घर पे आए नौकर ने मलिक की बेटी चोदी

हेलो दोस्तों, मैं आपकी हिमांशी हाज़िर हू फिर आपके लिए एक नयी सेक्स कहानी लेके. दोस्तों आप लोग तो मुझे जानते ही होंगे. मेरा फिगर 34-32-36 का है. रंग एक-दूं सॉफ जैसे दूध हो, और मुझे लंड लेने की तपद तो बहुत लगी रहती है, क्या ही बतौ. खैर आज की कहानी कुछ अलग सी है.

ये कहानी हमारे घर आए एक नौकर और मालकिन की है. और मालकिन मैं खुद हू. आप समझ ही गये होंगे सब. चलिए फिर शुरू करती हू दोस्तों.

हमारे घर में काम करने के लिए पहले एक आंटी शांति जो उप से थी, वो आती थी. उसका काम 3 टाइम खाना और बर्तन सॉफ करने का था. और उसकी बेटी झाड़ू-पोछा कर लेती थी.

सडन्ली उनको गाओं जाना पद गया, बिकॉज़ उनके वहाँ किसी की डेत हो गयी थी. तो वो पूरी फॅमिली अपने गाओं वापस चली गयी थी. मम्मी ने उनको कॉल किया और बोला-

मम्मी: शांति तुम कितने दिन बाद आओगी?

शांति बोली: दीदी मुझे कम से कम 1 महीना लग जाएगा.

क्यूंकी उसका ससुर मारा था, और गाओं में अलग-अलग रीति-रिवाज़ होते है. सो इतना टाइम तो लगना ही था. खैर शांति बोली-

शांति: दीदी आप घबराव मत. मैने एक लड़के को बोल रखा है. वो आपके यहाँ खाना और सॉफ-सफाई कर सकता है, जब तक मैं नही आ जाती. अगर आप कहो तो मैं कल को उसे भेज दूँगी.

मम्मी बोले: सुनो तुम उसको कल भेज देना, और हा कामचोर ना हो.

शांति बोली: नही दीदी, लड़का मेहनती और ईमानदार है.

फिर नेक्स्ट दे कोई लड़का किचन में खाना बना रहा था. मैं सुबह करीब 9 बजे किचन में गयी. उस लड़के की उमर 20-25 के आस-पास होगी, आंड रंग काला था. बुत बॉडी अची थी.

मैं जब किचन में गयी तो उस वक़्त मैने एक लोंग शर्ट जो मेरे घुटनो तक थी, वो पहनी हुई थी. मैं अंदर से बिल्कुल नंगी ही थी.

मुझे देख वो बोला: में साहेब, आपका खाना आपके कमरे में डू या आप डाइनिंग टेबल पर खाएँगी.

जिन नज़रों से वो मुझे देख रहा था, मैं साँझ गयी ये साला हवस का पुजारी है, और मेरी ले कर ही रहेगा.

मैने कहा: मेरे रूम में भेज दो खाना. तब तक मैं नहा कर फ्रेश हो जौंगी.

मैने पानी पी कर और मूमी-पापा के रूम में जेया कर गुड मॉर्निंग बोला. वो रेडी हो रहे थे दोनो.

मम्मी बोली: स्वीटी, हम जेया रहे है अपनी शॉप पर. तुम भी खाना खा लो और युवी को भी उठा देना. और हा, देखना नया नौकर काम ठीक से करता है या नही. और वो 1 मंत यहीं रुकेगा. किचन में सोने का इंतेज़ां कर दिया है मैने.

मैं बोली: ओक डीपू (मम्मी का शॉर्ट नामे).

फिर मुम्मा को हग किया, और अपने रूम में आ गयी. मैने आल्मिराह से एक शॉर्ट्स और स्किन फिट टॉप निकाला, जिसे अगर मैं पहन लू तो मेरे बूब्स अलग ही नज़र आते है. मैने फिर बातरूम में शवर लिया, और कपड़े चेंज किए.

मैं बातरूम में ब्रा और पनटी लाना भूल गयी थी. वो मेरे बेड पर ही पड़ी थी. मैं बता डू, मुझे नेट वाली ब्रा आंड स्टाइलिश ब्रा पनटी पहनना पसंद है. फिर मैने टवल लपेटा, और हल्का सा डोर ओपन किया. मैने देखा हमारा नौकर जिसका नामे परवीन था, वो मेरी पनटी को सूंघ रहा था और पाजामे के उपर से अपने लंड को मसल रहा था.

शायद उसको मालूम नही मैं सब देख रही थी. फिर मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया. मेरा स्किन फिट टॉप जो वाइट कलर का था, मैने टवल को हेर के बीच में बाँध लिया, और टॉप ऐसे ही पहन लिया. मेरी बॉडी वेट होने के कारण मेरे बूब्स के निपल दिख रहे थे.

मैने जान-बूझ कर बातरूम में से आवाज़ करी, जिस कारण परवीन जो रूम में था, वो बोला-

परवीन: में साहेब, मैं खाना लाया हू कहाँ रखू?

