दोस्तों, मैं मनीषा एक बार फिर से एक न्यू स्टोरी के साथ आई हू. आपको मेरी कज़िन सिस्टर के साथ हज़्बेंड स्वापिंग वाली स्टोरी पसंद आ रही है. उससे पहले वाली स्टोरी भी आप ज़रूर पढ़ लेना.
अब सीधे स्टोरी पे आते है. मेरी आगे अब 29 है, और मेरा फिगर 34-30-34 है. मेरी फॅमिली में मेरे हज़्बेंड दीपक जिनकी आगे 30 है, मेरी सास जिनकी आगे 55 है, और मेरा बेटा आराव है जिसकी आगे 5 यियर्ज़ है. मैं जॉब करती हू, तो आराव को मेरी सास ही संभालती है. अब ज़्यादा टाइम बर्बाद ना करते हुए सीधे स्टोरी पे आते है.
2025 का साल शुरू होते ही मेरे हज़्बेंड का जॉब में प्रमोशन हो गया. लेकिन प्रमोशन के चलते उनका ट्रान्स्फर देल्ही हो गया था. फिर उन्होने ये बात हुमको बताई. देखो मैं भी जॉब करती हू और मेरे हज़्बेंड भी अची ख़ासी जॉब में थे, और अब तो प्रमोशन भी हो गया था.
हमने सोचा की क्यूँ ना देल्ही में एक 3भक फ्लॅट लेके वहीं शिफ्ट हो जाए. पर इसमे एक दिक्कत थी, की मुझे अपनी जॉब छ्चोढनी पड़ती. पर ये इतनी भी बड़ी प्राब्लम नही थी, क्यूंकी देल्ही जैसी बड़ी जगह में जॉब मिलना तोड़ा मुश्किल था पर नामुमकिन नही था.
एक बात ये भी थी की मेरा भाई नील आंड उसकी वाइफ रिया भी देल्ही में रहते थे. नील की आगे 27 साल और रिया की 24 है. मैने नील को कॉल किया और ये सब बात बताई.
नील: अर्रे वाह दीदी, ये तो बड़ी अची बात है. कंग्रॅजुलेशन्स आपको और जीजा जी को.
मैं: थॅंक योउ. पर अभी ये सब बात छ्चोढ़ और मुझे बता की 3भक फ्लॅट मिल जाएगा देल्ही में?
नील: आप डीटेल्स सेंड करो, मैं आपको बताता हू.
मैं: ठीक है मैं और तेरे जीजा जी मिल के ये सब फाइनल करते है, और फिर मैं डीटेल सेंड कर दूँगी.
नील: दीदी वैसे अब आप यहाँ आ जाओगे तो हम वो सब भी कर पाएँगे जो 6 साल पहले स्टार्ट किया था.
मैं (शरमाते हुए): हॅट बदमाश! जब देखो तब बदमाशी च्छाई रहती है. चल मैं कॉल रखती हू.
नील: डीटेल्स सेंड करना मत भूलना.
मैं: ठीक है.
फिर कॉल कट करने के बाद हम दोनो ने मिल के बजेट, लोकेशन वगेरा-वगेरा डिसाइड किया और ये सब इन्फर्मेशन नील को सेंड की. 2 दिन बाद नील का कॉल आया और बोला-
नील: दीदी आपके इन्फर्मेशन के हिसाब से एक 3 भक फ्लॅट मिल चुका है.
मैं: कहाँ मिला फ्लॅट?
नील: पहले फ्लॅट की पिक्चर देखो, मैने Wहत्साप्प की है आपको.
मैने Wहत्साप्प खोल के देखा तो फ्लॅट दिखने में अछा था. मैने ये फोटो अपने हज़्बेंड को भी सेंड की उनको भी ये फ्लॅट पसंद आया. फिर मैने ये पिक्स अपने सास-ससुर जी को दिखाई तो उनको भी ये फ्लॅट अछा लगा.
मैं: हा, फ्लॅट तो सही है. लेकिन लोकेशन जैसी बताई थी वैसी ही है ना?
नील: हा-हा, जैसा आपने बोला था वैसी लोकेशन है. और मेरे ससुर जी का भी फ्लॅट आपके फ्लॅट के उपर है. अची सोसाइटी है. आपको सेट्लिंग में भी कोई दिक्कत नही होगी.
मैं: ठीक है.
फिर हमने ये डिसाइड किया की वो फ्लॅट अभी पर्चेस कर लेते है. उसके बाद मैं अपना 15 डेज़ का नोटीस पीरियड सर्व करके जन्वरी के लास्ट वीक में मैं और मेरे हज़्बेंड मेजर शिफ्टिंग कर देंगे. फिर स्टार्टिंग ऑफ फेब्रुवरी में सास-ससुर जी, और बेटे को भी यहीं ले आएँगे.
