अंतर्वसना कहानी का अगला भाग-
एक दिन सनडे था, मैं घर पर ही आराम कर रहा था, फोन में कुछ देख रहा था. तभी मम्मी मेरे कमरे में आई. मैं उनको देख कर हिल गया. उन्होने एक लाइट ब्लू मलमल कॉटन सारी पहनी थी. सारी उनके रसीले जिस्म पर बेहद खूबसूरती से फिट हो रही थी, और उनका ब्लाउस उनके भरे हुए बूब्स को पूरी तरह से उभार रहा था. पल्लू तोड़ा सरका हुआ था, जिससे कमर का हल्का सा हिस्सा और गोल गांद का उभार सॉफ दिख रहा था.
मम्मी (हल्की मुस्कान के साथ): आराव, मार्केट में बहुत सारे काम है. चल मेरे साथ.
मैं (बेड पर पलट-ते हुए): मम्मी, सिर्फ़ सनडे आराम करने को मिलता है. और आप मुझे ठीक से सोने भी नही दे रही.
मम्मी (मेरे बेड के करीब आकर): क्या हुआ मेरे बेटे को? इतना तक जाता है क्या?
उन्होने धीरे से अपना हाथ मेरे बालों में फेरा, जिससे मेरे लंड में एक करेंट सा दौड़ गया. मैं पलट कर उनकी तरफ देखा. वो तोड़ा झुकी हुई तीन, उनकी क्लीवेज मेरे सामने थी, और उनकी आँखों में एक शरारती चमक थी.
मम्मी (धीमी, मीठी आवाज़ में): चल ना बेटा, तू मेरा इतना काम नही करेगा? ऐसे तो अपनी मम्मी के बारे में बहुत सोचता है.
उन्होने अपना हाथ मेरे गाल पर रखा और सहलाया. मैं जानता था वो मुझे टीज़ कर रही थी. मेरा खड़ा लंड शॉर्ट्स के अंदर और ज़्यादा तंन गया था.
मैं (नज़र हटाते हुए): ठीक है मम्मी, चलते है. पर जल्दी वापस आएँगे.
मम्मी (नॉटी स्माइल के साथ): जैसा मेरा बेटा कहे.
उन्होने होंठ गीले किए और मेरे होंठ पर एक हल्का किस किया. मैने आँखें बड़ी करके उनको देखा, उन्होने नॉटी स्माइल दिया और मेरा हाथ पकड़ कर खड़ा किया. उनकी नज़र मेरे तनने हुए लंड पर चली गयी जो शॉर्ट्स के उपर तंबू बना रहा था.
मम्मी ने उसको देख कर नॉटी स्माइल दी और कहा: मैं तेरा बाहर इंतेज़ार कर रही हू.
वो कमरे से बाहर चल पड़ी, उनकी हिलती गांद मेरे सामने थी. मैं उनको जाते हुए देखता रहा, और मेरे अंदर की हवस और भी बढ़ गयी.
मैने जीभ होंठो पर घुमाई और मम्मी के होंठो का रस्स मुझे मदहोश कर गया. मेरे से कंट्रोल नही हुआ, मैं सीधा बातरूम में गया और मूठ मार लिया. ये मेरा पहली बार था की मैने मम्मी को इमॅजिन करके मूठ मारा था. मैने जल्दी से बातरूम सॉफ किया और कपड़े बदल कर बाहर आया.
मम्मी ने मुझे पूछा: कहाँ इतनी देर लगा दी?
मैने कुछ बोला नही, फिर उन्होने मेरे पंत के उपर देखा और नॉटी स्माइल देकर बोली: हा, कुछ चीज़ें शांत करने में समय लग जाता.
मैं और मम्मी मेरी बिके पर घर से निकल गये.
मैं (बिके चलते हुए): मम्मी, कहाँ जाना है?
मम्मी (धीमी आवाज़ में): अनिरुढ़ जी कहाँ रहते है?
मैं (हैरानी से): क्यूँ?
मम्मी (मेरा शोल्डर हल्का सा थपथपति है): तू बता ना बेटा, कहाँ रहते है?
मैं (मुस्कुराते हुए): यहाँ पास में ही उनका फ्लॅट है.
मम्मी (मेरे कान के करीब झुक कर फुसफुसाया): मार्केट तो बस बहाना था, असल में मुझे उन्होने अपने फ्लॅट पर मिलने बुलाया है.
मैं हस्स दिया. मम्मी भी मेरे साथ हासणे लगी. बेचारी मम्मी को नही पता था की ये मेरा ही प्लान था. उन्हे लग रहा था की अनिरुढ़ भाई ने खुद ये प्लान बनाया था, और वो उसकी वजह से शर्मा रही थी.