इतने में ही मैं बाहर आ गयी. ऑम्ग, मुझे देख कर तो वो एक-दूं स्टॅच्यू हो गया.

मैं बोली: क्या हुआ, खाना बेड पर रख दो. शॉक्ड क्यूँ हो गये हो?

वो: में.. साहेब, जी कुछ नही (लड़खड़ाती हुई आवाज़ में बोला).

मैं बोली: क्या हुआ, कभी लड़की नही देखी?

वो बोला: जी में साहेब, देखी है. बुत आप जैसी नही.

मैं बोली: अछा, मक्खन लगा रहे हो?

वो बोला: नही में साहेब, आप हो ही इतने सुंदर.

मैं नोटीस कर रही थी पाजामे में उसका लंड पूरा तंन चुका था, जिसे वो साला च्छूपा भी नही रहा था. मैं समझ गयी ये मुझे जल्दी ही छोड़ेगा.

फिर मैं बोली: चलो ठीक है, तुम जाओ. मैं खाना खा कर प्लेट लेकर नीचे आ जौंगी. तुम युवी को खाना दे आओ.

वो बोला: साहेब तो ऑमेलेट्ट और ब्रेड खा कर कॉलेज के लिए निकल गये है.

मैने कहा: ठीक है, फिर तुम जाओ.

चूड़ना तू मुझे भी था. बुत मैं इतनी जल्दी उसको अपनी छूट का रस्स पिलाना नही थी चाहती थी. मैने फिर हेर ड्राइ किए और न्यू ब्लॅक टॉप और ब्लॅक जीन्स पहन कर अपनी फ्रेंड्स के साथ मोविए देखने चली गयी. जाते वक़्त परवीन को बोला-

मैं: दोपहर का खाना अपने लिए बना लेना. हम में से कोई नही आएगा, और रात को मों दाद 8-9 बजे तक आ जाते है. उन के लिए डिन्नर रेडी रखना.

वो हेस्ट हुए बोला: जी में साहेब.

पूरा दिन ऐसे ही निकल गया मेरा. फिर रात को 10 बजे घर आई. मों-दाद और युवी से थोड़ी बहुत बात की, और अपने रूम में आ गयी. रात को 1 बजे मुझे प्यास लगी. मैं पानी लाना भूल गयी थी. फिर मैं नीचे किचन में गयी, बुत वहाँ परवीन नही था. बस उसका एक गद्दा और चादर पड़ी हुई थी.

मैं बॉटल लेकर अपने कमरे में आ गयी, बुत तभी देखा च्चत का गाते ओपन था. मैं जब वहाँ गयी तब देखा परवीन मोबाइल पर पॉर्न देख रहा था. उसके कानो में इयरफोन्स लगे हुए थे, जिस कारण उसको पता ही नही चला मैं उसके पीछे खड़ी थी.

मेरा ध्यान उसके लंड पर गया. ओह मी गोद, एक-दूं से काला लोड्‍ा और गुलाबी सा टोपा. उसका लंड मोटा और कम से कम 8 इंच लंबा था, जिसे वो पॉर्न देख कर हिला रहा था.

मेरी छूट ने तो लंड देख कर ही पानी छ्चोढ़ दिया. मैने सोचा ऐसे काम नही होगा, कुछ करना होगा. मैने च्चत का डोर बाहर से लॉक किया, और कपड़े उतार कर नंगी हो गयी. क्यूंकी हमारे आस-पास के घर हमसे नीचे थे, और हमारी वॉल बाउंड्री 5 फीट की थी, तो च्चत पर क्या हो रहा है, कोई भी देख नही सकता.

मैं जब परवीन के पास गयी, उसका शायद पानी निकल चुका था. वो चेर पर अपना सर लटका कर लेता हुआ था. मैं उसके सामने बैठ गयी और उसका आधा सोया होया लंड अपने मूह में ले लिया. वो उठ पड़ा, बुत मुझे नंगी देख कर वो भी समझ गया की भूख मुझे भी थी.

फिर वो वापस चेर पर बैठ गया. मैने उसका बाकी का पाजामा भी उतार दिया. अभी हम दोनो खुले आसमान के नीचे नंगे थे, और मैं उसका लंड चूस रही थी. 5 मिनिट्स में उसका काला नाग दोबारा से खड़ा हो गया.

उसने बोला: में साहेब, आप उठो.

मैं बोली: सेयेल मेरा नामे हिमांशी है. हिमांशी बोल मुझे.

वो बोला: तुझे तो मैं रॅंड बोलूँगा साली रंडी. पहले दिन से तुझे देखा है, तब से तेरी छूट लेने का सोच रहा हू. पर आज तू खुद चल कर आई है चूड़ने. चल घोड़ी बन जेया.

मैं दीवार के सहारे बेंड हो गयी. मुझे लगा सला गाओं का है, सीधा छोड़ेगा. बुत उसने सीधा मूह मेरी छूट में घुसा दिया. ऑम्ग, क्या सुकून का पल था वो. उसकी जीभ मेरी छूट के दाने को च्छेद रही थी, और मेरी सिसकारियाँ आह आह आह आ की निकल रही थी.