मेरे नोटीस पीरियड एंड होने के बाद हम दोनो देल्ही चले गये. सोसाइटी में पहुँचे तो नील और रिया वहाँ पहले ही आए हुए थे. हमने देखा तो उनके साथ बंटी अंकल, उनकी वाइफ सुमन आंटी, उनके पड़ोसी ब्रिज मोहन अंकल, उनकी वाइफ मधु और उनके बच्चे प्रिया आंड रोहन (मैं कॅरक्टर ऑफ स्टोरी “ये मेरी फॅमिली” बाइ योरो) भी हमारी शिफ्टिंग में हेल्प करने आए थे. फिर नील ने हुमको सब से इंट्रोड्यूस करवाया.
सुमन आंटी: देखो तुम लोग ये समान रूम तक पहुँचाओ. तब तक मैं और मधु मिल के सब के लिए खाने की व्यवस्था करते है.
मधु आंटी: हा और कुछ भी काम हो तो ये रोहन से बोल देना, शरमाना मत. ये आपकी सब हेल्प कर देगा.
ऐसे सभी की 2-4 मिनिट्स तक बात-चीत होती है, और हम सब समान रूम में शिफ्ट करने लगते है. लगभग दोपहर 2 बजे तक सब समान रूम में आ जाता है, और अर्जेंट समान अनपॅक कर देते है. तभी सुमन आंटी लंच के लिए बुला लेती है. सब लोग लंच करने जाते है. तभी नील मेरे हज़्बेंड से बोलता है की “जीजू आप लोग जाओ, हम ये रूम में एक-दो काम करके 10-15 मिनिट में आते है.”
दीपक: ठीक है, जल्दी आना. या अगर ज़्यादा काम है तो खाने के बाद कर सकते है.
नील: नही जीजू, तोड़ा ही काम है. आप जाओ, हम आ जाएँगे.
जब ये बात चल रही थी तब मैं अपना सारा समान अलमारी में सेट कर रही थी. मैं अपना सारा समान सेट करके पीछे मूडी तो देखा रूम में सिर्फ़ नील था.
मैं: नील, तेरे जीजा जी कहाँ है?
नील: सब लोग लंच करने गये.
मैं: अछा ठीक है, चल हम भी चलते है.
नील: कहाँ जेया रहे हो? बहुत समय से आपके साथ नही किया है, और अभी यहाँ कोई है भी नही.
इतना बोलते ही वो मेरी सारी खींच के उतार देता है.
मैं: नील, पागल हो गया है क्या? कोई आ जाएगा तो?
नील: कोई नही आएगा, और मैने जीजू को बोला है हम 15 मिनिट बाद आएँगे. और भाई-बेहन ये सब कर रहे होंगे कौन ही सोचेगा?
इतना बोलते ही वो मुझे ज़ोरो से किस करने लगता है. किस करते-करते वो ब्लाउस के उपर से मेरे बूब्स दबा रहा था. ये सब के बीच हम दोनो गरम हो चुके थे. अब फोरप्ले का टाइम तो था नही. उसका लंड भी खड़ा था और मेरी छूट भी गीली थी. वो अपनी पंत और शॉर्ट्स नीचे करता है, और मेरी पेटिकोट उपर करके पनटी निकाल देता है.
फिर अपने 6 इंच के लंड को मेरी छूट में डाल देता है. हमारी पोज़िशन भी अब ग़मे ऑफ थ्रोन्स के फर्स्ट एपिसोड वाले सीन जैसी थी.
मैं: आआआः छोड़ भेंचोड़, और ज़ोर से छोड़…. आई उफफफ्फ़ उम्म्म.
नील: आ, तुम्हारी इस छूट के लिए तो बहुत टाइम से वेट कर रहा था.
नील मुझे ज़ोर-ज़ोर से छोड़ रहा था. हम अपनी आवाज़ धीमी करने की कोशिश कर रहे थे, ताकि बाहर कोई आए तो ये सब सुन ना पाए. अपने संभोग की क्रिया में हम मगन थे, तभी रूम का डोर ओपन होता है. हम बहुत दर्र जाते है की कौन आ गया.
डोर ओपन होते ही हम देखते है वो रोहन था. वो हुमको देखता है और हम उसको. नील अभी भी मुझे छोड़ने में था. मेरी हार्टबीट बहुत तेज़ हो गयी थी. रोहन मुस्कुराता है और बोलता है-
रोहन: वेलकम तो थे सोसाइटी भाभी जी.
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तो बे कंटिन्यूड…