मैं मम्मी को अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर लेकर गया. जैसे ही अनिरुढ़ भाई ने दरवाज़ा खोला, उनकी आँखें मम्मी पर जाम सी गयी. चेहरे पर हैरानी, खुशी और गहरी हवस सॉफ दिख रही थी. अनिरुढ़ भाई की आँखों में वो प्यास थी जो कह रही थी की वो मम्मी के करीब आना चाहते थे.
मम्मी को देख कर उनके होंठो पर एक मदहोश मुस्कान आ गयी, और उन्होने हमारा वेलकम किया. मम्मी भी अनिरुढ़ भाई को देख कर हल्का सा शर्मा गयी, गाल गुलाबी हो गये, पर उनकी आँखों में भी अनिरुढ़ भाई के लिए एक च्छूपी हुई बेचैनी सॉफ दिख रही थी.
अनिरुढ़ भाई हमारे लिए जूस लेकर आए. मम्मी उनके फ्लॅट को बड़े ध्यान से देख रही थी.
मम्मी (फ्लॅट की तारीफ करते हुए): आपने अपने फ्लॅट को बहुत अची तरह मेनटेन किया है, अनिरुढ़ जी.
अनिरुढ़ (हल्की मुस्कान के साथ): अब जिसकी बीवी साथ नही होती, उसको सब मेनटेन करने की आदत डालनी पड़ती है, यामिनी जी.
मम्मी (अनिरुढ़ भाई की आँखों में देखते हुए): आपको भाभी की याद नही आती?
अनिरुढ़ (मम्मी की आँखों से नज़रें ना हटते हुए): याद तो आती है, यामिनी जी. पर यहाँ कुछ ऐसे दोस्त बन गये है की अब कम याद आती है.
मम्मी शर्मा गयी, गाल और भी गुलाबी हो गये. नज़रें झुका ली, पर होंठो पर एक च्छूपी हुई मुस्कान थी.
ऐसे ही कुछ आम बातें हुई, पर हर शब्द के पीछे एक च्छूपी हुई गर्मी और उत्तेजना थी. मम्मी ने मेरी तरफ देखा, उनकी आँखों में एक शरारती चमक थी और उन्होने अपनी आइब्रो हल्की सी उपर की, जैसे वो मुझे कोई सीक्रेट मेसेज दे रही हो. उन्होने ज़ुबान से होंठ गीले किए और मेरी तरफ देख कर हल्का सा मुस्कुराइ, जैसे वो मुझे अपने च्छूपे हुए इरादों का एहसास दिला रही हो.
मैं समझ गया की मम्मी मुझे बाहर जाने को कह रही है. मेरी साँसें तेज़ हो गयी. क्यूंकी मैं मम्मी की अनिरुढ़ भाई से चुदाई इमॅजिन कर रहा था, और शायद अब मम्मी सच में उनका बिस्तर गरम करने वाली थी. अपनी पर्सनल डिज़ाइर के लिए मैने दोनो को प्राइवेट स्पेस देने का सोच लिया.
मैं (मम्मी की तरफ देखते हुए): मम्मी, आप यहाँ रूको, मुझे एक काम है.
मम्मी (हल्का सा हिचकिचाते हुए): बेटा, कितना टाइम लगेगा?
मैं (अनिरुढ़ भाई की तरफ देखते हुए, एक च्छूपी हुई मुस्कान के साथ): कुछ दो घंटे लग जाएँगे.
अनिरुढ़ भाई ने भी मेरी तरफ देख कर एक नॉटी स्माइल दी. उसके बाद मैं वहाँ से निकल गया, पर मेरा द्यान अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर ही था. मैं जानता था अंदर क्या होने वाला था, और ये सोच कर ही मेरे बॉडी में अजीब सी बेचैनी हो रही थी.
कुछ डेढ़ घंटे के बाद अनिरुढ़ भाई का मुझे मेसेज आया, “तू फ्लॅट पर आ सकता है?” मुझे ये मेसेज देख कर उन पर तोड़ा गुस्सा आया. गुस्सा इस बात का नही था की उन्होने मम्मी को छोड़ा, बल्कि इस बात का था की मम्मी मुझे भी पसंद थी. और अनिरुढ़ भाई को ये सब मेरी मदद से मिला था. एक अजीब सी जेलासी और हवस का मिश्रण मेरे अंदर उबाल रहा था.
मैं जब फ्लॅट पर गया तो दरवाज़ा खुला ही था. अंदर मम्मी सोफा पर बैठी थी, और अपने उलझे हुए बालों को ठीक कर रही थी. उन्होने मेरी तरफ देखा और वो शर्मा गयी, पर उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी.
