मेरा नाम अंकित है. मैं अभी 24 साल का हू, और कॉलेज में पढ़ता हू. मेरे साथ ही मेरा दोस्त मनीष भी पड़ता है. वो भी मेरी ही उमर का है.
मनीष की एक बहुत ही खूबसूरत छ्होटी बेहन है, जिसका नाम “रूचि” है. उसकी उमर अभी 22 साल है. वो हमारे साथ ही कॉलेज के फर्स्ट एअर में ही पढ़ती है.
रूचि का रंग गोरा और उसकी फिगर बहुत ही ज़्यादा ज़बरदस्त है. उसके चेहरे की खूबसूरती देख कॉलेज के सभी लड़के लाइन मारते है. परंतु रूचि बहुत ही ज़्यादा खुश मिज़ाज लड़की है. वो किसी को भाव नही देती, और अपने में ही मस्त रहती है.
उन दीवानो में से ही एक मैं भी रूचि का दीवाना था, जिसे पाने के लिए ना जाने कितनी बार प्रयास किया था, पर मेरी कभी हिम्मत नही हो पाई उसे डाइरेक्ट प्रपोज़ करने की. और वैसे भी वो मेरे दोस्त की बेहन थी, तो उस पर इस तरह की नज़र रखना मुझे ठीक नही लग रहा था.
वैसे रूचि से मेरी बातें होती थी मैं जब भी मनीष के घर जाता था. तो रूचि मुझसे भी वैसे ही बातें करती जैसे वो अपने भैया से बात करती थी. मैं उससे खुल कर बातें करता था, और हँसी मज़ाक भी करता था.
एक दिन की बात है, जब मैं उसके घर गया था, और हम वैसे ही हँसी मज़ाक करके बातें कर रहे थे. तभी मेरा हाथ रूचि के बूब्स से टच हो गया. उस वक़्त मनीष रूम से बाहर पानी लाने के लिए गया हुआ था. मुझे लगा की रूचि गुस्सा होगी, पर वो हंसते हुए मुझे बोली-
रूचि: बदमाश!
उसके नॉटी अंदाज़ से मुझे लग गया की ये अब कुछ नही बोलने वाली. तब मैने उसका हाथ पकड़ कर अपनी और खींच लिया. फिर वो हंसते हुए बोली-
रूचि: अर्रे क्या कर रहे हो? ?आईं भैया को बोल दूँगी. छ्चोढो मुझे.
वो नॉटी अंदाज़ में मुझसे बोल रही थी, जिससे मुझे लग गया की ये किसी को कुछ नही बोलने वाली थी. इसलिए मैने भी उसके कान में धीरे से कहा-
मैं: बोल दो फिर.
रूचि समझ गयी की अब मैं नही छ्चोढने वाला था. तब वो कसमसाते हुए धीरे से बोली-
रूचि: प्लीज़ छ्चोढ़ दो ना. कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा? भैया आते ही होंगे.
मुझे भी लगा की सही कह रही थी, कोई देख सकता था. इसलिए मैने उसे छ्चोढ़ दिया. वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैं भी मॅन ही मॅन बहुत खुश था. आज मुझे हुस्न की पारी का दीदार हो गया था.
फिर हम दोनो ने अपना नंबर एक्सचेंज कर लिया, और उसके बाद रात को मैं उससे बातें करने लगा. हम दोनो बात करते-करते काफ़ी ओपन हो चुके थे. मैं उसे बूब्स दिखाने को कहता. वो थोड़ी देर तो ना-नुकुर करती, पर फिर मान जाती और अपने उपर के कपड़े खोल कर वीडियो कॉल पर मुझे अपनी चिकने और गोरे बूब्स दिखती. मेरा तो मॅन करता की जेया कर अभी दबा डू.
हम दोनो के बीच इसी तरह प्यार बढ़ता गया, और मेरा दोस्त इस चीज़ से अभी अंजान था. जब भी मैं उसके घर जाता, तो मैं रूचि के पास जब अकेला होता, तब उसके बूब्स और गांद को दबा देता. कभी मौका नही मिला की उसके बूब्स को निकाल कर चूस लू, क्यूंकी उसमे समय लगता और इतना टाइम हम दोनो को अकेले मिलता नही था.
हम दोनो की प्यास बढ़ती गयी, और हम दोनो वीडियो कॉल पर नंगे हो कर बातें करना शुरू कर दिए. मैं उसकी जब गोरी और चिकनी छूट को देखता, तो मेरा लंड बैठने का नाम ही नही लेता. उस रात को मैं दो-टीन बार मूठ मार कर सो जाता. फिर भी मेरा लंड शांत नही होता था.
मैने काई बार सोचा की रूचि को किसी होटेल में ले जेया कर छोड़ू. पर दिन में मेरे साथ उसका भाई मनीष होता था. इसलिए मैं उसके साथ कहीं जेया भी नही सकता था. लेकिन हम लोगों को ज़्यादा समय नही लगा, और हमारा कॉलेज से एक ट्रिप जेया रहा था घूमने के लिए. तो मैं मनीष को और उसकी बेहन सभी को ले जाने के लिए माना लिया.
