़ भाई से बातें करने में बिज़ी थी. उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी, और उनकी आँखों में एक चमक थी जो उनकी बढ़ती हुई सेल्फ़-कॉन्फिडेन्स को दिखा रही थी.
मैं ये सब देख रहा था और मेरे अंदर अजीब सी फीलिंग्स आ रही थी. एक तरफ तो मुझे गर्व हो रहा था की मेरी मम्मी इतनी खूबसूरत थी. और दूसरी तरफ जलन भी हो रही थी की इतने सारे मर्द उन्हे घूर रहे थे.
माल में घूमते हुए अनिरुढ़ भाई मम्मी को सीधे एक लाइनाये स्टोर के सामने ले गये. मम्मी ने मेरी तरफ देखा और थोड़ी शर्मा गयी. उनके गाल हल्के गुलाबी हो गये, पर उनकी आँखों में एक च्छूपी हुई उत्सुकता भी थी.
स्टोर में बहुत बोल्ड और सेक्सी लाइनाये, निघट्य और ब्रा-पनटी के सेट थे. मुझे लग रहा था शायद मम्मी ने ये सब पहली बार देखा था. वो इतना शर्मा रही थी की अपनी नज़र उठा कर वो सब देख भी नही पा रही थी.
फिर, अनिरुढ़ भाई मम्मी को कुछ निघट्य दिखाने लगे. कुछ तो इतनी छ्होटी और शियर थी, की मम्मी की शरम और बढ़ गयी.
मम्मी (धीमी आवाज़ में, शरमाते हुए): अनिरुढ़ जी, इस सब की क्या ज़रूरत है? और वैसे भी, ये सब मैं घर पर पहन नही सकती.
अनिरुढ़ (मुस्कुराते हुए, उनकी आँखों में देखते हुए): ये सब आपके घर के लिए नही यामिनी जी, मेरे फ्लॅट के लिए है.
मम्मी थोड़ी सर्प्राइज़ हुई और उन्होने तिरछी नज़र से अनिरुढ़ भाई को देखा. उनके चेहरे पर एक अजीब सी लाली और बेचैनी थी. अनिरुढ़ भाई भी उनको नॉटी स्माइल दे रहे थे, जैसे वो मम्मी के इस सर्प्राइज़ रिक्षन का मज़ा ले रहे हो.
अनिरुढ़ भाई की ज़िद की वजह से मम्मी मान गयी. उन्होने पहले कुछ सिंपल सिल्क की निघट्य चूज़ की, जो देखने में थोड़ी ट्रॅन्स्ल्यूसेंट थी. फिर उन्होने मम्मी को कुछ फॅन्सी ब्रा-पनटी के सेट्स भी दिखाए.
मम्मी बहुत शर्मा रही थी. लेकिन जब भी अनिरुढ़ भाई कोई आइटम उठाते, मम्मी एक बार मेरी तरफ देखती. कभी वो मेरे हाथ को हल्के से छ्छू कर मेरी चाय्स पूछती थी. मैं भी उन्हे इशारे में अपनी पसंद बताता था, जैसे, अगर कोई चीज़ मुझे ज़्यादा पसंद आती, तो मैं उनके हाथ को धीरे से एक बार दबा देता; और अगर ठीक-ताक लगती, तो हल्का सा टच करके छ्चोढ़ देता.
मेरी चाय्स पर मम्मी ने एक डीप मरून लेस वाला ब्रा-पनटी सेट, एक सॉफ्ट स्काइ ब्लू सेट, और एक एलिगेंट टील ब्लू सॅटिन टच के साथ सेट फाइनल किए. और नाइटीस में से, एक सॉफ्ट बेज 2-पीस सेट, जिसमे डेलिकेट प्रिंटेड स्लिप और मॅचिंग रोब था – एक-दूं ग्रेस्फुल, और दूसरा बोल्ड मरून सॅटिन स्लिप, जिसमे ब्लॅक लेस का शार्प कॉंट्रास्ट था, ये भी सेलेक्ट की.