उनकी आँखों में गहरी संतुष्टि थी, और उनके होंठो पर एक मदहोश मुस्कान टायर रही थी. लग रहा था जैसे उनका पूरा जिस्म खिल उठा हो, और उनका चेहरा एक खूबसूरत लाली लिए हुए था. ये वो खुशी थी जो चुदाई के बाद एक औरत के चेहरे पर आती है.
उनकी सारी थोड़ी इधर-उधर हो गयी थी, और ब्लाउस में भी हल्की सी सिलवट थी, जो सब कुछ बयान कर रही थी की उन्होने जल्दबाज़ी में सारी पहनी थी. मैं फ्लॅट पर गया तब मुझे ज़ोरों का पेशाब लगा था, तो मैने उनके वॉशरूम की तरफ रुख़ किया.
दरवाज़ा लॉक्ड था और अंदर से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी. मेरी नज़र अनिरुढ़ भाई के बेडरूम की तरफ गयी. बेडरूम का दरवाज़ा भी आधा खुला था और अंदर बिस्तर की चादर बिखर गयी थी. उस बिखरे हुए बिस्तर को देख कर मेरे अंदर आग सी लग गयी. मुझे सॉफ दिख रहा था की मम्मी ने उस बिस्तर पर अनिरुढ़ भाई के लिए अपनी छूट खोली थी.
इतने में अनिरुढ़ भाई वॉशरूम से बाहर आए. सिर्फ़ एक टवल लपेटे हुए थे, उनके बाल गीले थे. मुझे देख कर उन्होने एक नॉटी स्माइल दिया. उनके चेहरे पर भी वही खुशी और संतुष्टि सॉफ दिख रही थी जो अभी मम्मी के चेहरे पर थी. अनिरुढ़ भाई की वो नॉटी स्माइल देख कर मेरे अंदर का गुस्सा और बढ़ गया.
मैं वॉशरूम उसे करने गया. अंदर जाते ही, पहले मैं मूतने लगा, और मूट-ते हुए मॅन ही मॅन अनिरुढ़ भाई को गालियाँ देने लगा. ‘सेयेल, तू तो मौज कर गया मेरी मम्मी के साथ. मेरी चीज़ पर हक़ जाता रहा है? देखता हू कितने दिन तक ये खुशी रहती है तेरी.’ मेरा दिमाग़ मम्मी और अनिरुढ़ भाई के बीच हुए हर आक्ट को इमॅजिन करने लगा, जिससे मेरे अंदर का गुस्सा और भी बढ़ गया.
वॉशरूम उसे करके बाहर निकला, तो मेरी नज़र बेडरूम के पास रखे डस्टबिन पर पड़ी. उसमे उसेड कॉंडम और उसका खाली पॅकेट दिखा. ये सब देख कर मेरे बॉडी में एक तेज़ झटका लगा. मेरे अंदर एक अजीब सी ठंडी हवस दौड़ गयी, और उसके साथ ही मम्मी को दूसरे मर्द के साथ देखने का क्रोध भी. एक तरफ मम्मी की चुदाई की तस्वीर मेरे दिमाग़ में घूम रही थी, और दूसरी तरफ ये एहसास की अनिरुढ़ भाई ने जो किया वो सब मेरी मदद से ही हुआ था.
मैं जब लिविंग रूम में गया, तब मम्मी मुझे देख कर शर्मा गयी और झट से उठ कर बेडरूम में चली गयी. अनिरुढ़ भाई किचन में छाई बना रहे थे, उनके चेहरे पर अभी भी वही मम्मी को छोड़ने की खुशी सॉफ झलक रही थी.
थोड़े टाइम बाद मम्मी बेडरूम से निकली. मैने देखा उन्होने अपनी सारी ठीक कर ली थी, जैसे वो अपनी चुदाई होने का हर एक निशान मिटा देना चाहती हो. उसके बाद हम तीनो छाई पी रहे थे. लेकिन उस लिविंग रूम में एक अजीब सी खामोशी छ्चाई हुई थी. कोई कुछ नही बोल रहा था, पर मेरे दिमाग़ में एक अनोखा टेन्षन टायर रहा था.
अनिरुढ़ भाई मम्मी को घूर रहे थे. उनकी आँखों में अब भी हवस सॉफ दिख रही थी, और मम्मी हम दोनो से नज़रें चुरा कर शर्मा रही थी. उनके गाल अब भी हल्के गुलाबी थे. अनिरुढ़ भाई मुझे देख कर मुस्कुरा रहे थे. उनकी स्माइल देख कर इतना गुस्सा आ रहा था की पूछो मत.
