हेलो दोस्तों, मेरा नाम रोहित है. मेरी आगे 32 यियर्ज़ है. मैं एंपी में जॉब करता हू. वहाँ मेरे पड़ोस में एक भाभी अपने हज़्बेंड के साथ रहती है, जिनकी अभी न्यू शादी हुई थी.
मैं भाभी के बारे में कुछ डीटेल शेर करता हू. भाभी जिनका नाम सुमन (बदला हुआ) था, वो करीब 26 यियर्ज़ की थी. वो एक मस्त माल थी, जिसको देखने के बाद किसी की भी नियत बदल जाए. उसका फिगर 32-30-32 होगा.
मेरे पड़ोस में रहने की वजह से हमारी उनकी काफ़ी पहचान थी. तो अक्सर हम दोनो में बातें होती रहती थी. मैं जब भी उन्हे देखता था, मेरे मॅन में एक ही ख़याल आता था, की काश मुझे ये छोड़ने के लिए मिल जाए. पर ये इतना आसान नही था.
पर मैं भी मौका ढूँढ रहा था. भाभी के हज़्बेंड से भी मेरी अची बनती थी. सुमन भाभी के हज़्बेंड को शराब की काफ़ी आदत थी, जिसकी वजह से भाभी की रोज़ उनसे कहा-सुनी होती ही थी. एक बार उनके हज़्बेंड की शराब पीने की वजह से काफ़ी तबीयत खराब हो गयी तो मैं और भाभी उनको लेकर हॉस्पिटल गये.
ये बात तब की थी जब करोना की वजह से कोई हॉस्पिटल जल्दी किसी को अड्मिट नही करता था. पर मेरे यहाँ जॉब करते हुए काफ़ी टाइम हो गया था, जिसकी वजह से मेरी अची पहचान थी. सो हमने उन्हे एक हॉस्पिटल में अड्मिट कर दिया.
हॉस्पिटल में अड्मिट करने बाद जो-जो वर्क था उसमे मैने सुमन भाभी की हेल्प की. उस टाइम उनके पास मेरे अलावा कोई सहारा नही था. सुमन भाभी के घर वालो से भी मेरी बात हुई, जो मुझे रिक्वेस्ट किए की जब तक उनके हज़्बेंड आचे नही हो जाते मैं उनकी देख-रेख और हेल्प करू.
इसी बीच सुमन भाभी भी मुझसे काफ़ी बार रिक्वेस्ट कर चुकी थी, की जब तक उनका हज़्बेंड हॉस्पिटल से डिसचार्ज ना हो जाए, मैं ऑफीस से लीव ले लू.
जिस हॉस्पिटल में हमने उनके हज़्बेंड को अड्मिट किया था. उसमे करोना की वजह से मरीज़ के अलावा किसी को भी रहने नही देते थे. सो मैं सुमन भाभी को साथ लेकर रूम पर आने लगा.
रास्ते में आते वक़्त मैने काफ़ी सोचा की ये सही मौका था सुमन भाभी को छोड़ने का और उनकी मजबूरी का फ़ायदा उठाने का. रात करीब 9 बजे हम दोनो घर पहुँचे तो सुमन भाभी से पानी पीने के लिए माँगा. जब वो मुझे पानी दे रही थी, तो जान-बूझ कर मैने उनके हाथो को टच किया. वो कोई रिक्षन नही दी.
थोड़ी देर तक ऐसे ही मैं किसी ना किसी बहाने उनको टच करता रहा. उसके बाद जब भाभी टी बना रही थी, तो मैं किसी बहाने से किचन में गया, और उनके बगल में खड़े हो कर बोला-
मैं: भाभी आप ज़्यादा सोचिए मत. मैं लीव अप्लाइ कर दूँगा.
ये कहते हुए मैने अपने पैरों से उनके पैरों को मसला, तो वो अपना पैर हटा ली. धीरे-धीरे मेरा साहस बढ़ने लगा, और इस बार मैने पूरी तरह से अपने पैरों से उनके पैरों को मसला.
वो मुझे बोली: ये क्या कर रहे है आप?
तो मैने उनसे बोला: कुछ नही.