मैने पहले भी काई बार छूट चुस्वाई थी, बुत ये सुकून नही मिला कभी. मेरा 2 बार पानी निकल गया. मेरी लेग्स काँपने लगी.

फिर मैं बोली: मुझसे खड़ा नही हुआ जेया रहा, प्लीज़ छोड़ दो मुझे जानू.

वो बोला: साली ऐसा छोड़ूँगा सारी उमर मुझे याद रखेगी.

मैं बोली: अछा बच्चू, चल आजा फिर देखते है कितना दूं है तुझमे.

इतना बोलते ही उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, और लीप किस करने लगा. मैने नीचे से उसका लंड पकड़ा, और छूट पर सेट किया.

फिर बोली: डाल दे अंदर मेरे राजा.

उसने एक ज़ोर का झटका मारा, और आधा लंड अंदर घुस गया. मेरी आआहह अहह अहन निकल गयी. उसका टोपा बहुत मोटा था, जिस कारण दर्द हो रहा था. फिर एक और झटका मारा और पूरा लंड मेरी छूट में समा गया. उसके बाद वो मुझे गोद में उठा कर छोड़ रहा था, और बीच-बीच में मेरे बूब्स चूस और निपल पर बीते कर रहा था.

बहुत क्रेज़ी फील हो रहा था. उपर से ठंडी हवा के कारण मेरे निपल हार्ड हो रहे थे, और नीचे से गरमा-गरम लंड मेरी छूट में अंदर-बाहर हो रहा था. उसके टटटे मेरी गांद के च्छेद पर टकरा रहे थे.

फिर उसने मुझे चेर पर बेंड होने को कहा. उसके बाद मेरी एक टाँग चेर पर, और एक टाँग ज़मीन पर रख दी. इस वजह से मेरी छूट का च्छेद तोड़ा टाइट हो चुका था. फिर से उसने एक ही झटके में लंड अंदर डाल दिया, और छोड़ना शुरू कर दिया.

आह ह ह जानू आअहह की आवाज़े निकल रही थी, और इस पोज़ में मेरी छूट में से आग निकल रही थी. क्या ही बतौ, जैसे-तैसे मैं ज़मीन पर लेट गयी और बोली-

मैं: अभी मुझे ऐसे छोड़ो जानू.

वो मेरे उपर आ गया और फिर से मेरी छूट चाटने लगा. मैं उसका लंड चाटने लगी. हम 69 पोज़िशन में थे. मैं सोच रही थी ये साला मज़दूर टाइप का आदमी और सेयेल को तरीके सब मालूम थे, की लड़की को कैसे-कैसे छोड़ते है. मैं इतना सोच ही रही थी की सेयेल ने मेरी छूट को ऐसा छाता, की मेरी छूट में से पानी का फुव्वारा निकल गया.

अब मैं हाँफने लगी. आआहह जैसी आवाज़ निकली मेरी और मैं बोली: जान, आज तक बहुत लंड लिए और छूट चुस्वाई. बुत आज सुख जो तुमने दिया है ना, मैं भूल नही सकती कभी.

फिर एक लोंग स्मूच दिया. वो मुझे नीचे लिटा कर मेरे उपर आ गया, और फिर से मेरी चुदाई चालू हो गयी. इस बार दर्द कम हो रहा था, बिकॉज़ मेरी छूट अभी पूरी तरह से खुल चुकी थी. 10 मिनिट्स बाद वो बोला-

प्रवीण: मेरा होने वाला है, कहाँ निकालु?

मैं बोली: बाहर निकालो लोड को, मैं चूस-चूस कर निकालूंगी.

फिर मैं जल्दी से उठी और लोड को सीधा मूह में भर लिया, और चूसने लगी. मैं ज़ोर-ज़ोर से मूठ मारने लगी उसकी, और जब उसका होने वाला था. मैने पूरा लंड अपने गले तक ले लिया, बिकॉज़ मैं ऐसे लंड के पानी की एक भी बॉन्ड बेकार नही जाने दे सकती थी.

उसका सारा पानी मेरे गले से नीचे उतार गया. फिर उसका लंड अपने आप सिकुड गया, और गले से बाहर आ गया. अब हम दोनो ऐसे ही 10 मिनिट्स तक नंगे लेते रहे. फिर मैने अपने कपड़े उठाए, बुत पहने नही. पर परवीन ने कपड़े पहने, मुझे एक किस किया, और वो वापस किचन में चला गया.

दोस्तों परवीन हमारे घर में पुर 1 मंत रहा. मैने 1 मंत में कम से कम 20 बार उसके साथ चुदाई का सुख लिया, और एक और कांड किया था हमारी चुदाई के डरॅन. वो मैं नेक्स्ट स्टोरी में बतौँगी. तब तक बाइ बाइ, लोवे योउ ऑल.

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