उनकी मुस्कान में एक भाव था, जैसे वो कह रहे हो, आराव, तेरी मम्मी को निचोढ़ कर उसका मज़ा लिया. मैं चुप-छाप बैठा रहा, उनकी मुस्कान और मम्मी की शरम को अपने अंदर समेटे हुए. जब छाई ख़तम हुई, तो मैने मम्मी से पूछा, “चले घर?”
उन्होने सिर्फ़ सर हिलाया. उनकी नज़रें अभी भी नीचे थी, जैसे वो इस पल की शरम को जल्दी से जल्दी पीछे छ्चोढ़ देना चाहती हो.
अनिरुढ़ भाई ने मुझसे कहा: यामिनी जी को लेकर आते रहना.
मम्मी ने उनको एक नॉटी स्माइल दी, जो शरम और खुशी का मिश्रण थी. मम्मी की वो स्माइल बहुत ही क़ातिल थी, जैसे वो अनिरुढ़ भाई की चुदाई से खुश हो गयी हो, और बार-बार यहाँ छुड़वाने आने का इन्विटेशन मिला हो. हम दोनो उनके फ्लॅट से बाहर निकल गये. फिर हम बिके लेकर बाहर निकले, तब अनिरुढ़ भाई बाल्कनी से हम दोनो को देख रहे थे, उनके चेहरे पर अब भी वही मुस्कान टायर रही थी.
हम बिके पर घर की तरफ बढ़ रहे थे. मेरा गुस्सा उबाल रहा था.
मैं (बिके चलते हुए): मम्मी, मार्केट में कुछ काम था, या बस यही काम करने आई थी?
मम्मी (धीरे से, मेरी पीठ पर अपना हाथ रखती है): आराव बेटा, मैं जानती हू तुम मेरे पर बहुत गुस्सा हो.
मैं: मम्मी, मैं कहाँ गुस्सा हू?
मम्मी (मेरी कमर पर रखे हाथ को हल्का सा सहलाती है): वो तेरी आँखों में दिख रहा है. और अब तो तेरा चेहरा भी बता रहा है. मैं समझती हू, तुम मुझे खुश देखना चाहते हो, पर तेरे ख़ास दोस्त से हुई हू ना, इसलिए थोड़ी जलन है ना? तुम तो हमेशा मेरी खुशी चाहते हो ना?
मम्मी (मेरे कान के पास झुक कर): तुम मेरे आचे बेटे हो. तुम मुझे हमेशा सपोर्ट करना.
मैं: मम्मी, आप तो जानती हो मैं आपकी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हू. मैं तो बस… (एक पल रुका), मैं तो बस आपको खुश देखना चाहता हू.
मम्मी: मुझे पता है मेरे बेटे. और मैं तेरे इस सपोर्ट के लिए बहुत खुश हू.
मैने उनकी तरफ साइड मिरर से देखा. उनकी आँखों में अब भी वो शरारत थी. हम दोनो ऐसे बातें करते हुए घर चले गये.
जब हम घर पहुँचे, तब तक शाम हो चुकी थी, और छाई का समय हो गया था. मम्मी सब के लिए छाई बनाने किचन में चली गयी. लेकिन आज मम्मी के चेहरे पर एक अलग ही रौनक थी. वो खुशी जो बाहर से छुड़वा कर आने के बाद मिलती है, वो उनके हर अंग से झलक रही थी.
उनका चर्म भी बढ़ गया था. उनकी चाल में एक नया इठलाना आ गया था, और उनकी आँखों की चमक में एक गहरा राज़ था जो उनके नशीले होंठो की मुस्कान में च्छूपा था. सब घर वाले शायद मम्मी की इस बदलती हुई चमक को नॉर्मल खुशी समझ रहे थे, पर मैं जानता था इसका राज़.
और बस, उस दिन के बाद से ये महीने में 2-3 बार फिक्स हो गया था. हर वीकेंड पर कोई ना कोई बहाना बना कर, मैं मम्मी को अनिरुढ़ भाई के फ्लॅट पर लेकर जाता था. मम्मी भी बड़े उत्साह से तैयार होती थी. उनके चेहरे पर वही च्छूपी हुई बेचैनी और उत्तेजना सॉफ दिखती थी.
हर मुलाक़ात के बाद, मम्मी का जिस्म और खिल गया था, उनका रंग और सॉफ हो गया था, और उनके अंदर एक अजीब सी संतुष्टि आ गयी थी जो उनके पुर व्यक्तित्वा में दिखती थी. मेरे लिए ये सब देखना एक अजीब सा नशा बन गया था. एक तरफ उनको किसी और के साथ देखने की जलन, और दूसरी तरफ उनकी खुशी देख कर मेरी अपनी हवस का बढ़ना.