ट्रिप निकालने का समय हो गया. सभी लोग आ गये थे. तभी थोड़ी देर में मनीष अपनी बेहन के साथ कॉलेज में एंट्री किया. उसकी बेहन आज कमाल की लग रही थी. जब वो पास आई, तो मेरी तो नज़र ही नही हॅट रही थी उससे. वो एक फ्रॉक पहनी हुई थी, और बाल खुले थे. होंठो पर लाल लिपस्टिक, और माथे पर एक छ्होटी सी बिंदी सट्टी हुई थी. दिखने में बहुत ही मस्त लग रही थी.
वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी. मैं भी उसे देख कर आँख मार दिया. पर वो मेरे सामने इसके अलावा और कुछ नही की. क्यूंकी वहीं उसका भाई खड़ा था. फिर हम सभी निकल गये ट्रिप पर.
मैं और मनीष एक सीट पर बैठे हुए थे, और रूचि और उसकी दोस्त मानसी दूसरी सीट पर बैठे हुए थे. मेरा दोस्त मनीष मानसी को पसंद करता था. पर वो मानसी से बोलने में डरता था. मानसी भी इसे पसंद करती थी, पर दोनो में आँखों से तो बात हो जाती, पर सामने से किसी में हिम्मत नही थी की बात कर सके.
मैने काई बार कहा की अपनी बेहन से बोल दे, वो तेरी सेट्टिंग करा देगी. पर वो अपनी बेहन से नही बोलता था, क्यूंकी उसे लगता था की बेहन से इन सब के बारे में बात करना ठीक नही है.
फिर हम सब ट्रिप पर पहुँच गये, और सभी बच्चे बाहर इकट्ठा हुए. बस स्टॅंड में लग गयी, और वहाँ गाते पर दरवाज़ा लगा दिया गया. ट्रिप सुबह से होने वाली थी. पर अभी शाम हो गयी थी, तो सिर ने बोला था की आप सभी लोग यहाँ पर घूम फिर सकते है, जब तक खाना तैयार नही हो जाता.
तो सभी घूमने लगे. मैं किसी तरह बहाना ढूँढ रहा था, की रूचि को बाहों में भर लू. पर मेरे साथ मनीष था, तो मैं कुछ नही कर पा रहा था.
फिर मैं मनीष से च्चिपते-च्चिपते रूचि के पास पहुँचा, और उसे एक पेड़ के पीछे ले जेया कर, बाहों में भर के, उसे किस करने लगा. तब रूचि मुझे रोकने लगी और बोली-
रूचि: ये सब यहाँ ठीक नही है. किसी ने देख लिया तो बहुत नाश हो जाएगा. मेरे भैया भी यहीं पर है.
उसकी बातें बिल्कुल ठीक थी. पर मुझसे सबर नही हो रहा था. तब मैने कहा-
मैं: तुम बस मैं जहाँ बूलौऊ आ जाना. उसके बाद हम दोनो मिल कर आज अपने प्यार को चरम सीमा तक पहुचाएँगे (और मैने उसके होंठो पर एक किस कर दिया).
वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, और मैं वहाँ से निकल आया. मैं मनीष के पास आया और उससे बोला-
मैं: तुझे मानसी का नंबर चाहिए?
मनीष बिना देर किए हुए मेरी तरफ देखा और बोला-
मनीष: हा पर कैसे?
मैं: वो सब तू मुझ पर छ्चोढ़ दे. बस तुम्हे एक काम करना होगा.
मनीष: कैसा काम? तुम जो बोलॉगे मैं वो करने को तैयार हू. बस मानसी का नंबर दिला दे.
मैं: देखो मुझसे यहाँ पर एक लड़की सेट हुई है, और हम दोनो को चुदाई करनी है. मैं सोच रहा हू की उसे बस के पीछे ले जेया कर छोड़ू. बस तुम दरवाज़े के पास खड़े रहना, ताकि कोई अंदर ना आ जाए.
मनीष: हा ठीक है, पर तुमने यहाँ पर कौन सी लड़की पता ली?
मैं: वो सब तुम्हे जानना ज़रूरी नही. तुम बस अपने मानसी पर फोकस करो. तुम दरवाज़े के पास खड़े रहना. मैं उसे अंदर ले जौंगा, और फिर बस में ले जेया कर उसकी चुदाई करूँगा. तुम दरवाज़े से किसी को अंदर मत आने देना. किसी भी बहाने से उन्हे दरवाज़े से ही बाहर भगा देना.
अगर कोई ड्राइवर या फिर सिर आने की कोशिश करे, तो बस तुम हमे कॉल कर देना. हम बस से निकल कर दूसरी तरफ से भाग जाएँगे.
मनीष: ठीक है.
मैं: ओक फिर मैं अपनी माल को अंदर ले जेया रहा हू. तुम्हे जब कॉल करूँगा, दरवाज़े पर आ जाना.