वो कुछ नही बोली. तभी उनके घर से किसी का फोन आया, और वो बात करने लगी. थोड़े टाइम बाद वो फोन मुझे देते हुए बोली की वो लोग मुझसे बात करना चाहते थे. मैं फोन लेकर बात करने लगा. उस टाइम सुमन भाभी बेड पर बैठी थी, तो मैं भी बेड पर बैठ कर बात करने लगा.
फिर बात करते-करते अपने हाथो को उनके हाथो पर रख दिया. वो अपना हाथ च्चूधने की कोशिश की, पर मैं नही छ्चोढा. उसके बाद वो वापस किचन में चली गयी. जब इसके बाद वो कुछ नही बोली, तो पूरी तरह समझ गया की वो पूरी मजबूर थी, और मैं जो करूँगा वो करवाएगी.
जब मैं फोन से बात कर लिया, तो किचन में जेया कर देखा तो भाभी किचन क्लीन कर रही थी. मैने उन्हे ध्यान से उपर से नीचे तक देखा, और ये कहते हुए की, “भाभी क्या सोच रही है? मैं हू ना, सब सही कर दूँगा,” मैने उन्हे पीछे से अपनी बाहों में पकड़ लिया.
वो एक-दूं से चौक गयी और बोली: प्लीज़ छ्चोढिए मुझे. ये क्या कर रहे है?
मैं उन्हे पकड़े हुए बोला: मैं आपके लिए इतना कर रहा हू, तो आप मेरे लिए इतना भी नही करेंगी?
इस्पे वो बोली: ये ग़लत है. मैं बदनाम हो जौंगी.
मैं उन्हे पकड़े हुए बोला: आज रात हम दोनो के बीच जो कुछ होगा, वो कोई नही जानेगा.
ये कहते हुए मैने कपड़ों के उपर से भाभी की चुचियो को पकड़ लिया. जब भाभी कुछ नही बोली, तो मैने उनकी ब्रा के अंदर हाथ डाल दिए, और चुचियो को मसालने लगा. उसके बाद मैं उन्हे लेकर बेडरूम में आ गया.
बेडरूम में आने के बाद मैने कहा: अपने कपड़े उतरिय पहले.
लेकिन वो रेडी नही हुई. पर मेरे बार-बार कहने पर उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए. उस टाइम वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी. उसके बाद मैने भी अपने कपड़े उतरे, और उन्हे लेकर बेड पर आ गया. बेड पर ले जेया कर मैने पहले उनकी चुचियो को काफ़ी मसला, और चूसा. उसके बाद मैं उनको अपनी बाहों में पकड़ कर उनके होंठो को अपने होंठो में लेकर चूसने लगा.
धीरे-धीरे वो भी गरम हो गयी. वो मेरा साथ देने लगी. जब मैने भाभी का भी साथ मिलते देखा, तो मैने सुमन भाभी की छूट पर अपना लंड रखा. फिर एक ज़ोर का झटका उनकी छूट पर लगा दिया. इस झटके के बाद सुमन भाभी की आवाज़ आई-
भाभी: आअहह.
उनकी ये आवाज़ मुझे पागल कर रही थी. सो मैने अगला झटका और ज़ोरदार मारा. इस झटके के बाद सुमन भाभी पूरी तरह से मुझसे लिपट गयी और आवाज़ देने लगी आ आ की.
उसके बाद मैं पूरी जोश में उनकी छूट पर अपने लंड का झटका देने लगा, और वो मदहोश हो कर झटके लेने लगी. वो आ श बोले जेया रही. तभी एक और झटका दिया उनकी छूट में, और वो बोली-
भाभी: आह मेरी जान, और छोड़ो मुझे.
उसके बाद उनको झटके पर झटके देता रहा. वो मुझसे लिपट कर अपनी छूट चुड़वति रही. एक बार भाभी की चुदाई के बाद मैने उन्हे दोबारा छोड़ने की तायारी की. वो बिना कोई बात किए खुद मुझे अपनी बाहों में भर ली, और मैं उनकी छूट पर झटके लगाने लगा. वो मुझसे लिपट कर छुड़वाने लगी.
ये थी मेरी और भाभी की चुदाई. आयेज अगर आप सब सुनना चाहते है, की कैसे मैने उनके हज़्बेंड नही थे तो उन्हे बातरूम से लेकर बेडरूम तक छोड़ा, तो मुझे मैल ज़रूर करे. मेरी एमाइल ईद है