अनिरुढ़ भाई इस समय बिज़ी थे दूसरी निघट्य देखने में, या सेलेज़्गर्ल से बात करने में, तो उन्हे हमारे ये गुप्त इशारे समझ नही आ रहे थे. जब मम्मी ने अपनी पसंद फाइनल कर ली, अनिरुढ़ भाई उनके पास आए.
अनिरुढ़ (मुस्कुराते हुए): यामिनी जी, एक लास्ट पीस तो मेरी चाय्स का भी होना चाहिए, हैईना?
इससे पहले की मम्मी कुछ बोल पाती, अनिरुढ़ भाई ने एक डीप वाइन-रेड लेस निघट्य उठाई. वो इतनी सेक्सी थी की उसे देख कर ही मेरे होश उडद गये. पूरी निघट्य शियर लेस की बनी थी, जिसके थ्रू मम्मी का हर कर्व दिखेगा. उसका नेकलिन इतना डीप था की आधे से ज़्यादा बूब्स बाहर रहते और उसकी लेंग्थ इतनी शॉर्ट की ऑलमोस्ट इन्नर थाइस तक ही आती.
मम्मी की आँखें उस निघट्य को देख कर शॉक से बड़ी हो गयी, और उनके गाल तेज़ लाली से भर गये. उन्होने एक पल के लिए मेरी तरफ देखा. उनकी आँखों में शरम और तोड़ा सा दर्र भी था, जैसे वो कह रही हो, ये क्या है?
मैं भी उस निघट्य को देख कर एक-दूं स्टॅच्यू बन गया था. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी थी. तब मैने उनको इशारे से हा कह दिया. मेरा इशारा मिलते ही मम्मी मुझे नॉटी स्माइल देने लगी. उनकी आँखों में अब शरम के साथ एक नयी चमक थी.
मम्मी (अनिरुढ़ भाई से शर्मा कर): ठीक है अनिरुढ़ जी, आपकी पसंद भी रख लेते है.
उसके बाद मम्मी ने घर के लिए एक सॉफ्ट पिंक लोंग मॅक्सी भी ली, जो एक-दूं सिंपल, स्वीट और उनकी सॉफ्ट पर्सनॅलिटी जैसी थी.
उसके बाद हमने लंच किया. लंच के बाद हम एक फेमस पॅलेस घूमने गये. हम घूम रहे थे, बातें कर रहे थे. पर इन सब के बीच मेरी और मम्मी की नज़र बार-बार टकरा रही थी. उन आँखों में अब वो सिर्फ़ मा-बेटे वाला रिश्ता नही था.
कुछ तो था जो अब हमारे रिश्ते को ख़तम करके कुछ और ही राह पर ले जेया रहा था. एक अजीब सा करेंट था हम दोनो के बीच, जो चुपके से बढ़ता जेया रहा था.
शाम को हम अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर उन्हे छ्चोढने गये. इस टाइम मम्मी मेरे साथ वाली सीट पर बैठी थी. पुर रास्ते वो शांत थी, पर उनकी प्रेज़ेन्स मेरे पास थी.
जब मैने कार पार्किंग में सेट की, मम्मी ने उतरने से पहले मुझे ज़ोर से हग किया. उनकी साँसों की गर्मी मुझे महसूस हुई. फिर उन्होने मेरे गाल पर एक हल्की सी किस की.
उस पल, मुझे लगा जैसे पूरी दुनिया रुक गयी हो. मम्मी का जिस्म मेरे करीब था. उनकी खुश्बू मुझे मदहोश कर रही थी. उनका गाल पर किस करना, इतना सॉफ्ट और अनएक्सपेक्टेड था, की मेरे अंदर एक झुरजुरी सी दौड़ गयी. मुझे अजीब सा लगा, जैसे करेंट लगा हो. मैं बिल्कुल फ्रोज़न हो गया था, कुछ बोल नही पा रहा था, बस उनकी इस हरकत को प्रोसेस कर रहा था.
मम्मी के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी, आँखों में मेरे लिए प्यार था. उन्होने मुझे एक पल देखा, जैसे उनका मुझे छ्चोढ़ कर जाने का मॅन ना हो. फिर बिना कुछ बोले कार से उतार गयीं. उनके जाने के बाद भी उनकी किस का एहसास मेरे गाल पर बना रहा.