फिर मैं रूचि को लेकर दरवाज़े से अंदर गया, और उसके बाद सभी बस खाली थी, तो मैं एक बस में भीतर चला गया. फिर कॉल किया मनीष को, तब वो दरवाज़े पर आ कर खड़ा हो गया.
मैं जब मनीष को देख कर सुनिश्चित हो गया की वो अपना काम ठीक से कर रहा था, तब मैं रूचि को अपनी बाहों में पकड़ कर सीट पर बैठा, और उसे चूमना शुरू कर दिया. जब रूचि के कोमल होंठ पर मैने अपनी होंठ रखे तो मेरे तंन बदन में आग लग गयी.
मेरे पुर बदन में बिजलिया सी दौड़ गयी. उसके कोमल होंठ बहुत ही नरम और मुलायम थे. मुझे चूसने में बड़ा मज़ा आ रहा था. मैं उसके होंठो से सारी लाली को चूस गया.
10 मिनिट बाद जब मैने उसके होंठो को चूस कर छ्चोढा, तो वो हाँफने लगी. हम दोनो हाँफ रहे थे. उसके बाद मैने उसके फ्रॉक को निकाल दिया, और ब्रा को उपर करके उसके नरम बूब्स को चूसने लगा.
उसके नरम-नरम बूब्स मेरे मूह को लगते ही मेरी पुर बदन में करेंट दौड़ गया. आज तक मैने उसके बूब्स को केवल वीडियो कॉल पर ही देखा था. पर आज मूह में जाते ही मेरे तंन बदन में आग लग गयी. मैं उसके बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा. कभी उसके बूब्स चूस्टा, तो कभी उसके पेट और नाभि को चूमने लगता. बहुत ही मुलायम और नरम नाभि थी.
फिर उसके स्लॅक्स को उतरे और पनटी को सरका कर उसके कोमल छूट को रगड़ने लगा. रूचि आँखें बंद करके मज़ा ले रही थी, और उसका भाई बाहर पहरा दे रहा था. और मैं रूचि की कोमल छूट को फाड़ कर देख रहा था. अंदर से बिल्कुल लाल थी उसकी छूट.
मैने देर ना करते हुए अपने लंड को बाहर निकाला, और उस पर थूक लगाया. फिर रूचि को अपने लंड पर बैठने को बोल दिया. रूचि डरती हुई मेरे लंड पर बैठी, और तोड़ा ही अंदर लेकर उपर-नीचे होने लगी. मैं उसके बूब्स को चूस रहा था, और वो उपर-नीचे हो रही थी.
मुझसे रहा नही गया, और मैने उसे पकड़ कर कस्स के नीचे बिता दिया. मेरा लंड पूरी तरह से उसकी छूट में घुस गया. वो बेचारी तिलमिला उठी. मैं उसे बाहों में पकड़ कर उसके बूब्स को सहलाने लगा.
थोड़ी देर बाद जब रूचि को आराम हुआ, तो उसने खुद ही मेरे लंड पर उपर-नीचे बैठना शुरू कर दिया. उसके बाद हम दोनो ने जाम कर चुदाई की.
बाहर उसका भाई हम दोनो के लिए पहरा दे रहा था, और मैं इधर अंदर उसकी बेहन की छूट मार रहा था. फिर मैने रूचि को सीट पर लिटाया और उसके उपर आ गया. मैं उसकी छूट को छोड़ने लगा, साथ ही उसके होंठो को चूमने लगा.
इसी तरह हम दोनो चुदाई करते हुए झाड़ गये. फिर मैने उसको कुछ देर चूमना शुरू किया. उसके बाद हम दोनो उठे, और अपने कपड़े पहन कर वहाँ से निकालने लगे. तो मैने मनीष को फोन कर दिया की हमारा हो गया है, तू वहाँ से हॅट जेया. फिर वो हॅट गया और मैने जेया कर देखा की वहाँ कोई नही था. फिर रूचि को वहाँ से निकाल दिया.
उसके बाद मनीष के पास गया और उसे रूचि से लेकर मानसी का नंबर दे दिया. मनीष पूच्छने लगा की मुझे मानसी का नंबर कहाँ से मिला, तो मैने उसे बोल दिया की तू अपना काम निकाल, कहाँ से नंबर आया ये मत पूच.
कुछ ही देर बाद मनीष मानसी से बात करना शुरू कर दिया, और वो दोनो आपस में बिज़ी हो गये. फिर मुझे टाइम मिलने लगा और मैं रूचि से जेया कर चिपक गया. उसे मौका पा कर किस करना, और उसकी चुचियों को दबाना शुरू कर देता था.
मैने जब रूचि को बताया की उसका भाई हम दोनो की चुदाई के लिए बाहर पहरेदारी कर रहा था, तो वो खूब हँसी, और फिर बोली-
रूचि: कहीं भैया को पता ना चल जाए.
तब मैने कहा: तुम चिंता मत करो, उसे कभी पता नही चलेगा (और मैं उसके होंठो को चूसने लगा).